सिंधु नदी तंत्र: उद्गम, लंबाई, सहायक नदियां और मानचित्र | Sindhu Nadi Tantra

सिंधु नदी तिब्बत में मानसरोवर झील के पास कैलाश पर्वत श्रृंखला के बोखर-चू हिमनद से निकलती है और पाकिस्तान में कराची के निकट अरब सागर में जाकर गिरती है। इसकी कुल लंबाई 2,880 किलोमीटर है, जिसमें से 1,114 किलोमीटर भारत में पड़ता है। चेनाब इसकी सबसे बड़ी सहायक नदी है, और इसी की सहायक नदियों से मिलकर पूरा सिंधु नदी तंत्र बनता है।

भारत और दक्षिण एशिया के सबसे प्राचीन नदी तंत्रों में से एक, सिंधु नदी तंत्र (Sindhu Nadi Tantra), सिंधु नदी और उसकी दर्जनों सहायक नदियों से मिलकर बना है। सिंधु नदी को अंग्रेजी में Indus River कहा जाता है, और इसी नदी के नाम पर भारतीय उपमहाद्वीप तथा हिंदू धर्म तक का नामकरण जुड़ा माना जाता है। इस लेख में हम सिंधु नदी के उद्गम से लेकर उसके मुहाने तक, और उसके पूरे नदी तंत्र को विस्तार से समझेंगे।

Sindhu nadi tantra

Contents hide

सिंधु नदी तंत्र: एक नज़र में

विवरणमहत्वपूर्ण जानकारी
नदी का नामसिंधु नदी (Indus River)
प्राचीन/वैदिक नामसिंधु
उद्गम स्थलबोखर-चू हिमनद / ‘सिंघी खंबन’ (मानसरोवर झील के पास, तिब्बत)
उद्गम की ऊंचाईलगभग 4,164 मीटर (कैलाश पर्वत श्रृंखला)
मुहानाअरब सागर (कराची, पाकिस्तान के निकट)
कुल लंबाई2,880 किलोमीटर
भारत में लंबाई1,114 किलोमीटर
भारत में प्रवेश / निकासदमचौक (प्रवेश) / चिल्लास (निकास)
प्रवाह की दिशापहले उत्तर-पश्चिम, नंगा पर्वत के बाद दक्षिण की ओर
प्रवाहित देशचीन (तिब्बत), भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान
भारत में राज्य / केंद्र शासित प्रदेशलद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और चंडीगढ़
कुल अपवाह क्षेत्र11,65,500 वर्ग किलोमीटर
भारत में अपवाह क्षेत्र3,21,289 वर्ग किलोमीटर (देश के क्षेत्रफल का लगभग 9.8%)
नदी का प्रकारपूर्ववर्ती नदी (Antecedent River)
सबसे बड़ी सहायक नदीचेनाब नदी (जल प्रवाह की दृष्टि से)
सबसे लंबी सहायक नदीसतलज नदी (लगभग 1,450 किलोमीटर)
पंचनद (बाएं से मिलने वाली)झेलम, चेनाब, रावी, व्यास, सतलज
दाएं से मिलने वाली नदियांश्योक, काबुल, कुर्रम, गोमल, गिलगित
प्रमुख जल समझौतासिंधु जल समझौता (19 सितंबर 1960, कराची)

सिंधु नदी तंत्र (Sindhu Nadi Tantra): का सामान्य परिचय

सिंधु नदी तंत्र विश्व के सबसे विशाल नदी तंत्रों में से एक है, जिसका कुल जल ग्रहण क्षेत्र लगभग 11.65 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यह तंत्र दक्षिण एशिया के भौगोलिक, कृषि और सांस्कृतिक परिदृश्य को निर्णायक रूप से प्रभावित करता है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार भारत में इसका अपवाह क्षेत्र 3,21,289 वर्ग किलोमीटर है, जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 9.8% बैठता है। यह क्षेत्र लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी हिस्सों से लेकर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और चंडीगढ़ के मैदानी भागों तक फैला हुआ है। ऊपरी भाग में जहां संकरी घाटियां और पर्वत श्रेणियां हैं, वहीं निचला भाग देश के सबसे उपजाऊ मैदानों में गिना जाता है।

  • यह नदी तंत्र, इस तंत्र की सबसे प्रमुख नदी सिंधु नदी और उसकी सभी सहायक नदियों से मिलकर बनता है।
  • सिंधु नदी तंत्र में निम्न नदियां आती हैं- सिंधु, झेलम, चेनाब, रावी, व्यास, सतलज, श्योक, जास्कर, नुब्रा, गलवान, गिलगित, काबुल, कुर्रम, गोमल आदि।
  • सिंधु नदी तंत्र (Sindhu Nadi tantra) का अपवाह क्षेत्र तिब्बत (चीन), भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में फैला हुआ है।
  • सिंधु नदी तंत्र की अधिकांश नदियां हिमालय क्षेत्र से निकलती हैं, जबकि काबुल जैसी कुछ नदियां हिंदूकुश पर्वत से निकलती हैं। श्योक और नुब्रा का उद्गम काराकोरम श्रेणी में होता है।
  • सिंधु और उसकी अधिकतर सहायक नदियों के जल का स्रोत ग्लेशियर हैं, इसलिए यह नदियां वर्षवाहिनी (सदानीरा) हैं, यानी इनमें पूरे साल पानी बना रहता है।
  • सिंधु नदी एक पूर्ववर्ती नदी है, अर्थात यह हिमालय के निर्माण से पहले से बह रही है और पर्वत उठने के साथ-साथ इसने अपना मार्ग काटकर बनाए रखा।
  • सिंधु की सहायक नदियों को दो वर्गों में बांटा जाता है— बाएं तट की नदियां (झेलम, चेनाब, रावी, व्यास, सतलज) और दाएं तट की नदियां (श्योक, गिलगित, काबुल, कुर्रम, गोमल)।
  • चेनाब सिंधु की सबसे बड़ी सहायक नदी है, क्योंकि जल प्रवाह की दृष्टि से यह सबसे अधिक पानी लेकर आती है। वहीं सतलज सबसे लंबी सहायक नदी है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 1,450 किलोमीटर है। परीक्षा में यह अंतर अक्सर पूछा जाता है।
  • यह नदी तंत्र पाकिस्तान के शहर कराची के निकट अरब सागर में अपना जल गिराता है, जहाँ सिंधु नदी एक विशाल डेल्टा का निर्माण करती है।

सिंधु नदी (Sindhu Nadi)

सिंधु नदी का उद्गम स्थल कहाँ है?

