कृष्णा नदी महाराष्ट्र के सतारा जिले में महाबलेश्वर के पास जोर गांव से निकलती है और लगभग 1400 किलोमीटर बहकर आंध्र प्रदेश में बंगाल की खाड़ी में गिरती है। रास्ते में यह महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से होकर गुजरती है। कृष्णा और उसमें मिलने वाली सभी नदियों को मिलाकर कृष्णा नदी तंत्र (Krishna Nadi Tantra) कहा जाता है।
इस पोस्ट में कृष्णा नदी का उद्गम, पूरा प्रवाह मार्ग, सहायक नदियां और उन पर बने बांध सिलसिलेवार समझाए गए हैं। पढ़ते समय नीचे का नक्शा साथ में खोले रखिए, नदियों के नाम और उनकी जगह याद रखना आसान हो जाएगा।
कृष्णा नदी तंत्र (Krishna Nadi Tantra) एक नजर में
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| उद्गम स्थल | जोर गांव, महाबलेश्वर के पास, सतारा जिला (महाराष्ट्र), पश्चिमी घाट |
| उद्गम की ऊंचाई | समुद्र तल से लगभग 1337 मीटर |
| कुल लंबाई | लगभग 1400 किलोमीटर |
| मुहाना (जहां गिरती है) | बंगाल की खाड़ी, आंध्र प्रदेश में हंसलादीवी के पास (कोडुरु के निकट) |
| बेसिन का क्षेत्रफल | 2,58,948 वर्ग किलोमीटर, यानी देश के क्षेत्रफल का लगभग 8% |
| बहने वाले राज्य | महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश |
| दाएं किनारे की मुख्य सहायक नदियां | कोयना, वारना, पंचगंगा, दूधगंगा, घाटप्रभा, मलप्रभा, तुंगभद्रा |
| बाएं किनारे की मुख्य सहायक नदियां | येरला, भीमा, डिंडी, पेद्दावागु, मूसी, पालेरू, मुनेरू |
| सबसे लंबी सहायक नदी | भीमा (861 किलोमीटर) |
| सबसे बड़ी सहायक नदी (जल ग्रहण क्षेत्र के हिसाब से) | तुंगभद्रा |
| प्रमुख बांध | कोयना, अल्माटी, नारायणपुर, जुराला, श्रीशैलम, नागार्जुन सागर, उजनी, तुंगभद्रा, प्रकाशम बैराज |
नदी तंत्र किसे कहते हैं?
किसी एक मुख्य नदी और उसमें आकर मिलने वाली सारी छोटी-बड़ी नदियों के समूह को नदी तंत्र कहते हैं। इसी को अपवाह तंत्र भी कहा जाता है। कृष्णा नदी तंत्र में मुख्य नदी कृष्णा है और भीमा, तुंगभद्रा, कोयना, मूसी जैसी नदियां उसकी सहायक नदियां हैं।
कृष्णा प्रायद्वीपीय भारत की नदी है। प्रायद्वीपीय भारत का ढाल पश्चिम से पूर्व की ओर है, इसलिए कृष्णा भी पश्चिम से पूर्व की ओर बहती है। लंबाई में यह गंगा और गोदावरी के बाद देश की तीसरी सबसे लंबी नदी है और प्रायद्वीपीय भारत में गोदावरी के बाद दूसरे नंबर पर आती है। बेसिन के क्षेत्रफल के हिसाब से भी यह देश के बड़े नदी बेसिनों में गिनी जाती है। इसके तेज बहाव और ऊंचे-नीचे रास्ते की वजह से इस पर कई जलविद्युत परियोजनाएं बनी हैं।
कृष्णा नदी कहां से निकलती है? (उद्गम स्थल)
कृष्णा नदी पश्चिमी घाट (सह्याद्रि) में महाबलेश्वर के ठीक उत्तर में बसे जोर गांव के पास से निकलती है। यह गांव महाराष्ट्र के सतारा जिले में आता है और यहां की ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 1337 मीटर है। पुराने महाबलेश्वर में कृष्णाबाई मंदिर के पास की जलधारा को नदी का प्रारंभिक बिंदु माना जाता है।
एक रोचक बात यह है कि उद्गम की जगह अरब सागर से सिर्फ लगभग 64 किलोमीटर दूर है। फिर भी कृष्णा अरब सागर में नहीं जाती। पश्चिमी घाट का पश्चिमी ढाल बहुत तीखा है और पूर्वी ढाल धीमा, इसलिए पानी पूर्व की ओर बहकर लगभग 1400 किलोमीटर का सफर तय करता है और बंगाल की खाड़ी में पहुंचता है।
महाबलेश्वर एक जाना-माना हिल स्टेशन है और पंचगनी के साथ स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए भी मशहूर है। यहां पुराने महाबलेश्वर के पंचगंगा मंदिर को पांच नदियों के उद्गम से जोड़ा जाता है। ये पांच नदियां कृष्णा, कोयना, वेण्णा, सावित्री और गायत्री मानी जाती हैं। इनमें से कृष्णा, कोयना और वेण्णा पूर्व की ओर बहकर कृष्णा तंत्र का हिस्सा बनती हैं, जबकि सावित्री पश्चिम की ओर बहकर अरब सागर में गिरती है।
