भारतीय अपवाह तंत्र के अंतर्गत झेलम नदी (Jhelum Nadi) एक बेहद महत्वपूर्ण टॉपिक है। अगर आप विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो सिंधु नदी तंत्र की इस प्रमुख नदी से जुड़े प्रश्न अक्सर देखने को मिलते हैं।
आज की इस पोस्ट में हम झेलम नदी का सामान्य परिचय, उद्गम स्थल, प्रवाह क्षेत्र, प्रमुख सहायक नदियाँ, और इस पर स्थित महत्वपूर्ण जल विद्युत परियोजनाओं के बारे में विस्तार से जानेंगे। इसके साथ ही, हम झेलम नदी के किनारे स्थित प्रमुख शहरों और इसके ऐतिहासिक महत्व पर भी चर्चा करेंगे।
चीजों को आसानी से और लंबे समय तक याद रखने के लिए, हमने इस पोस्ट में झेलम नदी का मानचित्र (Jhelum River Map) भी शामिल किया है। आइए, झेलम नदी से जुड़े उन सभी महत्वपूर्ण तथ्यों को समझते हैं जो परीक्षा की दृष्टि से सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।

झेलम नदी का सामान्य परिचय
झेलम नदी सिंधु नदी तंत्र की एक बेहद महत्वपूर्ण नदी है। यह मुख्य रूप से सिंधु की सबसे बड़ी सहायक नदी चिनाब की एक प्रमुख उप-सहायक नदी है। पंजाब क्षेत्र की प्रसिद्ध पांच नदियों (पंचनद) में से यह सबसे पश्चिमी छोर पर बहने वाली नदी है।
भौगोलिक दृष्टि से, झेलम नदी भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की सबसे प्रमुख नदी है और इसे कश्मीर घाटी की जीवन रेखा भी माना जाता है। इसका प्रवाह क्षेत्र भारत के जम्मू-कश्मीर से शुरू होकर पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब प्रांत तक फैला हुआ है। झेलम नदी की कुल लंबाई लगभग 725 किलोमीटर है, जिसमें से यह भारत में लगभग 400 किलोमीटर की दूरी तय करती है।
ऐतिहासिक महत्व: इतिहास के पन्नों में भी झेलम नदी का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। इसी नदी के तट पर 326 ईसा पूर्व (326 BC) में मेसिडोनिया के राजा सिकंदर और पंजाब के राजा पोरस के बीच एक प्रसिद्ध युद्ध लड़ा गया था। इतिहास में इस युद्ध को ‘हाइडेस्पीज का युद्ध’ कहा जाता है। ग्रीक भाषा में झेलम नदी को ‘हाइडेस्पीज’ (Hydaspes) कहा जाता है।
झेलम नदी का उद्गम स्थल
झेलम नदी कश्मीर घाटी के दक्षिण पूर्वी भाग में पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला की पदस्थली में स्थित बेरीनाग झील से बेरीनाग झरने के रूप में निकलती है। बेरीनाग झील का पानी बेरीनाग झरने के रूप में शेषनाग झील में गिरता है और शेषनाग झील से यह नदी प्रारंभ होती है। बेरीनाग झील जम्मू कश्मीर के अनंतनाग जिले में स्थित है।

Note- बेरीनाग झील, बेरीनाग झरना, या शेषनाग झील में से कोई भी एक परीक्षा में झेलम नदी के उद्गम स्थल के रूप में पूछा जा सकता है यह तीनों ही उत्तर सही है।
कश्मीर घाटी जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में बृहद हिमालय और पीर पंजाल श्रेणियों के मध्य स्थित है। बेरीनाग झील, शेषनाग झील, श्रीनगर, डल झील, अंचार झील, वुलर झील आदि कश्मीर घाटी में ही स्थित है। झेलम नदी को कश्मीर घाटी की जीवन रेखा माना जाता है।
झेलम नदी का मानचित्र (Jhelam Nadi Map)

- बेरीनाग झील से निकलने के बाद झेलम नदी कश्मीर घाटी में प्रवेश करती है। यहां पर यह दो मुख्य सहायक नदियों लिड्डर नदी और विशव नदी का जल प्राप्त करती है।
- इसके बाद अवंतीपुरा से होते हुए झेलम नदी श्रीनगर पहुंचती है। श्रीनगर में ही झेलम के दाएं ओर डल झील स्थित है जो एक नहर से झेलम नदी से जुड़ी हुई है।
- श्रीनगर के आगे ही झेलम के दाएं तट पर अंकार झील (Anchar Lake) स्थित है।
- श्रीनगर के आगे कश्मीर घाटी के उत्तर में बांदीपुरा जिले में झेलम नदी वुलर झील में जाकर गिरती है जो भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है। यह झील अपनी प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता के लिए जानी जाती है। वुलर झील के मुहाने पर तुलबुल परियोजना बनाई गई है।