सिंधु नदी तिब्बत में मानसरोवर झील के पास कैलाश पर्वत श्रृंखला पर स्थित बोखर-चू नामक ग्लेशियर से लगभग 4,164 मीटर की ऊंचाई पर निकलती है। तिब्बत में इस ग्लेशियर को ‘सिंघी खंबन’ या ‘शेर का मुंह’ के नाम से जाना जाता है। यही कारण है कि परीक्षा में जब पूछा जाए कि सिंधु नदी किस ग्लेशियर से निकलती है, तो उत्तर बोखर-चू हिमनद होता है।

तिब्बत में मानसरोवर झील और कैलाश पर्वत स्थित है। तिब्बत मे मानसरोवर झील के पास से तीन पूर्ववर्ती नदियों सिंधु, सतलज, और ब्रह्मपुत्र का उद्गम होता हैं। मानसरोवर झील के पास स्थित राक्षस / राकस ताल झील से सतलज नदी का, मानसरोवर झील के पश्चिम में कैलाश पर्वत श्रृंखला में स्थित बोखर-चू हिमनद से सिंधु नदी का और मानसरोवर के पूर्व में स्थित कैलाश पर्वत श्रृंखला के चेमायुंगडुंग हिमनद से ब्रह्मपुत्र नदी का उद्गम होता है।

sindhu nadi ka udgam sthal

सिंधु नदी एक पूर्ववर्ती नदी है, यानी यह नदी हिमालय पर्वत के निर्माण से पहले से बह रही है। जब हिमालय ऊपर उठा, तब भी यह नदी अपने पुराने मार्ग को काटती हुई बहती रही और यही कारण है कि यह पर्वत श्रेणियों को आर-पार काटती हुई दिखाई देती है। यह हिमालय की सबसे पश्चिमी नदी भी है।

सिंधु नदी का प्रवाह मार्ग: तिब्बत से अरब सागर तक

सिंधु नदी तिब्बत से निकलकर तिब्बत (चीन), भारत और पाकिस्तान से होकर बहती है और अंत में अरब सागर में गिरती है। इसकी कुल लंबाई 2,880 किलोमीटर है, जबकि भारत में इसकी लंबाई 1,114 किलोमीटर है। इसका पूरा प्रवाह मार्ग इस प्रकार है—

  • भारत में सिंधु नदी लद्दाख के दमचौक नामक स्थान से प्रवेश करती है और चिल्लास नामक स्थान से बाहर निकल जाती है।
  • दमचौक से प्रवेश करने के बाद यह लद्दाख श्रेणी को उत्तर से दक्षिण की ओर दुंग्ती नामक स्थान पर काटती है, और फिर लद्दाख तथा जास्कर श्रेणियों के मध्य उत्तर-पश्चिम दिशा में बहती है।
  • लेह के पास इसमें बाईं ओर से जास्कर नदी आकर मिलती है। खास बात यह है कि संगम स्थल पर जास्कर नदी सिंधु से ज्यादा पानी लेकर आती है।
  • इस संगम से थोड़ा आगे सिंधु नदी पर अलची के पास निम्मो बाजगो जल विद्युत परियोजना चल रही है, जो भारत की सबसे ऊंचाई पर स्थित जलविद्युत परियोजनाओं में से एक है।
  • आगे चलकर सिंधु नदी गिलगित के समीप बुंजी नामक स्थान पर लगभग 5,200 मीटर गहरे महाखड्ड (बुंजी गॉर्ज) का निर्माण करती है, जो विश्व के सबसे गहरे गॉर्जों में गिना जाता है। ध्यान रहे कि यह क्षेत्र वर्तमान में पाक अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान में पड़ता है।
  • नंगा पर्वत के पास सिंधु नदी अचानक दक्षिण की ओर मुड़ जाती है और पाकिस्तान में प्रवेश कर जाती है। यहीं इसका प्रवाह उत्तर-पश्चिम से बदलकर दक्षिण की ओर हो जाता है।
  • पाकिस्तान में अटक के पास इसमें दाईं ओर से काबुल नदी आकर मिलती है।
  • पाकिस्तान में मिथनकोट के पास सिंधु नदी में पंचनद (झेलम, चेनाब, रावी, व्यास और सतलज की संयुक्त धारा) बाईं ओर से आकर मिलता है।
  • पाकिस्तान में सिंधु नदी पर तरबेला बांध बनाया गया है, जो विश्व के सबसे बड़े मिट्टी भराव (earth-filled) बांधों में से एक है।

सिंधु नदी कहाँ गिरती है? (मुहाना और डेल्टा)

सिंधु नदी अपना जल पाकिस्तान के शहर कराची के निकट अरब सागर में गिराती है। यही इसका मुहाना है। समुद्र में मिलने से पहले यह नदी पाकिस्तान के सिंध प्रांत में एक विशाल डेल्टा का निर्माण करती है, जिसे सिंधु डेल्टा (Indus Delta) कहा जाता है।

यह डेल्टा लगभग 41,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और विश्व के सबसे बड़े डेल्टाओं में गिना जाता है। इसमें सत्रह से अधिक बड़ी खाड़ियां, दलदली भूमि और मैंग्रोव वन शामिल हैं। सिंधु डेल्टा के मैंग्रोव वन विश्व के सबसे बड़े शुष्क जलवायु वाले मैंग्रोव वन माने जाते हैं, जो चक्रवात और समुद्री कटाव के विरुद्ध प्राकृतिक ढाल का काम करते हैं। ऊपरी भाग में बड़े बांधों और नहरों के कारण डेल्टा तक पहुंचने वाला ताजा पानी लगातार घटा है, जिससे यहां समुद्री जल का प्रवेश और मैंग्रोव का क्षरण एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या बन चुका है।

