भारत के पड़ोसी देश (Bharat ke Padosi Desh): सीमाएं, राजधानी और प्रमुख विवाद (Maps & Notes)

भारत के पड़ोसी देश (Bharat ke padosi desh) का टॉपिक भारत के भूगोल और स्टैटिक जीके का सबसे महत्वपूर्ण और ‘कोर’ हिस्सा है, जिसके बिना इन विषयों की तैयारी अधूरी मानी जाती है। अगर आप SSC, UPSC,UPSSSC,, SSC GD या किसी भी राज्य स्तरीय परीक्षा की गंभीरता से तैयारी कर रहे हैं, तो आपने जरूर गौर किया होगा कि इस सेक्शन से हर साल 2 से 3 प्रश्न सीधे तौर पर पूछे जाते हैं। ये प्रश्न तथ्यात्मक, मानचित्र आधारित  या फिर हालिया सीमा और नदी जल विवादों से जुड़े हो सकते हैं।

इंटरनेट पर बिखरी हुई और आधी-अधूरी जानकारी के बीच, यह विशेष आर्टिकल आपके लिए एक ‘वन-स्टॉप सॉल्यूशन’ है। इसे पूरी प्रामाणिकता के साथ इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि इसे पढ़ने के बाद भारत के पड़ोसी देश, भारत की स्थलीय और जलीय सीमाओं को लेकर आपके सारे कॉन्सेप्ट्स एकदम क्लियर हो जाएंगे, और आपको अपनी परीक्षा के लिए किसी अन्य स्रोत पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

भारत के 9 पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का विस्तृत मानचित्र (Bharat Ke Padosi Desh Map)

Contents hide

भारत के कितने पड़ोसी देश हैं?

भारत के मुख्य रूप से कुल 9 पड़ोसी देश माने जाते हैं। इनमें से 7 देश भारत के साथ स्थलीय सीमा  साझा करते हैं और 2 देश मुख्य जलीय सीमा  से जुड़े हैं।

भारत के पड़ोसी देश कौन कौन से हैं?

  1. पाकिस्तान 2. अफगानिस्तान 3. चीन 4. नेपाल 5. भूटान 6. म्यांमार 7. बांग्लादेश (ये 7 स्थलीय हैं)
  2. श्रीलंका 9. मालदीव (ये 2 मुख्य जलीय हैं)।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष तथ्य: यद्यपि मुख्य पड़ोसी 9 ही माने जाते हैं, लेकिन यदि हम अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के विस्तार को देखें, तो इंडोनेशिया (Indonesia) भी भारत का एक बहुत ही करीबी समुद्री पड़ोसी देश है (जो ‘ग्रेट चैनल’ द्वारा भारत से अलग होता है)। इसीलिए कई बार लोग इसे 10वें पड़ोसी देश के रूप में भी गिनते हैं।

इस आर्टिकल में हम क्या-क्या पढ़ेंगे?

इस विस्तृत लेख में हम एक तार्किक क्रम में निम्नलिखित विषयों का गहराई से अध्ययन करेंगे:

  • भारत की भौगोलिक स्थिति: दक्षिण एशिया में भारत की रणनीतिक स्थिति और ‘भारतीय उपमहाद्वीप’ (Indian Subcontinent) की सटीक परिभाषा।
  • स्थलीय पड़ोसी देश: भारत के सभी 7 स्थलीय पड़ोसी देशों के साथ सीमा की लंबाई, जुड़े हुए भारतीय राज्य, सुरक्षा बल और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखाएं (जैसे- मैकमोहन, रेडक्लिफ)।
  • प्रमुख अंतरराष्ट्रीय विवाद: भारत और पड़ोसी देशों के बीच चल रहे सीमा और नदी जल विवाद (जैसे- तीस्ता नदी विवाद, कालापानी, गालवन घाटी, डोकलाम और सर क्रीक आदि)।
  • जलीय पड़ोसी देश: भारत के समुद्री पड़ोसी देश और उन्हें अलग करने वाले प्रमुख जलडमरूमध्य (Straits) तथा महत्वपूर्ण चैनल्स (8°, 9°, 10° चैनल)।
  • समुद्री संधियाँ (UNCLOS, 1982): संयुक्त राष्ट्र की समुद्री संधि के अनुसार भारत के जलीय अधिकारों (EEZ, Territorial Sea आदि) का सम्पूर्ण विश्लेषण।

भारत के पड़ोसी देशों की राजधानी और मुद्राएं (Capitals and Currencies)

नीचे भारत के पड़ोसी देश और उनकी राजधानी (Bharat ke padosi desh aur unki rajdhani) की पूरी लिस्ट टेबल के रूप में दी गई है, ताकि आप एक ही जगह सब कुछ आसानी से रिवाइज कर सकें। प्रतियोगी परीक्षाओं ( SSC, police,UPSSSC) में अक्सर पड़ोसी देशों की राजधानी, मुद्रा और भारत के साथ उनकी सीमा की लंबाई से जुड़े सीधे सवाल या ‘मिलान’ वाले प्रश्न पूछे जाते हैं। आपकी त्वरित तैयारी  के लिए सभी 9 देशों की विस्तृत ‘मास्टर टेबल’ नीचे दी गई है:

क्र. सं.देश का नामराजधानीमुद्राभारत के साथ सीमा
1बांग्लादेशढाकाटका4,096.7 किमी (सबसे लंबी)
2चीनबीजिंगरेनमिनबी / युआन (RMB)3,488 किमी
3पाकिस्तानइस्लामाबादपाकिस्तानी रुपया3,323 किमी
4नेपालकाठमांडूनेपाली रुपया1,751 किमी
5म्यांमारनेपीताव (Naypyidaw)क्यात1,643 किमी
6भूटानथिम्पूनगुलट्रम699 किमी
7अफगानिस्तानकाबुलअफगानी106 किमी (सबसे छोटी)
8श्रीलंकाश्री जयवर्धनेपुरा कोट्टेश्रीलंकाई रुपयामुख्य जलीय सीमा (पाक जलसंधि)
9मालदीवमालेमालदीवियन रुफिया (Rufiyaa)*मुख्य जलीय सीमा (8° चैनल)

(नोट: मालदीव की मुद्रा रुफिया (Rufiyaa) है, रुपया नहीं। परीक्षाओं में विकल्प चुनते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें।)

भारत के पड़ोसी देशों के नाम याद रखने की Trick

अक्सर परीक्षाओं में भारत के स्थलीय पड़ोसी देशों को उनकी सीमा की लंबाई के घटते क्रम में व्यवस्थित करने का प्रश्न पूछा जाता है। इसे याद रखने की सबसे आसान और अचूक ट्रिक है:

💡 GK Short Trick: “बचपन में MBA किया”

इस ट्रिक का हर एक अक्षर सीमा की लंबाई के अनुसार एक देश को दर्शाता है:

  • ब (Ba) – बांग्लादेश (सबसे लंबी सीमा – 4,096 किमी)
  • च (Ch) – चीन
  • प (Pa) – पाकिस्तान
  • न (N) – नेपाल
  • M – म्यांमार
  • B – भूटान
  • A – अफगानिस्तान (सबसे छोटी सीमा – 106 किमी)

भारत की भौगोलिक स्थिति, दक्षिण एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप

विश्व मानचित्र पर भारत की स्थिति अत्यंत विशिष्ट और रणनीतिक है। भारत की भौगोलिक संरचना को पूरी तरह से समझने के लिए हमें इसके अक्षांशीय विस्तार, दक्षिण एशिया में इसकी स्थिति और ‘उपमहाद्वीप’ की अवधारणा को समझना होगा।

भारत की भौगोलिक स्थिति

भारत पूरी तरह से भूमध्य रेखा  के उत्तर में यानी उत्तरी गोलार्ध और ग्रीनविच रेखा के पूर्व में यानी पूर्वी गोलार्ध में स्थित है।

  • अक्षांशीय विस्तार: भारत की मुख्य भूमि का अक्षांशीय विस्तार 8°4′ उत्तरी अक्षांश (कन्याकुमारी, तमिलनाडु) से लेकर 37°6′ उत्तरी अक्षांश (इंदिरा कोल, लद्दाख) तक है। (नोट: यदि हम द्वीपों को भी शामिल करें, तो भारत का सबसे दक्षिणी बिंदु ‘इंदिरा पॉइंट’ अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में 6°45′ उत्तरी अक्षांश पर स्थित है।)
  • देशांतरीय विस्तार: भारत का देशांतरीय विस्तार 68°7′ पूर्वी देशांतर (गुहार मोती, गुजरात) से लेकर 97°25′ पूर्वी देशांतर (किबिथू, अरुणाचल प्रदेश) तक है।
  • कर्क रेखा (23.5° N): यह महत्त्वपूर्ण अक्षांश रेखा भारत के लगभग बिल्कुल मध्य से होकर गुजरती है। यह देश को दो बराबर जलवायु भागों (उष्ण कटिबंधीय और उपोष्ण कटिबंधीय) में बाँटती है। कर्क रेखा भारत के कुल 8 राज्यों (गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और मिजोरम) से होकर गुजरती है।
  • मानक समय रेखा (82.5° E): भारत का प्रामाणिक समय 82.5° पूर्वी देशांतर से लिया गया है। यह रेखा उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (मिर्ज़ापुर) से होकर गुजरती है। भारतीय मानक समय (IST), ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) से 5 घंटे 30 मिनट आगे है।

दक्षिण एशिया में भारत

एशिया महाद्वीप के दक्षिणी हिस्से को ‘दक्षिण एशिया’ कहा जाता है। भौगोलिक, जनसांख्यिकीय और रणनीतिक—तीनों ही दृष्टिकोण से भारत दक्षिण एशिया के बिल्कुल केंद्र में स्थित सबसे महत्वपूर्ण देश है।

  • दक्षिण एशिया क्षेत्र में मुख्य रूप से कुल 8 देश आते हैं—भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मालदीव और अफगानिस्तान। (यही 8 देश मिलकर ‘सार्क’ अर्थात् SAARC संगठन का निर्माण भी करते हैं)।
  • दक्षिण एशिया में भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसकी तटरेखा हिंद महासागर (Indian Ocean) में सबसे लंबी है। भारत की इसी विशाल और महत्वपूर्ण तटरेखा के कारण ही इस महासागर का नाम भारत के नाम पर ‘इंडियन ओशियन’ रखा गया है।
  • भारत की यह केंद्रीय स्थिति ‘ट्रांस-इंडियन ओसियन रूट्स’ को सीधे तौर पर नियंत्रित करती है। यह समुद्री मार्ग यूरोप के देशों और पूर्वी एशियाई देशों के बीच व्यापार का सबसे प्रमुख साधन है, जिससे भारत भू-राजनीतिक रूप से एक मजबूत वैश्विक ताकत बन जाता है।

भारतीय उपमहाद्वीप 

प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है कि भारत को ‘उपमहाद्वीप’ क्यों कहा जाता है? इसका कारण इसकी विशिष्ट भौगोलिक संरचना है। 

उपमहाद्वीप (Subcontinent) क्या होता है?

उपमहाद्वीप किसी महाद्वीप का वह विशाल हिस्सा होता है, जो अपनी भौगोलिक संरचना, सांस्कृतिक विविधता और विशिष्ट जलवायु के कारण उस महाद्वीप के बाकी हिस्से से बिल्कुल अलग और स्वतंत्र पहचान रखता हो।

भारत को उपमहाद्वीप क्यों कहा जाता है? 

