भारत के पड़ोसी देश (Bharat ke Padosi Desh): सीमाएं, राजधानी और प्रमुख विवाद (Maps & Notes)

भारत के पड़ोसी देश कुल 9 हैं। इनमें से 7 देशों से भारत की स्थलीय सीमा लगती है — बांग्लादेश, चीन, पाकिस्तान, नेपाल, म्यांमार, भूटान और अफगानिस्तान। दो देश ऐसे हैं जिनसे भारत की मुख्य जलीय सीमा लगती है — श्रीलंका और मालदीव।

यह टॉपिक भारत के भूगोल और स्टैटिक जीके का सबसे ज़रूरी हिस्सा है। SSC, UPSC, UPSSSC, SSC GD या राज्य स्तरीय परीक्षाओं में इस सेक्शन से लगभग हर साल सवाल आते हैं — कभी सीधे तथ्य पूछ लिए जाते हैं, कभी नक्शे पर आधारित सवाल आते हैं, और कभी सीमा या नदी जल विवादों से जुड़े प्रश्न। इस लेख में हमने हर देश की सीमा की लंबाई, उससे जुड़े भारतीय राज्य, सुरक्षा बल, अंतरराष्ट्रीय रेखाएँ, संधियाँ और ताज़ा विवाद एक ही जगह, एक तार्किक क्रम में रखे हैं, ताकि पढ़ने के बाद आपको कहीं और भटकना न पड़े।

भारत के 9 पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का विस्तृत मानचित्र (Bharat Ke Padosi Desh Map)

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भारत के कितने पड़ोसी देश हैं?

भारत के मुख्य रूप से कुल 9 पड़ोसी देश माने जाते हैं। नीचे इन्हें दो हिस्सों में बाँटकर दिया गया है, ताकि परीक्षा में “स्थलीय” और “जलीय” वाला अंतर याद रखने में आसानी हो।

स्थलीय सीमा वाले 7 देश: पाकिस्तान, अफगानिस्तान, चीन, नेपाल, भूटान, म्यांमार और बांग्लादेश।

मुख्य जलीय सीमा वाले 2 देश: श्रीलंका और मालदीव।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष तथ्य: मुख्य पड़ोसी 9 ही माने जाते हैं, लेकिन अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के विस्तार को देखें तो इंडोनेशिया (Indonesia) भी भारत का बहुत करीबी समुद्री पड़ोसी है। ग्रेट निकोबार और इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के बीच की दूरी लगभग 160 किलोमीटर ही है और दोनों को ‘ग्रेट चैनल’ अलग करता है। इसी वजह से कई जगह इसे 10वाँ पड़ोसी देश भी गिना जाता है।

एक लाइन में याद रखने वाले तथ्य

परीक्षा में सबसे ज़्यादा “सबसे बड़ा” और “सबसे छोटा” वाले सवाल पूछे जाते हैं। इन्हें अलग से याद कर लीजिए, क्योंकि इनमें विकल्प देखकर उलझ जाना बहुत आसान होता है।

प्रश्नउत्तर
क्षेत्रफल में भारत का सबसे बड़ा पड़ोसी देशचीन (लगभग 95.97 लाख वर्ग किमी)
क्षेत्रफल में भारत का सबसे छोटा पड़ोसी देशमालदीव (लगभग 300 वर्ग किमी) — यह एशिया का भी सबसे छोटा देश है
स्थलीय पड़ोसियों में क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे छोटाभूटान (लगभग 38,394 वर्ग किमी)
सबसे लंबी स्थलीय सीमा किस देश सेबांग्लादेश (4,096.7 किमी)
सबसे छोटी स्थलीय सीमा किस देश सेअफगानिस्तान (106 किमी)
भारत की कुल स्थलीय सीमा15,106.7 किलोमीटर
भारत की कुल तटीय सीमा (नया मापन, 2023-24)11,098.81 किलोमीटर
अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े भारतीय राज्य16 राज्य और 2 केंद्र शासित प्रदेश

इस आर्टिकल में हम क्या-क्या पढ़ेंगे?

इस विस्तृत लेख में हम एक तार्किक क्रम में निम्नलिखित विषयों का गहराई से अध्ययन करेंगे:

  • भारत की भौगोलिक स्थिति: दक्षिण एशिया में भारत की रणनीतिक स्थिति और ‘भारतीय उपमहाद्वीप’ (Indian Subcontinent) की सटीक परिभाषा।
  • स्थलीय पड़ोसी देश: सभी 7 स्थलीय पड़ोसी देशों के साथ सीमा की लंबाई, जुड़े हुए भारतीय राज्य, सुरक्षा बल और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखाएं (मैकमोहन, रेडक्लिफ, डूरंड)।
  • प्रमुख अंतरराष्ट्रीय विवाद: तीस्ता नदी विवाद, कालापानी, गलवान घाटी, डोकलाम, सर क्रीक और सिंधु जल संधि की मौजूदा स्थिति।
  • जलीय पड़ोसी देश: समुद्री पड़ोसी और उन्हें अलग करने वाली जलसंधियाँ (Straits) तथा महत्वपूर्ण चैनल्स (8°, 9°, 10° चैनल)।
  • समुद्री संधि (UNCLOS, 1982): संयुक्त राष्ट्र की समुद्री संधि के अनुसार भारत के जलीय अधिकारों (EEZ, प्रादेशिक जल आदि) का पूरा विश्लेषण।

भारत के पड़ोसी देशों की राजधानी और मुद्राएं (Capitals and Currencies)

नीचे भारत के पड़ोसी देश और उनकी राजधानी (Bharat ke padosi desh aur unki rajdhani) की पूरी लिस्ट दी गई है, ताकि आप एक ही जगह सब कुछ रिवाइज कर सकें। SSC, पुलिस और UPSSSC जैसी परीक्षाओं में राजधानी, मुद्रा और सीमा की लंबाई से जुड़े सीधे सवाल या ‘मिलान’ वाले प्रश्न अक्सर आते हैं, इसलिए यह टेबल सबसे ज़्यादा काम की है।

क्र. सं.देश का नामराजधानीमुद्राभारत के साथ सीमा
1बांग्लादेशढाकाटका4,096.7 किमी (सबसे लंबी)
2चीनबीजिंगरेनमिनबी / युआन (RMB)3,488 किमी
3पाकिस्तानइस्लामाबादपाकिस्तानी रुपया3,323 किमी
4नेपालकाठमांडूनेपाली रुपया1,751 किमी
5म्यांमारनेपीताव (Naypyidaw)क्यात1,643 किमी
6भूटानथिम्पूनगुलट्रम699 किमी
7अफगानिस्तानकाबुलअफगानी106 किमी (सबसे छोटी)
8श्रीलंकाश्री जयवर्धनेपुरा कोट्टेश्रीलंकाई रुपयामुख्य जलीय सीमा (पाक जलसंधि)
9मालदीवमालेमालदीवियन रुफिया (Rufiyaa)मुख्य जलीय सीमा (8° चैनल)
10*इंडोनेशिया (कभी-कभी गिना जाने वाला)जकार्ताइंडोनेशियाई रुपियासमुद्री सीमा (ग्रेट चैनल)

दो बातों का ध्यान रखिए। पहली, मालदीव की मुद्रा रुफिया है, रुपया नहीं — विकल्प चुनते समय यहीं गलती होती है। दूसरी, इंडोनेशिया को आधिकारिक तौर पर 9 मुख्य पड़ोसियों में नहीं गिना जाता, इसलिए अगर प्रश्न में “भारत के पड़ोसी देशों की संख्या” पूछी जाए तो उत्तर 9 ही होगा।

भारत के पड़ोसी देशों के नाम याद रखने की Trick

परीक्षा में स्थलीय पड़ोसी देशों को सीमा की लंबाई के घटते क्रम में लगाने वाला सवाल बार-बार आता है। इसे याद रखने का सबसे आसान तरीका एक छोटा सा वाक्य है — “बचपन में MBA किया”। इस वाक्य का हर अक्षर एक देश का पहला अक्षर है और क्रम अपने आप सही बैठ जाता है।

ट्रिक: “बचपन में MBA किया”

ब – बांग्लादेश (4,096.7 किमी, सबसे लंबी)  →  च – चीन (3,488 किमी)  →  प – पाकिस्तान (3,323 किमी)  →  न – नेपाल (1,751 किमी)  →  M – म्यांमार (1,643 किमी)  →  B – भूटान (699 किमी)  →  A – अफगानिस्तान (106 किमी, सबसे छोटी)

ध्यान रखें, यह ट्रिक केवल 7 स्थलीय पड़ोसियों के लिए है। जलीय पड़ोसी श्रीलंका और मालदीव को अलग से याद रखें — दोनों का कोई “सीमा की लंबाई” वाला आँकड़ा नहीं होता, इसलिए वे इस क्रम में शामिल नहीं किए जाते।

भारत की भौगोलिक स्थिति, दक्षिण एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप

विश्व मानचित्र पर भारत की स्थिति बहुत खास है। पड़ोसी देशों को ठीक से समझने से पहले यह जान लेना ज़रूरी है कि भारत खुद कहाँ स्थित है, दक्षिण एशिया में उसकी जगह क्या है, और उसे ‘उपमहाद्वीप’ क्यों कहा जाता है।

भारत की भौगोलिक स्थिति

भारत पूरी तरह भूमध्य रेखा के उत्तर में, यानी उत्तरी गोलार्ध में है, और ग्रीनविच रेखा के पूर्व में, यानी पूर्वी गोलार्ध में है।

मुख्य भूमि का अक्षांशीय विस्तार 8°4′ उत्तरी अक्षांश (कन्याकुमारी, तमिलनाडु) से लेकर 37°6′ उत्तरी अक्षांश (इंदिरा कोल, लद्दाख) तक है। अगर द्वीपों को भी शामिल कर लें तो भारत का सबसे दक्षिणी बिंदु ‘इंदिरा पॉइंट’ है, जो अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में 6°45′ उत्तरी अक्षांश पर पड़ता है। देशांतरीय विस्तार 68°7′ पूर्वी देशांतर (गुहार मोती, गुजरात) से 97°25′ पूर्वी देशांतर (किबिथू, अरुणाचल प्रदेश) तक है।

कर्क रेखा (23°30′ उत्तरी अक्षांश) भारत के लगभग बीच से गुजरती है और देश को उष्ण कटिबंधीय तथा उपोष्ण कटिबंधीय दो जलवायु भागों में बाँटती है। यह रेखा कुल 8 राज्यों से होकर जाती है — गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और मिजोरम।

भारत का मानक समय 82°30′ पूर्वी देशांतर से लिया जाता है। यह देशांतर रेखा उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर जिले से होकर गुजरती है। भारतीय मानक समय (IST) ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) से 5 घंटे 30 मिनट आगे है।

दक्षिण एशिया में भारत

एशिया महाद्वीप के दक्षिणी हिस्से को ‘दक्षिण एशिया’ कहते हैं। भौगोलिक, जनसंख्या और रणनीतिक — तीनों दृष्टि से भारत इस क्षेत्र के बीचोंबीच स्थित सबसे बड़ा देश है। दक्षिण एशिया में कुल 8 देश आते हैं — भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मालदीव और अफगानिस्तान। यही 8 देश मिलकर ‘सार्क’ (SAARC) संगठन बनाते हैं।

हिंद महासागर में सबसे लंबी तटरेखा भारत की ही है, और इसी विशाल तटरेखा तथा ऐतिहासिक महत्व के कारण इस महासागर का नाम भारत के नाम पर ‘इंडियन ओशियन’ पड़ा। भारत की यह केंद्रीय स्थिति हिंद महासागर के पार जाने वाले व्यापारिक मार्गों को सीधे प्रभावित करती है, जो यूरोप और पूर्वी एशिया के बीच व्यापार का सबसे बड़ा रास्ता है। यही बात भारत को भू-राजनीतिक रूप से मज़बूत बनाती है।

भारतीय उपमहाद्वीप

परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है कि भारत को ‘उपमहाद्वीप’ क्यों कहते हैं। उपमहाद्वीप (Subcontinent) किसी महाद्वीप का वह बड़ा हिस्सा होता है, जो अपनी भौगोलिक बनावट, संस्कृति और जलवायु की वजह से उस महाद्वीप के बाकी हिस्से से अलग पहचान रखता हो। भारतीय भूभाग चारों तरफ से ऐसी प्राकृतिक दीवारों से घिरा है कि वह शेष एशिया से लगभग कटा हुआ दिखाई देता है।

भारतीय उपमहाद्वीप का मानचित्र जिसमें भारत, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और इसकी प्राकृतिक सीमाएं (हिमालय, हिंद महासागर) दिखाई गई हैं।
मानचित्र: भारतीय उपमहाद्वीप और उसकी अभेद्य प्राकृतिक सीमाएँ

