झेलम नदी (Jhelum Nadi): उद्गम, मानचित्र, सहायक नदियां और परियोजनाएं

भारतीय अपवाह तंत्र के अंतर्गत झेलम नदी (Jhelum Nadi) एक बेहद महत्वपूर्ण टॉपिक है। अगर आप विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो सिंधु नदी तंत्र की इस प्रमुख नदी से जुड़े प्रश्न अक्सर देखने को मिलते हैं।

आज की इस पोस्ट में हम झेलम नदी का सामान्य परिचय, उद्गम स्थल, प्रवाह क्षेत्र, प्रमुख सहायक नदियाँ, और इस पर स्थित महत्वपूर्ण जल विद्युत परियोजनाओं के बारे में विस्तार से जानेंगे। इसके साथ ही, हम झेलम नदी के किनारे स्थित प्रमुख शहरों और इसके ऐतिहासिक महत्व पर भी चर्चा करेंगे।

चीजों को आसानी से और लंबे समय तक याद रखने के लिए, हमने इस पोस्ट में झेलम नदी का मानचित्र (Jhelum River Map) भी शामिल किया है। आइए, झेलम नदी से जुड़े उन सभी महत्वपूर्ण तथ्यों को समझते हैं जो परीक्षा की दृष्टि से सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।

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झेलम नदी एक नजर में

झेलम नदी भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में कश्मीर घाटी की सबसे प्रमुख नदी है। यह अनंतनाग जिले के वेरीनाग झरने से निकलती है, श्रीनगर और वुलर झील से होकर उरी के पास पाक अधिकृत कश्मीर में चली जाती है, और आगे पाकिस्तान के पंजाब में त्रिम्मू (झंग जिला) के पास चिनाब नदी में मिल जाती है। इसकी कुल लंबाई लगभग 725 किलोमीटर है।

बिंदुजानकारी
उद्गम स्थलवेरीनाग झरना (चश्मा), पीर पंजाल की तलहटी, अनंतनाग जिला, कश्मीर घाटी (जम्मू-कश्मीर)
कुल लंबाईलगभग 725 किलोमीटर
बहने का क्षेत्रजम्मू-कश्मीर (कश्मीर घाटी), फिर पाक अधिकृत कश्मीर, फिर पाकिस्तान का पंजाब प्रांत
संगम (मुहाना)चिनाब नदी, त्रिम्मू (झंग जिला, पाकिस्तान)
अन्य नामवितस्ता (संस्कृत), हाइडेस्पीज (ग्रीक), व्यथ (कश्मीरी), बिहट (पंजाबी)
सबसे बड़ी सहायक नदीकिशनगंगा (पाकिस्तान में नीलम)
प्रमुख झीलेंवुलर झील (झेलम इसमें गिरती है), डल झील और अंचार झील (नहर और धाराओं से जुड़ी)
प्रमुख शहरअनंतनाग, श्रीनगर, सोपोर, बारामूला, उरी, मुजफ्फराबाद, झेलम शहर (पाकिस्तान)
प्रमुख परियोजनाएंउरी-I और उरी-II, किशनगंगा, तुलबुल (रुकी हुई), मंगला बांध (पाकिस्तान)
पंचनद में स्थानपंजाब की पांच नदियों में सबसे पश्चिमी नदी
सिंधु जल संधि (1960)पश्चिमी नदी, जिसके पानी पर मुख्य अधिकार पाकिस्तान का है

झेलम नदी का सामान्य परिचय

झेलम नदी सिंधु नदी तंत्र की एक बेहद महत्वपूर्ण नदी है। यह चिनाब नदी की एक प्रमुख सहायक नदी है, यानी सिंधु की उप-सहायक नदी। चिनाब आगे चलकर सतलुज से मिलकर पंजनद बनाती है, और पंजनद मिठनकोट के पास सिंधु में मिल जाती है। पंजाब क्षेत्र की प्रसिद्ध पांच नदियों (पंचनद) में से यह सबसे पश्चिमी छोर पर बहने वाली नदी है।