सिंधु नदी तंत्र मानचित्र (Sindhu Nadi Tantra Map)

नीचे दिया गया सिंधु नदी तंत्र का यह मानचित्र हमारी टीम द्वारा विशेष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं को ध्यान में रखकर स्वयं तैयार किया गया है। इसमें सिंधु नदी का उद्गम स्थल, उसका पूरा प्रवाह मार्ग, बाएं और दाएं तट की सभी प्रमुख सहायक नदियां तथा उन पर स्थित जल विद्युत परियोजनाओं को एक ही जगह दर्शाया गया है। नदी तंत्र जैसे विषय केवल पढ़कर याद नहीं होते, इन्हें मानचित्र पर देखकर ही ठीक से समझा जा सकता है, इसलिए लेख पढ़ते समय इस मानचित्र को साथ रखें।

Sindhu Nadi tantra map (सिंधु नदी तंत्र मानचित्र)
सिंधु नदी तंत्र मानचित्र

इस मानचित्र में क्या-क्या दर्शाया गया है?

  • सिंधु नदी का उद्गम स्थल (बोखर-चू हिमनद) और तिब्बत से अरब सागर तक का पूरा प्रवाह मार्ग
  • भारत में प्रवेश (दमचौक) और निकास (चिल्लास) के स्थान
  • बाएं तट की पांचों नदियां — झेलम, चेनाब, रावी, व्यास और सतलज, उनके उद्गम सहित
  • दाएं तट की नदियां — श्योक, जास्कर, गिलगित, काबुल, कुर्रम और गोमल
  • प्रमुख संगम स्थल — तांडी, हरिके, झंग, सराय सिंधु और मिथनकोट
  • प्रमुख जल विद्युत परियोजनाएं और बांध — भाखड़ा नांगल, पोंग, थीन, सलाल, बगलिहार, दुलहस्ती और निम्मो बाजगो

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य:

अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में सिंधु और उसकी सहायक (पंचनद) नदियों को भौगोलिक रूप से उत्तर से दक्षिण के क्रम में व्यवस्थित करने के लिए कहा जाता है। मानचित्र के अनुसार इनका बिल्कुल सही क्रम इस प्रकार है:

उत्तर से दक्षिण सही क्रम:
सिंधु ➔ झेलम ➔ चेनाब ➔ रावी ➔ व्यास ➔ सतलज

सिंधु नदी की सहायक नदियां (Sindhu Nadi Ki Sahayak Nadiyan)

सिंधु नदी की प्रमुख सहायक नदियां हैं— झेलम, चेनाब, रावी, व्यास, सतलज, श्योक, जास्कर, नुब्रा, गलवान, गिलगित, काबुल, कुर्रम और गोमल। इनमें से चेनाब जल प्रवाह की दृष्टि से सबसे बड़ी सहायक नदी है, जबकि सतलज सबसे लंबी। पढ़ने की सुविधा की दृष्टि से इन सहायक नदियों को दो भागों में बांटा जाता है—

  1. सिंधु नदी में बाएं ओर से मिलने वाली नदियां — झेलम, चेनाब, रावी, व्यास, सतलज और जास्कर
  2. सिंधु नदी में दाएं ओर से मिलने वाली नदियां — श्योक, गिलगित, काबुल, कुर्रम और गोमल
सिंधु नदी की सहायक नदियां - झेलम, चेनाब, रावी, व्यास, सतलज, श्योक, काबुल और गिलगित (Sindhu Nadi Ki Sahayak Nadiya)
सिंधु नदी की सहायक नदियां

सिंधु की प्रमुख सहायक नदियां: एक दृष्टि में

नदी का नामप्राचीन/अन्य नामउद्गम स्थल (Origin)मुहाना/संगम (Confluence)विशेष तथ्य / परियोजनाएं
झेलम वितस्तावेरीनाग चश्मा (पीर पंजाल की तलहटी, अनंतनाग)चेनाब नदी (झंग, पाकिस्तान)श्रीनगर इसी के किनारे स्थित है। तुलबुल और उरी परियोजना। वुलर झील से होकर बहती है।
चेनाब असिक्नी / चंद्रभागाबारालाचा दर्रा (लाहुल स्पीति, हिमाचल)सिंधु नदी (मिथनकोट, पाकिस्तान)जल प्रवाह की दृष्टि से यह सिंधु की सबसे बड़ी सहायक नदी है। सलाल, बगलिहार, दुलहस्ती और रतले परियोजनाएं। विश्व का सबसे ऊंचा रेल पुल।
रावी परुष्णी / इरावतीरोहतांग दर्रे के पश्चिम, कुल्लू पहाड़ियां (हिमाचल)चेनाब नदी (सराय सिंधु, पाकिस्तान)चंबा घाटी से होकर बहती है। पंजाब में थीन बांध (रंजीत सागर बांध)।
व्यास विपासाव्यास कुंड (रोहतांग दर्रे के पास, हिमाचल)सतलज नदी (हरिके, पंजाब)पूर्ण रूप से केवल भारत में बहती है। इसी के संगम से इंदिरा गांधी नहर निकलती है। पोंग डैम। भारत में सिंधु डॉल्फिन का एकमात्र आवास।
सतलज शतुद्री / शतद्रुराकस/राक्षस ताल (मानसरोवर के पास, तिब्बत)चेनाब नदी (पंजनद का निर्माण)सिंधु की सबसे लंबी सहायक नदी (लगभग 1,450 किमी)। शिपकीला दर्रे से भारत में प्रवेश। भाखड़ा नांगल, नाथपा झाकरी और कोल डैम।
जास्कर जास्कर श्रेणी (लद्दाख)सिंधु नदी (निम्मू, लेह के पास)संगम पर यह सिंधु से अधिक जल लेकर आती है। शीत ऋतु में यहीं प्रसिद्ध ‘चादर ट्रेक’ होता है।
श्योक रेमो ग्लेशियर (काराकोरम श्रेणी)सिंधु नदीनुब्रा और गलवान इसकी सहायक हैं। रेमो ग्लेशियर को ‘सियाचिन की जीभ’ कहते हैं।
गिलगित घिज़र नदीशंदूर झील (गिलगित-बाल्टिस्तान)सिंधु नदी (बुंजी के पास)हुंजा इसकी प्रमुख सहायक नदी है। गिलगित शहर इसी के किनारे बसा है।
काबुल कुभा (वैदिक नाम)संगलाख़ श्रृंखला (हिंदूकुश पर्वत, अफगानिस्तान)सिंधु नदी (अटक, पाकिस्तान के पास)अफगानिस्तान की राजधानी काबुल इसी नदी के तट पर स्थित है।
कुर्रम क्रुमु (वैदिक नाम)सफेद कोह पर्वत (अफगानिस्तान)सिंधु नदी (पाकिस्तान)यह काबुल नदी के दक्षिण में सिंधु से मिलती है।
गोमल गोमती (वैदिक नाम)पक्तिका प्रांत, गजनी के दक्षिण-पूर्व (अफगानिस्तान)सिंधु नदी (डेरा इस्माइल खान के पास)झोब इसकी प्रमुख सहायक है। इसी नदी के नाम पर प्रसिद्ध गोमल दर्रा है।
किशनगंगानीलम नदी (पाकिस्तान में)किशनगंगा घाटी (जम्मू-कश्मीर)झेलम नदी (मुजफ्फराबाद के पास)भारत-पाकिस्तान के बीच इसके जल को लेकर विवाद (किशनगंगा परियोजना)।