उत्तर में दुनिया की सबसे ऊँची पर्वत श्रृंखला हिमालय इसे तिब्बत और चीन से अलग करती है और ठंडी साइबेरियन हवाओं से बचाती है। उत्तर-पश्चिम में हिंदूकुश और सुलेमान पर्वत श्रेणियाँ इसे मध्य एशिया से काटती हैं। पूर्व में पटकाई, नागा, मणिपुर और मिज़ो पहाड़ियाँ इसे म्यांमार यानी दक्षिण-पूर्व एशिया से अलग करती हैं। और दक्षिण में हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर इसे एक विशिष्ट प्रायद्वीपीय आकार देते हैं।

इसी प्राकृतिक घेरेबंदी के कारण इस पूरे क्षेत्र को ‘भारतीय उपमहाद्वीप’ कहा जाता है। मुख्य रूप से इसमें 5 देश गिने जाते हैं — भारत, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान और बांग्लादेश।

महत्वपूर्ण तथ्य: कई भू-राजनीतिक परिभाषाओं में द्वीप राष्ट्र श्रीलंका और मालदीव को भी भारतीय उपमहाद्वीप का हिस्सा मान लिया जाता है। लेकिन मुख्य स्थलीय उपमहाद्वीप ऊपर बताए गए 5 देशों से ही बनता है।

भारत की कुल स्थलीय सीमा का विस्तृत विश्लेषण

भारत की कुल स्थलीय सीमा 15,106.7 किलोमीटर लंबी है और यह कुल 7 देशों से लगती है। यह सीमा उत्तर-पश्चिम, उत्तर और पूर्वी हिस्से में फैली है, और इसमें रेगिस्तान, बर्फीले पहाड़, घने जंगल तथा नदियों वाले मैदान — सब तरह का इलाका आता है।

भारत का मानचित्र जिसमें 7 पड़ोसी देशों (बांग्लादेश, चीन, पाकिस्तान, नेपाल, म्यांमार, भूटान, अफगानिस्तान) के साथ लगने वाली 15,106 किलोमीटर लंबी स्थलीय सीमा दर्शाई गई है।
भारत के 7 पड़ोसी देश और उनके साथ साझा होने वाली स्थलीय सीमा की लंबाई।

सीमा की लंबाई के घटते क्रम में सबसे पहले बांग्लादेश (4,096.7 किमी) आता है, जिससे भारत की सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमा लगती है और जो पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा तथा मिजोरम से होकर गुजरती है। इसके बाद चीन (3,488 किमी) है, जिसकी सीमा लद्दाख से लेकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश तक फैली है।

तीसरे स्थान पर पाकिस्तान (3,323 किमी) है, जिसकी सीमा गुजरात, राजस्थान, पंजाब, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से जुड़ती है। फिर नेपाल (1,751 किमी) आता है, जिसके साथ भारत की खुली सीमा है और जो उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल तथा सिक्किम को छूती है।

सुदूर पूर्व में म्यांमार (1,643 किमी) की सीमा अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम से लगती है। भूटान (699 किमी) के साथ भारत की सबसे शांत सीमा है, जो सिक्किम, पश्चिम बंगाल, असम और अरुणाचल प्रदेश से जुड़ती है। सबसे अंत में अफगानिस्तान (106 किमी) है, जो भारत की सबसे छोटी अंतरराष्ट्रीय सीमा है और वाखान कॉरिडोर के पास पड़ती है।

अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े भारतीय राज्य

परीक्षा में यह भी पूछा जाता है कि भारत के कितने राज्य पड़ोसी देशों की सीमा से जुड़ते हैं। इसका उत्तर है — 16 राज्य और 2 केंद्र शासित प्रदेश। नीचे दी गई टेबल से यह एक नज़र में साफ हो जाएगा।

राज्य / केंद्र शासित प्रदेशकिन पड़ोसी देशों से सीमा लगती है
गुजरातपाकिस्तान
राजस्थानपाकिस्तान
पंजाबपाकिस्तान
जम्मू-कश्मीर (केंद्र शासित प्रदेश)पाकिस्तान
लद्दाख (केंद्र शासित प्रदेश)पाकिस्तान, चीन, अफगानिस्तान
हिमाचल प्रदेशचीन
उत्तराखंडचीन, नेपाल
उत्तर प्रदेशनेपाल
बिहारनेपाल
पश्चिम बंगालनेपाल, भूटान, बांग्लादेश
सिक्किमनेपाल, चीन, भूटान
असमभूटान, बांग्लादेश
अरुणाचल प्रदेशचीन, भूटान, म्यांमार
नागालैंडम्यांमार
मणिपुरम्यांमार
मिजोरमम्यांमार, बांग्लादेश
त्रिपुराबांग्लादेश
मेघालयबांग्लादेश

इस टेबल से तीन बातें निकलती हैं, जो सीधे सवाल बन सकती हैं। पश्चिम बंगाल, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश — ये तीनों राज्य तीन-तीन पड़ोसी देशों से सीमा साझा करते हैं। लद्दाख भी तीन देशों (पाकिस्तान, चीन और अफगानिस्तान) को छूता है, पर वह राज्य नहीं, केंद्र शासित प्रदेश है। और सबसे ज़्यादा राज्यों (पाँच-पाँच) की सीमा बांग्लादेश तथा नेपाल से लगती है।

दिशा के आधार पर भारत के पड़ोसी देश

नक्शे पर याद रखने के लिए दिशा के हिसाब से देखना सबसे आसान तरीका है। भारत के उत्तर-पश्चिम में पाकिस्तान और अफगानिस्तान हैं। उत्तर में चीन, नेपाल और भूटान हैं, जो हिमालय की दीवार के उस पार पड़ते हैं। पूर्व में बांग्लादेश और म्यांमार हैं। दक्षिण में समुद्र के पार श्रीलंका है, और दक्षिण-पश्चिम में हिंद महासागर के भीतर मालदीव स्थित है।

भारत की कुल तटीय सीमा (Coastline): नए आँकड़ों (2023-24) के साथ

भारत की तटीय सीमा के मापन में हाल ही में बड़ा बदलाव हुआ है, और करेंट अफेयर्स तथा स्टैटिक जीके दोनों के लिहाज़ से यह बहुत ज़रूरी अपडेट है। अगर आप अब तक तटीय सीमा 7,516.6 किलोमीटर पढ़ते आ रहे हैं, तो अब यह आँकड़ा बदल चुका है। नए मापन के अनुसार भारत की कुल तटीय सीमा बढ़कर 11,098.81 किलोमीटर हो गई है, यानी लगभग 47.6% की वृद्धि।

पुरानी तटरेखा का मापन 1970 में हुआ था और उस समय की तकनीक में तटों को लगभग सीधा मानकर नापा जाता था। वर्ष 2023-24 में नई और ज़्यादा सटीक तकनीक अपनाई गई, जिसमें डेल्टा, लैगून झीलें, ज्वारनदमुख, खाड़ियों के मुहाने और टेढ़ी-मेढ़ी तटरेखाओं को भी बारीकी से शामिल किया गया। लंबाई इसलिए बढ़ी है कि तट पहले से लंबा हो गया हो — ऐसा नहीं है; बस मापने का तरीका पहले से ज़्यादा बारीक हो गया है।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तटीय सीमा की नई स्थिति (9 तटीय राज्य)

गुजरात पहले भी सबसे लंबी तटीय सीमा वाला राज्य था और आज भी है। 1970 में इसकी तटरेखा 1,214 किमी मानी जाती थी, जो नए मापन में लगभग दोगुनी होकर 2,340 किलोमीटर हो गई है।

दूसरे और तीसरे स्थान में बड़ा उलटफेर हुआ है। पहले दूसरे नंबर पर आंध्र प्रदेश था, लेकिन अब तमिलनाडु (1,068 किमी) दूसरे स्थान पर आ गया है और आंध्र प्रदेश (1,053 किमी) तीसरे स्थान पर खिसक गया है।

सबसे चौंकाने वाले आँकड़े पश्चिम बंगाल के हैं। सुंदरबन डेल्टा की उलझी हुई संरचना को शामिल करने से यहाँ सबसे ज़्यादा 357% की वृद्धि दर्ज हुई है, यानी 157 किमी से बढ़कर 721 किमी। दूसरी तरफ गोवा अब भी सबसे छोटी तटीय सीमा वाला राज्य है (101 किमी से बढ़कर 193 किमी), और उसके बाद कर्नाटक (343 किमी) का स्थान है।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलाकर देखें तो सबसे लंबी तटीय सीमा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की है, जो 1,962 किमी से बढ़कर 3,083 किमी हो गई है। सबसे छोटी तटीय सीमा पुदुचेरी की है, केवल 42 किलोमीटर।

भारत के 7 स्थलीय पड़ोसी देश: सीमाएं, विवाद और महत्वपूर्ण तथ्य

UPSC, राज्य PCS और SSC जैसी परीक्षाओं में पड़ोसी देशों की सीमाओं, अंतरराष्ट्रीय विवादों और संधियों से गहराई तक सवाल पूछे जाते हैं। अब हम एक-एक करके सातों स्थलीय पड़ोसी देशों को विस्तार से देखेंगे।

भारत का पड़ोसी देश बांग्लादेश — भारत के साथ सबसे लंबी सीमा

भारत के पूर्व में स्थित बांग्लादेश रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण पड़ोसी है। 1947 के विभाजन के समय यह पाकिस्तान का हिस्सा था और इसे ‘पूर्वी पाकिस्तान’ कहा जाता था। 26 मार्च 1971 को शेख मुजीब-उर-रहमान के नेतृत्व में इसने खुद को स्वतंत्र घोषित किया, और भारतीय सेना तथा बांग्लादेश की ‘मुक्ति वाहिनी’ के साझा प्रयास से 16 दिसंबर 1971 को यह पूरी तरह स्वतंत्र राष्ट्र बन गया। नदियों की भरमार के कारण इसे ‘नदियों का देश’ भी कहा जाता है।

बांग्लादेश: एक नज़र में

राजधानीढाका (इसे ‘मस्जिदों का शहर’ भी कहा जाता है)
मुद्राटका
संसद का नामजातीय संसद (Jatiya Sangsad)
राजभाषाबंगाली
राष्ट्रगान‘आमार सोनार बांग्ला’ (रचयिता: रवींद्रनाथ टैगोर)
राष्ट्रीय पशुरॉयल बंगाल टाइगर
राष्ट्रीय पक्षीमैगपाई रॉबिन (स्थानीय नाम — डॉयल)
राष्ट्रीय पुष्पवाटर लिली (शापला)
राष्ट्रीय वृक्ष व फलवृक्ष: आम का पेड़ | फल: कटहल
राष्ट्रीय खेलकबड्डी (स्थानीय नाम — हा-डू-डू)
सबसे लंबी नदीपद्मा (भारत की गंगा नदी को ही बांग्लादेश में पद्मा कहा जाता है)
सबसे ऊंची चोटीसाका हाफोंग (केओकराडोंग को भी कई जगह सबसे ऊँचा बताया जाता है)
भारत और बांग्लादेश की सबसे लंबी 4096.7 किमी स्थलीय सीमा, रेडक्लिफ रेखा, तीस्ता नदी विवाद और प्रमुख संधियों (LBA 2015) को दर्शाने वाला विस्तृत माइंड मैप।
बांग्लादेश: 4,096.7 किमी की सबसे लंबी सीमा, जल समझौते और प्रमुख युद्धाभ्यासों का क्विक रिवीजन।

भारत-बांग्लादेश सीमा और सुरक्षा

भारत अपनी सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमा बांग्लादेश के साथ ही साझा करता है, जिसकी कुल लंबाई 4,096.7 किलोमीटर है। यह सीमा नदियों, अंतःक्षेत्रों और बाड़ वाले हिस्सों से होकर गुजरती है, इसलिए इसे दुनिया की सबसे उलझी हुई सीमाओं में गिना जाता है।

बांग्लादेश की सीमा भारत के 5 राज्यों को छूती है — पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा। इनमें सबसे लंबी सीमा पश्चिम बंगाल की लगती है। चूँकि बांग्लादेश पहले पाकिस्तान का ही हिस्सा था, इसलिए भारत और बांग्लादेश के बीच की सीमा को भी ‘रेडक्लिफ रेखा’ कहा जाता है। सीमा पर जहाँ असली अंतरराष्ट्रीय रेखा पड़ती है, उसे ‘शून्य रेखा’ (Zero Line) कहते हैं — यह किसी एक राज्य का नाम नहीं, बल्कि पूरी सीमा पर इस्तेमाल होने वाला आम शब्द है। ध्यान रखने वाली बात यह है कि भारत का त्रिपुरा राज्य तीन तरफ से बांग्लादेश से घिरा हुआ है। इस संवेदनशील सीमा की सुरक्षा BSF (सीमा सुरक्षा बल) के जिम्मे है।

प्रमुख समझौते, परिवहन और युद्धाभ्यास

भूमि सीमा समझौता (LBA, 2015) के तहत भारत ने अपने 100वें संविधान संशोधन के जरिए दशकों पुराना सीमा विवाद सुलझाया। इसके अंतर्गत भारत ने 111 एन्क्लेव बांग्लादेश को सौंपे और बांग्लादेश ने 51 एन्क्लेव भारत को दिए।