भौगोलिक दृष्टि से, झेलम नदी भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की सबसे प्रमुख नदी है और इसे कश्मीर घाटी की जीवन रेखा भी माना जाता है। इसका प्रवाह क्षेत्र भारत के जम्मू-कश्मीर से शुरू होकर पाक अधिकृत कश्मीर से होते हुए पाकिस्तान के पंजाब प्रांत तक फैला हुआ है। रास्ते में कुछ दूरी तक यह पाक अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की सीमा भी बनाती है। झेलम नदी की कुल लंबाई लगभग 725 किलोमीटर है। भारत वाले हिस्से की लंबाई अलग-अलग किताबों में अलग-अलग मिलती है, इसलिए परीक्षा में कुल लंबाई 725 किलोमीटर ही याद रखें।

ऐतिहासिक महत्व: इतिहास के पन्नों में भी झेलम नदी का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। इसी नदी के तट पर 326 ईसा पूर्व (326 BC) में मेसिडोनिया के राजा सिकंदर और पंजाब के राजा पोरस के बीच एक प्रसिद्ध युद्ध लड़ा गया था। इतिहास में इस युद्ध को ‘हाइडेस्पीज का युद्ध’ कहा जाता है। ग्रीक भाषा में झेलम नदी को ‘हाइडेस्पीज’ (Hydaspes) कहा जाता है।

यह युद्ध आज के पाकिस्तानी पंजाब में झेलम शहर के आसपास लड़ा गया माना जाता है। पोरस का राज्य झेलम और चिनाब नदियों के बीच फैला था। सिकंदर ने नदी को रात में बारिश के बीच पार करके पोरस की सेना पर हमला किया और जीत हासिल की। पोरस को पराजित होने के बाद भी राजा की तरह सम्मान मिला और सिकंदर ने उसका राज्य उसे लौटा दिया। यह सिकंदर की भारत में आखिरी बड़ी लड़ाई थी। जीत के बाद उसने झेलम के दोनों किनारों पर दो नगर बसाए, विजय की याद में निकैया (Nicaea) और अपने घोड़े बुकेफेलस की याद में बुकेफाला (Bucephala)। इसके बाद सिकंदर की सेना ने ब्यास नदी से आगे बढ़ने से मना कर दिया और वह वापस लौट गया।

झेलम नदी का उद्गम स्थल

झेलम नदी कश्मीर घाटी के दक्षिण पूर्वी भाग में पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला की पदस्थली में स्थित वेरीनाग (बेरीनाग) नामक झरने (चश्मे) से निकलती है। यह झरना जम्मू कश्मीर के अनंतनाग जिले में स्थित है। झेलम किसी झील से नहीं निकलती, बल्कि इसी झरने का पानी बहकर नदी का रूप ले लेता है।

झेलम नदी का उद्गम स्थल (अनंतनाग, कश्मीर घाटी)

Note- झेलम के उद्गम के रूप में परीक्षा में वेरीनाग झरना (चश्मा) ही सही उत्तर है। कई किताबों में इसे ‘बेरीनाग झील’ भी लिख दिया जाता है, इसलिए विकल्प में झील का नाम मिले तो भी वेरीनाग ही चुनें। शेषनाग झील एक अलग झील है, जो लिद्दर नदी की पूर्वी धारा को पानी देती है। लिद्दर स्वयं झेलम की सहायक नदी है, यानी शेषनाग झील झेलम के उद्गम की जगह उसके पानी का एक अप्रत्यक्ष स्रोत है। कुछ लोग इसे भी झेलम का स्रोत बता देते हैं, पर परीक्षा में मुख्य उद्गम वेरीनाग को ही माना जाता है।

वेरीनाग एक ऐतिहासिक स्थल भी है। यहां झरने के चारों ओर बना अष्टकोणीय (आठ कोनों वाला) पत्थर का कुंड और उसके आसपास का मेहराबदार गलियारा मुगल बादशाह जहांगीर ने 1620 ई. में बनवाया था। बाद में उनके पुत्र शाहजहां ने इसके पास बाग लगवाया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इसे राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया है।