भारतीय भूभाग अपनी विशालता और चारों ओर से घिरी हुई अभेद्य प्राकृतिक सीमाओं के कारण शेष एशिया से बिल्कुल अलग-थलग दिखाई देता है:

भारतीय उपमहाद्वीप का मानचित्र जिसमें भारत, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और इसकी प्राकृतिक सीमाएं (हिमालय, हिंद महासागर) दिखाई गई हैं।
मानचित्र: भारतीय उपमहाद्वीप और उसकी अभेद्य प्राकृतिक सीमाएँ
  1. उत्तर में: दुनिया की सबसे ऊँची और दुर्गम पर्वत श्रृंखला ‘हिमालय’ इसे तिब्बत और चीन से अलग करती है और ठंडी साइबेरियन हवाओं से बचाती है।
  2. उत्तर-पश्चिम में: हिंदूकुश और सुलेमान पर्वत श्रेणियां इसे मध्य एशिया से अलग करती हैं।
  3. पूर्व में: अराकान योमा की पहाड़ियाँ इसे म्यांमार (दक्षिण-पूर्व एशिया) से अलग करती हैं।
  4. दक्षिण में: विशाल हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर इसे बाकी दुनिया से अलग कर एक विशिष्ट प्रायद्वीपीय आकार देते हैं।

अपनी इसी प्राकृतिक सीमाबंदी के कारण इस पूरे क्षेत्र को ‘भारतीय उपमहाद्वीप’ कहा जाता है। मुख्य रूप से इसमें 5 देश शामिल माने जाते हैं:

  1. भारत
  2. पाकिस्तान
  3. नेपाल 
  4. भूटान
  5. बांग्लादेश

महत्वपूर्ण तथ्य: कई बार भू-राजनीतिक परिभाषाओं में द्वीप राष्ट्रों श्रीलंका और मालदीव को भी भारतीय उपमहाद्वीप का हिस्सा मान लिया जाता है, लेकिन मुख्य स्थलीय उपमहाद्वीप उपर्युक्त 5 देशों से ही मिलकर बनता है।

भारत की कुल स्थलीय सीमा का विस्तृत विश्लेषण

भारत की कुल स्थलीय सीमा अत्यंत विशाल और विविधताओं से भरी हुई है, जिसकी कुल लंबाई 15,106 किलोमीटर है। अक्सर पूछा जाता है कि भारत की स्थलीय सीमा कितने देशों से लगती है — तो जवाब है कुल 7 देशों से। यह विशाल स्थलीय सीमा भारत के उत्तर-पश्चिम, उत्तर और पूर्वी हिस्से में कुल सात पड़ोसी देशों के साथ साझा होती है। 

भारत का मानचित्र जिसमें 7 पड़ोसी देशों (बांग्लादेश, चीन, पाकिस्तान, नेपाल, म्यांमार, भूटान, अफगानिस्तान) के साथ लगने वाली 15,106 किलोमीटर लंबी स्थलीय सीमा दर्शाई गई है।
भारत के 7 पड़ोसी देश और उनके साथ साझा होने वाली स्थलीय सीमा की लंबाई।

स्थलीय सीमा से जुड़े 7 देश (लंबाई के घटते क्रम में):

  • 1. बांग्लादेश (4,096 किलोमीटर): भारत अपनी सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमा बांग्लादेश के साथ साझा करता है। यह लंबी सीमा भारत के 5 राज्यों—पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम से होकर गुजरती है।
  • 2. चीन (3,488 किलोमीटर): भारत की दूसरी सबसे लंबी स्थलीय सीमा चीन के साथ लगती है। यह उत्तर में लद्दाख (केंद्र शासित प्रदेश) से लेकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश तक फैली है।
  • 3. पाकिस्तान (3,323 किलोमीटर): भारत के पश्चिम और उत्तर-पश्चिम में स्थित पाकिस्तान की सीमा गुजरात, राजस्थान, पंजाब, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से जुड़ती है।
  • 4. नेपाल (1,751 किलोमीटर): उत्तर में नेपाल के साथ भारत की एक खुली सीमा है, जो 5 राज्यों—उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम से जुड़ती है।
  • 5. म्यांमार (1,643 किलोमीटर): भारत के सुदूर पूर्व में म्यांमार स्थित है, जिसकी सीमा अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम से लगती है।
  • 6. भूटान (699 किलोमीटर): भूटान के साथ भारत की एक शांतिपूर्ण सीमा है, जो 4 राज्यों—सिक्किम, पश्चिम बंगाल, असम और अरुणाचल प्रदेश से जुड़ती है।
  • 7. अफगानिस्तान (106 किलोमीटर): भारत की सबसे छोटी स्थलीय सीमा अफगानिस्तान के साथ मात्र 106 किलोमीटर की है, जो लद्दाख (PoK क्षेत्र) में वाखान कॉरिडोर के पास स्थित है।

भारत की कुल तटीय सीमा (Coastline): नए आँकड़ों (2023-24) के साथ

भारत की तटीय सीमा  के आकार और मापन में हाल ही में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। प्रतियोगी परीक्षाओं (Current Affairs & Static GK) के लिए यह डेटा अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि आप अब तक भारत की तटीय सीमा 7,516.6 किलोमीटर पढ़ते आ रहे हैं, तो अब इन आँकड़ों को अपडेट करने का समय आ गया है।

नवीनतम मापन के अनुसार, भारत की कुल तटीय सीमा 47.6% बढ़कर अब 11,098.81 किलोमीटर हो गई है।

भारत की पुरानी तटरेखा का मापन वर्ष 1970 में किया गया था (जिसमें कुल लंबाई 7,516.6 किमी आंकी गई थी)। उस समय पुरानी तकनीक का इस्तेमाल होता था और तटों को लगभग सीधा मापा जाता था। हालाँकि, वर्ष 2023-24 में तटरेखा को मापने के लिए नई और उन्नत तकनीक को अपनाया गया है। नई मापन प्रणाली में तटीय क्षेत्रों की जटिल संरचनाओं—जैसे कि डेल्टा, लैगून झीलें, ज्वारनदमुख, खाड़ी के मुहाने और टेढ़ी-मेढ़ी तटरेखाओं को भी सटीकता के साथ शामिल किया गया है। इन्हीं के कारण तटीय सीमा में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तटीय सीमा की नई स्थिति (9 तटीय राज्य)

  • सबसे लंबी तटीय सीमा वाला राज्य (गुजरात): गुजरात पहले भी सबसे लंबी तटीय सीमा वाला राज्य था और आज भी शीर्ष पर है। 1970 के आँकड़ों के अनुसार इसकी तटरेखा 1,214 किमी थी, जो नई तकनीक से मापने पर लगभग दोगुनी होकर 2,340 किलोमीटर हो गई है।
  • दूसरे और तीसरे स्थान में बड़ा बदलाव: पुरानी रैंकिंग में दूसरे स्थान पर आंध्र प्रदेश था, लेकिन अब तमिलनाडु (1,068 किमी) दूसरे स्थान पर आ गया है। वहीं, आंध्र प्रदेश (1,053 किमी) अब तीसरे स्थान पर खिसक गया है।
  • सर्वाधिक प्रतिशत वृद्धि (पश्चिम बंगाल): तटीय सीमा के इस नए मापन में सबसे चौंकाने वाले आँकड़े पश्चिम बंगाल के हैं। सुंदरबन डेल्टा की जटिल संरचनाओं को शामिल करने के कारण यहाँ सर्वाधिक 357% की वृद्धि दर्ज की गई है (157 किमी से बढ़कर 721 किमी)।
  • सबसे कम तटीय सीमा वाले राज्य: गोवा भारत का सबसे छोटी तटीय सीमा वाला राज्य है (101 किमी से बढ़कर 193 किमी)। इसके बाद कर्नाटक (343 किमी) दूसरे स्थान पर है।
  • केंद्र शासित प्रदेश: राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों दोनों को मिलाकर देखें, तो अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की तटीय सीमा पूरे भारत में सबसे अधिक है (1,962 किमी से बढ़कर 3,083 किमी)। इसके विपरीत, सबसे छोटी तटीय सीमा पुदुचेरी की है (मात्र 42 किमी)।

भारत के 7 स्थलीय पड़ोसी देश: सीमाएं, विवाद और महत्वपूर्ण तथ्य (In Detail)

प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, State PCS, SSC) में पड़ोसी देशों की सीमाओं, अंतरराष्ट्रीय विवादों और संधियों से गहराई से प्रश्न पूछे जाते हैं। आइए भारत के 7 स्थलीय पड़ोसी देशों का विस्तार से अध्ययन करते हैं: 

भारत का पड़ोसी देश बांग्लादेश — भारत के साथ सबसे लंबी सीमा

भारत के पूर्व में स्थित बांग्लादेश हमारा एक अत्यंत घनिष्ठ और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पड़ोसी देश है। 1947 में भारत विभाजन के समय यह पाकिस्तान का हिस्सा था और इसे ‘पूर्वी पाकिस्तान’ कहा जाता था। 26 मार्च 1971 को शेख मुजीब-उर-रहमान के नेतृत्व में इसने खुद को स्वतंत्र घोषित किया। भारतीय सेना और बांग्लादेश की ‘मुक्ति वाहिनी’ के ऐतिहासिक सहयोग से 16 दिसंबर 1971 को यह पूर्ण रूप से एक स्वतंत्र राष्ट्र बन गया। नदियों की बहुलता के कारण बांग्लादेश को ‘नदियों का देश’ भी कहा जाता है।

बांग्लादेश: एक नज़र में

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बांग्लादेश की बेसिक जानकारी और राष्ट्रीय प्रतीकों की सूची नीचे दी गई है:

विशेषताविवरण
राजधानीढाका (मस्जिदों का शहर और दुनिया की रिक्शा राजधानी)
मुद्राटका 
संसद का नामजातीय संसद 
राष्ट्रीय भाषाबंगाली
राष्ट्रगान‘आमार सोनार बांग्ला’ (रचयिता: रवींद्रनाथ टैगोर)
राष्ट्रीय पशुरॉयल बंगाल टाइगर
राष्ट्रीय पक्षीमैगपई रॉबिन (डॉयल)
राष्ट्रीय पुष्पवाटर लिली 
राष्ट्रीय वृक्ष व फलवृक्ष: आम का पेड़ | फल: कटहल
राष्ट्रीय खेलकबड्डी
सबसे लंबी नदीपद्मा (भारत की गंगा नदी को ही यहाँ पद्मा कहा जाता है)
सबसे ऊंची चोटीसाका हाफोंग  और केओका डोंग
भारत और बांग्लादेश की सबसे लंबी 4096.7 किमी स्थलीय सीमा, रेडक्लिफ रेखा, तीस्ता नदी विवाद और प्रमुख संधियों (LBA 2015) को दर्शाने वाला विस्तृत माइंड मैप।
बांग्लादेश (भारत का पड़ोसी देश): 4096.7 किमी की सबसे लंबी सीमा, शून्य रेखा (Zero Line), महत्वपूर्ण जल समझौते और प्रमुख युद्धाभ्यासों (सम्प्रीति) का क्विक रिवीजन।

भारत-बांग्लादेश सीमा और सुरक्षा

अपने इस पड़ोसी देश के साथ भारत की सीमा दुनिया की सबसे लंबी और सबसे जटिल अंतरराष्ट्रीय सीमाओं में गिनी जाती है, जो नदियों, एन्क्लेव और बाड़ेबंदी वाले हिस्सों से होकर गुजरती है। 

  • भारत अपनी सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमा बांग्लादेश के साथ ही साझा करता है, जिसकी कुल लंबाई 4096.7 किलोमीटर है।
  • बांग्लादेश की सीमा भारत के 5 राज्यों को स्पर्श करती है— पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा(महत्वपूर्ण तथ्य: बांग्लादेश के साथ सबसे लंबी सीमा पश्चिम बंगाल की लगती है।)
  • प्रमुख सीमा रेखाएं:
    • रेडक्लिफ रेखा: चूँकि बांग्लादेश पहले पाकिस्तान का ही हिस्सा था, इसलिए भारत और बांग्लादेश के बीच की सीमा को भी ‘रेडक्लिफ रेखा’ कहा जाता है।
    • शून्य रेखा: भारत का त्रिपुरा राज्य तीन तरफ से बांग्लादेश से घिरा हुआ है, और त्रिपुरा-बांग्लादेश के बीच की इसी सीमा को ‘जीरो लाइन’ कहा जाता है।
  • भारत-बांग्लादेश की संवेदनशील सीमा की सुरक्षा BSF (बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स) के जवानों द्वारा की जाती है।

प्रमुख समझौते, परिवहन और युद्धाभ्यास

  • भूमि सीमा समझौता (LBA 2015): भारत ने अपने 100वें संविधान संशोधन के जरिए बांग्लादेश के साथ दशकों पुराना सीमा विवाद सुलझाया। इसके तहत भारत ने 111 एन्क्लेव (अंतःक्षेत्र) बांग्लादेश को और बांग्लादेश ने 51 एन्क्लेव भारत को सौंपे।

क्या होता है एन्क्लेव (अंतःक्षेत्र)?