क्या होता है एन्क्लेव (अंतःक्षेत्र)?
एन्क्लेव किसी देश का वह भू-भाग होता है जो अपनी सभी सीमाओं से किसी एक ही दूसरे देश की ज़मीन से पूरी तरह घिरा हो। आसान भाषा में — दूसरे देश के बीच में फँसा हुआ ज़मीन का टुकड़ा।
भारत-बांग्लादेश के संदर्भ में इन्हें स्थानीय भाषा में ‘छीटमहल’ कहा जाता था। ये ऐसे क्षेत्र थे जहाँ भारत की ज़मीन बांग्लादेश के अंदर थी और बांग्लादेश की ज़मीन भारत के अंदर।
अंतरराष्ट्रीय उदाहरण: लेसोथो एक ऐसा स्वतंत्र देश है जो चारों तरफ से केवल दक्षिण अफ्रीका से घिरा है। इसी तरह वेटिकन सिटी पूरी तरह इटली से घिरा हुआ है।

गंगा जल समझौता (1996) पश्चिम बंगाल के फरक्का बैराज पर गंगा के पानी के बँटवारे को लेकर हुआ था और यह 30 साल के लिए था। यही बात करेंट अफेयर्स के लिहाज़ से सबसे अहम है — यह संधि दिसंबर 2026 में समाप्त हो रही है। भारत ने स्पष्ट किया है कि इसके नवीनीकरण पर बातचीत मौजूदा द्विपक्षीय तंत्रों, खासकर संयुक्त नदी आयोग (Joint Rivers Commission) के माध्यम से होगी। भारत और बांग्लादेश के बीच कुल 54 नदियाँ साझा हैं, इसलिए यह विषय आने वाली परीक्षाओं में आ सकता है।

संपर्क बढ़ाने के लिए त्रिपुरा और बांग्लादेश के बीच फेनी नदी पर लगभग 1.9 किलोमीटर लंबा ‘मैत्री सेतु’ बनाया गया है। रेल संपर्क में मैत्री एक्सप्रेस (2008, कोलकाता से ढाका), बंधन एक्सप्रेस (2017, कोलकाता से खुलना) और मिताली एक्सप्रेस (2022, न्यू जलपाईगुड़ी से ढाका) प्रमुख हैं। सैन्य सहयोग में दोनों देशों की सेनाओं के बीच ‘सम्प्रीति’ और नौसेनाओं के बीच ‘बोंगोसागर’ अभ्यास होते हैं।

ध्यान दें: अगस्त 2024 में बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद रेल सेवाओं और कुछ द्विपक्षीय गतिविधियों की स्थिति समय-समय पर बदलती रही है। परीक्षा से पहले इनकी ताज़ा स्थिति एक बार जाँच लेना बेहतर रहेगा।

प्रमुख विवाद

तीस्ता नदी जल विवाद दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा लंबित मुद्दा है। तीस्ता सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है, और इसके जल बँटवारे पर अब तक कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका है।

तीन बीघा कॉरिडोर पश्चिम बंगाल के कूचबिहार में स्थित एक पट्टी है, जिसे 1992 में भारत ने बांग्लादेश को लीज पर दिया था ताकि बांग्लादेश अपने दहाग्राम-अंगरपोता क्षेत्र तक पहुँच सके। इसके अलावा अवैध प्रवासन एक पुरानी सुरक्षा चुनौती रही है, खासकर असम और पूर्वोत्तर के लिए, और इसी संदर्भ में असम में NRC (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) जैसी प्रक्रिया अपनाई गई।

सांस्कृतिक और पर्यटन स्थल

सांस्कृतिक रूप से दोनों देश बहुत करीब हैं। बांग्लादेश में ढाकेश्वरी मंदिर (राष्ट्रीय मंदिर) और चटगांव का चंद्रनाथ मंदिर प्रमुख हिंदू धार्मिक स्थल हैं। पर्यटन की दृष्टि से ढाका का अहसान मंजिल (गुलाबी महल) और कॉक्स बाजार मशहूर हैं — कॉक्स बाजार दुनिया के सबसे लंबे प्राकृतिक समुद्री तटों में गिना जाता है। भारत और बांग्लादेश मिलकर दुनिया के सबसे बड़े मैंग्रोव वन ‘सुंदरबन डेल्टा’ को भी साझा करते हैं।

भारत का पड़ोसी देश चीन — क्षेत्रफल में सबसे बड़ा और दूसरी सबसे लंबी सीमा

भारत के उत्तर और उत्तर-पूर्व में स्थित चीन क्षेत्रफल तथा सामरिक दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा पड़ोसी है। 1 अक्टूबर 1949 को यह ‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ (PRC) के रूप में स्थापित हुआ। भारत और चीन के बीच हज़ारों साल पुराने सांस्कृतिक संबंध रहे हैं, लेकिन आज सीमा को लेकर दोनों देशों में कई गंभीर विवाद हैं।

चीन: एक नज़र में

राजधानीबीजिंग
मुद्रारेनमिनबी (Renminbi), जिसकी इकाई युआन (Yuan) कहलाती है
संसद का नामनेशनल पीपल्स कांग्रेस
राजभाषामंदारिन — दुनिया में सबसे ज़्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में से एक
राष्ट्रीय पशुविशाल पांडा (चीनी ड्रैगन को अनौपचारिक राष्ट्रीय प्रतीक माना जाता है)
राष्ट्रीय पक्षीलाल मुकुट वाला सारस (अनौपचारिक)
राष्ट्रीय पुष्पपियोनी (अनौपचारिक)
राष्ट्रीय वृक्षजिंकगो (अनौपचारिक)
राष्ट्रीय खेलटेबल टेनिस (सबसे लोकप्रिय खेल, अनौपचारिक रूप से राष्ट्रीय खेल)
सबसे लंबी नदीयांग्त्ज़ी नदी — यह पूरे एशिया की भी सबसे लंबी नदी है
सबसे ऊंची चोटीचोमोलुंग्मा — यह माउंट एवरेस्ट का ही तिब्बती नाम है
भारत और चीन सीमा (मैकमोहन रेखा, LAC), गलवान घाटी विवाद, अक्साई चीन और पंचशील समझौते को दर्शाने वाला विस्तृत माइंड मैप।
चीन: 3,488 किमी सीमा, मैकमोहन रेखा, प्रमुख विवाद और भारत-चीन की कूटनीतिक नीतियों का क्विक रिवीजन।

भारत-चीन सीमा और सुरक्षा

भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है, जो बांग्लादेश के बाद भारत की दूसरी सबसे लंबी सीमा है। यह सीमा 4 राज्यों — हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश — तथा 1 केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख से लगती है। परीक्षा के लिए यह भी याद रखें कि भारत-चीन सीमा को तीन हिस्सों में बाँटा जाता है: पश्चिमी सेक्टर (लद्दाख), मध्य सेक्टर (हिमाचल और उत्तराखंड) तथा पूर्वी सेक्टर (सिक्किम और अरुणाचल)।

मैकमोहन रेखा 1914 के शिमला सम्मेलन में सर हेनरी मैकमोहन द्वारा ब्रिटिश भारत और तिब्बत के बीच तय की गई थी। यही रेखा आज भारत (मुख्यतः अरुणाचल प्रदेश) और चीन के बीच की सीमा मानी जाती है, लेकिन चीन इसे नहीं मानता क्योंकि उसका कहना है कि तिब्बत को स्वतंत्र रूप से ऐसी संधि करने का अधिकार ही नहीं था। दूसरी ओर, LAC (वास्तविक नियंत्रण रेखा) वह रेखा है जहाँ 1962 के युद्ध के बाद दोनों सेनाएँ वास्तव में मौजूद हैं। यह कोई आपसी सहमति से खींची गई पक्की सीमा नहीं है, इसीलिए यहाँ बार-बार टकराव होता है। इस दुर्गम बर्फीली सीमा की सुरक्षा ITBP (भारत-तिब्बत सीमा पुलिस) के जिम्मे है।

प्रमुख समझौते, नीतियां और युद्धाभ्यास

पंचशील समझौता (1954) 29 अप्रैल 1954 को भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और चीन के प्रधानमंत्री चाऊ एन लाई के बीच हुआ था, जिसमें शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पाँच सिद्धांत तय किए गए।

‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ यानी ‘मोतियों की माला’ चीन की वह रणनीति है जिसके तहत वह हिंद महासागर में भारत के चारों ओर बंदरगाह और सैन्य ठिकाने विकसित कर रहा है, जैसे श्रीलंका में हंबनटोटा और पाकिस्तान में ग्वादर। इसके जवाब में भारत ने ‘नेकलेस ऑफ डायमंड्स’ नीति अपनाई है, जिसके तहत वह चाबहार (ईरान), चांगी (सिंगापुर) और डुक्म (ओमान) जैसे बंदरगाहों तक अपनी पहुँच बना रहा है। दोनों देशों की सेनाओं के बीच ‘हैंड-इन-हैंड’ नामक अभ्यास होता रहा है, हालाँकि सीमा तनाव के कारण यह कई बार स्थगित रहा।

अक्टूबर 2024 में दोनों देशों के बीच पूर्वी लद्दाख के देपसांग और डेमचोक क्षेत्रों में गश्त को लेकर समझौता हुआ, जिसके बाद 2020 से चला आ रहा गतिरोध काफी हद तक कम हुआ।

प्रमुख विवाद और संघर्ष

1962 का युद्ध और अक्साई चीन: 1962 के युद्ध में चीन ने लद्दाख के एक बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया, जिसे ‘अक्साई चीन’ कहा जाता है।

अरुणाचल प्रदेश विवाद: चीन पूरे अरुणाचल प्रदेश पर दावा करता है और उसे ‘दक्षिण तिब्बत’ बताता है। वह यहाँ के निवासियों को ‘नत्थी वीजा’ (Stapled Visa) जारी करके और इलाकों के नाम बदलकर विवाद पैदा करता रहता है।

डोकलाम विवाद (2017): डोकलाम एक पठार है जो भारत, चीन और भूटान के त्रि-संगम के पास पड़ता है। इसके उत्तर में तिब्बत (चीन) की चुंबी घाटी है। 2017 में चीनी सेना यहाँ सड़क बना रही थी, जिस पर भारतीय सेना के साथ लंबा गतिरोध हुआ, क्योंकि यह क्षेत्र भारत के ‘सिलीगुड़ी कॉरिडोर’ (चिकन नेक) के बहुत पास है।

गलवान घाटी झड़प (2020): अक्साई चीन क्षेत्र में बहने वाली गलवान नदी (जो श्योक नदी की सहायक है) की घाटी में जून 2020 में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें भारत के 20 जवान शहीद हुए।

पैंगोंग त्सो झील विवाद: लद्दाख में लगभग 14,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित इस खारे पानी की झील का लगभग एक-तिहाई हिस्सा भारत के नियंत्रण में और बाकी चीन के नियंत्रण में है। यहाँ फिंगर-4 से फिंगर-8 के बीच सीमांकन को लेकर तनाव रहा है।

ब्रह्मपुत्र नदी और मेडोग बाँध: चीन ब्रह्मपुत्र नदी (तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो) पर जांग्मू जैसे कई बाँध पहले ही बना चुका है। सबसे बड़ी चिंता मेडोग (Medog) जलविद्युत परियोजना है, जिसका निर्माण जुलाई 2025 में शुरू हुआ। यह नदी के उस ‘ग्रेट बेंड’ पर है जहाँ से नदी मुड़कर भारत में सियांग बनकर प्रवेश करती है। लगभग 60 गीगावाट प्रस्तावित क्षमता के साथ यह दुनिया की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना बन सकती है और इसके 2030 के दशक में पूरा होने की उम्मीद है। भारत की चिंता दो तरफा है — पानी रोके जाने पर अरुणाचल तथा असम में कमी, और अचानक पानी छोड़े जाने पर बाढ़ का खतरा। भारत ने चीन से नदी संबंधी आँकड़े साझा करने और विशेषज्ञ स्तरीय तंत्र (Expert Level Mechanism) की बैठक जल्द बुलाने की माँग की है, साथ ही अरुणाचल में सियांग परियोजना पर भी काम कर रहा है।

OBOR / BRI: चीन की इस वैश्विक बुनियादी ढाँचा परियोजना का भारत विरोध करता है, क्योंकि इसका एक मुख्य हिस्सा ‘CPEC’ (चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) भारत के संप्रभु क्षेत्र पाक-अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरता है।