कश्मीर घाटी जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में बृहद हिमालय और पीर पंजाल श्रेणियों के मध्य स्थित है। वेरीनाग झरना, शेषनाग झील, श्रीनगर, डल झील, अंचार झील, वुलर झील आदि कश्मीर घाटी में ही स्थित है। झेलम नदी को कश्मीर घाटी की जीवन रेखा माना जाता है।

झेलम नदी का मानचित्र (Jhelam Nadi Map)

झेलम नदी का मानचित्र (Jhelum River Map) - उद्गम से चिनाब संगम तक
  • वेरीनाग से निकलने के बाद झेलम नदी कश्मीर घाटी में उत्तर-पश्चिम की ओर बहती है। यहां पर यह दो मुख्य सहायक नदियों लिड्डर नदी और विशव नदी का जल प्राप्त करती है। लिद्दर खानाबल के पास और विशव अनंतनाग के संगम (बिजबेहरा के पास) पर इसमें मिलती है।
  • इसके बाद अवंतीपुरा से होते हुए झेलम नदी श्रीनगर पहुंचती है। श्रीनगर में ही झेलम के दाएं ओर डल झील स्थित है जो एक नहर से झेलम नदी से जुड़ी हुई है।
  • श्रीनगर के आगे ही झेलम के दाएं तट पर अंचार झील (Anchar Lake) स्थित है। इसी के पास शादीपोरा (गांदरबल) में सिंध नदी झेलम से मिलती है।
  • श्रीनगर के आगे कश्मीर घाटी के उत्तर में बांदीपुरा जिले में झेलम नदी वुलर झील में जाकर गिरती है जो भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है। यह झील अपनी प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता के लिए जानी जाती है। वुलर झील के मुहाने पर तुलबुल परियोजना बनाई गई है।
  • वुलर झील से निकलने के बाद सोपोर के डोआबगाह में पोहरू नदी झेलम में मिलती है। आगे यह नदी बारामूला के पास पीर पंजाल श्रेणी को एक बहुत गहरी और संकरी घाटी (गॉर्ज) बनाकर काटते हुए पार करती है और उरी पहुंचती है। यह घाटी लगभग 2100 मीटर गहरी है और इसकी दीवारें लगभग सीधी खड़ी हैं।
  • जम्मू कश्मीर के बारामूला जिले में झेलम पर उरी के पास उरी बांध बनाया गया है।
  • उरी से आगे झेलम पाक अधिकृत कश्मीर (POK) में प्रवेश करती है । पाक अधिकृत कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद के पास झेलम दक्षिण की ओर मुड़ जाती है और कुछ दूरी तक पाक अधिकृत कश्मीर (पूर्व की ओर) और पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत (पश्चिम की ओर) के बीच की सीमा बनाती है।
  • मुजफ्फराबाद के पास ही झेलम नदी में किशनगंगा नदी (नीलम नदी) मिलती है। जो झेलम की सबसे बड़ी सहायक नदी है। किशनगंगा नदी पर भारत ने किशनगंगा हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर स्टेशन बनाया है, जो 2018 से चालू है। झेलम की एक और बड़ी सहायक नदी कुन्हार (कागान घाटी की नदी) पाकिस्तान में मिलती है।
  • मुजफ्फराबाद के बाद झेलम नदी दक्षिण की ओर प्रवाहित होते हुए पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में प्रवेश करती है और मंगला के पास बाहरी हिमालय को काटकर पंजाब के मैदान में पहुंचती है।
  • यहीं पाक अधिकृत कश्मीर में मीरपुर के पास झेलम पर मंगला डैम स्थित है।
  • मंगला के बाद झेलम शहर के पास नदी नमक की पहाड़ियों (साल्ट रेंज) के साथ दक्षिण-पश्चिम की ओर मुड़ती है और खुशाब के पास फिर दक्षिण की ओर बहने लगती है। इसके आगे झेलम नदी पंजाब के मैदान में बहते हुए पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के झंग जिले के त्रिम्मू नामक स्थान पर चेनाब नदी से मिल जाती है। इसके बाद चेनाब सतलुज से मिलकर पंजनद बनाती है, जो मिठनकोट के पास सिंधु नदी से मिल जाती है।