कृष्णा नदी कहां-कहां से बहती है और कहां गिरती है? (प्रवाह मार्ग)
कृष्णा नदी चार राज्यों से होकर बहती है। नीचे दिए गए नक्शे में इसका पूरा रास्ता और बीच में मिलने वाली नदियां दिखाई गई हैं।

महाराष्ट्र में कृष्णा नदी का मार्ग
उद्गम के बाद कृष्णा महाराष्ट्र में मोटे तौर पर दक्षिण की ओर बहती है। सतारा जिले में वाई शहर के पास से गुजरते हुए यह आगे बढ़ती है और इस हिस्से में इस पर धोम बांध बना है। सतारा के पास वेण्णा नदी इससे मिलती है। इसके बाद कराड में दाईं ओर से कोयना नदी आकर मिलती है। कृष्णा और कोयना के इस संगम को प्रीति संगम कहा जाता है।
आगे सांगली जिले में बाईं ओर से येरला नदी ब्रह्मणाल के पास कृष्णा में मिलती है। सांगली के पास हरिपुर में दाईं ओर से वारना नदी आती है। इसके बाद कोल्हापुर जिले में नरसोबावाडी (कुरुंदवाड के पास) में पंचगंगा नदी दाईं ओर से कृष्णा से मिलती है। इसी इलाके में दूधगंगा भी कृष्णा की ओर आती है। महाराष्ट्र में लगभग 300 किलोमीटर बहने के बाद नदी पूर्व की ओर मुड़ती है और कुरुंदवाड के पास कर्नाटक में प्रवेश करती है।
कर्नाटक में कृष्णा नदी का मार्ग
कर्नाटक में कृष्णा बेलगावी जिले से होकर बागलकोट, विजयपुरा (पहले बीजापुर), यादगीर और रायचूर जिलों की ओर बढ़ती है। बागलकोट जिले के चिक्कसंगम में दाईं ओर से घाटप्रभा नदी इससे मिलती है। कुछ आगे उसी जिले के कूडलसंगम में मलप्रभा नदी मिलती है। यह जगह लिंगायत समुदाय का बड़ा तीर्थ है और यहां बसवेश्वर की समाधि है।
इन दोनों संगमों के बाद कृष्णा पर अल्माटी बांध (लाल बहादुर शास्त्री सागर) बना है। इससे आगे यादगीर जिले में नारायणपुर बांध है, जिसे बसव सागर भी कहते हैं। इसके बाद नदी कुछ दूरी तक कर्नाटक और तेलंगाना की सीमा के पास बहती है। रायचूर के पास यहीं बाईं ओर से भीमा नदी आकर मिलती है, जो कृष्णा की सबसे लंबी सहायक नदी है।
तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी का मार्ग
तेलंगाना में प्रवेश करने पर कृष्णा पर जुराला बांध बना है। आगे नदी तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की सीमा के साथ-साथ बहती है। कुरनूल के पास संगमेश्वरम में दक्षिण की ओर से तुंगभद्रा नदी इससे मिलती है। यह कृष्णा की दाईं ओर की सबसे बड़ी सहायक नदी है।
इसके बाद नल्लामाला की पहाड़ियों के बीच श्रीशैलम बांध आता है, और उससे आगे नागार्जुन सागर बांध। नागार्जुन सागर के बाद तेलंगाना के नलगोंडा जिले में बाईं ओर से मूसी नदी मिलती है। फिर नदी आंध्र प्रदेश में पूरी तरह प्रवेश कर जाती है। यहां मुनेरू नदी इससे मिलती है, जो तेलंगाना से निकलकर आती है।
कृष्णा नदी का मुहाना और डेल्टा
विजयवाड़ा में कृष्णा पर प्रकाशम बैराज बना है। बैराज नदी के पानी को नहरों में मोड़ने के लिए बनाया गया ऐसा ढांचा होता है जो पानी को रोकता भी है और छोड़ता भी है। यह कृष्णा बेसिन का सबसे लंबा बैराज है और इसकी लंबाई लगभग 1223 मीटर है। इससे निकलने वाली नहरें कृष्णा डेल्टा की खेती को पानी देती हैं।
विजयवाड़ा के बाद नदी कई धाराओं में बंट जाती है और अपने लाए हुए उपजाऊ मिट्टी-गाद से डेल्टा बनाती है। डेल्टा उस समतल इलाके को कहते हैं जो नदी के समुद्र में मिलने से ठीक पहले बनता है। कृष्णा का डेल्टा कृष्णा और गुंटूर क्षेत्र में फैला है और आगे गोदावरी के डेल्टा से मिल जाता है। अंत में आंध्र प्रदेश में हंसलादीवी के पास नदी बंगाल की खाड़ी में गिर जाती है।
कृष्णा बेसिन किन राज्यों में कितना फैला है?