प्रमुख सांस्कृतिक और पर्यटन स्थल

चीन अपनी प्राचीन धरोहरों के लिए विश्व-विख्यात है। ‘चीन की महान दीवार’ यहाँ की सबसे मशहूर संरचना है और इसे दुनिया के नए सात अजूबों में गिना जाता है। इसके अलावा शियान की ‘टेराकोटा आर्मी’ (मिट्टी के हज़ारों सैनिकों की आदमकद मूर्तियाँ), बीजिंग का ‘फॉरबिडन सिटी’ और ‘स्वर्ग का मंदिर’ प्रमुख पर्यटन स्थल हैं।

भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान — रेडक्लिफ रेखा और सबसे संवेदनशील सीमा

पाकिस्तान भारत के पश्चिम और उत्तर-पश्चिम में स्थित है। 14 अगस्त 1947 को भारत के विभाजन के बाद यह एक अलग राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में आया। सामरिक दृष्टि से यह दक्षिण एशिया का एक प्रमुख देश है और इससे जुड़े भौगोलिक तथा राजनीतिक तथ्य परीक्षाओं में लगातार पूछे जाते हैं।

पाकिस्तान: एक नज़र में

राजधानीइस्लामाबाद
मुद्रापाकिस्तानी रुपया
संसद का नाममजलिस-ए-शूरा — इसके दो सदन हैं: नेशनल असेंबली (निचला) और सीनेट (ऊपरी)
राष्ट्रभाषाउर्दू (अंग्रेजी भी आधिकारिक भाषा है)
राष्ट्रीय गानकौमी तराना (रचयिता: हाफिज जालंधरी)
राष्ट्रीय पशुमारखोर
राष्ट्रीय पक्षीचकोर
राष्ट्रीय पुष्पचमेली
राष्ट्रीय वृक्षदेवदार
राष्ट्रीय फलआम (गर्मियों का) और अमरूद (सर्दियों का) — यह वर्गीकरण अनौपचारिक है
राष्ट्रीय खेलफील्ड हॉकी
सबसे लंबी नदीसिंधु नदी (पाकिस्तान की राष्ट्रीय नदी)
सबसे ऊंची चोटीतिरिच मीर (नीचे दी गई व्याख्या ज़रूर पढ़ें)

यहाँ भ्रम क्यों होता है: कई किताबों में पाकिस्तान की सबसे ऊँची चोटी K-2 (गॉडविन ऑस्टिन) लिखी मिलती है। लेकिन K-2 गिलगित-बाल्टिस्तान में है, जो पाक-अधिकृत कश्मीर का हिस्सा है और कानूनी रूप से भारत का क्षेत्र है। इसीलिए भारत के आधिकारिक दृष्टिकोण से पाकिस्तान की अपनी सबसे ऊँची चोटी तिरिच मीर (हिंदूकुश श्रेणी) मानी जाती है। प्रश्न में दिए गए विकल्प देखकर उत्तर तय करें।

भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान का विस्तृत माइंड मैप, जिसमें राजधानी, मुद्रा, भारत-पाक सीमा (रेडक्लिफ रेखा) और प्रमुख विवाद (PoK, सर क्रीक) दर्शाए गए हैं।
पाकिस्तान से जुड़े प्रमुख तथ्य, अंतरराष्ट्रीय संधियां और सीमा विवाद एक नज़र में।

भारत-पाकिस्तान सीमा और सुरक्षा

भारत और पाकिस्तान 3,323 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करते हैं, जिसे दुनिया की सबसे अधिक सैन्यीकृत सीमाओं में गिना जाता है। यह सीमा 3 राज्यों (गुजरात, राजस्थान और पंजाब) तथा 2 केंद्र शासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) को छूती है।

दोनों देशों के बीच की अंतरराष्ट्रीय सीमा को ‘रेडक्लिफ रेखा’ कहा जाता है, जिसका निर्धारण 17 अगस्त 1947 को सर सिरिल रेडक्लिफ ने किया था। कश्मीर में दोनों सेनाओं के बीच की रेखा को LoC (नियंत्रण रेखा) कहते हैं, जो 1972 के शिमला समझौते के बाद तय हुई। इसके आगे सियाचिन क्षेत्र में जो अनिर्धारित हिस्सा है, उसे AGPL (एक्चुअल ग्राउंड पोज़िशन लाइन) कहा जाता है। अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा मुख्य रूप से BSF के पास है, जबकि LoC की ज़िम्मेदारी भारतीय सेना निभाती है।

प्रमुख समझौते और संधियाँ

सिंधु जल समझौता (1960): 19 सितंबर 1960 को विश्व बैंक की मध्यस्थता में जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच यह समझौता हुआ था। इसके तहत पूर्वी नदियों (रावी, व्यास, सतलज) का पानी भारत को और पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) का पानी मुख्यतः पाकिस्तान को दिया गया, जबकि भारत को इन पश्चिमी नदियों पर सीमित उपयोग — जैसे रन-ऑफ-रिवर बिजली परियोजनाएँ — करने का अधिकार मिला।

करेंट अफेयर्स — सिंधु जल संधि की मौजूदा स्थिति: 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के अगले ही दिन, 23 अप्रैल 2025 को भारत ने घोषणा की कि यह संधि तब तक स्थगित (in abeyance) रहेगी जब तक पाकिस्तान सीमा-पार आतंकवाद को समर्थन देना ठोस और स्थायी रूप से बंद नहीं करता। पाकिस्तान इस मुद्दे को स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA, हेग) ले गया। 31 अगस्त 2026 को न्यायालय ने कहा कि संधि अब भी लागू है, लेकिन भारत ने इस फैसले को खारिज करते हुए दोहराया कि उस न्यायालय का गठन ही संधि के प्रावधानों के विरुद्ध है और संधि भारत की दृष्टि से स्थगित ही है। परीक्षा में पूछे जाने पर संधि का मूल प्रावधान (1960, विश्व बैंक, पूर्वी-पश्चिमी नदियों का बँटवारा) और उसकी वर्तमान स्थिति — दोनों याद रखें।

ताशकंद समझौता (1966): 1965 के युद्ध के बाद 10 जनवरी 1966 को लाल बहादुर शास्त्री और अयूब खान के बीच उज़्बेकिस्तान के ताशकंद में यह शांति समझौता हुआ था।

शिमला समझौता (1972): 1971 के युद्ध के बाद 2 जुलाई 1972 को इंदिरा गांधी और जुल्फिकार अली भुट्टो के बीच यह समझौता हुआ, जिसके तहत युद्धविराम रेखा को LoC का वर्तमान स्वरूप दिया गया और यह तय हुआ कि दोनों देश अपने विवाद आपसी बातचीत से सुलझाएँगे।

प्रमुख सीमा विवाद और युद्ध

PoK (पाक अधिकृत कश्मीर): 1947 में पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के एक बड़े हिस्से पर अवैध कब्ज़ा कर लिया था। इसके दो मुख्य प्रशासनिक हिस्से ‘तथाकथित आज़ाद कश्मीर’ और ‘गिलगित-बाल्टिस्तान’ हैं। 1963 में पाकिस्तान ने इसी क्षेत्र की शक्सगाम घाटी का एक हिस्सा गैरकानूनी ढंग से चीन को सौंप दिया था।

सर क्रीक विवाद: गुजरात में कच्छ के रण के पास स्थित लगभग 96 किलोमीटर लंबी इस दलदली जल-पट्टी के सीमांकन को लेकर दोनों देशों में पुराना विवाद है। यह इसलिए महत्वपूर्ण है कि इससे समुद्री सीमा और अनन्य आर्थिक क्षेत्र का हिसाब भी बदल जाता है।

सियाचिन ग्लेशियर: यह दुनिया का सबसे ऊँचा युद्ध क्षेत्र है। 1984 में भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन मेघदूत’ चलाकर इस क्षेत्र पर नियंत्रण सुनिश्चित किया था।

भारत-पाक युद्ध: दोनों देशों के बीच अब तक चार बड़े टकराव हो चुके हैं — 1947-48 (कश्मीर पर कबायली हमला), 1965, 1971 (बांग्लादेश मुक्ति संग्राम) और 1999 (कारगिल युद्ध)।

परिवहन, धार्मिक स्थल और प्रमुख शहर

दोनों देशों के बीच ‘समझौता एक्सप्रेस’ (दिल्ली से लाहौर) और ‘थार एक्सप्रेस’ (जोधपुर से कराची) जैसी ट्रेनें चलती थीं, तथा 1999 में ‘सदा-ए-सरहद’ बस सेवा शुरू हुई थी। तनाव के कारण ये सेवाएँ फिलहाल बंद हैं।

पाकिस्तान में सिखों के अत्यंत पवित्र स्थल ननकाना साहिब और करतारपुर साहिब पंजाब प्रांत में स्थित हैं। हिंदू धार्मिक स्थलों में हिंगलाज माता मंदिर बलूचिस्तान में, कटासराज शिव मंदिर पंजाब प्रांत के चकवाल जिले में, और वरुण देव मंदिर सिंध प्रांत में कराची के पास मनोरा द्वीप पर है।

शहरों की बात करें तो लाहौर को पाकिस्तान का ‘सांस्कृतिक दिल’ और ‘बागों का शहर’ कहा जाता है, जबकि कराची को ‘रोशनियों का शहर’ कहते हैं। खूबसूरत स्वात घाटी को ‘पाकिस्तान का स्विट्ज़रलैंड’ कहा जाता है।

भारत का पड़ोसी देश नेपाल — खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा

भारत के उत्तर में हिमालय की गोद में बसा नेपाल चारों ओर से ज़मीन से घिरा (Landlocked) देश है और भारत तथा चीन के बीच एक ‘बफर स्टेट’ की तरह पड़ता है। भारत और नेपाल के बीच रोटी-बेटी जैसा सांस्कृतिक रिश्ता रहा है, और यही बात इस सीमा को बाकी सब सीमाओं से अलग बनाती है।

नेपाल: एक नज़र में

राजधानीकाठमांडू (इसे ‘मंदिरों का शहर’ भी कहा जाता है)
पर्यटन राजधानीपोखरा (इसे ‘झीलों का शहर’ कहा जाता है)
मुद्रानेपाली रुपया
संसद का नामसंघीय संसद — राजशाही काल में इसे राष्ट्रीय पंचायत कहा जाता था
राजभाषानेपाली
राष्ट्रीय पशुगाय — भारत के पड़ोसियों में एकमात्र देश जिसका राष्ट्रीय पशु गाय है
राष्ट्रीय पक्षीहिमालयन मोनाल, जिसे नेपाल में ‘डाँफे’ कहते हैं
राष्ट्रीय पुष्पलाली गुराँस / बुराँस (Rhododendron)
राष्ट्रीय वृक्षपीपल
राष्ट्रीय खेलवॉलीबॉल — इसे 2017 में राष्ट्रीय खेल घोषित किया गया
सबसे लंबी नदीकरनाली नदी (भारत में यह घाघरा कहलाती है)
सबसे ऊंची चोटीमाउंट एवरेस्ट (8,848.86 मीटर) — नेपाल में इसे ‘सागरमाथा’ कहा जाता है
अंतरराष्ट्रीय मुख्यालयकाठमांडू में SAARC (दक्षेस) का मुख्यालय स्थित है
भारत और नेपाल की 1751 किमी खुली सीमा, सुगौली संधि (1816), कालापानी-लिपुलेख विवाद और प्रमुख सांस्कृतिक स्थलों को दर्शाने वाला विस्तृत माइंड मैप।
नेपाल: 1,751 किमी खुली सीमा, सुगौली संधि, कालापानी विवाद और प्रमुख पर्यटन स्थलों का क्विक रिवीजन चार्ट।

भारत-नेपाल सीमा और सुरक्षा

भारत और नेपाल के बीच कुल 1,751 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमा है, जो भारत के 5 राज्यों से लगती है — उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम। नेपाल के साथ सबसे लंबी सीमा बिहार (लगभग 726 किमी) साझा करता है।

यह एक ‘खुली सीमा’ है, यानी दोनों देशों के नागरिकों को आने-जाने या काम करने के लिए वीज़ा या पासपोर्ट की ज़रूरत नहीं पड़ती। इसी वजह से यह सीमा व्यापार और रिश्तेदारी के लिहाज़ से तो सुविधाजनक है, पर निगरानी के लिहाज़ से चुनौती भी है। इसकी सुरक्षा और निगरानी का दायित्व SSB (सशस्त्र सीमा बल) पर है।

प्रमुख संधियाँ, समझौते और युद्धाभ्यास

सुगौली की संधि (1816) आंग्ल-नेपाल युद्ध (1814-16) के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और नेपाल के बीच हुई थी। इसी संधि से भारत-नेपाल की वर्तमान सीमा का आधार बना, जिसमें पश्चिम में काली नदी को सीमा माना गया। आज कालापानी विवाद की जड़ भी यही है, क्योंकि दोनों देश काली नदी के असली उद्गम पर अलग-अलग राय रखते हैं।