सिंधु नदी में बाएं ओर से मिलने वाली नदियां

(1) झेलम नदी

1- उद्गमझेलम नदी कश्मीर घाटी के दक्षिण-पूर्वी भाग में, पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला की पदस्थली में स्थित वेरीनाग चश्मे से निकलती है। यह स्थान जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में पड़ता है। ध्यान रखें कि यह एक प्राकृतिक जलस्रोत (चश्मा) है, कोई झील नहीं।

2- उत्तर-पश्चिम दिशा में प्रवाहित होते हुए यह वुलर झील से होकर निकलती है। वुलर झील जम्मू-कश्मीर में स्थित है और इसे भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील माना जाता है। यह एक रामसर आर्द्रभूमि भी है।

3- जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर झेलम नदी के किनारे स्थित है। डल झील और श्रीनगर के प्रसिद्ध पुल इसी नदी से जुड़े हैं।

4- आगे चलकर झेलम नदी पाक अधिकृत कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद के पास से दक्षिण की ओर मुड़ जाती है और कुछ दूरी तक भारत और पाकिस्तान की सीमा निर्धारित करती है।

5- झेलम नदी का प्राचीन/वैदिक नाम वितस्ता है। ग्रीक इसे ‘हाइडेस्पीज’ कहते थे, और इसी नदी के तट पर 326 ईसा पूर्व में सिकंदर और पोरस के बीच प्रसिद्ध हाइडेस्पीज का युद्ध लड़ा गया था।

6- झेलम नदी की सबसे प्रमुख सहायक नदी किशनगंगा नदी है, जिसे पाकिस्तान में ‘नीलम नदी’ के नाम से जाना जाता है। इस नदी पर जम्मू-कश्मीर (भारत) में ‘किशनगंगा जल विद्युत परियोजना’ स्थित है। इसके जल बंटवारे (सिंधु जल समझौते) को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच का विवाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अक्सर चर्चा में रहता है, इसलिए यह परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

7- झेलम नदी पाकिस्तान में झंग नामक स्थान पर चेनाब नदी से मिल जाती है।

8- यह कश्मीर की सबसे महत्वपूर्ण नदी है। जम्मू-कश्मीर में झेलम नदी पर तुलबुल और उरी परियोजनाएं चल रही हैं।

(2) चेनाब नदी

1- चेनाब नदी का प्राचीन/वैदिक नाम असिक्नी है। जल प्रवाह की दृष्टि से यह सिंधु नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी है।

2- उद्गम– चेनाब नदी हिमाचल प्रदेश में जास्कर श्रेणी के लाहुल-स्पीति खंड में बारालाचा दर्रे के पास से दो शाखाओं चंद्र और भागा के रूप में निकलती है। चंद्र नदी चंद्र ताल से और भागा नदी सूर्य ताल से निकलती है। चंद्र और भागा का संगम हिमाचल प्रदेश के तांडी में होता है, इसी कारण चेनाब नदी को चंद्रभागा के नाम से भी जाना जाता है।

3- चेनाब नदी अपने साथ झेलम और रावी का जल लेकर सतलज से मिलती है, और इनकी संयुक्त धारा (पंचनद) पाकिस्तान के मिथनकोट नामक स्थान पर सिंधु नदी में जाकर मिल जाती है।

4- झेलम और रावी सीधे चेनाब में मिलती हैं, जबकि व्यास सतलज में मिलती है। इसी कारण पंचनद की सारी धाराएं अंततः चेनाब और सतलज के माध्यम से एक हो जाती हैं।

5- चेनाब नदी पर सलाल, बगलिहार, दुलहस्ती और रतले आदि प्रमुख जल विद्युत परियोजनाएं स्थापित की गई हैं। इनमें से रतले परियोजना को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद चल रहा है।

6- विश्व का सबसे ऊंचा रेल ब्रिज (चिनाब रेल पुल) चेनाब नदी पर जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में बनाया गया है। यह पुल नदी तल से लगभग 359 मीटर ऊंचा है, जो एफिल टॉवर से भी अधिक है।

(3) रावी नदी

1- रावी नदी का प्राचीन/वैदिक नाम परुष्णी है, जिसे इरावती भी कहा जाता है। यह चेनाब नदी की एक प्रमुख सहायक नदी है। ऋग्वेद में वर्णित प्रसिद्ध दाशराज्ञ युद्ध इसी नदी के तट पर लड़ा गया था।