कृष्णा का जल ग्रहण क्षेत्र, यानी वह पूरा इलाका जिसका बारिश का पानी कृष्णा और उसकी सहायक नदियों में आता है, लगभग 2,58,948 वर्ग किलोमीटर है। दिलचस्प बात यह है कि नदी का उद्गम महाराष्ट्र में है, लेकिन बेसिन का सबसे बड़ा हिस्सा कर्नाटक में पड़ता है।
| राज्य | बेसिन का क्षेत्रफल (वर्ग किमी, लगभग) | बेसिन का हिस्सा (लगभग) |
|---|---|---|
| कर्नाटक | 1,13,271 | 44% |
| महाराष्ट्र | 69,425 | 27% |
| तेलंगाना | 50,177 | 19% |
| आंध्र प्रदेश | 25,772 | 10% |
पूरे कृष्णा बेसिन को सात उप-बेसिनों में बांटा गया है, यानी ऊपरी कृष्णा, मध्य कृष्णा, निचली कृष्णा, ऊपरी भीमा, निचली भीमा, ऊपरी तुंगभद्रा और निचली तुंगभद्रा। इनमें ऊपरी कृष्णा सबसे बड़ा (लगभग 21%) और मध्य कृष्णा सबसे छोटा (लगभग 9%) उप-बेसिन है।
बेसिन में बारिश हर जगह एक जैसी नहीं होती। पश्चिमी घाट की ढलानों पर बहुत ज्यादा बारिश होती है, जबकि घाट के पूर्व का इलाका वृष्टि छाया क्षेत्र में आता है और सूखा रहता है। इसी वजह से पूरे बेसिन में सालाना बारिश 450 मिलीमीटर से लेकर 3200 मिलीमीटर तक बदल जाती है। लगभग 90% बारिश मानसून के चार महीनों में होती है। रायलसीमा, रायचूर और बेल्लारी जैसे इलाके सूखा-प्रवण माने जाते हैं, जबकि डेल्टा का इलाका बाढ़ की चपेट में आता रहता है।
कृष्णा नदी की सहायक नदियां कौन-कौन सी हैं?
कृष्णा की सहायक नदियों को इस आधार पर दो हिस्सों में बांटा जाता है कि वे नदी के बहाव की दिशा में देखने पर दाईं ओर से मिलती हैं या बाईं ओर से। महाराष्ट्र में कृष्णा दक्षिण की ओर बहती है, इसलिए वहां पश्चिम की तरफ से आने वाली नदियां (कोयना, वारना, पंचगंगा) दाईं ओर से और पूर्व की तरफ से आने वाली नदियां (येरला) बाईं ओर से मिलती हैं।

| सहायक नदी | किस ओर से मिलती है | उद्गम | खास बात |
|---|---|---|---|
| कोयना | दाईं ओर | महाबलेश्वर, सतारा (महाराष्ट्र) | कराड में प्रीति संगम, कोयना बांध |
| वारना | दाईं ओर | सह्याद्रि (प्रचितगढ़ के पास) | सांगली के पास हरिपुर में संगम |
| पंचगंगा | दाईं ओर | पांच धाराओं के मेल से बनती है (कोल्हापुर) | नरसोबावाडी में संगम |
| दूधगंगा | दाईं ओर | सह्याद्रि (कोल्हापुर क्षेत्र) | कालम्मावाडी बांध |
| घाटप्रभा | दाईं ओर | पश्चिमी घाट | चिक्कसंगम में संगम, गोकाक जलप्रपात, हिडकल बांध |
| मलप्रभा | दाईं ओर | कनकुंबी, बेलगावी (कर्नाटक) | कूडलसंगम में संगम, नविलुतीर्थ बांध |
| तुंगभद्रा | दाईं ओर | तुंगा और भद्रा का मेल, कूडली (शिवमोगा) | सबसे बड़ी सहायक नदी, हम्पी इसी के किनारे |
| येरला | बाईं ओर | म्हस्कोबा की पहाड़ियां, सतारा | ब्रह्मणाल के पास संगम |
| भीमा | बाईं ओर | भीमाशंकर की पहाड़ियां (महाराष्ट्र) | सबसे लंबी सहायक नदी (861 किमी), उजनी बांध |
| डिंडी | बाईं ओर | तेलंगाना | सूखे इलाके की छोटी नदी |
| पेद्दावागु | बाईं ओर | तेलंगाना | सूखे इलाके की छोटी नदी |