शांति और मित्रता की संधि (1950) के तहत दोनों देशों की सीमाएँ खुली रखी गईं और नागरिकों को एक-दूसरे के यहाँ रहने, काम करने तथा संपत्ति रखने जैसे लगभग समान अधिकार मिले। महाकाली संधि (1996) महाकाली नदी (भारत में शारदा) के जल बँटवारे और पंचेश्वर बहुउद्देश्यीय परियोजना के लिए हुई थी। सैन्य स्तर पर दोनों देशों के बीच ‘सूर्य किरण’ नामक वार्षिक संयुक्त अभ्यास होता है।

प्रमुख सीमा विवाद

कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख विवाद दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा सीमा मुद्दा है। यह क्षेत्र भारत के उत्तराखंड (पिथौरागढ़ जिला) और नेपाल के दार्चुला जिले के बीच पड़ता है। वर्ष 2020 में नेपाल ने सुगौली संधि की अपनी व्याख्या के आधार पर एक नया राजनीतिक नक्शा जारी किया, जिसमें इन भारतीय क्षेत्रों को अपना हिस्सा दिखाया गया। भारत ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। लिपुलेख इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि यह कैलाश मानसरोवर यात्रा और भारत-चीन व्यापार का एक पुराना दर्रा है।

सुस्ता क्षेत्र विवाद गंडक नदी के पास, उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा से लगे इलाके में है। गंडक नदी बार-बार अपना रास्ता बदलती रही है, इसलिए यहाँ सीमांकन स्पष्ट नहीं रह गया।

प्रमुख सांस्कृतिक और पर्यटन स्थल

काठमांडू में बागमती नदी के किनारे स्थित पशुपतिनाथ मंदिर भगवान शिव का विश्व प्रसिद्ध मंदिर है; इसके अलावा मुक्तिनाथ और मनकामना मंदिर भी प्रसिद्ध हैं। लुंबिनी भगवान गौतम बुद्ध का जन्मस्थान है और यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। बौद्धनाथ स्तूप (दुनिया के सबसे बड़े गोलाकार स्तूपों में से एक) और स्वयंभूनाथ स्तूप (मंकी टेम्पल) भी बहुत मशहूर हैं। त्योहारों में ‘दसैं’ (Dashain) नेपाल का सबसे बड़ा और सबसे लंबा चलने वाला पर्व है, जो भारत के दशहरे जैसा है, और होली को यहाँ ‘फागू पूर्णिमा’ कहा जाता है।

भारत का पड़ोसी देश म्यांमार — पूर्वोत्तर की पहाड़ी सीमा

भारत के सुदूर पूर्व में स्थित म्यांमार रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण पड़ोसी है। इसका पुराना नाम ‘बर्मा’ था। यह ब्रिटिश भारत का ही हिस्सा था, जिसे भारत शासन अधिनियम 1935 के प्रावधानों के तहत 1937 में भारत से अलग कर दिया गया, और 4 जनवरी 1948 को यह पूर्ण स्वतंत्र राष्ट्र बना। सुनहरे पैगोडा और बौद्ध मंदिरों की भरमार के कारण इसे ‘स्वर्णिम पैगोडा की भूमि’ कहा जाता है। भारत के लिए यह दक्षिण-पूर्व एशिया का प्रवेश द्वार है, क्योंकि यही एकमात्र आसियान देश है जिससे भारत की स्थलीय सीमा लगती है।

म्यांमार: एक नज़र में

राजधानीनेपीताव (Naypyidaw) — 2006 से पहले राजधानी यंगून (रंगून) थी
मुद्राक्यात
संसद का नामप्यीदौंगसु ह्लुत्ताव (Assembly of the Union); इसका निचला सदन पाइथू ह्लुत्ताव कहलाता है
राजभाषाबर्मी
राष्ट्रीय पशुबाघ
राष्ट्रीय पक्षीग्रे पीकॉक तीतर (Grey Peacock-Pheasant)
राष्ट्रीय पुष्पपैडक (Padauk)
राष्ट्रीय खेलचिनलोन (Chinlone) — इसमें बेंत की गेंद को बिना हाथ लगाए हवा में रखना होता है
सबसे लंबी नदीइरावदी नदी — इसे म्यांमार की जीवन रेखा कहा जाता है
सबसे ऊंची चोटीहकाकाबो राजी (Hkakabo Razi)
भारत और म्यांमार की 1643 किमी सीमा (अराकान योमा पर्वत), कलादान प्रोजेक्ट, फ्री मूवमेंट रिजीम (FMR) और प्रमुख सुरक्षा चुनौतियों को दर्शाने वाला विस्तृत माइंड मैप।
म्यांमार: 1,643 किमी सीमा, असम राइफल्स की तैनाती, कलादान मल्टी-मोडल प्रोजेक्ट और सुरक्षा चुनौतियों का क्विक रिवीजन चार्ट।

भारत-म्यांमार सीमा और सुरक्षा

भारत और म्यांमार के बीच कुल 1,643 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमा है, जो भारत के 4 पूर्वोत्तर राज्यों से लगती है। उत्तर से दक्षिण के क्रम में ये हैं — अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम। परीक्षा में उलझाने के लिए अक्सर विकल्पों में असम और त्रिपुरा दे दिए जाते हैं; याद रखिए कि इन दोनों की सीमा म्यांमार से नहीं लगती।

यह सीमा मुख्य रूप से पटकाई बुम, नागा, मणिपुर (चिन) और मिज़ो पहाड़ियों के साथ-साथ चलती है, जो हिमालय का ही पूर्वी मोड़ हैं और एक प्राकृतिक जल-विभाजक बनाती हैं। अराकान योमा इन्हीं पहाड़ियों का दक्षिणी विस्तार है, पर वह पूरी तरह म्यांमार के भीतर पड़ता है और भारतीय उपमहाद्वीप को दक्षिण-पूर्व एशिया से अलग करने वाली दीवार का काम करता है। घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों वाली इस सीमा की सुरक्षा असम राइफल्स के जिम्मे है, जो भारत का सबसे पुराना अर्धसैनिक बल है।

प्रमुख नीतियां, प्रोजेक्ट्स और युद्धाभ्यास

म्यांमार भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘नेबरहुड फर्स्ट’ दोनों नीतियों का केंद्र है, क्योंकि यही भारत को आसियान देशों से ज़मीन के रास्ते जोड़ता है।

कलादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट प्रोजेक्ट भारत की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजनाओं में से एक है, जो भारत के कोलकाता बंदरगाह को म्यांमार के सिटवे बंदरगाह से जोड़ती है और फिर नदी तथा सड़क मार्ग से मिजोरम तक पहुँचती है। इसका मकसद पूर्वोत्तर की ‘सिलीगुड़ी कॉरिडोर’ पर निर्भरता घटाना और दूरी कम करना है। इसी तरह भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग भी निर्माणाधीन है।

फ्री मूवमेंट रिजीम (FMR) एक ऐसी व्यवस्था थी जिसके तहत सीमावर्ती समुदाय बिना वीज़ा के सीमा के 16 किलोमीटर भीतर तक आ-जा सकते थे। ड्रग्स तस्करी और घुसपैठ रोकने के लिए भारत सरकार ने 2024 में इस व्यवस्था को समाप्त करने का निर्णय लिया और अब पूरी सीमा पर बाड़ लगाने का काम चल रहा है। सैन्य स्तर पर दोनों देशों की थलसेनाओं के बीच IMBEX अभ्यास और नौसेनाओं के बीच IMNEX अभ्यास होता है, जबकि IMCOR दोनों नौसेनाओं की संयुक्त समन्वित गश्त है।

प्रमुख विवाद और सुरक्षा चुनौतियां

दीफू दर्रा भारत (अरुणाचल प्रदेश), चीन और म्यांमार के त्रि-संगम के पास स्थित एक महत्वपूर्ण दर्रा है, जहाँ स्पष्ट सीमांकन न होने के कारण मतभेद बने रहते हैं।

म्यांमार कुख्यात ‘स्वर्णिम त्रिभुज’ (Golden Triangle — म्यांमार, लाओस, थाईलैंड) का हिस्सा है, जो अवैध अफीम और मादक पदार्थों के उत्पादन का बड़ा केंद्र रहा है। यहाँ से पूर्वोत्तर भारत में ड्रग्स की तस्करी एक गंभीर सुरक्षा चुनौती है। इसके अलावा पूर्वोत्तर के कई उग्रवादी गुट म्यांमार के जंगलों में शरण लेते रहे हैं। वर्ष 2019 में भारत और म्यांमार की सेनाओं ने मिलकर दो चरणों में ‘ऑपरेशन सनराइज’ चलाया था। इससे पहले जून 2015 में भारतीय सेना ने मणिपुर में हुए हमले के जवाब में सीमा-पार कार्रवाई की थी, जो एक अलग अभियान था। फरवरी 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद म्यांमार में चल रही अस्थिरता से सीमा पर शरणार्थियों का दबाव भी बढ़ा है।

प्रमुख सांस्कृतिक और पर्यटन स्थल

यंगून का श्वेडागोन पैगोडा म्यांमार का सबसे पवित्र बौद्ध स्थल माना जाता है, जहाँ विशाल स्वर्ण स्तूप है। बागान को ‘मंदिरों का शहर’ कहा जाता है, जहाँ दो हज़ार से ज़्यादा प्राचीन बौद्ध मंदिर और स्तूप हैं और जो यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल है; प्रसिद्ध आनंद मंदिर भी यहीं बागान में है। 1857 की क्रांति के बाद अंग्रेज़ों ने अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह ज़फ़र को निर्वासित करके रंगून भेज दिया था और उनकी दरगाह आज भी यंगून में है। इन्ले झील अपने उन नाविकों के लिए मशहूर है जो पैरों से नाव खेते हैं, और गोल्डन रॉक (क्यैक्तियो पैगोडा) एक विशाल सुनहरी चट्टान है जो पहाड़ के किनारे संतुलन बनाए खड़ी है।

भारत का पड़ोसी देश भूटान — सबसे शांत सीमा वाला देश

भारत के उत्तर-पूर्व में हिमालय की वादियों में बसा भूटान भारत का सबसे शांतिपूर्ण और घनिष्ठ पड़ोसी है। क्षेत्रफल की दृष्टि से यह भारत के स्थलीय पड़ोसियों में सबसे छोटा है और भारत तथा चीन के बीच एक ‘बफर स्टेट’ की भूमिका निभाता है। अपनी अनूठी संस्कृति के कारण इसे ‘लैंड ऑफ थंडर ड्रैगन’ या ‘ड्रुक यूल’ कहा जाता है। यहाँ संवैधानिक राजतंत्र है, यानी राजा भी हैं और चुनी हुई सरकार भी।

भूटान: एक नज़र में

राजधानीथिम्पू (पुनाखा को भूटान की पुरानी तथा शीतकालीन राजधानी कहा जाता है)
मुद्रानगुलट्रम (भारतीय रुपये के साथ बराबरी पर जुड़ी हुई)
संसद का नामसंसद के दो सदन हैं — नेशनल असेंबली (त्शोग्दू) और नेशनल काउंसिल
राजभाषाजोंगखा (Dzongkha)
राष्ट्रीय पशुतकिन (Takin)
राष्ट्रीय पक्षीरेवेन (काला कौवा) — यह भूटान के राजमुकुट पर भी अंकित है
राष्ट्रीय पुष्पब्लू पॉपी
राष्ट्रीय वृक्षसाइप्रस
राष्ट्रीय खेलतीरंदाजी
सबसे लंबी नदीमानस नदी
सबसे ऊंची चोटीगंगखर पुनसुम — यह दुनिया की सबसे ऊँची ऐसी चोटी है जिस पर आज तक कोई नहीं चढ़ सका
भारत और भूटान की 699 किमी शांत सीमा, डोकलाम पठार विवाद, प्रोजेक्ट दंतक और प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं को दर्शाने वाला विस्तृत माइंड मैप।
भूटान: शांत सीमा, डोकलाम त्रि-संगम विवाद, प्रोजेक्ट दंतक और ‘सकल राष्ट्रीय खुशी’ का क्विक रिवीजन चार्ट।

भारत-भूटान सीमा और सुरक्षा

भारत और भूटान के बीच कुल 699 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमा है, जो भारत के 4 राज्यों से लगती है — पश्चिम बंगाल, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और असम। भूटान के साथ सबसे लंबी सीमा असम (लगभग 267 किमी) साझा करता है। इस खुली और मित्रवत सीमा की निगरानी SSB (सशस्त्र सीमा बल) करता है। सीमा शांत ज़रूर है, पर डोकलाम जैसे त्रि-संगम क्षेत्रों के कारण रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बनी रहती है।

प्रमुख नीतियां, समझौते और परियोजनाएं

सकल राष्ट्रीय खुशी (Gross National Happiness — GNH) भूटान की सबसे अलग पहचान है। यह देश अपनी प्रगति सिर्फ GDP से नहीं, बल्कि नागरिकों की खुशहाली, संस्कृति के संरक्षण, पर्यावरण और सुशासन — इन सबको मिलाकर मापता है। भूटान अपने विशाल वन क्षेत्र के कारण कार्बन-नेगेटिव देशों में गिना जाता है, यानी वह जितनी कार्बन गैस छोड़ता है, उससे ज़्यादा सोख लेता है।