- वुलर झील से निकलने के बाद यह नदी बारामूला के पास पीर पंजाल श्रेणी को काटते हुए पार करती है और उरी पहुंचती है।
- जम्मू कश्मीर के बारामूला जिले में झेलम पर उरी के पास उरी बांध बनाया गया है।
- उरी से आगे झेलम पाक अधिकृत कश्मीर (POK) में प्रवेश करती है । पाक अधिकृत कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद के पास झेलम दक्षिण की ओर मुड़ जाती है और कुछ दूरी तक भारत-पाकिस्तान की सीमा बनाती है।
- मुजफ्फराबाद के पास ही झेलम नदी में किशनगंगा नदी (नीलम नदी) मिलती है। जो झेलम की सबसे बड़ी सहायक नदी है। किशनगंगा नदी पर ही भारत किशनगंगा हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर स्टेशन विकसित कर रहा है।
- मुजफ्फराबाद के बाद झेलम नदी दक्षिण की ओर भारत पाक सीमा पर प्रवाहित होते हुए पंजाब के मैदान में प्रवेश करती है।
- यहीं पाक अधिकृत कश्मीर में मीरपुर के पास झेलम पर मंगला डैम स्थित है।
- इसके आगे झेलम नदी पंजाब के मैदान में बहते हुए पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के क्षंग जिले के त्रिम्मू नामक स्थान पर चेनाब नदी से मिल जाती है। बाद में चेनाब नदी सिंधु नदी से मिल जाती है।
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झेलम नदी के उपनाम/ अन्यनाम
- झेलम नदी को वैदिक काल में संस्कृत भाषा में वितस्ता कहा जाता था।
- झेलम नदी को कश्मीरी भाषा में व्यथ कहा जाता है।
- पंजाबी भाषा में झेलम को बिहट/बीहट कहा जाता है।
- ग्रीक भाषा में झेलम को हाइडस्पेस कहा जाता है।
झेलम नदी की सहायक नदियां
दाएं और से मिलने वाली सहायक नदियां- लिड्डर नदी, पोहरू नदी, सिंध नदी, किशनगंगा (नीलम) नदी
बाईं ओर से मिलने वाली सहायक नदियां- रामबिरा नदी, विशव नदी, दूधगंगा नदी, डुडांगा नदी, सुखनांग नदी
किशनगंगा नदी (नीलम नदी)
किशनगंगा नदी झेलम नदी की सबसे महत्वपूर्ण और सबसे लंबी सहायक नदी है। किशनगंगा नदी जम्मू कश्मीर के सोनमर्ग शहर के पास स्थित किशनसर झील से निकलती है। यह नदी अपनी मनमोहक गुरेज़ घाटी से होकर बहती है। कुछ दूर तक यह नदी नियंत्रण रेखा के साथ-साथ बहती है और पाक अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में दाखिल हो जाती है। मुजफ्फराबाद के पास किशनगंगा नदी झेलम में मिल जाती है। किशनगंगा नदी को पाकिस्तान में नीलम नदी के नाम से जाना जाता है।
आपने पढ़ा होगा कि जम्मू-कश्मीर का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सोनमर्ग ‘सिंध नदी’ के किनारे स्थित है।
ध्यान रहे: यह ‘सिंध नदी’ (Sindh River) है, न कि ‘सिंधु नदी’ (Indus)। सिंध नदी झेलम की ही एक प्रमुख सहायक नदी है।
झेलम नदी के किनारे स्थित प्रमुख शहर
झेलम नदी कश्मीर घाटी की जीवनरेखा (Lifeline) मानी जाती है। यह जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर के बिल्कुल बीचों-बीच से होकर गुजरती है।
प्रमुख शहर: श्रीनगर, अनंतनाग, बारामुला, उरी, सोपोर, मुजफ्फराबाद आदि शहर झेलम नदी के किनारे स्थित है।
झेलम नदी जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर, बारामुला और उरी शहर भी झेलम नदी के किनारे स्थित है। पाक अधिकृत कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद भी झेलम और नीलम नदी (किशनगंगा) के संगम पर स्थित है।
नदियां आमतौर पर मैदानी इलाकों में पहुँचकर ‘विसर्प’ (सांप की तरह टेढ़ा-मेढ़ा बहना) बनाती हैं।
अपवाद: झेलम नदी अपनी युवावस्था में ही कश्मीर घाटी (जो कि एक समतल घाटी है) में विसर्प का निर्माण करती है।
झेलम और उसकी सहायक नदियों पर स्थित प्रमुख जल विद्युत परियोजनाएं