| मूसी | बाईं ओर | अनंतगिरि की पहाड़ियां, विकाराबाद (तेलंगाना) | हैदराबाद इसी के किनारे बसा है |
| पालेरू | बाईं ओर | तेलंगाना | तेलंगाना से आंध्र प्रदेश में आती है |
| मुनेरू | बाईं ओर | तेलंगाना | आंध्र प्रदेश में कृष्णा से मिलती है |
इनके अलावा वेण्णा नदी भी है, जो महाबलेश्वर क्षेत्र से निकलती है और सतारा के पास कृष्णा से मिलती है।
कोयना नदी
कोयना कृष्णा की छोटी लेकिन बहुत काम की सहायक नदी है। यह सतारा जिले में महाबलेश्वर के पास से निकलती है और कराड में कृष्णा से मिलती है। दोनों नदियों के संगम को प्रीति संगम कहते हैं।
कोयना पर सतारा जिले में बना कोयना बांध महाराष्ट्र के सबसे बड़े बांधों में गिना जाता है। इसके पीछे बनी कृत्रिम झील का नाम शिवसागर है। कोयना जलविद्युत परियोजना महाराष्ट्र की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना है और इसकी क्षमता लगभग 1960 मेगावाट है। इस बांध के आसपास 1967 में बड़ा भूकंप आया था, जिसे जलाशय के पानी के भारी दबाव से पैदा हुआ माना जाता है। ऐसे भूकंप को जलाशय-प्रेरित भूकंप कहते हैं।
वारना नदी
वारना सह्याद्रि पर्वत में पाथरपुंज पठार के पास प्रचितगढ़ से निकलती है और सांगली के पास हरिपुर में कृष्णा से मिलती है। इसकी घाटी पूर्व में दक्कन के पठार और पश्चिम में कोंकण के बीच के संक्रमण क्षेत्र में पड़ती है।
पंचगंगा नदी
पंचगंगा किसी एक जगह से नहीं निकलती, यह पांच धाराओं के मिलने से बनती है। इनमें चार धाराएं कसारी, कुंभी, तुलसी और भोगावती हैं। पांचवीं धारा सरस्वती मानी जाती है, जो परंपरा के अनुसार धरती के नीचे बहती है। कोल्हापुर के पास प्रयाग संगम पर आखिरी नदी कसारी आकर मिलती है और यहीं से पंचगंगा का असली रूप शुरू होता है। कोल्हापुर शहर इसी नदी के किनारे है। भोगावती पर राधानगरी बांध बना है। पंचगंगा नरसोबावाडी में कृष्णा से मिल जाती है।
घाटप्रभा नदी
घाटप्रभा पश्चिमी घाट से निकलती है और महाराष्ट्र तथा कर्नाटक में बहकर बागलकोट जिले के चिक्कसंगम में कृष्णा से मिलती है। बेलगावी जिले में गोकाक शहर के पास इस पर गोकाक जलप्रपात है, जो कर्नाटक का जाना-माना पर्यटन स्थल है। इसी नदी पर हिडकल गांव में राजा लखमगौड़ा बांध बना है, जिसे हिडकल बांध भी कहते हैं। इसका जलाशय हिडकल जलाशय या घाटप्रभा जलाशय कहलाता है।
मलप्रभा नदी
मलप्रभा का उद्गम बेलगावी जिले में पश्चिमी घाट के कनकुंबी गांव के पास है। लगभग 300 किलोमीटर बहने के बाद यह बागलकोट जिले के कूडलसंगम में कृष्णा से मिलती है। सौंदत्ती तालुका के नविलुतीर्थ गांव में इस पर बना बांध नविलुतीर्थ बांध कहलाता है। इसे रेणुकासागर या मलप्रभा बांध भी कहते हैं।
पट्टदकल, ऐहोल और बादामी के प्रसिद्ध गुफा मंदिर मलप्रभा के किनारे हैं। ये स्थल चालुक्य राजवंश से जुड़े हैं। इनमें पट्टदकल यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में है, जबकि बाकी दोनों को शामिल कराने की कोशिश चल रही है।
तुंगभद्रा नदी