भूगोल और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में, एन्क्लेव किसी देश के उस भू-भाग को कहते हैं जो अपनी सभी सीमाओं से किसी एक ही अन्य देश द्वारा पूरी तरह से घिरा हुआ हो।

भारत-बांग्लादेश के संदर्भ में:
इन्हें स्थानीय भाषा में ‘छीटमहल’ कहा जाता था। ये ऐसे क्षेत्र थे जहाँ भारत की ज़मीन बांग्लादेश के अंदर थी और बांग्लादेश की ज़मीन भारत के अंदर।

अंतरराष्ट्रीय उदाहरण:
लेसोथो एक ऐसा स्वतंत्र देश है, जो चारों तरफ से केवल एक ही देश ‘दक्षिण अफ्रीका’ से घिरा हुआ है। इसी तरह वेटिकन सिटी पूरी तरह से इटली से घिरा हुआ एक एन्क्लेव है।
  • गंगा जल समझौता (1996): पश्चिम बंगाल के फरक्का बैराज के पानी के बंटवारे को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच 30 साल के लिए यह ऐतिहासिक जल संधि हुई थी।
  • मैत्री सेतु: त्रिपुरा और बांग्लादेश के बीच व्यापार और संपर्क को बेहतर करने के लिए फेनी नदी पर लगभग 1.9 किलोमीटर लंबा ‘मैत्री सेतु’ (Maitri Setu) बनाया गया है।
  • परिवहन (ट्रेनें): दोनों देशों के बीच संपर्क मजबूत करने के लिए तीन प्रमुख यात्री ट्रेनें संचालित की जाती हैं:
    1. मैत्री एक्सप्रेस (2008) – कोलकाता से ढाका
    2. बंधन एक्सप्रेस (2017) – कोलकाता से खुल्ना
    3. मिताली एक्सप्रेस (2022) – न्यू जलपाईगुड़ी से ढाका
  • संयुक्त युद्धाभ्यास: भारत और बांग्लादेश की सेनाओं के बीच ‘सम्प्रीति’ और नौसेना के बीच ‘बोंगोसागर’ नामक सैन्य अभ्यास आयोजित किए जाते हैं।

प्रमुख विवाद 

  • तीस्ता नदी जल विवाद: तीस्ता नदी सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है। इसके जल बंटवारे का मुद्दा दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा और लंबित विवाद है।
  • तीन बीघा कॉरिडोर: यह पश्चिम बंगाल के कूचबिहार में स्थित एक क्षेत्र है, जिसे 1992 में भारत ने बांग्लादेश को लीज (किराए) पर दिया था, ताकि बांग्लादेश अपने दहालाग्राम-अंगरपोता क्षेत्रों से जुड़ सके।
  • अवैध प्रवासन (Illegal Migration): बांग्लादेश से भारत में (विशेषकर असम और उत्तर-पूर्व में) घुसपैठ एक पुरानी राष्ट्रीय सुरक्षा की समस्या रही है। इसी के समाधान के लिए असम में NRC (National Register of Citizens) जैसी प्रक्रियाएं अपनाई गई हैं।

सांस्कृतिक और पर्यटन स्थल

सांस्कृतिक रूप से दोनों देश बहुत करीब हैं। बांग्लादेश में ढाकेश्वरी मंदिर (बांग्लादेश का राष्ट्रीय मंदिर) और चटगांव में स्थित चंद्रनाथ मंदिर प्रमुख हिंदू धार्मिक स्थल हैं। पर्यटन के लिहाज से ढाका का अहसान मंजिल (गुलाबी महल) और कॉक्स बाजार (Cox’s Bazar) बहुत मशहूर हैं। कॉक्स बाजार दुनिया का सबसे लंबा प्राकृतिक समुद्री तट (बीच) है। इसके अलावा, भारत और बांग्लादेश मिलकर दुनिया के सबसे बड़े मैंग्रोव वन ‘सुंदरबन डेल्टा’ को भी साझा करते हैं, जो अपने समृद्ध पारिस्थितिक तंत्र के लिए प्रसिद्ध है।

भारत का पड़ोसी देश चीन — क्षेत्रफल में सबसे बड़ा और दूसरी सबसे लंबी सीमा 

भारत के उत्तर और उत्तर-पूर्व में स्थित चीन क्षेत्रफल और सामरिक दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा पड़ोसी देश है। जनसांख्यिकी और अर्थव्यवस्था के पैमाने पर चीन दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों में गिना जाता है। 1 अक्टूबर 1949 को यह ‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ (PRC) के रूप में स्थापित हुआ था। भारत और चीन के बीच हजारों साल पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं, लेकिन वर्तमान में दोनों देशों के बीच सीमा को लेकर कई गंभीर विवाद भी हैं।

चीन: एक नज़र में

प्रतियोगी परीक्षाओं में सीधे तौर पर पूछे जाने वाले चीनी राष्ट्रीय प्रतीकों और तथ्यों की सूची नीचे दी गई है:

विशेषताविवरण
राजधानीबीजिंग 
मुद्रारेनमिनबी (Renminbi) या युआन (Yuan)
संसद का नामनेशनल पीपल्स कांग्रेस
राष्ट्रीय भाषामंदारिन – दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में से एक
राष्ट्रीय पशुविशाल पांडा और चीनी ड्रैगन
राष्ट्रीय पक्षीलाल मुकुट वाला सारस
राष्ट्रीय पुष्पपियोनी 
राष्ट्रीय वृक्ष व फलवृक्ष: जिंकगो | फल: कीवी 
राष्ट्रीय खेलटेबल टेनिस 
सबसे लंबी नदीयांगजी नदी – यह पूरे एशिया की भी सबसे लंबी नदी है
सबसे ऊंची चोटीचोमो लुंग्मा – यह माउंट एवरेस्ट का ही तिब्बती/चीनी नाम है
भारत और चीन सीमा (मैकमोहन रेखा, LAC), गलवान घाटी विवाद, अक्साई चीन और पंचशील समझौते को दर्शाने वाला विस्तृत माइंड मैप।
चीन (भारत का पड़ोसी देश): 3,488 किमी सीमा, मैकमोहन रेखा, प्रमुख विवाद (गलवान, डोकलाम) और भारत-चीन की कूटनीतिक नीतियों (स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स) का क्विक रिवीजन।

भारत-चीन सीमा और सुरक्षा 

  • भारत और चीन के बीच 3488 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। (यह बांग्लादेश के बाद भारत की दूसरी सबसे लंबी सीमा है)।
  • यह सीमा भारत के 4 राज्यों— हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और 1 केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख से लगती है।
    (परीक्षाओं के लिए ध्यान रखें: भारत-चीन सीमा को तीन हिस्सों में बांटा जाता है – पश्चिमी सेक्टर (लद्दाख), मध्य सेक्टर (हिमाचल व उत्तराखंड) और पूर्वी सेक्टर (सिक्किम व अरुणाचल)।)
  • प्रमुख सीमा रेखाएं:
    • मैकमोहन रेखा: 1914 में शिमला समझौते के तहत सर हेनरी मैकमोहन द्वारा भारत और चीन (मुख्यतः अरुणाचल प्रदेश वाले हिस्से में) के बीच यह सीमा रेखा निर्धारित की गई थी, जिसे चीन अक्सर मानने से इनकार करता है।
    • LAC (Line of Actual Control): 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद अक्साई चीन और भारत के बीच जो वास्तविक नियंत्रण रेखा/युद्ध विराम रेखा खींची गई, उसे LAC कहा जाता है।
  • भारत-चीन की इस दुर्गम बर्फीली सीमा की सुरक्षा का जिम्मा ITBP (इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस) के बहादुर जवानों के पास है।

प्रमुख समझौते, नीतियां और युद्धाभ्यास

  • पंचशील समझौता (1954): 29 अप्रैल 1954 को भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और चीन के प्रधानमंत्री चाऊ एन लाई (Zhou Enlai) के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के 5 सिद्धांतों पर यह ऐतिहासिक समझौता हुआ था।
  • स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स: यह चीन की एक आक्रामक कूटनीतिक रणनीति है (जिसे ‘मोतियों की माला’ भी कहते हैं)। इसके तहत चीन हिंद महासागर में भारत को घेरने के लिए पड़ोसी देशों में अपने सैन्य और व्यापारिक बंदरगाह विकसित कर रहा है (जैसे- श्रीलंका में हंबनटोटा, पाकिस्तान में ग्वादर)।
  • नेकलेस ऑफ डायमंड्स: चीन की स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स के जवाब में भारत ने इस कूटनीतिक नीति को अपनाया है, जिसके तहत भारत चाबहार (ईरान), चांगी (सिंगापुर) और डुक्म (ओमान) जैसे पोर्ट तक अपनी पहुंच बना रहा है।
  • संयुक्त युद्धाभ्यास: भारत और चीन की सेनाओं के बीच ‘हैंड-इन-हैंड’ (Hand-in-Hand) नामक संयुक्त सैन्य अभ्यास आयोजित किया जाता है (यद्यपि सीमा विवादों के कारण यह अक्सर बाधित रहता है)।

प्रमुख विवाद और संघर्ष

भारत और चीन के बीच विवाद के मुख्य केंद्र बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • 1962 का युद्ध और अक्साई चीन: 1962 के युद्ध में चीन ने लद्दाख के एक बड़े हिस्से पर अवैध कब्जा कर लिया था, जिसे ‘अक्साई चीन’ कहा जाता है।
  • अरुणाचल प्रदेश विवाद: चीन अक्सर पूरे अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा ठोकता है और इसे ‘दक्षिण तिब्बत’ का हिस्सा बताता है। वह यहाँ के निवासियों को ‘नत्थी वीजा’ (Stapled Visa) जारी करके विवाद पैदा करता है।
  • डोकलाम विवाद (2017): यह पठार भारत, चीन और भूटान के त्रि-संगम (चुंबी घाटी) पर स्थित है। 2017 में चीनी सेना द्वारा यहाँ सड़क बनाने को लेकर भारी गतिरोध हुआ था, क्योंकि यह क्षेत्र भारत के ‘सिलीगुड़ी कॉरिडोर’ (चिकन नेक) के बेहद करीब है।
  • गलवान घाटी झड़प (2020): अक्साई चीन क्षेत्र में बहने वाली गलवान नदी (जो श्योक नदी की सहायक है) की घाटी में भारत और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें भारत के 20 जवान शहीद हुए थे।
  • पैंगोंग त्सो झील विवाद: लद्दाख में 14,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस खारे पानी की झील का लगभग 45 किमी हिस्सा भारत में और 90 किमी हिस्सा चीन में आता है। यहाँ फिंगर-4 से फिंगर-8 के बीच सीमांकन को लेकर दोनों देशों में तनाव रहता है।
  • ब्रह्मपुत्र नदी विवाद: चीन ब्रह्मपुत्र नदी (जिसे तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो कहा जाता है) पर जियाचा, जांग्मू, और दागु जैसे कई बड़े बांधों का निर्माण कर रहा है। इससे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में पानी की कमी या अचानक बाढ़ का खतरा बना रहता है।
  • OBOR (वन बेल्ट वन रोड) / BRI: चीन की इस वैश्विक बुनियादी ढांचा परियोजना का भारत कड़ा विरोध करता है, क्योंकि इसका मुख्य हिस्सा ‘CPEC’ (चाइना पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर) भारत के संप्रभु क्षेत्र पाक-अधिकृत कश्मीर (PoK) से होकर गुजरता है।

प्रमुख सांस्कृतिक और पर्यटन स्थल

चीन अपनी प्राचीन ऐतिहासिक धरोहरों के लिए विश्व विख्यात है। यहाँ ‘चीन की महान दीवार’  स्थित है जो दुनिया के सात अजूबों में से एक है और इसे अंतरिक्ष से भी देखा जा सकता है। इसके अलावा शियान शहर में स्थित ‘टेराकोटा आर्मी’ (मिट्टी के हजारों सैनिकों की आदमकद मूर्तियां), बीजिंग का ‘फॉरबिडन सिटी’ (निषिद्ध शहर) और ‘स्वर्ग का मंदिर’ (Temple of Heaven) चीन के प्रमुख पर्यटन स्थल हैं।

भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान — रेडक्लिफ रेखा 

पाकिस्तान भारत के पश्चिम और उत्तर-पश्चिम में स्थित एक अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ोसी देश है। 14 अगस्त 1947 को भारत के विभाजन के बाद यह एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में आया। क्षेत्रफल और सामरिक दृष्टि से पाकिस्तान दक्षिण एशिया का एक प्रमुख देश है, जिससे जुड़े भौगोलिक और राजनीतिक तथ्य परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाते हैं।