भारत और भूटान के बीच 1949 में मित्रता संधि हुई थी, जिसमें 2007 में संशोधन करके भूटान को विदेश नीति और सैन्य खरीद में ज़्यादा स्वायत्तता दी गई। प्रोजेक्ट दंतक (1961) भारत के सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा भूटान में सड़कें, पारो हवाई अड्डा और अन्य बुनियादी ढाँचा बनाने की परियोजना थी। भारत के सहयोग से भूटान में चूखा, कुरिछू, ताला और मांगदेछू जैसी जलविद्युत परियोजनाएँ चल रही हैं, और भूटान इनसे बनी बिजली भारत को बेचकर अच्छी आमदनी करता है।

प्रमुख विवाद और रणनीतिक चुनौतियां

भारत और भूटान के बीच कोई सीमा विवाद नहीं है, लेकिन भूटान का चीन के साथ विवाद भारत की सुरक्षा को सीधे प्रभावित करता है।

डोकलाम पठार विवाद (2017): डोकलाम भूटान और चीन के बीच विवादित पठार है, जो भारत, भूटान और तिब्बत (चीन) के त्रि-संगम के पास पड़ता है; इसके उत्तर में चीन की चुंबी घाटी है। 2017 में चीनी सेना यहाँ सड़क बना रही थी, जिसका भारतीय सेना ने कड़ा विरोध किया। कारण यह था कि डोकलाम से भारत का ‘सिलीगुड़ी कॉरिडोर’ (चिकन नेक) बहुत पास पड़ता है — यही वह संकरी पट्टी है जो शेष भारत को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ती है।

सकतेंग वन्यजीव अभयारण्य: हाल के वर्षों में चीन ने पूर्वी भूटान के इस अभयारण्य पर भी दावा पेश किया है, जो अरुणाचल प्रदेश की सीमा के करीब है।

प्रमुख सांस्कृतिक और पर्यटन स्थल

टाइगर नेस्ट मठ, जिसे ‘पारो ताकत्सांग’ कहते हैं, एक खड़ी चट्टान के किनारे बना बौद्ध धर्म का पवित्र स्थल है। पारो घाटी में देश का एकमात्र अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। पुनाखा जोंग फो चू और मो चू नदियों के संगम पर स्थित है और भूटान का सबसे सुंदर तथा दूसरा सबसे पुराना जोंग (किलानुमा मठ) माना जाता है — सबसे पुराना सिम्तोखा जोंग है। थिम्पू की पहाड़ियों पर बुद्ध डोर्डेनमा की विशाल स्वर्ण प्रतिमा स्थित है। त्योहारों में ‘पारो त्सेचू’ सबसे रंगारंग है, जिसमें लोग पारंपरिक मुखौटे पहनकर नृत्य करते हैं।

भारत का पड़ोसी देश अफगानिस्तान — सबसे छोटी अंतरराष्ट्रीय सीमा

भारत के उत्तर-पश्चिम में स्थित अफगानिस्तान सामरिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण पड़ोसी है, और भारत की सबसे छोटी अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमा इसी से लगती है। ऐतिहासिक रूप से यह ‘सिल्क रूट’ का प्रमुख पड़ाव रहा है और मध्य एशिया तक पहुँचने का रास्ता भी। अगस्त 2021 में सत्ता परिवर्तन के बाद यहाँ तालिबान का शासन है, जो खुद को ‘इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान’ कहता है।

अफगानिस्तान: एक नज़र में

राजधानीकाबुल
मुद्राअफगानी
संसद का नामशोरा या नेशनल असेंबली — 2021 के सत्ता परिवर्तन के बाद यह भंग है
राजभाषापश्तो और दरी
स्वतंत्रता दिवस19 अगस्त (1919 में ब्रिटेन से पूर्ण स्वतंत्रता)
राष्ट्रीय पशुस्नो लेपर्ड (बर्फीला तेंदुआ)
राष्ट्रीय पक्षीसुनहरा गरुड़ (Golden Eagle)
राष्ट्रीय पुष्पट्यूलिप
राष्ट्रीय फलअनार
राष्ट्रीय खेलबुज़कशी — इसमें घुड़सवार खिलाड़ी एक बकरे के शव को खींचकर लक्ष्य तक ले जाते हैं
सबसे लंबी नदीहेलमंद नदी
सबसे ऊंची चोटीनोशाक (हिंदूकुश श्रेणी)
भारत और अफगानिस्तान की सबसे छोटी 106 किमी सीमा, वाखान कॉरिडोर, डूरंड रेखा, सलमा बांध और ऑपरेशन देवी शक्ति को दर्शाने वाला विस्तृत माइंड मैप।
अफगानिस्तान: सबसे छोटी सीमा, डूरंड रेखा, वाखान कॉरिडोर और भारत के प्रमुख प्रोजेक्ट्स का क्विक रिवीजन चार्ट।

भारत-अफगानिस्तान सीमा

भारत और अफगानिस्तान के बीच कुल 106 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो भारत की सभी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं में सबसे छोटी है। यह सीमा भारत के केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख से लगती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह हिस्सा इस समय पाक-अधिकृत कश्मीर के ‘गिलगित-बाल्टिस्तान’ क्षेत्र में पड़ता है, यानी व्यावहारिक रूप से भारत का इस सीमा पर नियंत्रण नहीं है, पर कानूनी और आधिकारिक दृष्टि से यह भारत की सीमा मानी जाती है।

अफगानिस्तान का जो सँकरा भू-भाग भारत की इस सीमा को छूता है, उसे वाखान कॉरिडोर कहते हैं। यह उँगली जैसी पट्टी 19वीं सदी में ब्रिटिश और रूसी साम्राज्यों के बीच बफर बनाने के लिए बनाई गई थी। वर्ष 1893 में सर मोर्टिमर डूरंड ने ब्रिटिश भारत और अफगानिस्तान के बीच ‘डूरंड रेखा’ खींची थी। 1947 में विभाजन के बाद अब यह रेखा मुख्य रूप से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच की सीमा तय करती है, जिसे अफगानिस्तान आज तक औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं करता।

भारत-अफगानिस्तान संबंध और प्रमुख प्रोजेक्ट्स

भारत ने अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में बड़ी भूमिका निभाई है और यहीं से परीक्षा के सवाल भी बनते हैं। हेरात प्रांत में बना सलमा बांध भारत ने बनवाया है, जिसे ‘अफगान-भारत मैत्री बांध’ भी कहा जाता है। काबुल शहर को पीने का पानी देने के लिए काबुल नदी बेसिन पर शहतूत बांध परियोजना को भारत ने मंजूरी दी थी। अफगानिस्तान की नई संसद की इमारत भी भारत सरकार ने बनवाई, जिसका उद्घाटन 2015 में हुआ था। अगस्त 2021 में तालिबान के कब्ज़े के समय वहाँ फँसे भारतीयों और अफगान सिख-हिंदुओं को सुरक्षित निकालने के लिए भारत ने ‘ऑपरेशन देवी शक्ति’ चलाया था। इसके अलावा भारत ईरान के चाबहार बंदरगाह के रास्ते अफगानिस्तान तक पहुँच बनाए रखता है, क्योंकि पाकिस्तान ज़मीनी रास्ता नहीं देता।

प्रमुख सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल

बामियान के बुद्ध पहाड़ काटकर बनाई गई भगवान बुद्ध की दो विशाल प्राचीन मूर्तियाँ थीं, जिन्हें 2001 में तालिबान ने विस्फोट से नष्ट कर दिया था। मज़ार-ए-शरीफ एक प्रमुख शहर और तीर्थस्थल है, जहाँ नीली टाइलों की शानदार वास्तुकला वाली ‘ब्लू मॉस्क’ स्थित है। भारत में मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर का मकबरा काबुल के ‘बाग-ए-बाबर’ में है, क्योंकि बाबर की इच्छा थी कि उसे काबुल में ही दफनाया जाए। हिंदूकुश पर्वत यहाँ की सबसे प्रमुख पर्वत श्रृंखला है, जो देश के मध्य भाग से होकर गुजरती है।

भारत के प्रमुख जलीय पड़ोसी देश: समुद्री सीमाएं और कूटनीति

भारत अपनी मुख्य भूमि से अलग, समुद्र पार स्थित देशों के साथ भी महत्वपूर्ण जलीय सीमाएँ साझा करता है। इनमें श्रीलंका और मालदीव मुख्य जलीय पड़ोसी माने जाते हैं, क्योंकि इन दोनों के साथ भारत की केवल समुद्री सीमा है, ज़मीनी बिल्कुल नहीं, और दोनों भारत के बहुत पास स्थित हैं।

यह भ्रम ज़रूर दूर कर लें: भारत की समुद्री सीमा सिर्फ दो देशों से नहीं लगती। भारत ने पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार, थाईलैंड, इंडोनेशिया, श्रीलंका और मालदीव — सबके साथ समुद्री सीमाएँ साझा की हैं। लेकिन इनमें से पाकिस्तान, बांग्लादेश और म्यांमार से भारत की स्थलीय सीमा भी लगती है, इसलिए उन्हें स्थलीय पड़ोसी में गिना जाता है। थाईलैंड और इंडोनेशिया से सीमा अंडमान-निकोबार के आसपास बनती है, मुख्य भूमि से नहीं। इसी वजह से “मुख्य जलीय पड़ोसी” के रूप में केवल श्रीलंका और मालदीव गिने जाते हैं।

भारत का जलीय पड़ोसी देश श्रीलंका — पाक जलसंधि और राम सेतु

भारत के दक्षिण में हिंद महासागर में स्थित श्रीलंका एक द्वीपीय देश है। अपनी बनावट और सुंदरता के कारण इसे ‘हिंद महासागर का मोती’ और ‘भारत का आँसू’ कहा जाता है। इसका पुराना नाम ‘सिलोन’ था और यह 1948 में ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र हुआ। भारत और श्रीलंका के बीच भौगोलिक ही नहीं, गहरे ऐतिहासिक और धार्मिक संबंध भी हैं।

श्रीलंका: एक नज़र में

राजधानीश्री जयवर्धनेपुरा कोट्टे (प्रशासनिक) और कोलंबो (वाणिज्यिक राजधानी)
मुद्राश्रीलंकाई रुपया
संसद का नामश्रीलंका की संसद (Parliament of Sri Lanka)
राजभाषासिंहली और तमिल
राष्ट्रीय पशुहाथी (विशाल गिलहरी को भी राष्ट्रीय पशु के रूप में बताया जाता है)
राष्ट्रीय पक्षीश्रीलंकाई जंगली मुर्गा (Sri Lankan Junglefowl)
राष्ट्रीय फूलब्लू वाटर लिली (नील मनेल)
राष्ट्रीय वृक्षआयरन वुड (ना ट्री)
राष्ट्रीय खेलवॉलीबॉल (क्रिकेट यहाँ का सबसे लोकप्रिय खेल है)
सबसे लंबी नदीमहावेली गंगा
सबसे ऊंची चोटीपिदुरुतलागला — इसे माउंट पेड्रो भी कहते हैं
भारत और श्रीलंका की जलीय सीमा, पाक जलसंधि, राम सेतु, कच्चा तीवू द्वीप समझौता और रामायण सर्किट को दर्शाने वाला विस्तृत माइंड मैप।
श्रीलंका: पाक जलसंधि, मन्नार की खाड़ी, ऐतिहासिक समझौते और प्रमुख सैन्य अभ्यासों का क्विक रिवीजन चार्ट।

भारत-श्रीलंका जलीय सीमा और भूगोल

पाक जलसंधि (Palk Strait) वह जलराशि है जो भारत (तमिलनाडु) और श्रीलंका को अलग करती है। यह बंगाल की खाड़ी को पाक की खाड़ी (Palk Bay) से जोड़ती है। इसका नाम मद्रास प्रेसीडेंसी के गवर्नर रॉबर्ट पाक के नाम पर पड़ा।

मन्नार की खाड़ी भारत और श्रीलंका के बीच दक्षिण में स्थित एक उथला समुद्री क्षेत्र है, जो अपने मोतियों और समृद्ध समुद्री जैव-विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ भारत का मन्नार की खाड़ी जीवमंडल रिजर्व भी स्थित है।

राम सेतु (Adam’s Bridge) भारत के पंबन द्वीप (धनुषकोडी) और श्रीलंका के मन्नार द्वीप (तलैमन्नार) के बीच लगभग 48 किलोमीटर लंबी चूना-पत्थर की उथली श्रृंखला है, जो पाक जलसंधि और मन्नार की खाड़ी को एक-दूसरे से अलग करती है।