तुंगभद्रा कृष्णा की सबसे बड़ी सहायक नदी है। ध्यान रखिए कि सबसे लंबी सहायक नदी भीमा है, पर जल ग्रहण क्षेत्र के हिसाब से सबसे बड़ी तुंगभद्रा है। परीक्षा में यह अंतर अक्सर पूछा जाता है।
तुंगभद्रा दो नदियों, तुंगा और भद्रा, के मिलने से बनती है, और इसी वजह से इसका यह नाम पड़ा। दोनों नदियां पश्चिमी घाट में गंगामूल से निकलती हैं और कर्नाटक के शिवमोगा जिले के कूडली गांव में मिलती हैं। यहां से आगे तुंगभद्रा लगभग 531 किलोमीटर बहकर आंध्र प्रदेश में संगमेश्वरम पर कृष्णा से मिल जाती है। इसकी सहायक नदियों में तुंगा, भद्रा, वरदा, वेदवती (हगरी) और कुमुदवती प्रमुख हैं।
तुंगभद्रा के किनारे कई ऐतिहासिक और धार्मिक स्थान हैं। आदि शंकराचार्य का स्थापित श्रृंगेरी मठ तुंगा के तट पर चिकमंगलूर जिले में है और हिंदू धर्म के चार पीठों में से दक्षिणी पीठ माना जाता है। विजयनगर साम्राज्य की राजधानी हम्पी भी इसी नदी के किनारे है, जहां का विरुपाक्ष मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। कुरनूल शहर भी तुंगभद्रा के तट पर बसा है।
कृष्णा और तुंगभद्रा के बीच की जमीन को रायचूर दोआब कहते हैं। दोआब का मतलब है दो नदियों के बीच का इलाका। इसका नाम रायचूर शहर पर पड़ा है और यह कर्नाटक के रायचूर क्षेत्र से तेलंगाना के गडवाल क्षेत्र तक फैला है।
येरला नदी
येरला बाईं ओर से मिलने वाली सहायक नदी है। यह सतारा जिले के खटाव तालुका में म्हस्कोबा की पहाड़ियों से निकलती है और सांगली जिले में ब्रह्मणाल के पास कृष्णा से मिलती है। इसकी घाटी के एक ओर वर्धनगढ़ श्रेणी और दूसरी ओर महिमानगढ़ श्रेणी है।
भीमा नदी
भीमा महाराष्ट्र में पश्चिमी घाट की भीमाशंकर पहाड़ियों से निकलती है। यहीं बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक भीमाशंकर मंदिर है। भीमा दक्षिण-पूर्व की ओर बहते हुए महाराष्ट्र और कर्नाटक से गुजरती है, कुछ दूरी तक कर्नाटक और तेलंगाना की सीमा बनाती है और रायचूर के पास कृष्णा में मिल जाती है। 861 किलोमीटर की लंबाई के साथ यह कृष्णा की सबसे लंबी सहायक नदी है।
भीमा की मुख्य सहायक नदियां नीरा, सीना, घोड, मुला-मुठा, इंद्रायणी, मान और कागिना हैं। पंढरपुर इसी नदी के किनारे है, जहां इसे चंद्रभागा भी कहते हैं, और पुणे शहर इसकी सहायक मुला-मुठा के किनारे बसा है। सोलापुर जिले के उजनी गांव में भीमा पर उजनी बांध बना है, जिसे भीमा बांध या भीमा सिंचाई परियोजना भी कहते हैं। यह मुख्य रूप से सिंचाई के लिए बना है।
मूसी नदी
मूसी तेलंगाना के विकाराबाद जिले में अनंतगिरि की पहाड़ियों से निकलती है और नलगोंडा जिले में कृष्णा से मिलती है। इसका प्राचीन नाम मुचुकुंदा नदी है। हैदराबाद शहर इसी के किनारे बसा है और यह पुराने शहर को नए शहर से अलग करती है। मूसी पर उस्मान सागर जलाशय बना है, जबकि हिमायत सागर इसकी सहायक नदी ईसी पर है। ये दोनों जलाशय हैदराबाद को पीने का पानी देते हैं और बाढ़ से बचाव में भी मदद करते हैं।
कृष्णा नदी पर कौन-कौन से बांध हैं?