चूँकि सिंधु जल समझौते (Indus Water Treaty – 1960) के तहत झेलम नदी के पानी के इस्तेमाल का अधिकार पाकिस्तान को दिया गया है, इसलिए भारत इस पर केवल ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ परियोजनाएं ही बना सकता है (यानी बिना पानी रोके बिजली बनाना)। यही कारण है कि इन परियोजनाओं पर अक्सर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद रहता है।
परीक्षाओं में अक्सर पूछी जाने वाली प्रमुख जल विद्युत परियोजनाएं इस प्रकार हैं:
तुलबुल जल विद्युत परियोजना
- यह परियोजना जम्मू-कश्मीर के बांदीपुरा जिले में भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील वुलर झील के मुहाने पर झेलम नदी पर स्थित है।
- इसका मुख्य उद्देश्य सर्दियों में वुलर झील के जल स्तर को नियंत्रित करना है, ताकि श्रीनगर से बारामूला तक झेलम नदी में नावों का आवागमन सुचारू रूप से चल सके। इसके साथ ही यह आस-पास के क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने और बाढ़ नियंत्रण में भी सहायक है।
- पाकिस्तान इसे सिंधु जल समझौते का उल्लंघन मानता है और इसे ‘वुलर बैराज’ कहता है। विवाद के कारण 1987 से इस परियोजना का काम रुका हुआ है।
उरी जल विद्युत परियोजना
- यह जल विद्युत परियोजना जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) के बहुत करीब झेलम नदी पर स्थित है।
- यह एक रन-ऑफ-द-रिवर प्रोजेक्ट है। इसके पहले चरण (Uri-I) की बिजली उत्पादन क्षमता 480 मेगावाट है, जिसके बाद उरी-II (240 मेगावाट) भी शुरू किया गया है।
- भौगोलिक चुनौतियों को देखते हुए इस प्रोजेक्ट में एक 4.3 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड सुरंग बनाई गई है, जिसके जरिए पानी को टरबाइन (पावर हाउस) तक ले जाया जाता है।
किशनगंगा जल विद्युत परियोजना
- किशनगंगा जल विद्युत परियोजना जम्मू-कश्मीर के बांदीपुरा जिले में झेलम नदी की प्रमुख सहायक नदी ‘किशनगंगा’ पर स्थित है।
- यह भी एक रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना है, जिसकी कुल बिजली उत्पादन क्षमता 330 मेगावाट है। इसका उद्घाटन मई 2018 में किया गया था।
- इस परियोजना का इंजीनियरिंग मॉडल बहुत ही खास है; इसमें एक 24 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड सुरंग के जरिए किशनगंगा नदी के पानी को पहाड़ों के नीचे से मोड़कर वुलर झील (झेलम नदी) में गिराया गया है।
- पाकिस्तान ने इस परियोजना के खिलाफ हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय में अपील की थी, लेकिन न्यायालय ने भारत के पक्ष में फैसला सुनाते हुए भारत को पानी मोड़ने का अधिकार दे दिया।
- भारत की इसी परियोजना के जवाब में (किशनगंगा का पानी रोके जाने के डर से) पाकिस्तान ने भी नीलम नदी के निचले हिस्से में ‘नीलम-झेलम हाइड्रोपावर प्लांट’ का निर्माण किया है।
मंगला बांध
- यह एक बहुउद्देशीय विशाल बांध है जो पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) के मीरपुर जिले में झेलम नदी पर स्थित है।
- यह दुनिया के सबसे बड़े ‘मिट्टी से भरे बांधों’ (Earth-fill dams) में से एक है, जिसका निर्माण 1967 में विश्व बैंक के सहयोग से पूरा हुआ था।
- मंगला बांध का निर्माण विशेष रूप से 1960 की सिंधु जल संधि के प्रावधानों के तहत किया गया था, ताकि पाकिस्तान अपनी सिंचाई और बिजली की जरूरतों को पूरा कर सके।
- इस विशाल बांध के जल भराव के कारण इसके पीछे एक बहुत बड़ी कृत्रिम झील का निर्माण होता है, जिसे ‘मंगला झील’ कहा जाता है।
- वर्तमान में इस बांध की बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 1120 मेगावाट है, जो पाकिस्तान के प्रमुख बिजली स्रोतों में से एक है।
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Sir aapko YouTube channel par bhi ye sab knowledge upload karna chahiye