पाकिस्तान: एक नज़र में 

परीक्षाओं में सीधे पूछे जाने वाले तथ्यात्मक प्रश्नों के लिए पाकिस्तान की बेसिक जानकारी और राष्ट्रीय प्रतीकों की सूची नीचे दी गई है:

विशेषताविवरण
राजधानीइस्लामाबाद
मुद्रापाकिस्तानी रुपया
संसद का नामनेशनल असेंबली (मजलिस-ए-सूरा)
राष्ट्रीय भाषाउर्दू
राष्ट्रीय गानकौमी तराना (रचयिता: हाफिज जालंधरी)
राष्ट्रीय पशुमारखोर
राष्ट्रीय पक्षीचकोर
राष्ट्रीय पुष्पचमेली 
राष्ट्रीय वृक्षदेवदार
राष्ट्रीय फलआम (गर्मियों में) और अमरूद (सर्दियों में)
राष्ट्रीय खेलफील्ड हॉकी
सबसे लंबी नदीसिंधु नदी (पाकिस्तान की राष्ट्रीय नदी)
सबसे ऊंची चोटीतिरचमीर
भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान का विस्तृत माइंड मैप, जिसमें राजधानी, मुद्रा, भारत-पाक सीमा (रेडक्लिफ रेखा) और प्रमुख विवाद (PoK, सर क्रीक) दर्शाए गए हैं।
भारत के पड़ोसी देश: पाकिस्तान से जुड़े प्रमुख तथ्य, अंतरराष्ट्रीय संधियां और सीमा विवाद (एक नज़र में)

भारत-पाकिस्तान सीमा और सुरक्षा

अपने इस पड़ोसी देश के साथ भारत की सीमा को दुनिया की सबसे अधिक सैन्यीकृत और संवेदनशील सीमाओं में गिना जाता है। 

  • भारत और पाकिस्तान 3,323 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करते हैं।
  • यह सीमा भारत के 3 राज्यों (गुजरात, राजस्थान और पंजाब) तथा 2 केंद्र शासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) को स्पर्श करती है।
  • भारत और पाकिस्तान के बीच की अंतरराष्ट्रीय सीमा को ‘रेडक्लिफ रेखा’ कहा जाता है। इसका निर्धारण 17 अगस्त 1947 को सर सिरिल रेडक्लिफ द्वारा किया गया था। कश्मीर में दोनों देशों के बीच की युद्ध विराम रेखा को LOC (Line of Control) कहा जाता है।
  • इस संवेदनशील सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी मुख्य रूप से BSF (बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स) के पास है।

प्रमुख समझौते और संधियाँ

  • सिंधु जल समझौता (1960): 19 सितंबर 1960 को विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अय्यूब खान के बीच यह ऐतिहासिक समझौता हुआ था। इसके तहत पूर्वी नदियों (रावी, व्यास, सतलज) के पानी का अधिकार भारत को, और पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) के पानी का अधिकार पाकिस्तान को दिया गया।
  • ताशकंद समझौता (1966): 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद 10 जनवरी 1966 को लाल बहादुर शास्त्री और अय्यूब खान के बीच उज्बेकिस्तान के ताशकंद में यह शांति समझौता हुआ था।
  • शिमला समझौता (1972): 1971 के युद्ध के बाद 2 जुलाई 1972 को इंदिरा गांधी और जुल्फिकार अली भुट्टो के बीच यह समझौता हुआ, जिसके तहत ही LOC का वर्तमान स्वरूप निर्धारित हुआ।

प्रमुख सीमा विवाद और युद्ध

  • PoK (पाक अधिकृत कश्मीर): 1947 में पाकिस्तान ने अवैध रूप से जम्मू-कश्मीर के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। इसके दो मुख्य प्रशासनिक हिस्से ‘आजाद कश्मीर’ और ‘गिलगित-बाल्टिस्तान’ हैं। (1963 में पाकिस्तान ने इसी क्षेत्र की शक्सगाम घाटी का एक हिस्सा गैर-कानूनी तरीके से चीन को सौंप दिया था)।
  • सर क्रीक विवाद (Sir Creek): गुजरात में कच्छ के रण के पास स्थित 96 किलोमीटर लंबी इस दलदली जल पट्टी के सीमांकन को लेकर दोनों देशों के बीच पुराना विवाद है।
  • सियाचिन ग्लेशियर: यह दुनिया का सबसे ऊंचा युद्ध स्थल है। 1984 में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के नापाक इरादों को विफल करते हुए ‘ऑपरेशन मेघदूत’ के जरिए इसे पूरी तरह सुरक्षित किया था।
  • भारत-पाक युद्ध: दोनों देशों के बीच अब तक चार प्रमुख युद्ध हो चुके हैं— 1947 (कश्मीर कबाइलियों का हमला), 1965, 1971 (बांग्लादेश मुक्ति संग्राम) और 1999 (कारगिल युद्ध)।

परिवहन, धार्मिक स्थल और प्रमुख शहर

  • परिवहन: दोनों देशों के बीच ‘समझौता एक्सप्रेस’ (दिल्ली से लाहौर) और ‘थार एक्सप्रेस’ (जोधपुर से कराची) जैसी ट्रेनें चलाई गई थीं। 1999 में ‘सदा-ए-सरहद’ बस सेवा भी शुरू की गई थी (वर्तमान में दोनों देशों के बीच तनाव के कारण ये सेवाएं निलंबित हैं)।
  • धार्मिक स्थल: पाकिस्तान में सिखों के अत्यंत पवित्र स्थल ननकाना साहिब और करतारपुर साहिब (पंजाब प्रांत) स्थित हैं। इसके अलावा, बलूचिस्तान में हिंगलाज माता मंदिर, कटासराज शिव मंदिर और वरुण देव मंदिर जैसे प्रमुख ऐतिहासिक हिंदू मंदिर भी मौजूद हैं।
  • प्रमुख शहर: लाहौर को पाकिस्तान का ‘सांस्कृतिक दिल’ और ‘उद्यानों का शहर’ कहा जाता है। राजधानी इस्लामाबाद को ‘रोशनी का शहर’ कहा जाता है, जबकि खूबसूरत स्वात घाटी को ‘पाकिस्तान का स्विट्जरलैंड’ नाम से जाना जाता है।

भारत का पड़ोसी देश नेपाल — खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा 

भारत के उत्तर में हिमालय की गोद में बसा नेपाल हमारा एक बेहद खूबसूरत और महत्वपूर्ण पड़ोसी देश है। यह चारों ओर से भूमि से घिरा (Landlocked) एक ‘बफर स्टेट’ (Buffer State) है, जिसकी सीमाएं मुख्य रूप से भारत और चीन (तिब्बत) से लगती हैं। भारत और नेपाल के बीच अत्यंत घनिष्ठ, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से नेपाल का भूगोल और इसकी संधियाँ बहुत महत्वपूर्ण हैं।

नेपाल: एक नज़र में 

परीक्षाओं में नेपाल से जुड़े सीधे तथ्यात्मक प्रश्नों के लिए यह ‘क्विक रिवीजन टेबल’ नीचे दी गई है:

विशेषताविवरण
राजधानीकाठमांडू (इसे ‘मंदिरों का शहर’ भी कहा जाता है)
पर्यटन राजधानीपोखरा (इसे ‘झीलों का शहर’ भी कहा जाता है)
मुद्रानेपाली रुपया 
संसद का नामसंघीय संसद – पहले इसे राष्ट्रीय पंचायत कहते थे
राष्ट्रीय भाषानेपाली
राष्ट्रीय पशुगाय- भारत के पड़ोसियों में एकमात्र देश जिसका राष्ट्रीय पशु गाय है
राष्ट्रीय पक्षीहिमालयन मोनाल (इसे ट्रैगोपान / Lophophorus भी कहते हैं)
राष्ट्रीय पुष्पलाली गुरांस / बुरांस (Rhododendron)
राष्ट्रीय वृक्षपीपल 
राष्ट्रीय खेलवॉलीबॉल – इसे 2017 में राष्ट्रीय खेल घोषित किया गया था
सबसे लंबी नदीकरनाली नदी
सबसे ऊंची चोटीमाउंट एवरेस्ट (8848.86 मीटर) – नेपाल में इसे ‘सागरमाथा’ कहा जाता है
अंतरराष्ट्रीय मुख्यालयकाठमांडू में SAARC (दक्षेस) का मुख्यालय स्थित है
भारत और नेपाल की 1751 किमी खुली सीमा, सुगौली संधि (1816), कालापानी-लिपुलेख विवाद और प्रमुख सांस्कृतिक स्थलों को दर्शाने वाला विस्तृत माइंड मैप।
नेपाल (भारत का पड़ोसी देश): 1751 किमी खुली सीमा, ऐतिहासिक सुगौली संधि, कालापानी विवाद और प्रमुख पर्यटन स्थलों (पशुपतिनाथ, लुंबिनी) का क्विक रिवीजन चार्ट।

भारत-नेपाल सीमा और सुरक्षा 

अपने इस पड़ोसी देश के साथ भारत की सीमा खुली होने के कारण सांस्कृतिक और व्यापारिक रूप से घनिष्ठ तो है, लेकिन प्रशासनिक निगरानी की दृष्टि से एक अनूठी चुनौती भी बनी रहती है। 

  • भारत और नेपाल के बीच कुल 1751 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमा है।
  • नेपाल की सीमा भारत के 5 राज्यों से लगती है— उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम(परीक्षा के लिए अतिरिक्त तथ्य: नेपाल के साथ सबसे लंबी सीमा बिहार (लगभग 726 किमी) साझा करता है)।
  • भारत और नेपाल के बीच की सीमा एक ‘खुली सीमा’ है। इसका मतलब है कि दोनों देशों के नागरिकों को एक-दूसरे के यहाँ आने-जाने या काम करने के लिए वीजा (Visa) या पासपोर्ट की आवश्यकता नहीं होती है।
  • इस मित्रवत लेकिन संवेदनशील सीमा की सुरक्षा और निगरानी का दायित्व भारत के SSB (सशस्त्र सीमा बल) के जवानों पर है।

प्रमुख संधियाँ, समझौते और युद्धाभ्यास

  • सुगौली की संधि (1816): यह एक ऐतिहासिक संधि है जो आंग्ल-नेपाल युद्ध (1814-16) के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और नेपाल के बीच हुई थी। इसी संधि के तहत भारत और नेपाल की वर्तमान सीमा (काली नदी और गंडक नदी के आधार पर) तय की गई थी।
  • शांति और मित्रता की संधि (1950): 1950 में भारत और नेपाल के बीच इस ऐतिहासिक संधि पर हस्ताक्षर हुए थे, जिसके तहत दोनों देशों की सीमाएं खुली रखी गई हैं और नागरिकों को समान अधिकार व मुक्त आवागमन की सुविधा मिली हुई है।
  • महाकाली संधि (1996): महाकाली नदी (जिसे भारत में शारदा नदी कहा जाता है) के जल बंटवारे और पंचेश्वर बहुउद्देश्यीय परियोजना के एकीकृत विकास को लेकर यह संधि हुई थी।
  • संयुक्त युद्धाभ्यास: भारत और नेपाल की सेनाओं के बीच ‘सूर्य किरण’ नामक वार्षिक संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास आयोजित किया जाता है।

प्रमुख सीमा विवाद 

हालांकि भारत और नेपाल के संबंध बहुत मधुर हैं, लेकिन हाल के वर्षों में कुछ सीमा विवाद चर्चा में रहे हैं:

  • कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख विवाद: यह भारत (उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले) और नेपाल (दार्चुला जिले) के बीच सीमा का सबसे बड़ा विवाद है। नेपाल ने 1816 की सुगौली संधि की अपने अनुसार व्याख्या करते हुए एक नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था, जिसमें इन भारतीय क्षेत्रों को अपना हिस्सा बताया था, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया।
  • सुस्ता क्षेत्र विवाद: उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा पर गंडक नदी के पास स्थित ‘सुस्ता क्षेत्र’ को लेकर भी भारत और नेपाल के बीच पुराना विवाद है, क्योंकि गंडक नदी के अपना मार्ग बदलने के कारण यहाँ सीमांकन स्पष्ट नहीं है।

प्रमुख सांस्कृतिक और पर्यटन स्थल 

सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से भारत और नेपाल लगभग एक समान हैं। नेपाल के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल निम्नलिखित हैं:

  • पशुपतिनाथ मंदिर: नेपाल की राजधानी काठमांडू में बागमती नदी के किनारे स्थित यह भगवान शिव का विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक मंदिर है। इसके अलावा नेपाल में मुक्तिनाथ और मनकामना मंदिर भी स्थित हैं।
  • लुंबिनी: यह भगवान गौतम बुद्ध का जन्मस्थान है, जो नेपाल में स्थित है। यह बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए सबसे पवित्र स्थलों में से एक है और यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची में शामिल है।
  • बौद्ध स्तूप: नेपाल में स्थित ‘बौद्धनाथ स्तूप’ (दुनिया के सबसे बड़े गोलाकार स्तूपों में से एक) और ‘स्वयंभूनाथ स्तूप’ (मंकी टेम्पल) बहुत प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैं।
  • प्रमुख त्यौहार: ‘दसई’ (Dashain) नेपाल का सबसे प्रमुख और लंबा चलने वाला त्यौहार है (जो भारत के दशहरे के समान है)। इसके अलावा यहाँ ‘फागू पूर्णिमा’ (होली का ही एक रूप) भी बहुत धूमधाम से मनाई जाती है।

भारत का पड़ोसी देश म्यांमार — अराकान योमा पर्वत सीमा 

भारत के सुदूर पूर्व में स्थित म्यांमार हमारा एक अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक पड़ोसी देश है। म्यांमार का पुराना नाम ‘बर्मा’  था। ऐतिहासिक रूप से यह ब्रिटिश भारत का ही हिस्सा था, जिसे भारत शासन अधिनियम 1935 के प्रावधानों के तहत वर्ष 1937 में भारत से अलग कर दिया गया था। 4 जनवरी 1948 को यह पूर्ण रूप से एक स्वतंत्र राष्ट्र बना। बौद्ध धर्म की गहरी छाप और शानदार मंदिरों के कारण म्यांमार को ‘स्वर्णिम पैगोड़ा की भूमि’ (Land of Golden Pagoda) कहा जाता है। सामरिक दृष्टि से यह भारत के लिए ‘दक्षिण-पूर्वी एशिया का प्रवेश द्वार’ माना जाता है।

म्यांमार: एक नज़र में 

प्रतियोगी परीक्षाओं में सीधे पूछे जाने वाले म्यांमार के राष्ट्रीय प्रतीकों और तथ्यों की सूची नीचे दी गई है:

विशेषताविवरण
राजधानीनेपीताव (Naypyidaw) – पहले राजधानी रंगून/यंगून थी
मुद्राक्यात 
संसद का नामपाइथू हुटाव या असेंबली ऑफ द यूनियन
राष्ट्रीय भाषाबर्मी 
राष्ट्रीय पशुबाघ 
राष्ट्रीय पक्षीग्रे पीकॉक तीतर (Grey Peacock-Pheasant)
राष्ट्रीय पुष्पपैडक (Padauk)
राष्ट्रीय खेलचिलॉन (Chinlone / Caneball) – इसमें गेंद को बिना हाथ लगाए हवा में रखना होता है
सबसे लंबी नदीइरावती नदी – यह म्यांमार की जीवन रेखा है
सबसे ऊंची चोटीहकाबो राजी / खाकोबी राजी
भारत और म्यांमार की 1643 किमी सीमा (अराकान योमा पर्वत), कलादान प्रोजेक्ट, फ्री मूवमेंट रिजीम (FMR) और प्रमुख सुरक्षा चुनौतियों को दर्शाने वाला विस्तृत माइंड मैप।
म्यांमार (भारत का पड़ोसी देश): 1643 किमी सीमा, असम राइफल्स की सुरक्षा, कलादान मल्टी-मोडल प्रोजेक्ट और ‘ऑपरेशन सनराइज’ का विस्तृत क्विक रिवीजन चार्ट।

भारत-म्यांमार सीमा और सुरक्षा 

अपने इस पड़ोसी देश के साथ भारत की सीमा खुली होने के कारण सांस्कृतिक और व्यापारिक रूप से घनिष्ठ तो है, लेकिन प्रशासनिक निगरानी की दृष्टि से एक अनूठी चुनौती भी बनी रहती है। 

  • भारत और म्यांमार के बीच कुल 1643 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमा है।
  • यह सीमा भारत के 4 उत्तर-पूर्वी राज्यों से लगती है (उत्तर से दक्षिण क्रम)— अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम(नोट: अक्सर परीक्षाओं में फंसाने के लिए असम और त्रिपुरा का विकल्प दिया जाता है, याद रखें इनकी सीमा म्यांमार से नहीं लगती है)।
  • भारत और म्यांमार के बीच ‘अराकान योमा’ पर्वत श्रेणी एक प्राकृतिक सीमा (जल विभाजक) का निर्माण करती है, जो हिमालय का ही पूर्वी विस्तार है।
  • घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों वाली इस सीमा की सुरक्षा का जिम्मा मुख्य रूप से असम राइफल्स  के पास है, जो भारत का सबसे पुराना अर्धसैनिक बल है।

प्रमुख नीतियां, प्रोजेक्ट्स और युद्धाभ्यास

  • एक्ट ईस्ट पॉलिसी: म्यांमार भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति का मुख्य केंद्र है, क्योंकि यह भारत को आसियान (ASEAN) देशों से जोड़ता है।
  • कलादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट प्रोजेक्ट: यह भारत का एक अति-महत्वपूर्ण रणनीतिक प्रोजेक्ट है जो भारत के ‘कोलकाता बंदरगाह’ को म्यांमार के ‘सिटवे (Sittwe) बंदरगाह’ से जोड़ता है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से कोलकाता और मिजोरम के बीच की दूरी लगभग 1800 किमी से घटकर मात्र 930 किमी रह जाएगी और ‘सिलीगुड़ी कॉरिडोर’ पर निर्भरता कम होगी।
  • फ्री मूवमेंट रिजीम (FMR): यह एक मुक्त आवागमन व्यवस्था थी जिसके तहत दोनों देशों के सीमावर्ती आदिवासी बिना वीजा के सीमा के 16 किलोमीटर अंदर तक आ-जा सकते थे। (करेंट अफेयर्स): म्यांमार की तरफ से ड्रग्स की तस्करी और घुसपैठ को रोकने के लिए भारत सरकार ने 2024 में इस FMR समझौते को समाप्त कर दिया है और अब पूरी सीमा पर स्मार्ट फेंसिंग (बाड़) लगाई जा रही है।
  • संयुक्त युद्धाभ्यास: भारत और म्यांमार की सेनाओं के बीच IMBEX (India-Myanmar Bilateral Army Exercise) और नौसेना के बीच IMCOR अभ्यास आयोजित किया जाता है।

प्रमुख विवाद और सुरक्षा चुनौतियां

  • दीफू दर्रा: यह भारत (अरुणाचल प्रदेश), चीन और म्यांमार के ‘त्रि-संगम’ (Tri-junction) पर स्थित एक महत्वपूर्ण दर्रा है। यहाँ स्पष्ट सीमांकन न होने के कारण अक्सर विवाद की स्थिति बनी रहती है।
  • ‘गोल्डन ट्रायंगल’ और ड्रग्स तस्करी: म्यांमार कुख्यात ‘स्वर्णिम त्रिभुज’ (Golden Triangle – म्यांमार, लाओस, थाईलैंड) का हिस्सा है, जो दुनिया में अवैध अफीम और ड्रग्स उत्पादन का बहुत बड़ा केंद्र है। यहाँ से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में ड्रग्स की तस्करी एक बड़ी सुरक्षा चुनौती है।
  • उग्रवाद और ऑपरेशन सनराइज: पूर्वोत्तर भारत के कई उग्रवादी गुट म्यांमार के घने जंगलों में शरण लेते हैं। इनके खात्मे के लिए भारत और म्यांमार की सेनाओं ने 2015 और 2019 में मिलकर ‘ऑपरेशन सनराइज’ नामक एक सफल संयुक्त सैन्य अभियान चलाया था।

प्रमुख सांस्कृतिक और पर्यटन स्थल

म्यांमार मुख्य रूप से अपने ऐतिहासिक और मनमोहक बौद्ध तीर्थस्थलों के लिए विश्व विख्यात है:

  • श्वेडागोन पैगोड़ा: यंगून में स्थित यह म्यांमार का सबसे पवित्र बौद्ध स्थल माना जाता है, जहाँ एक विशाल स्वर्ण स्तूप मौजूद है। (आनंद मंदिर भी यहाँ का प्रमुख ऐतिहासिक मंदिर है)।
  • बागान (Bagan): इस प्राचीन शहर को ‘मंदिरों का शहर’ या ‘मंदिरों का सागर’ कहा जाता है। यहाँ 2000 से अधिक प्राचीन बौद्ध मंदिर और स्तूप स्थित हैं, जो यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर में शामिल हैं।
  • बहादुर शाह जफर की दरगाह: 1857 की क्रांति के बाद अंग्रेजों ने भारत के अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को निर्वासित करके म्यांमार भेज दिया था। उनकी कब्र आज भी रंगून (यंगून) में स्थित है।
  • इन्ले झील: यह खूबसूरत झील अपने उन अनूठे नाविकों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है, जो अपने हाथों की बजाय ‘पैरों से नाव’ चलाते हैं।
  • गोल्डन रॉक (Kyaiktiyo Pagoda): यह एक विशाल सुनहरी चट्टान है जो एक पहाड़ के किनारे पर गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देती हुई बिल्कुल संतुलन में टिकी है, जो पर्यटकों के बीच बहुत लोकप्रिय है।

भारत का पड़ोसी देश भूटान  — सबसे शांत सीमा वाला देश 

भारत के उत्तर-पूर्व में हिमालय की खूबसूरत वादियों में बसा भूटान (Bhutan) भारत का एक बेहद शांतिपूर्ण और घनिष्ठ पड़ोसी देश है। भारत की स्थलीय सीमा पर स्थित यह सबसे छोटा और महत्वपूर्ण देश है। भूटान मुख्य रूप से एक ‘बफर स्टेट’ है, जो दो बड़ी शक्तियों (भारत और चीन) के बीच स्थित है। अपनी अनूठी संस्कृति और पर्यावरण के कारण भूटान को ‘लैंड ऑफ थंडर ड्रैगन’ या ‘ड्रुक यूल’ (Druk Yul) के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ आज भी संवैधानिक राजशाही शासन व्यवस्था चलती है।

भूटान: एक नज़र में 

प्रतियोगी परीक्षाओं में सीधे पूछे जाने वाले भूटान के बेसिक तथ्यों और राष्ट्रीय प्रतीकों के लिए यह ‘क्विक रिवीजन टेबल’ नीचे दी गई है:

विशेषताविवरण
राजधानीथिम्पू  – (पुनाखा को भूटान की शीतकालीन राजधानी कहा जाता है)
मुद्रानगुलट्रम या न्यूगल्ट्रम 
संसद का नामतसोंगडू  या भूटानी संसद
राष्ट्रीय भाषाजोंगखा (Dzongkha)
राष्ट्रीय पशुतैकिन 
राष्ट्रीय पक्षीरेवेन या काला कौवा 
राष्ट्रीय पुष्पब्लू पपी 
राष्ट्रीय वृक्षसाइप्रस
राष्ट्रीय खेलतीरंदाजी 
सबसे लंबी नदीमानस नदी 
सबसे ऊंची चोटीगंगखर पुनसुम – (यह दुनिया की ऐसी सबसे ऊंची चोटी है जिस पर आज तक कोई पर्वतारोही नहीं चढ़ सका है)
भारत और भूटान की 699 किमी शांत सीमा, डोकलाम पठार विवाद, प्रोजेक्ट दंतक और प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं को दर्शाने वाला विस्तृत माइंड मैप।
भूटान (भारत का पड़ोसी देश): शांत सीमा, डोकलाम त्रि-संगम (Tri-junction) विवाद, प्रोजेक्ट दंतक और ‘सकल राष्ट्रीय खुशी (GNH)’ का क्विक रिवीजन चार्ट।

भारत-भूटान सीमा और सुरक्षा 

अपने इस पड़ोसी देश के साथ भारत की सीमा भले ही शांतिपूर्ण मानी जाती हो, पर डोकलाम जैसे त्रि-संगम क्षेत्रों में यह रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बनी रहती है। 