इसे भी पढ़ें- गंगा नदी तंत्र ( Ganga Nadi tantra)

झेलम नदी के उपनाम/ अन्यनाम

  • झेलम नदी को वैदिक काल में संस्कृत भाषा में वितस्ता कहा जाता था।
  • झेलम नदी को कश्मीरी भाषा में व्यथ कहा जाता है।
  • पंजाबी भाषा में झेलम को बिहट/बीहट कहा जाता है।
  • ग्रीक भाषा में झेलम को हाइडेस्पीज (Hydaspes) कहा जाता है।

पंचनद: पंजाब की पांच नदियां और उनके प्राचीन नाम

झेलम पंजाब की उन पांच नदियों में से एक है जिन्हें पंचनद कहा जाता है। पश्चिम से पूर्व की ओर इनका क्रम झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज है। झेलम इनमें सबसे पश्चिम में है। परीक्षा में इन नदियों के वैदिक और यूनानी नाम अक्सर पूछे जाते हैं, इसलिए नीचे तालिका में इन्हें एक साथ दिया है।

नदीवैदिक (संस्कृत) नामयूनानी (ग्रीक) नाम
झेलमवितस्ताहाइडेस्पीज
चिनाबअस्किनी (असिक्नी)अकेसिनीज
रावीपरुष्णी (इरावती)हाइड्राओटीज
ब्यासविपाशाहाइफेसिस
सतलुजशतद्रु (शुतुद्री)जारेड्रोस

झेलम नदी की सहायक नदियां

दाएं और से मिलने वाली सहायक नदियां- लिड्डर नदी, पोहरू नदी, सिंध नदी, किशनगंगा (नीलम) नदी, कुन्हार नदी

बाईं ओर से मिलने वाली सहायक नदियां- रामबिरा नदी, विशव नदी, दूधगंगा नदी, सुखनांग नदी, रामोशी नदी, पुंछ नदी

लिद्दर नदी

लिद्दर कश्मीर घाटी में बहने वाली झेलम की एक प्रमुख सहायक नदी है, जिसकी लंबाई लगभग 73 किलोमीटर है। इसकी पश्चिमी धारा कोलाहोई हिमनद से और पूर्वी धारा शेषनाग झील से निकलती है। दोनों धाराएं पहलगाम में मिलती हैं, और आगे लिद्दर खानाबल के पास झेलम से मिल जाती है। शेषनाग झील का झेलम से संबंध इसी लिद्दर के जरिए है।

सिंध नदी

सिंध नदी झेलम की दूसरी प्रमुख सहायक नदी है, जो मछोई हिमनद से निकलती है। जम्मू-कश्मीर का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सोनमर्ग इसी के किनारे है। यह गांदरबल जिले के शादीपोरा में झेलम से मिल जाती है।

विशव नदी

विशव नदी पीर पंजाल की कौसरनाग झील से निकलती है और बाईं ओर से अनंतनाग के संगम (बिजबेहरा के पास) पर झेलम में मिलती है।

किशनगंगा नदी (नीलम नदी)

किशनगंगा नदी झेलम नदी की सबसे महत्वपूर्ण और सबसे लंबी सहायक नदी है। किशनगंगा नदी जम्मू कश्मीर के सोनमर्ग शहर के पास स्थित किशनसर झील से निकलती है। यह नदी अपनी मनमोहक गुरेज़ घाटी से होकर बहती है। कुछ दूर तक यह नदी नियंत्रण रेखा के साथ-साथ बहती है और पाक अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में दाखिल हो जाती है। मुजफ्फराबाद के पास किशनगंगा नदी झेलम में मिल जाती है। किशनगंगा नदी को पाकिस्तान में नीलम नदी के नाम से जाना जाता है।

एक महत्वपूर्ण तथ्य:

आपने पढ़ा होगा कि जम्मू-कश्मीर का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सोनमर्ग ‘सिंध नदी’ के किनारे स्थित है।

ध्यान रहे: यह ‘सिंध नदी’ (Sindh River) है, न कि ‘सिंधु नदी’ (Indus)। सिंध नदी झेलम की ही एक प्रमुख सहायक नदी है।