एलिफेंट पास (Elephant Pass) उत्तरी श्रीलंका में स्थित एक सँकरा स्थलडमरूमध्य (isthmus) है, यानी ज़मीन की पतली पट्टी जो दो बड़े भू-भागों को जोड़ती है। यह तमिल बहुल जाफना प्रायद्वीप को शेष श्रीलंका की मुख्य भूमि से जोड़ने वाला रणनीतिक प्रवेश द्वार है, और गृहयुद्ध के दौरान इसी पर नियंत्रण के लिए सबसे भीषण लड़ाइयाँ हुई थीं।

भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सीमा को दर्शाने वाला मानचित्र, जिसमें पाक जलसंधि, मन्नार की खाड़ी, पम्बन द्वीप, कच्चातिवु द्वीप और राम सेतु स्पष्ट रूप से दिखाए गए हैं।

प्रमुख समझौते, नीतियां और युद्धाभ्यास

कच्चातिवु द्वीप समझौता (1974): इस समझौते के तहत भारत ने पाक जलसंधि में स्थित कच्चातिवु द्वीप श्रीलंका को सौंप दिया था। आज यह तमिल मछुआरों के मछली पकड़ने के अधिकारों को लेकर बार-बार विवाद का केंद्र बनता है।

श्रीमा-शास्त्री समझौता (1964): यह समझौता भारतीय मूल के उन तमिलों की नागरिकता का मुद्दा सुलझाने के लिए हुआ था, जिन्हें ब्रिटिश काल में चाय बागानों में काम के लिए श्रीलंका ले जाया गया था।

भारत-श्रीलंका शांति समझौता (1987): राजीव गांधी और जे. आर. जयवर्धने के बीच हुए इस समझौते के तहत भारत ने LTTE उग्रवाद समाप्त करने और शांति बहाली के लिए भारतीय शांति सेना (IPKF) भेजी थी।

मुक्त व्यापार समझौता (ISFTA, 1998) दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए किया गया। सैन्य स्तर पर सेनाओं के बीच ‘मित्र शक्ति’ और नौसेनाओं के बीच ‘स्लिनेक्स’ (SLINEX) अभ्यास होते हैं।

प्रमुख सांस्कृतिक और पर्यटन स्थल

सिगिरिया, जिसे ‘लायन रॉक’ कहा जाता है, एक विशाल चट्टान के ऊपर बना प्राचीन किला और महल है और यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल है। कैंडी का ‘टूथ रेलिक मंदिर’ (श्री दलदा मालिगावा) बौद्धों के लिए अत्यंत पवित्र है। हिंदू धर्म की दृष्टि से यहाँ ‘पंच ईश्वरम’ नाम से जाने जाने वाले पाँच प्राचीन शिव मंदिर हैं — नगुलेश्वरम, केतीश्वरम, कोणेश्वरम, मुन्नेश्वरम और तोंडेश्वरम। ‘नवम पेराहेरा’ यहाँ का बेहद रंगारंग त्योहार है, जिसमें सजे हुए हाथी और पारंपरिक नर्तक शामिल होते हैं। भारत और श्रीलंका मिलकर ‘रामायण सर्किट’ पर भी काम कर रहे हैं, जिसके तहत अशोक वाटिका और सीता एलिया जैसे पौराणिक स्थलों को पर्यटन के रूप में विकसित किया जा रहा है।

रणनीतिक चुनौती: श्रीलंका में चीन का बढ़ता प्रभाव भारत के लिए चिंता का विषय है। हंबनटोटा बंदरगाह चीनी कर्ज़ से बना और बाद में 99 साल की लीज पर चीनी कंपनी को देना पड़ा — इसे ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ रणनीति का हिस्सा माना जाता है। दूसरी ओर, 2022 के आर्थिक संकट में भारत ने श्रीलंका को लगभग 4 अरब डॉलर की सहायता देकर सबसे बड़े मददगार की भूमिका निभाई।

भारत का जलीय पड़ोसी देश मालदीव — 8 डिग्री चैनल और मूंगा द्वीप

भारत के दक्षिण-पश्चिम में हिंद महासागर (लक्षद्वीप सागर) में स्थित मालदीव क्षेत्रफल और जनसंख्या दोनों दृष्टि से एशिया का सबसे छोटा देश है। यह पूरी तरह मूंगे की चट्टानों यानी प्रवाल भित्तियों से बना द्वीपीय देश है और लगभग 1,200 द्वीपों से मिलकर बना है। मालदीव 1965 में ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र हुआ और 1968 में इसने खुद को गणतंत्र घोषित किया।

मालदीव: एक नज़र में

राजधानीमाले
मुद्रामालदीवियन रुफिया — ध्यान दें, यह रुपया नहीं है
संसद का नामपीपल्स मजलिस
राजभाषाधिवेही
राष्ट्रीय पशुयेलोफिन टूना (एक प्रकार की मछली)
राष्ट्रीय पक्षीव्हाइट-ब्रेस्टेड वाटरहेन (सफेद छाती वाला जलमुर्गा)
राष्ट्रीय पुष्पगुलाबी गुलाब (फिनिफेनमा)
राष्ट्रीय वृक्षनारियल का पेड़
राष्ट्रीय खेलफुटबॉल
सबसे ऊंचा बिंदुविलिंगिली द्वीप का एक स्थान — मात्र 2.4 मीटर ऊँचा। यह दुनिया का सबसे निचला देश है, इसलिए समुद्र-स्तर बढ़ने का सबसे बड़ा खतरा इसी पर है
भारत और मालदीव समुद्री सीमा (8 डिग्री चैनल), मिनीकॉय द्वीप, ऐतिहासिक ऑपरेशन कैक्टस (1988) और प्रमुख युद्धाभ्यासों को दर्शाने वाला विस्तृत माइंड मैप।
मालदीव: 8 डिग्री चैनल, ‘ऑपरेशन कैक्टस’, ‘ऑपरेशन नीर’ और भारत-मालदीव संबंधों का क्विक रिवीजन चार्ट।

भारत-मालदीव जलीय सीमा

भारत और मालदीव को ‘8 डिग्री चैनल’ अलग करता है। ठीक-ठीक कहें तो यह चैनल भारत के लक्षद्वीप समूह के सबसे दक्षिणी द्वीप ‘मिनीकॉय’ और मालदीव के सबसे उत्तरी हिस्से के बीच पड़ता है। यह चैनल हिंद महासागर के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है, इसलिए इसका रणनीतिक महत्व बहुत ज़्यादा है।

प्रमुख समझौते और सैन्य अभियान

ऑपरेशन कैक्टस (1988): जब भाड़े के हथियारबंद लड़ाकों ने मालदीव के राष्ट्रपति के खिलाफ तख्तापलट की कोशिश की, तब भारतीय सशस्त्र बलों ने रातोंरात वहाँ पहुँचकर उसे विफल कर दिया था। यह भारत की सबसे तेज़ और सफल विदेशी सैन्य कार्रवाइयों में गिना जाता है।

ऑपरेशन नीर (2014): जब माले में पीने के पानी का भारी संकट पैदा हुआ, तब भारतीय वायुसेना और नौसेना ने लाखों लीटर शुद्ध पानी वहाँ पहुँचाया था।

समुद्री सीमा समझौता (1976): इस समझौते के तहत मालदीव ने मिनीकॉय द्वीप पर भारत का अधिकार स्पष्ट रूप से स्वीकार कर लिया, जिससे पुराना मतभेद समाप्त हो गया।

सैन्य अभ्यासों में दोनों देशों की सेनाओं के बीच ‘एकुवेरिन’ (धिवेही भाषा में इसका अर्थ ‘मित्र’ है) और ‘एकथा’ आयोजित होते हैं। इसके अलावा भारत, मालदीव और श्रीलंका के तटरक्षक बलों के बीच ‘दोस्ती’ नामक त्रिपक्षीय अभ्यास भी होता है।

करेंट अफेयर्स — रिश्तों का ताज़ा रुख: वर्ष 2023 में राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू के सत्ता में आने के बाद ‘इंडिया आउट’ अभियान और भारतीय सैन्यकर्मियों की वापसी की माँग से रिश्तों में खटास आई थी। लेकिन इसके बाद स्थिति बदली — अक्टूबर 2024 में दोनों देशों ने ‘व्यापक आर्थिक और समुद्री सुरक्षा साझेदारी’ का दस्तावेज़ अपनाया, और जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मालदीव के 60वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बने। उसी दौरे में नई ऋण सुविधा, रक्षा सहयोग और मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू करने जैसे कदम तय हुए। यानी ‘इंडिया आउट’ वाला दौर अब पीछे छूट चुका है, हालाँकि हिंद महासागर में चीन की मौजूदगी अब भी भारत के लिए एक रणनीतिक चुनौती बनी हुई है।

प्रमुख पर्यटन स्थल और अर्थव्यवस्था

मालदीव की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से पर्यटन और मत्स्य पालन पर टिकी है। वाधू द्वीप का बायोलुमिनिसेंट बीच रात में ‘प्लैंकटन’ नामक सूक्ष्म जीवों के चमकने से नीली रोशनी बिखेरता है, इसीलिए इसे ‘सी ऑफ स्टार्स’ कहते हैं। बनाना रीफ केले के आकार का एक संरक्षित समुद्री क्षेत्र है और मालदीव के सबसे बेहतरीन डाइविंग स्पॉट्स में से एक है।

भारत की प्रमुख जलीय सीमाएं और समुद्री चैनल

भारत के द्वीपों और समुद्री पड़ोसी देशों को अलग करने वाले चैनल और जलसंधियाँ परीक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं, खासकर नक्शे पर आधारित सवालों में। एक बात पहले समझ लीजिए — 8°, 9°, 10° चैनल के नाम अक्षांश रेखाओं के आधार पर रखे गए हैं। यानी 8° चैनल का सीधा मतलब है भूमध्य रेखा से 8° उत्तर में पड़ने वाला जल-मार्ग।

क्विक रिवीजन टेबल

समुद्री चैनल / जलसंधिकिनके मध्य स्थित है?
8° चैनलमिनीकॉय (भारत) और मालदीव
9° चैनलमिनीकॉय और शेष लक्षद्वीप समूह
10° चैनलअंडमान और निकोबार द्वीप समूह के मध्य
11° चैनलअमीनदीवी और कन्नानोर द्वीप (लक्षद्वीप के भीतर)
ग्रेट चैनलग्रेट निकोबार (भारत) और सुमात्रा (इंडोनेशिया)
डंकन पासदक्षिण अंडमान और छोटा अंडमान
कोको स्ट्रेटउत्तरी अंडमान (भारत) और कोको द्वीप (म्यांमार)
पाक जलसंधितमिलनाडु (भारत) और श्रीलंका

प्रमुख चैनलों का विस्तृत विवरण

8° चैनल लक्षद्वीप के सबसे दक्षिणी द्वीप ‘मिनीकॉय’ को समुद्री पड़ोसी ‘मालदीव’ से अलग करता है।

9° चैनल मिनीकॉय द्वीप को लक्षद्वीप समूह के बाकी द्वीपों (कल्पेनी, सुहेली आदि) से अलग करता है। ध्यान रखें कि लक्षद्वीप का सबसे बड़ा द्वीप एंड्रोट है, और प्रशासनिक राजधानी कवरत्ती है।

10° चैनल परीक्षा में सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला चैनल है। यह अंडमान द्वीप समूह को निकोबार द्वीप समूह से अलग करता है। गहराई से पूछे जाने पर — यह मुख्य रूप से ‘छोटा अंडमान’ और ‘कार निकोबार’ के बीच पड़ता है।

11° चैनल लक्षद्वीप समूह को दो हिस्सों में बाँटता है — उत्तर में अमीनदीवी द्वीप और दक्षिण में कन्नानोर द्वीप।

डंकन पास अंडमान द्वीप समूह के भीतर ही दक्षिण अंडमान और छोटा अंडमान के बीच का समुद्री मार्ग है।

कोको स्ट्रेट भारत के उत्तरी अंडमान और म्यांमार के अधिकार वाले कोको द्वीप के बीच है। यह इसलिए महत्वपूर्ण है कि इस द्वीप पर चीन की गतिविधियों की खबरें आती रहती हैं और यह भारत के अंडमान-निकोबार कमांड के बहुत पास है।

ग्रेट चैनल भारत के ग्रेट निकोबार और इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के बीच स्थित है और दोनों देशों के बीच जलीय सीमा बनाता है। इसे सिक्स डिग्री चैनल (6° चैनल) भी कहा जाता है।

परीक्षा के लिए विशेष: भारत और श्रीलंका के बीच दो संरचनाएँ बार-बार पूछी जाती हैं। पाक जलसंधि तमिलनाडु और श्रीलंका के बीच है और बंगाल की खाड़ी को पाक की खाड़ी से जोड़ती है। मन्नार की खाड़ी इससे दक्षिण में, दक्षिण-पूर्वी तमिलनाडु और श्रीलंका के बीच स्थित है और अपने मोतियों तथा समुद्री जैव-विविधता के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इन दोनों के बीच में राम सेतु पड़ता है।