2- उद्गम– रावी नदी हिमाचल प्रदेश की कुल्लू पहाड़ियों में रोहतांग दर्रे के पश्चिम से निकलती है। इसी दर्रे के पास स्थित व्यास कुंड से व्यास नदी निकलती है। आगे चलकर रावी हिमाचल के चंबा जिले से होकर बहती है।

3- रावी नदी हिमाचल प्रदेश की चंबा घाटी में बहती है।

4- रावी नदी पीर पंजाल श्रेणी और धौलाधार श्रेणी के मध्य प्रवाहित होती है तथा धौलाधार श्रेणी को उत्तर से दक्षिण की ओर काटते हुए महाखड्ड (गार्ज) का निर्माण करती है।

5- पंजाब में रावी नदी मैदानी भाग में प्रवेश करती है और कुछ दूरी तक भारत-पाक सीमा के साथ-साथ बहती है। पाकिस्तान का प्रसिद्ध शहर लाहौर इसी नदी के किनारे बसा है, इसीलिए इसे ‘लाहौर की नदी’ भी कहा जाता है।

6- पंजाब के पठानकोट जिले में रावी नदी पर थीन बांध (रंजीत सागर बांध) परियोजना स्थित है।

7- रावी नदी पाकिस्तान में सराय सिंधु के निकट चेनाब नदी से मिल जाती है।

(4) व्यास नदी

1- व्यास नदी का प्राचीन/वैदिक नाम विपासा है। यह सतलज नदी की सहायक नदी है।

2- उद्गम– व्यास नदी का उद्गम हिमाचल प्रदेश की कुल्लू पहाड़ी में स्थित रोहतांग दर्रे के दक्षिणी किनारे पर स्थित व्यास कुंड से होता है।

3- यह नदी कुल्लू घाटी से होकर गुजरती है और धौलाधार श्रेणी में काती तथा लारगी में महाखड्ड का निर्माण करती है। इसके बाद यह कांगड़ा घाटी में बहती है।

4- पंजाब में हरिके नामक स्थान पर व्यास नदी सतलज नदी से मिलती है। व्यास और सतलज के इसी संगम पर हरिके बैराज बनाया गया है, और इसी बैराज से इंदिरा गांधी नहर निकलती है, जो भारत की सबसे लंबी नहर है।

5- हरिके बैराज के पीछे हरिके नामक कृत्रिम झील का निर्माण हुआ है, जो एक रामसर आर्द्रभूमि है।

6- पंचनद की पांच नदियों में से केवल व्यास नदी ऐसी है जिसका संपूर्ण प्रवाह भारत में ही है।

7- सिंधु डॉल्फिन (Indus River Dolphin) भारत में केवल व्यास नदी में पाई जाती है, किसी अन्य भारतीय नदी में नहीं। लंबे समय तक इसे भारत से विलुप्त मान लिया गया था, परंतु 2007 में हरिके और निचली व्यास में इसकी आबादी दोबारा खोजी गई। यह पंजाब का राज्य जलीय जीव है, और 2018 में तलवाड़ा से हरिके तक के लगभग 185 किलोमीटर के हिस्से को ब्यास संरक्षण रिजर्व घोषित किया गया, जो देश का सबसे बड़ा नदी संरक्षण रिजर्व है।

8- हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में व्यास नदी पर पोंग डैम बनाया गया है, जिसे व्यास बांध भी कहा जाता है। यह भी एक रामसर स्थल है।

(5) सतलज नदी

1- सतलज नदी का प्राचीन/वैदिक नाम शतुद्री (शतद्रु) है। लगभग 1,450 किलोमीटर लंबाई के साथ यह सिंधु नदी तंत्र की सबसे लंबी सहायक नदी है और पंचनद की पांचों नदियों में सबसे लंबी भी।

2- उद्गम– सतलज नदी तिब्बत की मानसरोवर झील के पास स्थित राकस/राक्षस ताल झील से निकलती है। सिंधु और ब्रह्मपुत्र की तरह यह भी एक पूर्ववर्ती नदी है।

3- सतलज नदी भारत-चीन सीमा पर हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित शिपकीला दर्रे से भारत में प्रवेश करती है।

4- सतलज नदी पर भाखड़ा नांगल परियोजना चल रही है। इस परियोजना के तहत हिमाचल प्रदेश में भाखड़ा बांध और पंजाब में नांगल बांध बनाया गया है। भाखड़ा बांध के पीछे गोविंद सागर झील का निर्माण होता है, जो हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित है।

5- हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित भाखड़ा बांध भारत का सबसे ऊंचा गुरुत्व बांध है, जिसकी ऊंचाई लगभग 226 मीटर है। इसे प्रायः ‘विश्व का सबसे ऊंचा सीधा गुरुत्व बांध (straight gravity dam)’ भी कहा जाता है। ध्यान दें कि विश्व का सबसे ऊंचा गुरुत्व बांध स्विट्जरलैंड का ग्रैंड डिक्सेंस (लगभग 285 मीटर) है। परीक्षा में विकल्प देखकर उत्तर चुनें।

6- नाथपा झाकरी परियोजना, कोल डैम परियोजना और सरहिंद परियोजना सतलज नदी पर स्थित अन्य परियोजनाएं हैं।

7- व्यास नदी सतलज की सहायक नदी है, जो पंजाब के हरिके नामक स्थान पर सतलज से मिलती है। आगे पाकिस्तान में सतलज चेनाब से मिलकर पंजनद का निर्माण करती है।

(6) जास्कर नदी

1- जास्कर नदी लद्दाख में जास्कर श्रेणी से निकलती है और लेह के पास निम्मू नामक स्थान पर बाईं ओर से सिंधु नदी में मिल जाती है।

2- संगम स्थल पर जास्कर नदी सिंधु नदी से अधिक जल लेकर आती है, जो इसे भौगोलिक दृष्टि से विशेष बनाता है।

3- शीत ऋतु में जब यह नदी जम जाती है, तब इसकी बर्फ पर प्रसिद्ध चादर ट्रेक किया जाता है।