झेलम नदी के किनारे स्थित प्रमुख शहर

झेलम नदी कश्मीर घाटी की जीवनरेखा (Lifeline) मानी जाती है। यह जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर के बिल्कुल बीचों-बीच से होकर गुजरती है।

प्रमुख शहर: श्रीनगर, अनंतनाग, बारामुला, उरी, सोपोर, मुजफ्फराबाद आदि शहर झेलम नदी के किनारे स्थित है।

झेलम नदी जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर, बारामुला और उरी शहर भी झेलम नदी के किनारे स्थित है। पाक अधिकृत कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद भी झेलम और नीलम नदी (किशनगंगा) के संगम पर स्थित है। पाकिस्तान के पंजाब में झेलम शहर (जिसका नाम इसी नदी पर पड़ा है) और खुशाब भी इसके किनारे हैं।

भूगोल का विशेष फैक्ट:

नदियां आमतौर पर मैदानी इलाकों में पहुँचकर ‘विसर्प’ (सांप की तरह टेढ़ा-मेढ़ा बहना) बनाती हैं।

अपवाद: झेलम नदी अपनी युवावस्था में ही कश्मीर घाटी (जो कि एक समतल घाटी है) में विसर्प का निर्माण करती है।

झेलम और उसकी सहायक नदियों पर स्थित प्रमुख जल विद्युत परियोजनाएं

चूँकि सिंधु जल समझौते (Indus Water Treaty – 1960) के तहत झेलम नदी के पानी के इस्तेमाल का अधिकार पाकिस्तान को दिया गया है, इसलिए भारत इस पर केवल ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ परियोजनाएं ही बना सकता है (यानी बिना पानी रोके बिजली बनाना)। यही कारण है कि इन परियोजनाओं पर अक्सर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद रहता है।

सिंधु जल संधि की पूरी जानकारी, यानी कौन सी नदी किस देश को मिली और उससे जुड़े विवाद, हमने सिंधु नदी तंत्र वाली पोस्ट में विस्तार से बताई है।

परीक्षाओं में अक्सर पूछी जाने वाली प्रमुख जल विद्युत परियोजनाएं इस प्रकार हैं:

तुलबुल जल विद्युत परियोजना

  • यह परियोजना जम्मू-कश्मीर के बांदीपुरा जिले में भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील वुलर झील के मुहाने पर झेलम नदी पर स्थित है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य सर्दियों में वुलर झील के जल स्तर को नियंत्रित करना है, ताकि श्रीनगर से बारामूला तक झेलम नदी में नावों का आवागमन सुचारू रूप से चल सके। इसके साथ ही यह आस-पास के क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने और बाढ़ नियंत्रण में भी सहायक है।
  • पाकिस्तान इसे सिंधु जल समझौते का उल्लंघन मानता है और इसे ‘वुलर बैराज’ कहता है। विवाद के कारण 1987 से इस परियोजना का काम रुका हुआ है।

उरी जल विद्युत परियोजना

  • यह जल विद्युत परियोजना जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) के बहुत करीब झेलम नदी पर स्थित है।
  • यह एक रन-ऑफ-द-रिवर प्रोजेक्ट है। इसके पहले चरण (Uri-I) की बिजली उत्पादन क्षमता 480 मेगावाट है, जिसे 1997 में शुरू किया गया था। इसके बाद उरी-II (240 मेगावाट, 4 इकाइयां 60-60 मेगावाट की) भी शुरू किया गया, जिसका व्यावसायिक उत्पादन 2014 में शुरू हुआ।
  • भौगोलिक चुनौतियों को देखते हुए इन प्रोजेक्टों में पहाड़ों के भीतर सुरंगें बनाई गई हैं। उरी-II में लगभग 4.2 किलोमीटर लंबी सुरंग है, जिसके जरिए पानी को टरबाइन (पावर हाउस) तक ले जाया जाता है।
  • उरी-I का दूसरा चरण (Uri-I Stage-II, 240 मेगावाट) अभी निर्माणाधीन है और इसका निर्माण कार्य मई 2026 में शुरू हुआ है।