कृष्णा और उसकी सहायक नदियों पर बांध और बैराज की पूरी श्रृंखला है। बांध पानी रोकने की दीवार होता है, जबकि बैराज पानी की मात्रा को नियंत्रित करके नहरों में छोड़ने का ढांचा। नीचे की तालिका में मुख्य बांध नदी के बहाव के क्रम में दिए हैं।
| बांध | नदी | स्थान | जलाशय / खास बात |
|---|---|---|---|
| धोम बांध | कृष्णा | वाई के पास, सतारा (महाराष्ट्र) | महाराष्ट्र में कृष्णा का प्रमुख बांध |
| कोयना बांध | कोयना | सतारा (महाराष्ट्र) | शिवसागर जलाशय, लगभग 1960 मेगावाट |
| राधानगरी बांध | भोगावती (पंचगंगा की धारा) | कोल्हापुर (महाराष्ट्र) | सिंचाई और जलविद्युत |
| कालम्मावाडी बांध | दूधगंगा | कोल्हापुर (महाराष्ट्र) | महाराष्ट्र और कर्नाटक के सहयोग से बना |
| उजनी बांध | भीमा | सोलापुर (महाराष्ट्र) | भीमा सिंचाई परियोजना |
| हिडकल बांध | घाटप्रभा | बेलगावी (कर्नाटक) | राजा लखमगौड़ा बांध, हिडकल जलाशय |
| नविलुतीर्थ बांध | मलप्रभा | बेलगावी (कर्नाटक) | रेणुकासागर जलाशय |
| अल्माटी बांध | कृष्णा | विजयपुरा और बागलकोट जिलों की सीमा (कर्नाटक) | लाल बहादुर शास्त्री सागर, 290 मेगावाट |
| नारायणपुर बांध | कृष्णा | यादगीर (कर्नाटक) | बसव सागर, मुख्यतः सिंचाई |
| जुराला बांध | कृष्णा | जोगुलांबा गडवाल (तेलंगाना) | सिंचाई और जलविद्युत |
| तुंगभद्रा बांध | तुंगभद्रा | होसपेटे, विजयनगर जिला (कर्नाटक) | पम्पा सागर, बहुउद्देशीय |
| श्रीशैलम बांध | कृष्णा | आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की सीमा | श्रीशैलम जलाशय, 1670 मेगावाट |
| नागार्जुन सागर बांध | कृष्णा | आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की सीमा | नागार्जुन सागर जलाशय |
| प्रकाशम बैराज | कृष्णा | विजयवाड़ा (आंध्र प्रदेश) | बेसिन का सबसे लंबा बैराज, कृष्णा डेल्टा की नहरें |
अल्माटी बांध (लाल बहादुर शास्त्री बांध)
अल्माटी बांध कर्नाटक में कृष्णा पर बना है, घाटप्रभा और मलप्रभा के संगम के बाद। इसके पीछे बना जलाशय लाल बहादुर शास्त्री सागर कहलाता है। इस परियोजना का मकसद बिजली बनाना, सिंचाई और बाढ़ पर नियंत्रण है, और इसकी क्षमता 290 मेगावाट है।
नारायणपुर बांध (बसव सागर)
यह बांध यादगीर जिले में कृष्णा पर है। पहले इसे सिर्फ सिंचाई के लिए बनाया गया था और बाद में इससे बिजली बनाने पर भी विचार हुआ। इसका जलाशय बसव सागर जलाशय कहलाता है।
श्रीशैलम बांध
श्रीशैलम बांध आंध्र प्रदेश के नंद्याल और तेलंगाना के नागरकुरनूल जिलों के बीच नल्लामाला पहाड़ियों में एक गहरी घाटी में बना है। इसका निर्माण 1960 के आसपास शुरू हुआ और 1981 में पूरा माना जाता है। इसकी कुल स्थापित क्षमता 1670 मेगावाट है। श्रीशैलम में मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग भी है। आसपास का नागार्जुनसागर-श्रीशैलम टाइगर रिजर्व देश के सबसे बड़े बाघ अभयारण्यों में गिना जाता है।
नागार्जुन सागर बांध
नागार्जुन सागर पत्थर की चिनाई से बना देश का एक विशाल बांध है। यह आंध्र प्रदेश के पलनाडु और तेलंगाना के नलगोंडा जिले के बीच कृष्णा पर स्थित है और सिंचाई, बिजली और पेयजल के काम आता है। इसका नाम बौद्ध आचार्य नागार्जुन के नाम पर रखा गया है, और इसके पीछे बनी झील को नागार्जुन सागर जलाशय कहते हैं। जलाशय के बीच नागार्जुनकोंडा टापू है, जहां बौद्ध काल के अवशेष मिले हैं।
तुंगभद्रा बांध
तुंगभद्रा बांध विजयनगर जिले में होसपेटे के पास तुंगभद्रा नदी पर बना है। इसे पम्पा सागर भी कहते हैं। यह बहुउद्देशीय बांध है, यानी इसका पानी सिंचाई, बिजली बनाने और बाढ़ पर नियंत्रण, तीनों कामों में आता है।
कृष्णा बेसिन की प्रमुख नहर परियोजनाएं