सिंधु नदी में दाएं ओर से मिलने वाली सहायक नदियां

(1) श्योक नदी

1- उद्गम– श्योक नदी काराकोरम श्रेणी में स्थित रेमो ग्लेशियर से निकलती है।

2- रेमो ग्लेशियर काराकोरम श्रेणी पर सियाचिन ग्लेशियर के दाईं ओर स्थित है।

3- रेमो ग्लेशियर को ‘सियाचिन ग्लेशियर की जीभ’ कहा जाता है।

4- नुब्रा नदी और गलवान नदी श्योक नदी की सहायक नदियां हैं। नुब्रा नदी सियाचिन ग्लेशियर से निकलती है और लद्दाख की प्रसिद्ध नुब्रा घाटी इसी के नाम पर है।

5- गलवान नदी अक्साई चिन क्षेत्र से निकलकर श्योक में मिलती है। 2020 में भारत-चीन तनाव के कारण गलवान घाटी अंतरराष्ट्रीय चर्चा में रही थी।

(2) काबुल नदी

1- काबुल नदी अफगानिस्तान में हिंदूकुश पर्वत की संगलाख़ श्रृंखला से निकलती है। इसका वैदिक नाम कुभा है।

2- काबुल नदी पाकिस्तान के अटक नामक शहर के पास सिंधु नदी से मिल जाती है।

3- काबुल नदी पूर्वी अफगानिस्तान की मुख्य नदी है और सिंधु की सबसे महत्वपूर्ण दाएं तट की सहायक नदी मानी जाती है।

4- अफगानिस्तान की राजधानी काबुल इसी नदी के तट पर स्थित है।

5- स्वात नदी और कुनार नदी काबुल नदी की सहायक नदियां हैं।

6- स्वात नदी घाटी को ‘पाकिस्तान का स्विट्जरलैंड’ कहा जाता है।

(3) गिलगित नदी

1- गिलगित नदी गिलगित-बाल्टिस्तान (पाक अधिकृत क्षेत्र) में स्थित शंदूर झील से निकलती है, जो शंदूर दर्रे के पास है।

2- इसके ऊपरी भाग को घिज़र नदी (Ghizer River) के नाम से भी जाना जाता है।

3- हुंजा नदी इसकी सबसे प्रमुख सहायक नदी है, जो गिलगित शहर के पास इसमें मिलती है।

4- गिलगित शहर इसी नदी के किनारे स्थित है। लगभग 240 किलोमीटर बहने के बाद यह नदी बुंजी के पास सिंधु नदी में मिल जाती है।

(4) कुर्रम नदी

1- कुर्रम नदी अफगानिस्तान के सफेद कोह पर्वत क्षेत्र से निकलती है। इसका वैदिक नाम क्रुमु है।

2- यह पाकिस्तान में काबुल नदी के दक्षिण में सिंधु नदी से मिल जाती है।

(5) गोमल नदी

1- गोमल नदी अफगानिस्तान के पक्तिका प्रांत में, गजनी के दक्षिण-पूर्वी पहाड़ी क्षेत्र से निकलती है। इसका वैदिक नाम गोमती माना जाता है।

2- लगभग 400 किलोमीटर बहने के बाद यह पाकिस्तान के डेरा इस्माइल खान के पास सिंधु नदी में मिल जाती है।

3- झोब नदी इसकी प्रमुख सहायक नदी है।

4- इसी नदी के नाम पर गोमल दर्रा है, जो खैबर दर्रे और बोलन दर्रे के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण दर्रा है और अफगानिस्तान को पाकिस्तान से जोड़ता है।

पंचनद क्या है?

‘पंजाब’ शब्द मुख्य रूप से दो शब्दों ‘पंज’ (पांच) + ‘आब’ (पानी/नदी) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है— ‘पांच नदियों की भूमि’। भारत और पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र में बहने वाली सिंधु की पांच प्रमुख सहायक नदियों के समूह को ही ‘पंचनद’ कहा जाता है।

  • पंचनद की नदियां (उत्तर से दक्षिण क्रम में): झेलम, चेनाब, रावी, व्यास और सतलज।
  • इन पांचों नदियों में चेनाब नदी सबसे प्रमुख और विशाल है, जिसमें अन्य चारों नदियां आकर अपना जल मिलाती हैं।
  • पाकिस्तान में जहां सतलज और चेनाब का संगम होता है, वहां से आगे इस संयुक्त धारा को पंजनद नदी (Panjnad River) कहा जाता है।
  • यह संयुक्त धारा पाकिस्तान के मिथनकोट नामक स्थान पर सिंधु नदी में बाईं ओर से जाकर मिल जाती है।
  • नदियों द्वारा लाई गई उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी और प्रचुर जल की उपलब्धता के कारण पंचनद का यह पूरा क्षेत्र कृषि की दृष्टि से अत्यधिक उपजाऊ माना जाता है।

पंचनद के प्रमुख ‘दोआब’

दो नदियों के बीच के उपजाऊ मैदानी भाग को ‘दोआब’ कहा जाता है। सिंधु नदी तंत्र (विशेषकर पंचनद) में 5 प्रमुख दोआब पाए जाते हैं, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

इन्हें याद रखना बहुत आसान है क्योंकि अधिकतर दोआबों के नाम उनके बीच बहने वाली नदियों के पहले अक्षरों से मिलकर बने हैं:

दोआब का नामकिन नदियों के मध्य स्थित है?याद रखने की ट्रिक
बिस्त दोआबव्यास और सतलजबि (व्यास) + स्त (सतलज)
बारी दोआबव्यास और रावीबा (व्यास) + री (रावी)
रेचना दोआबरावी और चेनाबरे (रावी) + चना (चेनाब)
चाज / छाज दोआबचेनाब और झेलमचा (चेनाब) + (झेलम)
सिंध सागर दोआबझेलम और सिंधुसिंधु और झेलम नदी के बीच का क्षेत्र

सिंधु जल समझौता (Indus Water Treaty – 1960)

सिंधु नदी तंत्र के जल बंटवारे को लेकर भारत और पाकिस्तान के मध्य एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है, जिसे सिंधु जल समझौता कहा जाता है। परीक्षा की दृष्टि से इसके निम्नलिखित बिंदु अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:

  • समझौते की तिथि और स्थान: इस समझौते पर 19 सितंबर 1960 को पाकिस्तान के शहर कराची में हस्ताक्षर किए गए थे।
  • हस्ताक्षरकर्ता: भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने इस पर हस्ताक्षर किए थे।
  • मध्यस्थता: इस समझौते को संपन्न कराने में विश्व बैंक ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। विश्व बैंक की ओर से इस पर इसके उपाध्यक्ष डब्ल्यू. ए. बी. इलिफ ने हस्ताक्षर किए थे।
  • वार्ता की अवधि: यह समझौता अचानक नहीं हुआ, बल्कि इससे पहले लगभग नौ वर्षों तक दोनों देशों के बीच बातचीत चली थी।

एक आम भ्रम दूर कीजिए: कराची या रावलपिंडी?