किशनगंगा जल विद्युत परियोजना

  • किशनगंगा जल विद्युत परियोजना जम्मू-कश्मीर के बांदीपुरा जिले में झेलम नदी की प्रमुख सहायक नदी ‘किशनगंगा’ पर स्थित है।
  • यह भी एक रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना है, जिसकी कुल बिजली उत्पादन क्षमता 330 मेगावाट (110-110 मेगावाट की तीन इकाइयां) है। इसका उद्घाटन 19 मई 2018 को किया गया था।
  • इस परियोजना का इंजीनियरिंग मॉडल बहुत ही खास है; इसमें लगभग 23 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड सुरंग के जरिए किशनगंगा नदी के पानी को पहाड़ों के नीचे से मोड़कर झेलम नदी के बेसिन में, यानी वुलर झील की ओर, गिराया गया है।
  • पाकिस्तान ने इस परियोजना के खिलाफ हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय में अपील की थी। 2013 में न्यायालय ने भारत को पानी मोड़ने की अनुमति तो दी, लेकिन नदी में एक न्यूनतम मात्रा में पानी छोड़ते रहने की शर्त रखी। इस परियोजना की डिजाइन से जुड़ा विवाद आज भी सुलझा नहीं है।
  • भारत की इसी परियोजना के जवाब में (किशनगंगा का पानी रोके जाने के डर से) पाकिस्तान ने भी नीलम नदी का पानी मोड़कर मुजफ्फराबाद के पास 969 मेगावाट का ‘नीलम-झेलम हाइड्रोपावर प्लांट’ बनाया है, जो 2018 में पूरा हुआ।

मंगला बांध

  • यह एक बहुउद्देशीय विशाल बांध है जो पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) के मीरपुर जिले में झेलम नदी पर स्थित है।
  • यह दुनिया के सबसे बड़े ‘मिट्टी से भरे बांधों’ (Earth-fill dams) में से एक है, जिसका निर्माण 1967 में पूरा हुआ था। इसकी ऊंचाई लगभग 147 मीटर और लंबाई लगभग 3,140 मीटर है।
  • मंगला बांध का निर्माण विशेष रूप से 1960 की सिंधु जल संधि के प्रावधानों के तहत बने सिंधु बेसिन प्रोजेक्ट के हिस्से के रूप में किया गया था, ताकि पाकिस्तान अपनी सिंचाई और बिजली की जरूरतों को पूरा कर सके। संधि के तहत भारत की ओर गई पूर्वी नदियों की भरपाई के लिए इसे बनाया गया था।
  • इस विशाल बांध के जल भराव के कारण इसके पीछे एक बहुत बड़ी कृत्रिम झील का निर्माण होता है, जिसे ‘मंगला झील’ कहा जाता है। इस बांध के बनने से 280 से अधिक गांव डूब गए थे।
  • वर्तमान में इस बांध की बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 1000 मेगावाट (कुछ स्रोतों में 1070 मेगावाट) है, जो पाकिस्तान के प्रमुख बिजली स्रोतों में से एक है। इसे बढ़ाकर 1310 मेगावाट करने का काम चल रहा है।

पाकिस्तान में झेलम की अन्य प्रमुख परियोजनाएं

पाकिस्तान में झेलम पर मंगला के अलावा 720 मेगावाट का कारोट जल विद्युत परियोजना भी है, जिसे चीन की एक कंपनी ने बनाया है और जो 2022 में चालू हुई। मंगला बांध से लगभग 72 किलोमीटर नीचे झेलम पर रसूल बैराज है, और चिनाब पर झेलम के संगम के नीचे त्रिम्मू बैराज है।

झेलम नदी से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

झेलम नदी कहां है?

झेलम नदी भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की कश्मीर घाटी में बहती है। यह उरी के पास पाक अधिकृत कश्मीर में चली जाती है और आगे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बहकर चिनाब नदी में मिल जाती है।

झेलम नदी कहां से निकलती है?