कृष्णा का पानी नहरों के जरिए बहुत बड़े इलाके की खेती तक पहुंचता है। इनमें कृष्णा डेल्टा प्रणाली (आंध्र प्रदेश), तुंगभद्रा की बायीं और दायीं तट नहरें (कर्नाटक और आंध्र प्रदेश), घाटप्रभा और मलप्रभा की नहरें (कर्नाटक), कोयना और भीमा नहर प्रणालियां (महाराष्ट्र) और नागार्जुन सागर की नहरें (आंध्र प्रदेश और तेलंगाना) प्रमुख हैं।
कृष्णा नदी के किनारे के प्रमुख स्थान
| स्थान | राज्य | नदी | क्यों महत्वपूर्ण |
|---|---|---|---|
| महाबलेश्वर | महाराष्ट्र | कृष्णा का उद्गम | हिल स्टेशन, पांच नदियों से जुड़ा तीर्थ |
| कराड | महाराष्ट्र | कृष्णा-कोयना संगम | प्रीति संगम |
| कोल्हापुर | महाराष्ट्र | पंचगंगा | प्रयाग संगम, नरसोबावाडी के पास कृष्णा से मेल |
| कूडलसंगम | कर्नाटक | कृष्णा-मलप्रभा संगम | बसवेश्वर की समाधि |
| पट्टदकल, ऐहोल, बादामी | कर्नाटक | मलप्रभा | चालुक्य कालीन मंदिर और गुफाएं |
| श्रृंगेरी | कर्नाटक | तुंगा | शंकराचार्य का दक्षिणी पीठ |
| हम्पी | कर्नाटक | तुंगभद्रा | विजयनगर साम्राज्य की राजधानी |
| श्रीशैलम | आंध्र प्रदेश | कृष्णा | मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग |
| हैदराबाद | तेलंगाना | मूसी | उस्मान सागर और हिमायत सागर से पेयजल |
| विजयवाड़ा | आंध्र प्रदेश | कृष्णा | नदी किनारे का सबसे बड़ा शहर, प्रकाशम बैराज |
कृष्णा जल विवाद और नदी का प्रबंधन
कृष्णा के पानी के बंटवारे को लेकर बेसिन के राज्यों के बीच लंबे समय से विवाद रहा है। इसे सुलझाने के लिए 1969 में न्यायमूर्ति बचावत की अध्यक्षता में पहला कृष्णा जल विवाद अधिकरण बनाया गया और 2004 में बृजेश कुमार की अध्यक्षता में दूसरा। आंध्र प्रदेश के बंटवारे और तेलंगाना बनने के बाद 2014 में दोनों तेलुगु राज्यों के बीच पानी के प्रबंधन के लिए कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) बनाया गया।
इस पोस्ट के मानचित्रों के बारे में
इस पोस्ट के सभी मानचित्र मैंने खुद पेन टैब की मदद से हाथ से बनाए हैं, ताकि हर नदी, संगम और बांध परीक्षा की जरूरत के हिसाब से साफ दिखाई दे। नक्शे में कोई कमी या गलती दिखे तो कमेंट में जरूर बताइए। मानचित्र इस्तेमाल करने से पहले हमारा इमेज लाइसेंस पेज जरूर पढ़ लें। भारत की दूसरी नदियों और राज्यों के नक्शे मानचित्र पेज पर मिल जाएंगे। इसी तरह गंगा नदी तंत्र और सिंधु नदी तंत्र भी पढ़ सकते हैं, और कृष्णा के बड़े हिस्से की जानकारी के लिए कर्नाटक का नक्शा भी देखें।
कृष्णा नदी तंत्र (Krishna Nadi Tantra) का माइंड मैप: क्विक रिवीजन
पूरी पोस्ट को जल्दी दोहराने के लिए नीचे माइंड मैप दिया गया है। इसमें उद्गम स्थल, प्रमुख बांध, दाएं और बाएं किनारे की सहायक नदियां, रायचूर दोआब और ऐतिहासिक स्थल एक ही चार्ट में समेटे गए हैं। परीक्षा से पहले इसे एक बार जरूर देख लें।

कृष्णा नदी तंत्र: हाई-क्वालिटी PDF माइंड मैप डाउनलोड करें
कृष्णा नदी से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
कृष्णा नदी कहां से निकलती है?
कृष्णा नदी महाराष्ट्र के सतारा जिले में महाबलेश्वर के ठीक उत्तर में बसे जोर गांव के पास पश्चिमी घाट (सह्याद्रि) से निकलती है। उद्गम की ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 1337 मीटर है। यह जगह अरब सागर से सिर्फ लगभग 64 किलोमीटर दूर है।
कृष्णा नदी कहां गिरती है?
कृष्णा नदी आंध्र प्रदेश में हंसलादीवी (कोडुरु के पास) बंगाल की खाड़ी में गिरती है। समुद्र में मिलने से पहले यह विजयवाड़ा के बाद कई धाराओं में बंटकर डेल्टा बनाती है, जो आगे गोदावरी के डेल्टा से मिल जाता है।
कृष्णा नदी की लंबाई कितनी है?
कृष्णा नदी की कुल लंबाई उद्गम से मुहाने तक लगभग 1400 किलोमीटर है। यह गंगा और गोदावरी के बाद भारत की तीसरी सबसे लंबी नदी है और प्रायद्वीपीय भारत में गोदावरी के बाद दूसरी सबसे लंबी नदी मानी जाती है।
कृष्णा नदी किन राज्यों से होकर बहती है?