इंटरनेट पर कई जगह लिखा मिलता है कि सिंधु जल समझौते पर रावलपिंडी में हस्ताक्षर हुए थे। यह गलत है। भ्रम इसलिए होता है क्योंकि 1959 से 1967 तक इस्लामाबाद के निर्माण के दौरान रावलपिंडी पाकिस्तान की अंतरिम राजधानी थी। लेकिन हस्ताक्षर समारोह कराची में हुआ था, और स्वयं संधि के मूल पाठ के अंत में लिखा है कि यह 19 सितंबर 1960 को कराची में सम्पन्न हुई। संयुक्त राष्ट्र की संधि सूची (UN Treaty Series) में भी इसे ‘Signed at Karachi’ दर्ज किया गया है। परीक्षा में उत्तर कराची ही होगा।

जल बंटवारे का नियम (80:20 का नियम)

इस समझौते के तहत सिंधु नदी तंत्र की 6 प्रमुख नदियों को दो भागों— पूर्वी और पश्चिमी नदियों में बांटा गया:

  1. पूर्वी नदियां (रावी, व्यास और सतलज): इन तीन नदियों के जल के उपयोग पर भारत को पूर्ण अधिकार दिया गया है। भारत इनके पानी का बिना किसी रोक-टोक के इस्तेमाल कर सकता है।
  2. पश्चिमी नदियां (सिंधु, चेनाब और झेलम): इन तीन नदियों का जल मुख्य रूप से पाकिस्तान के उपयोग के लिए निर्धारित किया गया। भारत इन नदियों पर गैर-उपभोगी उपयोग कर सकता है, यानी बहते पानी से बिजली बनाना (रन-ऑफ-द-रिवर परियोजनाएं), सीमित सिंचाई, मत्स्य पालन और घरेलू उपयोग। भारत इनका पानी बड़े पैमाने पर रोककर जमा नहीं कर सकता।

80:20 का अर्थ क्या है? इस बंटवारे के परिणामस्वरूप पूरे सिंधु नदी तंत्र के कुल जल का लगभग 80% हिस्सा पाकिस्तान के पास और लगभग 20% भारत के पास आता है। ध्यान रखने योग्य बात यह है कि यह अनुपात पूरे नदी तंत्र के जल का है, केवल पश्चिमी नदियों का नहीं। पश्चिमी नदियों पर भारत को 20% पानी नहीं, बल्कि सीमित और शर्तों के साथ उपयोग का अधिकार मिला है। परीक्षा में यह अंतर कई बार भ्रम पैदा करता है।

सिंधु जल समझौता: विवाद और ऐतिहासिक निलंबन (2025-26)

प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से सिंधु जल समझौते से जुड़े हालिया घटनाक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। पिछले दो वर्षों में इस संधि को लेकर वह सब हुआ है, जो पिछले 65 वर्षों में कभी नहीं हुआ था।

  • विवाद का मुख्य कारण: यह विवाद मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर में बन रही भारत की दो जल विद्युत परियोजनाओं— किशनगंगा (किशनगंगा नदी पर) और रतले (चेनाब नदी पर) को लेकर शुरू हुआ। पाकिस्तान ने इन परियोजनाओं के तकनीकी डिजाइन पर आपत्ति जताई, जबकि भारत का कहना है कि ये परियोजनाएं संधि के दायरे में ही हैं।
  • दोहरी प्रक्रिया पर टकराव: पाकिस्तान यह विवाद हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) में ले गया, जबकि भारत ने संधि की व्यवस्था के अनुसार तटस्थ विशेषज्ञ (Neutral Expert) की प्रक्रिया को सही माना। भारत का तर्क है कि संधि के अनुसार एक ही समय में दो अलग-अलग प्रक्रियाएं नहीं चल सकतीं, इसलिए विश्व बैंक द्वारा गठित यह मध्यस्थता न्यायालय ही अवैध है। भारत ने कभी इसकी कार्यवाही में भाग नहीं लिया।
  • पहलगाम हमला और संधि का निलंबन: 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के अगले ही दिन भारत ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए इस संधि को निलंबित (Abeyance) कर दिया। यह 65 वर्षों में पहली बार हुआ, क्योंकि 1965, 1971 और 1999 (कारगिल) के युद्धों के दौरान भी यह संधि नहीं रोकी गई थी।
  • भारत का रुख: भारत ने स्पष्ट किया है कि जब तक पाकिस्तान सीमा-पार आतंकवाद के लिए अपने समर्थन को “विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से” समाप्त नहीं करता, तब तक यह संधि निलंबित ही रहेगी।
  • न्यायालय के फैसले और भारत की अस्वीकृति: जून 2025 और अगस्त 2025 में मध्यस्थता न्यायालय ने अपने फैसले सुनाए, जिन्हें भारत ने हर बार अस्वीकार किया। सबसे ताज़ा फैसला 31 अगस्त 2026 को आया, जिसमें न्यायालय ने कहा कि निलंबन के लिए दिए गए कारण संधि को स्थगित या समाप्त करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं, अतः संधि अब भी प्रभावी है और भारत को पश्चिमी नदियों पर अपनी परियोजनाओं के डिजाइन तथा संचालन से जुड़े दायित्व निभाने होंगे। न्यायालय ने रतले परियोजना की कुछ निर्माण गतिविधियों पर अस्थायी रोक भी लगाई।
  • भारत की प्रतिक्रिया: विदेश मंत्रालय ने इसी दिन जारी बयान में इस न्यायालय को “अवैध रूप से गठित” बताते हुए फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया। मंत्रालय ने कहा कि इस निकाय को भारत के संप्रभु निर्णयों पर फैसला सुनाने का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है, और भारत की परियोजनाओं पर इसके किसी भी वर्तमान या भविष्य के आदेश का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। भारत ने दोहराया कि संधि निलंबित (abeyance) में ही बनी रहेगी
  • वर्तमान स्थिति: इस प्रकार आज स्थिति यह है कि एक ओर मध्यस्थता न्यायालय संधि को प्रभावी मानता है, वहीं दूसरी ओर भारत न तो न्यायालय की वैधता स्वीकार करता है और न ही संधि के दायित्वों से स्वयं को बंधा हुआ मानता है। इस मुद्दे पर आगे के घटनाक्रम प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से देखते रहना जरूरी है।