झेलम नदी कश्मीर घाटी के दक्षिण-पूर्वी भाग में, पीर पंजाल की तलहटी में, अनंतनाग जिले के वेरीनाग झरने (चश्मे) से निकलती है। यह किसी झील से नहीं निकलती। शेषनाग झील अलग है, जो लिद्दर नदी की पूर्वी धारा को पानी देती है।

झेलम नदी की लंबाई कितनी है?

झेलम नदी की कुल लंबाई लगभग 725 किलोमीटर है। यह पंजाब की पांच नदियों में सबसे पश्चिमी नदी है।

झेलम नदी का पुराना (प्राचीन) नाम क्या है?

झेलम का प्राचीन संस्कृत नाम वितस्ता है। कश्मीरी में इसे व्यथ, पंजाबी में बिहट और ग्रीक भाषा में हाइडेस्पीज कहा जाता है।

झेलम की सहायक नदियां कौन-कौन सी हैं?

दाएं तट से लिद्दर, सिंध, पोहरू, किशनगंगा (नीलम) और कुन्हार नदियां मिलती हैं। बाएं तट से विशव, रामबिरा, दूधगंगा, सुखनाग, रामोशी और पुंछ नदियां मिलती हैं। इनमें किशनगंगा (नीलम) सबसे बड़ी और सबसे लंबी सहायक नदी है, जो मुजफ्फराबाद के पास झेलम में मिलती है।

झेलम नदी कहां जाकर मिलती है?

झेलम नदी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में झंग जिले के त्रिम्मू नामक स्थान पर चिनाब नदी में मिल जाती है। चिनाब आगे सतलुज से मिलकर पंजनद बनाती है, जो सिंधु में जा मिलती है।

झेलम नदी पर कौन-कौन से बांध और परियोजनाएं हैं?

भारत में झेलम पर उरी-I (480 मेगावाट) और उरी-II (240 मेगावाट) परियोजनाएं हैं, और तुलबुल परियोजना का काम रुका हुआ है। इसकी सहायक नदी किशनगंगा पर 330 मेगावाट की किशनगंगा परियोजना है। पाकिस्तान में मंगला बांध और कारोट परियोजना झेलम पर हैं।

हाइडेस्पीज का युद्ध कब और किसके बीच हुआ था?

हाइडेस्पीज का युद्ध 326 ईसा पूर्व में झेलम नदी (ग्रीक नाम हाइडेस्पीज) के तट पर सिकंदर और पंजाब के राजा पोरस के बीच हुआ था। इसमें सिकंदर की जीत हुई और यह भारत में उसकी आखिरी बड़ी लड़ाई थी।

इसे भी पढ़ें- कृष्णा नदी तंत्र

भारत की दूसरी नदियों और राज्यों के नक्शे देखने के लिए हमारा मानचित्र पेज देखिए। अगर इस पोस्ट में कहीं कोई कमी या गलती दिखे तो कमेंट में जरूर बताइए।

स्रोत और संदर्भ

इस पोस्ट के तथ्य इन स्रोतों से मिलाकर देखे गए हैं: एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका (झेलम नदी, मंगला बांध और हाइडेस्पीज का युद्ध); NHPC (उरी और किशनगंगा परियोजनाएं); और WAPDA (मंगला बांध)।

Nitin Tiwari
✍️ लेखक

Nitin Tiwari

नितिन तिवारी GKGSNotes.com के संस्थापक और मुख्य लेखक हैं। उन्होंने गणित में B.Sc. और भूगोल में M.A. की डिग्री प्राप्त की है तथा D.El.Ed (2017 बैच) भी किया है। इसके अलावा उन्हें 5 वर्षों का शिक्षण अनुभव भी है, जिससे वे छात्रों की जरूरतों और परीक्षा की चुनौतियों को गहराई से समझते हैं। उत्तर प्रदेश से संबंध रखने वाले नितिन जी को भूगोल, इतिहास और सामान्य ज्ञान विषयों में गहरी रुचि है। उनका लक्ष्य है कि हिंदी माध्यम के छात्रों को UPSC, UPPSC, SSC, UP Police जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उच्च गुणवत्ता की अध्ययन सामग्री बिल्कुल निःशुल्क मिले।

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