कृष्णा नदी चार राज्यों से होकर बहती है: महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश। यह महाराष्ट्र से निकलती है, कर्नाटक में बहती है, फिर तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की सीमा के साथ आगे बढ़कर आंध्र प्रदेश में समुद्र से मिलती है।
कृष्णा नदी की सहायक नदियां कौन-कौन सी हैं?
दाईं ओर से कोयना, वारना, पंचगंगा, दूधगंगा, घाटप्रभा, मलप्रभा और तुंगभद्रा मिलती हैं। बाईं ओर से येरला, भीमा, डिंडी, पेद्दावागु, मूसी, पालेरू और मुनेरू मिलती हैं। इनमें भीमा सबसे लंबी और तुंगभद्रा सबसे बड़ी सहायक नदी है।
कृष्णा नदी की सबसे लंबी सहायक नदी कौन सी है?
कृष्णा की सबसे लंबी सहायक नदी भीमा है, जिसकी लंबाई 861 किलोमीटर है। यह महाराष्ट्र की भीमाशंकर पहाड़ियों से निकलती है और रायचूर के पास कृष्णा में मिलती है। जल ग्रहण क्षेत्र के हिसाब से सबसे बड़ी सहायक नदी तुंगभद्रा है।
कृष्णा नदी पर कौन-कौन से बांध बने हैं?
कृष्णा और उसकी सहायक नदियों पर धोम, कोयना, उजनी, अल्माटी, नारायणपुर, जुराला, तुंगभद्रा, श्रीशैलम और नागार्जुन सागर बांध बने हैं। विजयवाड़ा में प्रकाशम बैराज है। कोयना महाराष्ट्र की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना है और श्रीशैलम की क्षमता 1670 मेगावाट है।
महाबलेश्वर से कौन-कौन सी नदियां निकलती हैं?
महाबलेश्वर क्षेत्र से कृष्णा, कोयना, वेण्णा, सावित्री और गायत्री नदियां निकलती मानी जाती हैं। इनमें से कृष्णा, कोयना और वेण्णा पूर्व की ओर बहती हैं, जबकि सावित्री पश्चिम की ओर बहकर अरब सागर में गिरती है।
कृष्णा और तुंगभद्रा के बीच के क्षेत्र को क्या कहते हैं?
कृष्णा और तुंगभद्रा नदियों के बीच के उपजाऊ क्षेत्र को रायचूर दोआब कहते हैं। दोआब का मतलब है दो नदियों के बीच की भूमि। इसका नाम कर्नाटक के रायचूर शहर पर पड़ा है और यह क्षेत्र तेलंगाना के गडवाल इलाके तक फैला है।
कृष्णा नदी पश्चिम से पूर्व की ओर क्यों बहती है?
प्रायद्वीपीय भारत का ढाल पश्चिम से पूर्व की ओर है। पश्चिमी घाट पश्चिम में ऊंचे और खड़े हैं, इसलिए वहां से निकली नदियां पूर्व की ओर बहती हैं। कृष्णा पश्चिमी घाट से निकलकर इसी ढाल पर बहती हुई बंगाल की खाड़ी में जाती है।
नदी तंत्र किसे कहते हैं?
किसी मुख्य नदी और उसमें मिलने वाली सभी सहायक नदियों के समूह को नदी तंत्र या अपवाह तंत्र कहते हैं। जैसे कृष्णा नदी तंत्र में कृष्णा मुख्य नदी है और भीमा, तुंगभद्रा, कोयना, मूसी आदि उसकी सहायक नदियां हैं।
स्रोत और संदर्भ
इस पोस्ट की जानकारी इन स्रोतों से जांची गई है: भारत जल संसाधन सूचना प्रणाली (India-WRIS), जल शक्ति मंत्रालय का कृष्णा नदी घाटी का पृष्ठ; कृष्णा रिवर बेसिन एटलस (सितंबर 2025), cKrishna, एनआईटी वारंगल और एनआईटीके सूरतकल, राष्ट्रीय नदी संरक्षण निदेशालय (NRCD) के लिए; बागलकोट जिला प्रशासन की वेबसाइट (कूडलसंगम); और SANDRP की रिपोर्ट “Krishna River in Maharashtra: A Profile”।
इस पोस्ट में मैंने कृष्णा नदी से जुड़े सभी जरूरी बिंदु शामिल करने की कोशिश की है। अगर कहीं कोई कमी या गलती दिखे तो कमेंट में जरूर बताइए। ऐसे ही नोट्स और मानचित्रों के लिए हमारे फेसबुक पेज (gkgsnotes) से भी जुड़ सकते हैं।

अति उत्तम
Thank you