  • भारत और भूटान के बीच कुल 699 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमा है।
  • भूटान की सीमा भारत के 4 राज्यों से लगती है— पश्चिम बंगाल, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और असम(परीक्षा के लिए अतिरिक्त तथ्य: भूटान के साथ सबसे लंबी सीमा असम (267 किमी) साझा करता है)।
  • भारत-भूटान की इस खुली और मित्रवत सीमा की सुरक्षा का जिम्मा भारत के SSB (सशस्त्र सीमा बल) के जवानों के पास है।

प्रमुख नीतियां, समझौते और परियोजनाएं

  • सकल राष्ट्रीय खुशी (Gross National Happiness – GNH): भूटान दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जो अपनी प्रगति को GDP (अर्थव्यवस्था) से नहीं, बल्कि ‘ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस’ (नागरिकों की खुशी और पर्यावरण) से मापता है।
  • मित्रता और शांति संधि (Friendship Treaty): भारत और भूटान के बीच 1949 में एक ऐतिहासिक मित्रता संधि हुई थी। 2007 में इस संधि में संशोधन करके भूटान को उसकी विदेश नीति और सैन्य खरीद में अधिक स्वायत्तता दी गई।
  • प्रोजेक्ट दंतक (1961): यह भारत के सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा भूटान में बुनियादी ढांचा (सड़कें, पारो एयरपोर्ट आदि) विकसित करने के लिए चलाया गया एक बेहद महत्वपूर्ण और सफल प्रोजेक्ट था।
  • जलविद्युत परियोजनाएं: भारत, भूटान के आर्थिक विकास में सबसे बड़ा भागीदार है। भारत के वित्तीय और तकनीकी सहयोग से भूटान में ‘चूखा’, ‘कुरीछू’, ‘ताला’ और ‘मांग देछू’ जैसी प्रमुख जलविद्युत परियोजनाएं सफलतापूर्वक चल रही हैं।

प्रमुख विवाद और रणनीतिक चुनौतियां

यद्यपि भारत और भूटान के बीच कोई विवाद नहीं है, लेकिन भूटान का चीन के साथ सीमा विवाद भारत की सुरक्षा को सीधे प्रभावित करता है:

  • डोकलाम पठार विवाद (2017): ‘डोकलाम पठार’ भूटान की ‘चुंबी घाटी’ में स्थित है, जो भारत, भूटान और चीन (तिब्बत) का त्रि-संगम (Tri-junction) है। 2017 में चीनी सेना यहाँ सड़क बना रही थी, जिसका भारतीय सेना ने कड़ा विरोध किया। इसका मुख्य कारण यह था कि डोकलाम भारत के ‘सिलीगुड़ी कॉरिडोर’ (चिकन नेक) के बेहद करीब है, जो शेष भारत को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है।
  • सकतेंग वन्यजीव अभयारण्य: हाल ही में चीन ने पूर्वी भूटान में स्थित ‘सकतेंग अभयारण्य’ (Sakteng Wildlife Sanctuary) पर भी अपना झूठा दावा पेश किया है, जो भारत के अरुणाचल प्रदेश की सीमा के करीब है।

प्रमुख सांस्कृतिक और पर्यटन स्थल

भूटान अपने शांत पर्यावरण (यह दुनिया का एकमात्र कार्बन-नेगेटिव देश है) और बौद्ध मठों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है:

  • टाइगर नेस्ट मठ: इसे ‘पारो ताकत्संग’ भी कहा जाता है। यह बौद्ध धर्म का अत्यंत पवित्र स्थल है जो एक खड़ी चट्टान के किनारे पर रहस्यमयी तरीके से स्थित है।
  • पारो घाटी: पारो भूटान का एक प्रमुख शहर है जहाँ देश का एकमात्र अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा स्थित है। यह अपने मनमोहक दृश्यों के लिए पर्यटकों की पहली पसंद है।
  • पुनाखा जोंग: यह भूटान की दो नदियों (फो चू और मो चू) के संगम पर स्थित है, जिसे भूटान का सबसे सुंदर और पुराना मठ (Dzong) माना जाता है।
  • बुद्ध डोर्डेनमा: यह राजधानी थिम्पू की पहाड़ियों के बीच स्थित भगवान बुद्ध की एक विशाल और विश्व प्रसिद्ध स्वर्ण प्रतिमा है।
  • प्रमुख त्यौहार: ‘पारो तसेचू’ और ‘थांगबी’ भूटान के मशहूर और रंगारंग त्यौहार हैं, जिनमें लोग पारंपरिक मुखौटे पहनकर नृत्य करते हैं।

भारत का पड़ोसी देश अफगानिस्तान — सबसे छोटी अंतरराष्ट्रीय सीमा  

भारत के उत्तर-पश्चिम में स्थित अफगानिस्तान सामरिक दृष्टि से हमारा एक अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ोसी देश है। भारत अपनी सबसे छोटी अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमा इसी देश के साथ साझा करता है। अफगानिस्तान ऐतिहासिक रूप से ‘सिल्क रूट’ का एक प्रमुख हिस्सा रहा है। अगस्त 2021 में हुए तख्तापलट के बाद से वर्तमान में यहाँ तालिबान का शासन है, जिसे ‘इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान’ कहा जाता है।

अफगानिस्तान: एक नज़र में 

प्रतियोगी परीक्षाओं में सीधे तौर पर पूछे जाने वाले अफगानिस्तान के बेसिक तथ्यों और राष्ट्रीय प्रतीकों की सूची नीचे दी गई है:

विशेषताविवरण
राजधानीकाबुल (इसे ‘उद्यानों का शहर’ भी कहा जाता है)
मुद्राअफगानी
संसद का नामशोरा या नेशनल असेंबली
राष्ट्रीय भाषापश्तो और दरी
स्वतंत्रता दिवस19 अगस्त
राष्ट्रीय पशुस्नो लेपर्ड (बर्फीला तेंदुआ)
राष्ट्रीय पक्षीसुनहरा गरुड़ (Golden Eagle)
राष्ट्रीय पुष्पट्यूलिप 
राष्ट्रीय फलअनार 
राष्ट्रीय खेलबुज़कशी*
सबसे लंबी नदीहेलमंद नदी (Helmand River)
सबसे ऊंची चोटीनोशाक 

(नोट: बुज़कशी अफगानिस्तान का एक प्राचीन और पारंपरिक खेल है, जिसमें खिलाड़ी घोड़े पर बैठकर एक मृत बकरी/बछड़े को खींचते हुए लक्ष्य तक ले जाते हैं।)

भारत और अफगानिस्तान की सबसे छोटी 106 किमी सीमा, वाखान कॉरिडोर, डूरंड रेखा, सलमा बांध और ऑपरेशन देवी शक्ति को दर्शाने वाला विस्तृत माइंड मैप।
अफगानिस्तान (भारत का पड़ोसी देश): सबसे छोटी सीमा, डूरंड रेखा, वाखान कॉरिडोर, और भारत के प्रमुख प्रोजेक्ट्स (सलमा व शहतूत बांध) का क्विक रिवीजन चार्ट।

भारत-अफगानिस्तान सीमा

  • भारत और अफगानिस्तान के बीच कुल 106 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है, जो भारत की सभी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं में सबसे छोटी है।
  • यह सीमा सीधे तौर पर भारत के केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख से लगती है। (वर्तमान में यह हिस्सा पाक-अधिकृत कश्मीर यानी PoK के ‘गिलगित-बाल्टिस्तान’ क्षेत्र में आता है)।
  • वाखान कॉरिडोर: अफगानिस्तान का यह सँकरा भू-भाग ही भारत (PoK) की सीमा को स्पर्श करता है।
  • 1893 में सर मोर्टिमर डूरंड द्वारा ब्रिटिश भारत और अफगानिस्तान के बीच ‘डूरंड रेखा’ खींची गई थी। (चूंकि 1947 में भारत का विभाजन हो गया, इसलिए वर्तमान में यह डूरंड रेखा मुख्य रूप से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच की सीमा निर्धारित करती है)।

भारत-अफगानिस्तान संबंध और प्रमुख प्रोजेक्ट्स 

भारत ने अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जहाँ से परीक्षाओं में अक्सर सवाल बनते हैं:

  • सलमा बांध: हेरात प्रांत में स्थित इस बांध का निर्माण भारत ने करवाया है। इसे ‘अफगान-भारत मैत्री बांध’ भी कहा जाता है।
  • शहतूत बांध: काबुल शहर को पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए भारत द्वारा काबुल नदी बेसिन पर इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई थी।
  • अफगान संसद भवन: अफगानिस्तान की नई संसद की इमारत का निर्माण भी भारत सरकार द्वारा करवाया गया था, जिसका उद्घाटन 2015 में किया गया था।
  • ऑपरेशन देवी शक्ति (2021): अगस्त 2021 में जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया था, तब वहाँ फंसे भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने के लिए भारत सरकार द्वारा ‘ऑपरेशन देवी शक्ति’ चलाया गया था।

प्रमुख सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल

अफगानिस्तान का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत अधिक रहा है। यहाँ के कुछ प्रमुख स्थल निम्नलिखित हैं:

  • बामियान के बुद्ध: यह पहाड़ को काटकर बनाई गई भगवान बुद्ध की दो विशाल और प्राचीन मूर्तियाँ थीं, जो विश्व भर में प्रसिद्ध थीं। दुर्भाग्य से, 2001 में कट्टरपंथी तालिबान ने डायनामाइट लगाकर इस विश्व धरोहर को नष्ट कर दिया था।
  • मजार-ए-शरीफ: यह अफगानिस्तान का एक प्रमुख शहर और तीर्थस्थल है, जिसे ‘संतों का मकबरा’ भी कहा जाता है। यहीं पर प्रसिद्ध ‘ब्लू मॉस्क’ स्थित है, जो अपनी नीली टाइल्स की शानदार वास्तुकला के लिए जाना जाता है।
  • बाबर का मकबरा: भारत में मुगल साम्राज्य के संस्थापक जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर का मकबरा अफगानिस्तान की राजधानी काबुल (बागे-बाबर) में ही स्थित है। (बाबर की इच्छा थी कि उसे काबुल में ही दफनाया जाए)।
  • हिंदू कुश पर्वत: यह अफगानिस्तान की सबसे प्रमुख पर्वत श्रृंखला है, जो देश के मध्य भाग से होकर गुजरती है।

भारत के प्रमुख जलीय पड़ोसी देश: समुद्री सीमाएं और कूटनीति

भारत अपनी मुख्य भूमि से अलग, समुद्र पार स्थित देशों के साथ भी अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक और जलीय सीमाएं साझा करता है। आइए भारत के मुख्य जलीय पड़ोसी देशों (श्रीलंका और मालदीव) का विस्तृत अध्ययन करते हैं:

भारत का जलीय पड़ोसी देश श्रीलंका — पाक जलसंधि और राम सेतु  

भारत के दक्षिण में हिंद महासागर में स्थित श्रीलंका एक अत्यंत खूबसूरत और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण द्वीपीय (Island) देश है। अपनी अनूठी भौगोलिक बनावट और प्राकृतिक सुंदरता के कारण इसे ‘हिंद महासागर का मोती’ (Pearl of the Indian Ocean) और ‘भारत का आंसू’ (Teardrop of India) कहा जाता है। श्रीलंका का पुराना नाम ‘सिलोन’ था, और यह 1948 में ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र हुआ। भारत और श्रीलंका के बीच न केवल भौगोलिक बल्कि गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध हैं।

श्रीलंका: एक नज़र में 

परीक्षाओं में श्रीलंका से जुड़े तथ्यात्मक प्रश्नों के लिए यह ‘क्विक रिवीजन टेबल’ आपकी मदद करेगी:

विशेषताविवरण
राजधानीश्री जयवर्धनेपुरा कोट्टे (विधायी/प्रशासनिक) और कोलंबो (वाणिज्यिक)
मुद्राश्रीलंकाई रुपया 
संसद का नामश्रीलंका की संसद 
राष्ट्रीय भाषासिंहली  और तमिल
राष्ट्रीय पशुहाथी
राष्ट्रीय पक्षीजंगली मुर्गी (Jungle Fowl)
राष्ट्रीय फूलब्लू वाटर लिली 
राष्ट्रीय वृक्षआयरन वुड 
राष्ट्रीय खेलवॉलीबॉल 
सबसे लंबी नदीमहावेली गंगा 
सबसे ऊंची चोटीपिद्रुतलगला (Pidurutalagala) – इसे माउंट पेड्रो भी कहते हैं
भारत और श्रीलंका की जलीय सीमा, पाक जलसंधि, राम सेतु, कच्चा तीवू द्वीप समझौता और रामायण सर्किट को दर्शाने वाला विस्तृत माइंड मैप।
श्रीलंका (भारत का जलीय पड़ोसी देश): पाक जलसंधि, मन्नार की खाड़ी, ऐतिहासिक श्रीमा-शास्त्री समझौता, और प्रमुख सैन्य अभ्यासों (मित्र शक्ति, स्लिनेक्स) का क्विक रिवीजन चार्ट।