संयुक्त राष्ट्र समुद्री संधि (UNCLOS 1982): भारत के समुद्री अधिकार

किसी भी देश की समुद्री सीमा कहाँ तक होगी और समुद्र में उसके क्या अधिकार होंगे, यह तय करने के लिए 1982 में संयुक्त राष्ट्र ने एक अंतरराष्ट्रीय समझौता किया, जिसे UNCLOS (United Nations Convention on the Law of the Sea) कहते हैं। यह संधि 1994 में लागू हुई और भारत ने इसे 1995 में अनुमोदित किया। इसके अनुसार किसी भी तटीय देश के समुद्री क्षेत्र को मुख्य रूप से 5 हिस्सों में बाँटा जाता है।

दो बुनियादी बातें:

समुद्री मील (Nautical Mile): समुद्र में दूरी किलोमीटर में नहीं, समुद्री मील में नापी जाती है। 1 समुद्री मील = 1.852 किलोमीटर।

आधार रेखा (Baseline): समुद्र में सारी दूरियाँ आधार रेखा से नापी जाती हैं। तट के बाहरी बिंदुओं को मिलाने वाली काल्पनिक सीधी रेखा ही आधार रेखा कहलाती है।

UNCLOS समुद्री क्षेत्र: एक नज़र में

समुद्री क्षेत्रआधार रेखा से दूरीभारत के प्रमुख अधिकार
प्रादेशिक जल12 समुद्री मील तकपूर्ण संप्रभु अधिकार, पर विदेशी जहाजों को निर्दोष गमन की छूट
संलग्न क्षेत्र24 समुद्री मील तकसीमा शुल्क, राजकोषीय, आप्रवासन और स्वास्थ्य संबंधी कानूनों को लागू करने का नियंत्रण
अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ)200 समुद्री मील तकसंसाधनों का दोहन, वैज्ञानिक अनुसंधान और कृत्रिम द्वीप बनाने का अधिकार

UNCLOS के अनुसार जलीय क्षेत्रों का विस्तृत विवरण

1. आंतरिक जल (Internal Waters)

तट और आधार रेखा के बीच का पानी आंतरिक जल कहलाता है। इसमें नदियाँ, झीलें, खाड़ियाँ और लैगून शामिल होते हैं। इस क्षेत्र पर देश का ठीक वैसा ही पूरा अधिकार होता है जैसा उसकी अपनी ज़मीन पर होता है, और यहाँ विदेशी जहाजों को निर्दोष गमन का अधिकार भी नहीं मिलता।

2. प्रादेशिक जल (Territorial Sea)

आधार रेखा से समुद्र की ओर 12 समुद्री मील तक का क्षेत्र प्रादेशिक जल कहलाता है। इस क्षेत्र में भारत को पूर्ण संप्रभुता प्राप्त है — पानी, उसके ऊपर का आसमान और नीचे की ज़मीन, तीनों पर भारत का ही कानून चलता है।

यहाँ एक ज़रूरी बात समझ लीजिए, क्योंकि इसी पर अक्सर गलती होती है। विदेशी जहाजों को इस क्षेत्र से गुजरने का अधिकार होता है, जिसे ‘निर्दोष गमन का अधिकार’ (Right of Innocent Passage) कहते हैं। शर्त यह है कि उनका गुजरना शांतिपूर्ण, लगातार और तेज़ हो, और उससे तटीय देश की शांति, सुरक्षा या व्यवस्था को कोई नुकसान न पहुँचे। अगर जहाज हथियारों का अभ्यास करे, जासूसी करे या प्रदूषण फैलाए, तो वह गमन ‘निर्दोष’ नहीं रह जाता और तटीय देश उसे रोक सकता है।

3. संलग्न क्षेत्र (Contiguous Zone)

आधार रेखा से 24 समुद्री मील तक का क्षेत्र संलग्न क्षेत्र कहलाता है, यानी प्रादेशिक जल के बाद अगले 12 समुद्री मील। यह क्षेत्र संप्रभु क्षेत्र नहीं होता, यहाँ तटीय देश को सिर्फ कुछ खास कानूनों को लागू करने का नियंत्रण मिलता है। ये कानून चार तरह के होते हैं — सीमा शुल्क (Customs), राजकोषीय (Fiscal), आप्रवासन (Immigration) और स्वास्थ्य संबंधी (Sanitary)। मतलब यह कि भारत यहाँ से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स नहीं वसूलता, बल्कि तस्करी, अवैध प्रवेश या बीमारी फैलने जैसी घटनाओं को रोकने और उन पर कार्रवाई करने का अधिकार रखता है।

4. अनन्य आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone — EEZ)

आधार रेखा से 200 समुद्री मील तक का क्षेत्र अनन्य आर्थिक क्षेत्र कहलाता है और परीक्षा में सबसे ज़्यादा सवाल यहीं से आते हैं। इस क्षेत्र में भारत को संप्रभुता नहीं, बल्कि संसाधनों पर विशेष अधिकार मिलते हैं।

इनमें समुद्र के भीतर मौजूद खनिज, तेल और प्राकृतिक गैस के उत्खनन तथा मछली पकड़ने का अधिकार शामिल है — मुंबई हाई इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इसके अलावा भारत को यहाँ वैज्ञानिक अनुसंधान करने और कृत्रिम द्वीप या ढाँचे बनाने का अधिकार भी है। लेकिन दूसरे देशों के जहाज और विमान इस क्षेत्र से आ-जा सकते हैं और यहाँ समुद्र के नीचे केबल तथा पाइपलाइन बिछा सकते हैं।

भारत का EEZ लगभग 23.7 लाख वर्ग किलोमीटर है, और अंडमान-निकोबार तथा लक्षद्वीप जैसे द्वीप समूहों की वजह से यह इतना बड़ा है। इसी वजह से ये छोटे-छोटे द्वीप भी भारत के लिए रणनीतिक रूप से बहुत कीमती हैं।

5. उच्च सागर (High Seas)

EEZ यानी 200 समुद्री मील के बाद खुले समुद्र का विस्तार होता है, जिसे उच्च सागर या ‘अंतरराष्ट्रीय जल’ कहते हैं। इस पर किसी एक देश का अधिकार नहीं होता। यहाँ दुनिया के सभी देशों को — चाहे वे तटीय हों या चारों ओर से ज़मीन से घिरे हों — समान अधिकार प्राप्त हैं, जिनमें शांतिपूर्ण नौवहन, मछली पकड़ना, वैज्ञानिक शोध और समुद्री केबल बिछाने की आज़ादी शामिल है।

निष्कर्ष: भारत और उसके पड़ोसी देश

लगभग 15,106.7 किलोमीटर लंबी स्थलीय सीमा और नए मापन के अनुसार 11,098.81 किलोमीटर लंबी तटीय सीमा के साथ भारत दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा भौगोलिक और सामरिक केंद्र है। कुल 9 पड़ोसी देशों से घिरा भारत इस क्षेत्र का सबसे बड़ा देश तो है ही, आर्थिक और सांस्कृतिक दृष्टि से इसकी भूमिका स्वाभाविक रूप से नेतृत्वकर्ता की रही है।

भारत की पड़ोस नीति को कुछ प्रमुख सिद्धांतों से समझा जा सकता है। ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के तहत भारत पड़ोसियों के साथ शांति, सुरक्षा और संपर्क (Connectivity) को प्राथमिकता देता है। गुजराल सिद्धांत (1996) के अनुसार भारत अपने छोटे पड़ोसियों — नेपाल, भूटान, मालदीव, श्रीलंका और बांग्लादेश — को बदले में कुछ माँगे बिना एकतरफा सहयोग देता है।

क्षेत्रीय संगठनों में भारत सार्क (SAARC) का संस्थापक सदस्य है और 2006 में लागू साफ्टा (SAFTA) के जरिए मुक्त व्यापार को बढ़ावा देता है। लेकिन पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के कारण सार्क लगभग निष्क्रिय पड़ा है, इसलिए भारत अब ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के तहत बिम्सटेक (BIMSTEC) के जरिए बंगाल की खाड़ी से जुड़े देशों के साथ सहयोग तेज़ी से बढ़ा रहा है।

चीन की विस्तारवादी नीतियाँ और पाकिस्तान का सीमा-पार आतंकवाद भारत के लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं, और सिंधु जल संधि जैसे पुराने समझौते भी अब नए दौर से गुजर रहे हैं। फिर भी भारत का बुनियादी रुख शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का ही रहा है। इसका कारण सीधा है — भारत जानता है कि उसकी अपनी प्रगति तभी टिकाऊ होगी जब उसका पड़ोस शांत और समृद्ध होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भारत के कितने पड़ोसी देश हैं?

भारत के कुल 9 पड़ोसी देश हैं। इनमें 7 देशों (बांग्लादेश, चीन, पाकिस्तान, नेपाल, म्यांमार, भूटान, अफगानिस्तान) से स्थलीय सीमा और 2 देशों (श्रीलंका, मालदीव) से मुख्य जलीय सीमा लगती है।

भारत के पड़ोसी देश कौन-कौन से हैं और उनकी राजधानी क्या है?

बांग्लादेश-ढाका, चीन-बीजिंग, पाकिस्तान-इस्लामाबाद, नेपाल-काठमांडू, म्यांमार-नेपीताव, भूटान-थिम्पू, अफगानिस्तान-काबुल, श्रीलंका-श्री जयवर्धनेपुरा कोट्टे और मालदीव-माले।

भारत का सबसे बड़ा पड़ोसी देश कौन सा है?

क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा पड़ोसी देश चीन है, जिसका क्षेत्रफल लगभग 95.97 लाख वर्ग किलोमीटर है।

क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे छोटा पड़ोसी देश कौन सा है?

मालदीव, जिसका क्षेत्रफल लगभग 300 वर्ग किलोमीटर है। यह एशिया का भी सबसे छोटा देश है। स्थलीय पड़ोसियों में सबसे छोटा देश भूटान है।

भारत की सबसे लंबी और सबसे छोटी सीमा किस देश से लगती है?

सबसे लंबी स्थलीय सीमा बांग्लादेश से लगती है, जो 4,096.7 किलोमीटर है। सबसे छोटी सीमा अफगानिस्तान से है, जो केवल 106 किलोमीटर है।

भारत के जलीय पड़ोसी देश कौन से हैं?

श्रीलंका और मालदीव भारत के मुख्य जलीय पड़ोसी देश हैं। श्रीलंका को भारत से पाक जलसंधि अलग करती है और मालदीव को 8 डिग्री चैनल।

भारत के कितने राज्य पड़ोसी देशों की सीमा से जुड़े हैं?

कुल 16 राज्य और 2 केंद्र शासित प्रदेश (जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख) अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े हैं। पश्चिम बंगाल, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश — ये तीन राज्य तीन-तीन देशों से सीमा साझा करते हैं।

क्या इंडोनेशिया भारत का पड़ोसी देश है?

इंडोनेशिया भारत का समुद्री पड़ोसी है। ग्रेट निकोबार द्वीप और इंडोनेशिया के सुमात्रा के बीच की दूरी लगभग 160 किलोमीटर है और दोनों को ग्रेट चैनल अलग करता है। लेकिन इसे मुख्य 9 पड़ोसी देशों में नहीं गिना जाता।

भारत-चीन सीमा की रक्षा कौन सा बल करता है?

भारत-चीन सीमा की सुरक्षा ITBP (भारत-तिब्बत सीमा पुलिस) करती है। भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमा पर BSF, भारत-नेपाल तथा भारत-भूटान सीमा पर SSB, और भारत-म्यांमार सीमा पर असम राइफल्स तैनात रहती है।

Nitin Tiwari
✍️ लेखक

Nitin Tiwari

नितिन तिवारी GKGSNotes.com के संस्थापक और मुख्य लेखक हैं। उन्होंने गणित में B.Sc. और भूगोल में M.A. की डिग्री प्राप्त की है तथा D.El.Ed (2017 बैच) भी किया है। इसके अलावा उन्हें 5 वर्षों का शिक्षण अनुभव भी है, जिससे वे छात्रों की जरूरतों और परीक्षा की चुनौतियों को गहराई से समझते हैं। उत्तर प्रदेश से संबंध रखने वाले नितिन जी को भूगोल, इतिहास और सामान्य ज्ञान विषयों में गहरी रुचि है। उनका लक्ष्य है कि हिंदी माध्यम के छात्रों को UPSC, UPPSC, SSC, UP Police जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उच्च गुणवत्ता की अध्ययन सामग्री बिल्कुल निःशुल्क मिले।

3 thoughts on “भारत के पड़ोसी देश (Bharat ke Padosi Desh): सीमाएं, राजधानी और प्रमुख विवाद (Maps & Notes)”

  1. बहुत अच्छा notes बनाया गया है | ऐसे ही notes की मुझे जरूरत थी |आपका बहुत बहुत धन्यवाद 🙏 | ऐसे ही अच्छे अच्छे नोट्स आप मेरे whatsapp पर send करे 9161680443

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