सिंधु नदी तंत्र (Indus River System): विस्तृत माइंड मैप

इस पूरे आर्टिकल के ‘क्विक रिवीजन’ के लिए हमने यहाँ ‘सिंधु नदी तंत्र’ का एक विस्तृत माइंड मैप साझा किया है। इस चार्ट की मदद से आप नदी के उद्गम स्थल, पंचनद की नदियों (झेलम, चेनाब, रावी, व्यास, सतलज), और दाईं तथा बाईं ओर से मिलने वाली प्रमुख सहायक नदियों का आसानी से रिवीजन कर सकते हैं। इसके अलावा, इसमें ‘सिंधु जल समझौता (1960)’ जैसे महत्वपूर्ण परीक्षा-उपयोगी तथ्यों को भी शामिल किया गया है। पूरे विषय को गहराई से समझने के लिए हमारे विस्तृत नोट्स का अध्ययन अवश्य करें।

Sindhu Nadi Tantra Mind Map for Geography Revision
सिंधु नदी तंत्र और सहायक नदियां – क्विक रिवीजन माइंड मैप

सिंधु नदी तंत्र: हाई-क्वालिटी PDF माइंड मैप डाउनलोड करें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. सिंधु नदी कहाँ से निकलती है (उद्गम स्थल)?

उत्तर: सिंधु नदी तिब्बत में मानसरोवर झील के पास कैलाश पर्वत श्रृंखला में स्थित ‘बोखर-चू’ हिमनद (ग्लेशियर) से निकलती है। तिब्बत में इस उद्गम स्थल को ‘सिंघी खंबन’ या ‘शेर का मुंह’ भी कहा जाता है।

2. सिंधु नदी की कुल लंबाई कितनी है?

उत्तर: सिंधु नदी की कुल लंबाई लगभग 2,880 किलोमीटर है। यदि बात केवल भारत की करें, तो भारत में सिंधु नदी की लंबाई 1,114 किलोमीटर है।

3. सिंधु नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी कौन सी है?

उत्तर: सिंधु नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी चेनाब नदी है। यह हिमाचल प्रदेश के बारालाचा दर्रे से निकलती है और पाकिस्तान के मिथनकोट में जाकर सिंधु नदी (पंचनद के रूप में) से मिल जाती है।

4. सिंधु नदी अपना जल कहाँ गिराती है (मुहाना)?

उत्तर: सिंधु नदी तिब्बत और भारत से बहते हुए अंत में पाकिस्तान पहुँचती है और पाकिस्तान के शहर कराची के निकट अरब सागर में अपना जल गिराती है। यहाँ यह एक विशाल डेल्टा का निर्माण करती है।

5. सिंधु नदी कहाँ है और यह किन देशों में बहती है?

उत्तर: सिंधु नदी दक्षिण एशिया की एक प्रमुख नदी है। इसका अपवाह क्षेत्र मुख्य रूप से तीन देशों— चीन (तिब्बत), भारत और पाकिस्तान में फैला हुआ है। भारत में यह मुख्य रूप से केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख (लेह) से होकर बहती है।

6. पंचनद क्या है और इसमें कौन-कौन सी नदियां आती हैं?

उत्तर: ‘पंचनद’ का अर्थ है ‘पांच नदियों का समूह’। इसमें पंजाब (भारत और पाकिस्तान) में बहने वाली सिंधु की पांच प्रमुख सहायक नदियां शामिल हैं: झेलम, चेनाब, रावी, व्यास और सतलज

7. सिंधु जल समझौता कब और किन देशों के बीच हुआ था?

उत्तर: सिंधु जल समझौता 19 सितंबर 1960 को भारत और पाकिस्तान के मध्य हुआ था। इस समझौते को कराने में विश्व बैंक ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी, जिसके तहत 6 नदियों के पानी का बंटवारा किया गया था।

Nitin Tiwari
✍️ लेखक

Nitin Tiwari

नितिन तिवारी GKGSNotes.com के संस्थापक और मुख्य लेखक हैं। उन्होंने गणित में B.Sc. और भूगोल में M.A. की डिग्री प्राप्त की है तथा D.El.Ed (2017 बैच) भी किया है। इसके अलावा उन्हें 5 वर्षों का शिक्षण अनुभव भी है, जिससे वे छात्रों की जरूरतों और परीक्षा की चुनौतियों को गहराई से समझते हैं। उत्तर प्रदेश से संबंध रखने वाले नितिन जी को भूगोल, इतिहास और सामान्य ज्ञान विषयों में गहरी रुचि है। उनका लक्ष्य है कि हिंदी माध्यम के छात्रों को UPSC, UPPSC, SSC, UP Police जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उच्च गुणवत्ता की अध्ययन सामग्री बिल्कुल निःशुल्क मिले।

1 thought on “सिंधु नदी तंत्र: उद्गम, लंबाई, सहायक नदियां और मानचित्र | Sindhu Nadi Tantra”

Leave a Comment