भारत-श्रीलंका जलीय सीमा और भूगोल

अपने इस जलीय पड़ोसी देश से भारत की समुद्री सीमा ‘पाक जलसंधि’ और मन्नार की खाड़ी से होकर गुजरती है, जो दोनों देशों के मछुआरों के बीच अक्सर विवाद का कारण भी बनती है। 

  • पाक जलसंधि: भारत (तमिलनाडु) और श्रीलंका को अलग करने वाली जलराशि को ‘पाक जलसंधि’ कहा जाता है। यह बंगाल की खाड़ी को ‘पाक की खाड़ी’ से जोड़ती है।
  • मन्नार की खाड़ी: यह भारत और श्रीलंका के बीच स्थित एक उथला समुद्री क्षेत्र है, जो जैव-विविधता के लिए प्रसिद्ध है।
  • राम सेतु (Adam’s Bridge): भारत के पम्बन द्वीप (धनुषकोडी) और श्रीलंका के मन्नार द्वीप (तैलयामन्नार) के बीच लगभग 50 किमी लंबी चूना पत्थर की एक डूबी हुई श्रृंखला है, जिसे राम सेतु कहा जाता है।
  • एलिफेंटा दर्रा: यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक दर्रा है जो श्रीलंका के उत्तरी हिस्से ‘जाफना प्रायद्वीप’ (तमिल बहुल क्षेत्र) को शेष श्रीलंका से जोड़ता है।

भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सीमा को दर्शाने वाला मानचित्र, जिसमें पाक जलसंधि, मन्नार की खाड़ी, पम्बन द्वीप, कच्चातिवु द्वीप और राम सेतु स्पष्ट रूप से दिखाए गए हैं।

प्रमुख समझौते, नीतियां और युद्धाभ्यास

  • कच्चा तीवू द्वीप समझौता (1974): भारत और श्रीलंका के बीच हुए इस समझौते के तहत भारत ने ‘कच्चा तीवू द्वीप’ श्रीलंका को सौंप दिया था। वर्तमान में यह मछुआरों के अधिकारों और मत्स्य पालन विवाद का केंद्र बना रहता है।
  • श्रीमा-शास्त्री समझौता (1964): यह समझौता भारतीय मूल के तमिलों (जिन्हें ब्रिटिश काल में चाय बागानों के लिए वहां ले जाया गया था) की नागरिकता और उनके अधिकारों को सुलझाने के लिए हुआ था।
  • शांति समझौता (1987): राजीव गांधी और जे.आर. जयवर्धने के बीच हुए इस समझौते के तहत भारत ने LTTE (लिट्टे) उग्रवाद को समाप्त करने और शांति बहाली के लिए अपनी शांति सेना (IPKF) भेजी थी।
  • मुक्त व्यापार समझौता (ISFTA – 1998): दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए मुक्त व्यापार समझौता किया गया था।
  • संयुक्त युद्धाभ्यास: भारत और श्रीलंका की सेनाओं के बीच ‘मित्र शक्ति’ और नौसेना के बीच ‘स्लिनेक्स’ (SLINEX – Sri Lanka India Naval Exercise) नामक सैन्य अभ्यास आयोजित किए जाते हैं।

प्रमुख सांस्कृतिक और पर्यटन स्थल

श्रीलंका अपने समुद्री तटों और समृद्ध ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है:

  • सिगरिया: इसे ‘लयन रॉक’ भी कहा जाता है। यह एक विशाल चट्टान के ऊपर बना प्राचीन किला और महल है, जो यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची में शामिल है।
  • धार्मिक स्थल: श्रीलंका में कैंडी का ‘टूथ रेलिक मंदिर’ (दंत अवशेष मंदिर) अत्यंत प्रसिद्ध है। इसके अलावा, हिंदुओं के लिए यहाँ मुनेश्वरम, नागुलेश्वरम, और पंचेश्वरम जैसे अति प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर स्थित हैं।
  • प्रमुख त्यौहार: ‘नवम पैराहेरा’ श्रीलंका में मनाया जाने वाला एक बेहद प्रसिद्ध और रंगारंग त्यौहार है, जिसमें हाथी और पारंपरिक नर्तक शामिल होते हैं।
  • रामयण सर्किट: भारत और श्रीलंका दोनों मिलकर ‘रामायण सर्किट’ पर काम कर रहे हैं, जिसके तहत अशोक वाटिका, सीता एलिया (जहाँ माता सीता को रखा गया था) जैसे पौराणिक स्थलों को पर्यटन के रूप में विकसित किया जा रहा है।

रणनीतिक चुनौती: वर्तमान में श्रीलंका में चीन का प्रभाव (जैसे हंबनटोटा बंदरगाह का लीज पर जाना) भारत के लिए एक कूटनीतिक और रणनीतिक चुनौती बना हुआ है, जिसे ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ रणनीति का हिस्सा माना जाता है।

 भारत का जलीय पड़ोसी देश मालदीव — 8 डिग्री चैनल और मूंगा द्वीप 

भारत के दक्षिण-पश्चिम में अरब सागर  में स्थित मालदीव एक बेहद खूबसूरत और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जलीय पड़ोसी देश है। क्षेत्रफल और जनसंख्या दोनों ही हिसाब से यह एशिया का सबसे छोटा देश है। यह पूरी तरह से मूंगे की चट्टानों या प्रवाल भित्तियों से बना एक द्वीपीय देश है। मालदीव वर्ष 1965 में ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र हुआ था और 1968 में इसने स्वयं को एक गणतंत्र घोषित किया। इसे ‘महलों का द्वीप’ भी कहा जाता है।

मालदीव: एक नज़र में

प्रतियोगी परीक्षाओं में सीधे पूछे जाने वाले मालदीव के बेसिक तथ्यों और राष्ट्रीय प्रतीकों के लिए यह ‘क्विक रिवीजन टेबल’ नीचे दी गई है:

विशेषताविवरण
राजधानीमाले 
मुद्रामालदीवियन रुफिया (ध्यान दें, यह रुपया नहीं है)
संसद का नामप्यूपिल्स मजलिस 
राष्ट्रीय भाषाधिवेही 
राष्ट्रीय पशुयेलोफिन टूना ( एक प्रकार की मछली)
राष्ट्रीय पक्षीव्हाइट-ब्रेस्टेड वाटरहेन (सफेद छाती वाला जलमुर्गा)
राष्ट्रीय पुष्पगुलाबी गुलाब (Pink Rose / Finifenmaa) 
राष्ट्रीय वृक्षनारियल का पेड़
राष्ट्रीय खेलफुटबॉल 
सबसे ऊंचा बिंदुमाउंट विलिंगली – चूँकि मालदीव बहुत निचला देश है, इसलिए इसकी अधिकतम ऊंचाई मात्र 2.4 मीटर है।
भारत और मालदीव समुद्री सीमा (8 डिग्री चैनल), मिनीकॉय द्वीप, ऐतिहासिक ऑपरेशन कैक्टस (1988) और प्रमुख युद्धाभ्यासों को दर्शाने वाला विस्तृत माइंड मैप।
मालदीव (भारत का जलीय पड़ोसी देश): 8 डिग्री चैनल, ऐतिहासिक ‘ऑपरेशन कैक्टस’, ‘ऑपरेशन नीर’ और वर्तमान ‘इंडिया आउट’ अभियान जैसी रणनीतिक चुनौतियों का क्विक रिवीजन चार्ट।

भारत-मालदीव जलीय सीमा 

अपने इस जलीय पड़ोसी देश से भारत की समुद्री सीमा हिंद महासागर में सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, खासकर चीन के बढ़ते प्रभाव के मद्देनज़र। 

  • 8 डिग्री चैनल: भारत और मालदीव एक-दूसरे से समुद्री सीमा के माध्यम से जुड़े हैं और इन्हें ‘8 डिग्री चैनल’ अलग करता है।
  • मिनीकॉय: गहराई से देखने पर, यह 8 डिग्री चैनल मुख्य रूप से भारत के लक्षद्वीप समूह के सबसे दक्षिणी हिस्से ‘मिनीकॉय द्वीप’ और मालदीव के बीच स्थित है।

भारत-मालदीव: प्रमुख समझौते और सैन्य अभियान

  • ऑपरेशन कैक्टस (1988): यह भारत द्वारा मालदीव में चलाया गया एक ऐतिहासिक सैन्य अभियान था। 1988 में जब भाड़े के हथियारबंद लड़ाकों ने मालदीव के राष्ट्रपति के खिलाफ तख्तापलट की कोशिश की थी, तब भारतीय सशस्त्र बलों ने रातों-रात वहाँ पहुँचकर उस तख्तापलट को विफल कर दिया था।
  • ऑपरेशन नीर (2014): जब मालदीव की राजधानी माले में पीने के पानी का भारी संकट पैदा हो गया था, तब भारतीय वायुसेना और नौसेना ने ‘ऑपरेशन नीर’ के तहत वहाँ लाखों लीटर शुद्ध पानी पहुँचाया था।
  • समुद्री सीमा समझौता (1976): 1976 से पहले मिनीकॉय द्वीप को लेकर भारत और मालदीव के बीच हल्का विवाद था। लेकिन 1976 के समुद्री सीमा समझौते के तहत मालदीव ने स्पष्ट रूप से ‘मिनीकॉय द्वीप’ पर भारत का अधिकार मान लिया।
  • संयुक्त युद्धाभ्यास: भारत और मालदीव की सेनाओं के बीच ‘एकुवेरिन’ (जिसका अर्थ धिवेही भाषा में ‘मित्र’ होता है) तथा ‘एकथा’ नामक संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास आयोजित किए जाते हैं। इसके अलावा भारत, मालदीव और श्रीलंका के तटरक्षकों के बीच ‘दोस्ती’ नामक त्रिपक्षीय अभ्यास भी होता है।

प्रमुख पर्यटन स्थल और अर्थव्यवस्था

मालदीव की पूरी अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से इसके पर्यटन और मत्स्य पालन पर निर्भर है। यह अपने ‘वाटर विला’ और सफेद रेत वाले समुद्री तटों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है:

  • बायोलुमिनिसेंट बीच: वाधू द्वीप पर स्थित यह मालदीव का एक अति-प्रसिद्ध समुद्री तट है। यह रात के समय अपने ‘प्लैंकटन’ (Plankton – एक प्रकार के सूक्ष्म जीव) के चमकने के कारण नीले रंग में प्राकृतिक रूप से जगमगाता है, जिसे ‘सी ऑफ स्टार्स’ भी कहते हैं।
  • बनाना रीफ: यह केले के आकार का एक संरक्षित समुद्री क्षेत्र है, जो मालदीव के सबसे बेहतरीन डाइविंग स्पॉट्स में से एक है।

रणनीतिक चुनौती: वर्तमान में मालदीव में चीन का बढ़ता दखल और मालदीव सरकार का हालिया “इंडिया आउट” (India Out) अभियान भारत के लिए एक बड़ी रणनीतिक और कूटनीतिक चुनौती बना हुआ है।

भारत की प्रमुख जलीय सीमाएं और समुद्री चैनल 

भारत के विभिन्न द्वीपों और समुद्री पड़ोसी देशों को अलग करने वाले प्रमुख जल-चैनल और जलसंधियां प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। मानचित्र पर आधारित प्रश्नों में यहाँ से हर साल सवाल पूछे जाते हैं।

भौगोलिक अवधारणा: भूगोल में 8°, 9° या 10° चैनल का नामकरण **’अक्षांश रेखाओं’** के आधार पर किया गया है। यानी 8° चैनल का सीधा मतलब भूमध्य रेखा के उत्तर में स्थित 8° उत्तरी अक्षांश रेखा से है।

क्विक रिवीजन टेबल

परीक्षा से ठीक पहले तेजी से रिवीजन करने के लिए सभी प्रमुख चैनलों की सूची नीचे दी गई है:

समुद्री चैनल / जलसंधिकिनके मध्य स्थित है? 
8° चैनल मालदीव और मिनीकॉय (भारत)
9° चैनल मिनीकॉय और लक्षद्वीप
10° चैनल अंडमान और निकोबार के मध्य
11° चैनलअमीनदीवी और कन्नानोर (लक्षद्वीप)
ग्रेट चैनल भारत (निकोबार) और इंडोनेशिया (सुमात्रा)
डंकन पास दक्षिण अंडमान और छोटा अंडमान
कोको स्ट्रेट उत्तरी अंडमान और कोको द्वीप (म्यांमार)
पाक जलसंधितमिलनाडु (भारत) और श्रीलंका

प्रमुख चैनलों का विस्तृत विवरण 

  • 8° चैनल: यह जल चैनल भारत के लक्षद्वीप के सबसे दक्षिणी द्वीप ‘मिनीकॉय’ को समुद्री पड़ोसी देश ‘मालदीव’ से अलग करता है।
  • 9° चैनल: यह जल क्षेत्र भारत के केंद्र शासित प्रदेश ‘लक्षद्वीप’ (कवरत्ती) को उसी के सबसे बड़े और दक्षिणी द्वीप ‘मिनीकॉय’ से अलग करता है।
  • 10° चैनल: यह भारत का सबसे महत्वपूर्ण और सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला चैनल है। यह अंडमान द्वीप समूह को निकोबार द्वीप समूह से अलग करता है। (गहराई से पूछने पर: यह मुख्य रूप से ‘छोटा अंडमान’ (Little Andaman) और ‘कार निकोबार’ के मध्य स्थित है)।
  • 11° चैनल: यह चैनल लक्षद्वीप समूह को दो हिस्सों में बांटता है— उत्तर में अमीनदीवी द्वीप और दक्षिण में कन्नानोर द्वीप।
  • डंकन पास: यह एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है जो अंडमान द्वीप समूह के ही दो हिस्सों— दक्षिण अंडमान और छोटा अंडमान के मध्य स्थित है।
  • कोको स्ट्रेट: यह जलसंधि कोको द्वीप (जो म्यांमार के अधिकार में है और जहाँ चीन की गतिविधियां देखी जाती हैं) तथा भारत के उत्तरी अंडमान के मध्य स्थित है।
  • ग्रेट चैनल: यह चैनल भारत और इंडोनेशिया के बीच जलीय सीमा बनाता है। यह मुख्य रूप से भारत के सबसे दक्षिणी बिंदु यानी ‘ग्रेट निकोबार’ और इंडोनेशिया के ‘सुमात्रा द्वीप’ के मध्य स्थित है। इसे सिक्स डिग्री चैनल (6° Channel) भी कहा जाता है।

 परीक्षा के लिए विशेष: भारत और श्रीलंका के बीच दो अन्य महत्वपूर्ण भौगोलिक संरचनाएं स्थित हैं, जो अक्सर परीक्षाओं में पूछी जाती हैं:

  • पाक जलसंधि: यह भारत के तमिलनाडु राज्य और श्रीलंका के मध्य स्थित एक जलडमरूमध्य है, जो बंगाल की खाड़ी को मन्नार की खाड़ी से जोड़ता है।
  • मन्नार की खाड़ी: यह दक्षिण-पूर्व तमिलनाडु और श्रीलंका के मध्य स्थित है। यह क्षेत्र अपने उच्च कोटि के मोतियों और अत्यंत समृद्ध समुद्री जैव-विविधता के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

 संयुक्त राष्ट्र समुद्री संधि (UNCLOS 1982): भारत के समुद्री अधिकार और जलीय क्षेत्र

किसी भी देश की समुद्री सीमा कहाँ तक होगी और समुद्र में उसके क्या अधिकार होंगे, इसे तय करने के लिए 1982 में संयुक्त राष्ट्र ने एक अंतरराष्ट्रीय समझौता किया था। इसे UNCLOS (United Nations Convention on the Law of the Sea) कहा जाता है।

UNCLOS के अनुसार भारत सहित किसी भी तटीय देश की समुद्री सीमा और अधिकारों को मुख्य रूप से 5 भागों में बांटा गया है।

भौगोलिक तथ्य: समुद्र में दूरियों का मापन सामान्य किलोमीटर के बजाय ‘समुद्री मील’ (Nautical Mile – NM) में किया जाता है, जिससे जुड़े मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • 1 समुद्री मील (1 NM) = 1.852 किलोमीटर होता है।
  • आधार रेखा: समुद्र में सभी दूरियों को हमेशा ‘आधार रेखा’ से मापा जाता है। समुद्र के टेढ़े-मेढ़े तटों के बाहरी बिंदुओं को मिलाने वाली एक काल्पनिक सीधी रेखा को ही ‘आधार रेखा’ कहते हैं।

UNCLOS समुद्री क्षेत्र: एक नज़र में 

परीक्षा से ठीक पहले तेजी से रिवीजन करने के लिए समुद्री क्षेत्रों और भारत के अधिकारों की सूची नीचे दी गई है:

समुद्री क्षेत्रआधार रेखा से दूरी भारत के प्रमुख अधिकार 
प्रादेशिक जल 12 नॉटिकल मील (NM) तकदेश का संपूर्ण संप्रभु अधिकार (पूर्ण नियंत्रण)।
संलग्न क्षेत्र 24 नॉटिकल मील (NM) तकसाफ-सफाई, सीमा शुल्क और वित्तीय अधिकार।
अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ)200 नॉटिकल मील (NM) तकसंसाधनों का दोहन, वैज्ञानिक अनुसंधान और कृत्रिम द्वीप बनाना।

UNCLOS के अनुसार जलीय क्षेत्रों का विस्तृत विवरण

1. आंतरिक जल (Internal Water)

तट के कटे-फटे हिस्सों (मुख्य भूमि) और ‘आधार रेखा’ (Baseline) के बीच जो समुद्र का पानी भरा होता है, उसे आंतरिक जल कहा जाता है। इस क्षेत्र पर देश का ठीक वैसा ही पूर्ण और संप्रभु अधिकार होता है, जैसा उसकी मुख्य भूमि पर होता है। इसमें नदियां, झीलें, खाड़ियाँ और लैगून शामिल होते हैं।

2. प्रादेशिक जल (Territorial Sea)

आधार रेखा (Baseline) से समुद्र की ओर 12 समुद्री मील (12 NM) तक के क्षेत्र को प्रादेशिक जल या ‘क्षेत्रीय सागर’ कहा जाता है। इस क्षेत्र में भारत को संपूर्ण संप्रभुता प्राप्त है। यानी इस जल क्षेत्र, इसके ऊपर के आसमान और इसके नीचे की जमीन पर पूरी तरह से भारत का ही कानून लागू होता है। विदेशी जहाज बिना अनुमति के यहाँ प्रवेश नहीं कर सकते।

3. संलग्न क्षेत्र (Contiguous Zone)

आधार रेखा से 24 समुद्री मील (24 NM) तक के समुद्री क्षेत्र को संलग्न क्षेत्र कहा जाता है। (यानी प्रादेशिक जल की सीमा खत्म होने के बाद अगले 12 NM का क्षेत्र)। इस क्षेत्र में भारत को 3 प्रमुख अधिकार प्राप्त हैं:

    1. सीमा शुल्क: भारत यहाँ से गुजरने वाले विदेशी जहाजों से सीमा शुल्क (टैक्स) वसूल सकता है।
    2. साफ-सफाई: इस क्षेत्र में पर्यावरण और समुद्र की साफ-सफाई का अधिकार भारत के पास है।
    3. वित्तीय और प्रवासी कानून: अप्रवासन और वित्तीय कानून लागू करने का अधिकार।

4. अनन्य आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone – EEZ)

आधार रेखा से 200 समुद्री मील (200 NM) तक का क्षेत्र अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) कहलाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में सबसे ज्यादा प्रश्न इसी क्षेत्र से पूछे जाते हैं।  इस विशाल क्षेत्र में भारत को समुद्री संसाधनों के उपयोग के विशेष अधिकार प्राप्त हैं:

    1. संसाधनों का दोहन: समुद्र के भीतर मिलने वाले खनिज सम्पदा, तेल, प्राकृतिक गैस का उत्खनन और मछली पकड़ने का पूर्ण अधिकार (जैसे- मुंबई हाई)।
    2. वैज्ञानिक अनुसंधान: समुद्री जीवों और पानी पर वैज्ञानिक परीक्षणकरने का अधिकार।
    3. कृत्रिम द्वीप: इस क्षेत्र में भारत नए कृत्रिम द्वीपों का निर्माण कर सकता है।

5. उच्च सागर (High Seas)

EEZ यानी 200 समुद्री मील के बाद खुले समुद्र का विस्तार होता है, जिसे उच्च सागर या ‘अंतरराष्ट्रीय जल’ कहा जाता है। इस क्षेत्र पर दुनिया के किसी भी एक देश का अधिकार नहीं होता है। यहाँ दुनिया के सभी देशों (चाहे वे तटीय हों या लैंडलॉक्ड) को समान अधिकार प्राप्त हैं। यहाँ शांतिपूर्ण व्यापार, नेविगेशन और संचार केबल बिछाने की सभी को स्वतंत्रता होती है।

निष्कर्ष: भारत और उसके पड़ोसी देश

भारत, अपनी लगभग 15,106 किलोमीटर लंबी स्थलीय सीमा और लगभग 11,098 किलोमीटर की विशाल तटीय सीमा (नए मापन के अनुसार) के साथ, दक्षिण एशिया का एक प्रमुख भौगोलिक और सामरिक केंद्र है। कुल 9 पड़ोसी देशों (7 स्थलीय और 2 जलीय) से घिरा भारत न केवल इस क्षेत्र का सबसे बड़ा देश है, बल्कि आर्थिक और सांस्कृतिक दृष्टि से एक स्वाभाविक नेतृत्वकर्ता भी है।

भारत और उसके पड़ोसी देशों के कूटनीतिक और भू-राजनीतिक संबंधों का सार निम्नलिखित प्रमुख नीतियों में देखा जा सकता है:

  • ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति: भारत ने हमेशा अपने पड़ोसियों के साथ शांति, सुरक्षा और विकास को प्राथमिकता दी है। इसका मुख्य उद्देश्य पड़ोसी देशों के साथ व्यापारिक और संपर्क (Connectivity) संबंधों को निरंतर मजबूत करना है।
  • गुजराल सिद्धांत (1996): पूर्व प्रधानमंत्री आई. के. गुजराल द्वारा दिए गए इस ऐतिहासिक सिद्धांत के तहत, भारत अपने छोटे पड़ोसी देशों (जैसे- नेपाल, भूटान, मालदीव, श्रीलंका और बांग्लादेश) को बिना किसी वापसी की उम्मीद के एकतरफा मदद प्रदान करता है।
  • सार्क (SAARC) और साफ्टा (SAFTA): दक्षिण एशियाई देशों में सहयोग के लिए भारत ‘सार्क’ का संस्थापक सदस्य है। साथ ही 2006 में लागू ‘साफ्टा’ (South Asian Free Trade Area) के माध्यम से इस पूरे क्षेत्र में मुक्त व्यापार को बढ़ावा दिया जा रहा है।
  • बिम्सटेक (BIMSTEC) पर बढ़ता जोर: पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के कारण वर्तमान में ‘सार्क’ उतना सक्रिय नहीं है। इसलिए भारत अब अपनी ‘एक्ट ईस्ट’ (Act East) नीति के तहत ‘बिम्सटेक’ के माध्यम से बंगाल की खाड़ी से जुड़े पड़ोसी देशों के साथ क्षेत्रीय सहयोग तेजी से बढ़ा रहा है।

अंतिम विचार 

यद्यपि चीन की विस्तारवादी नीतियां और पाकिस्तान का सीमा-पार आतंकवाद भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं, फिर भी भारत ‘पंचशील समझौते’ के माध्यम से शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में विश्वास रखता है। भारत जानता है कि ‘वैश्विक महाशक्ति’ (Global Superpower) बनने का सपना तभी साकार हो सकता है, जब उसका पड़ोस शांत और समृद्ध हो। अंततः, एक सुरक्षित और सहयोगात्मक पड़ोस ही आत्मनिर्भर भारत की सच्ची नींव है।

Leave a Comment