गंगा नदी तंत्र (Ganga Nadi Tantra): मैप, सहायक नदियां, पंच प्रयाग और नोट्स PDF

गंगा नदी केवल भारत की सबसे लंबी नदी ही नहीं, बल्कि यह देश की आर्थिक और सांस्कृतिक जीवनरेखा भी है। प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UPSC, SSC, State PSC) की दृष्टि से ‘गंगा नदी तंत्र’ (Ganga Nadi Tantra) भूगोल का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। इस पोस्ट में हम गंगा नदी तंत्र के सामान्य परिचय, गंगा नदी का उद्गम, विशेषताएं, मुहाना, प्रवाह क्षेत्र, पंच प्रयाग और गंगा नदी की सभी सहायक नदियों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे। साथ ही गंगा और उसकी सहायक नदियों के किनारे बसे हुए प्रमुख नगरों की भी बात करेंगे। इन सब चीजों को हम चित्रों और मैप की सहायता से विस्तार से समझेंगे। मैं इस पोस्ट में गंगा नदी तंत्र से संबंधित लगभग सभी तथ्यों को समाहित करने का प्रयास करूंगा।

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गंगा नदी तंत्र एक नजर में

सीधे शब्दों में कहें तो गंगा नदी उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में गोमुख (गंगोत्री हिमनद) से भागीरथी के रूप में निकलती है। देवप्रयाग में अलकनंदा से मिलने के बाद इसका नाम गंगा हो जाता है। इसके बाद यह उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से बहते हुए बंगाल की खाड़ी में गिरती है। भागीरथी और हुगली के रास्ते बंगाल की खाड़ी तक इसकी कुल लंबाई 2525 किलोमीटर मानी जाती है।

बिंदुजानकारी
उद्गम स्थलगोमुख (गंगोत्री हिमनद), उत्तरकाशी जिला, उत्तराखंड। यहां इसका नाम भागीरथी है
गंगा नाम कहां से मिलता हैदेवप्रयाग में भागीरथी और अलकनंदा के संगम से
कुल लंबाई2525 किलोमीटर (भागीरथी और हुगली के रास्ते बंगाल की खाड़ी तक)
मुख्यधारा के राज्यउत्तराखंड, उत्तर प्रदेश (सबसे अधिक), बिहार, झारखंड (सबसे कम) और पश्चिम बंगाल
मैदान में प्रवेशहरिद्वार
मुहानाबंगाल की खाड़ी, गंगा सागर (पश्चिम बंगाल) के पास। बांग्लादेश जाने वाली धारा पद्मा कहलाती है
डेल्टासुंदरबन डेल्टा, दुनिया का सबसे बड़ा डेल्टा
दाएं तट की मुख्य सहायक नदियांयमुना, सोन, पुनपुन
बाएं तट की मुख्य सहायक नदियांरामगंगा, गोमती, घाघरा, गंडक, बूढ़ी गंडक, कोसी, महानंदा
पंच प्रयागविष्णुप्रयाग, नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग, देवप्रयाग
बेसिन का क्षेत्रफललगभग 10 लाख वर्ग किलोमीटर। इसमें से भारत में लगभग 8.6 लाख वर्ग किलोमीटर (देश का लगभग 26%)
राष्ट्रीय नदी4 नवंबर 2008 को घोषित

ऐसी ही बहुत सारी पोस्टों की सहायता से हम भारत के सभी नदी तंत्रों को विस्तार से समझेंगे। इन सभी नदी तंत्रों को समझने से पहले हमें भारत के अपवाह तंत्र के वर्गीकरण को समझना होगा, जिसे मैं कुछ इमेज की सहायता से समझाने का प्रयास कर रहा हूं। भारत के अपवाह तंत्र को डिटेल में हम एक अन्य पोस्ट में पढ़ेंगे।

भारत के अपवाह तंत्र का वर्गीकरण
उद्गम और मुहाने के आधार पर भारत के अपवाह तंत्र का वर्गीकरण
हिमालय नदियों का वर्गीकरण
हिमालयी नदियों का वर्गीकरण

नदी तंत्र (अपवाह तंत्र) किसे कहते हैं?

किसी एक मुख्य नदी और उसमें आकर मिलने वाली सारी छोटी-बड़ी नदियों के पूरे समूह को नदी तंत्र कहते हैं। इसी को अपवाह तंत्र भी कहा जाता है। जिस इलाके की बारिश और बर्फ पिघलने का पानी आखिर में एक ही मुख्य नदी तक पहुंचता है, उस इलाके को उस नदी का जल ग्रहण क्षेत्र (कैचमेंट एरिया) कहते हैं। दो नदी तंत्रों को अलग करने वाली ऊंची जमीन, जैसे कोई पर्वत या पठार, जल विभाजक कहलाती है।

गंगा नदी तंत्र, जिसे गंगा अपवाह तंत्र या गंगा नदी प्रणाली भी कहते हैं, में मुख्य नदी गंगा है और यमुना, सोन, घाघरा, गंडक, कोसी जैसी नदियां उसकी सहायक नदियां हैं। इसे हिमालय से निकलने वाली नदियों का तंत्र माना जाता है, और उद्गम तथा मुहाने के आधार पर यह बंगाल की खाड़ी में गिरने वाला तंत्र है। ऊपर के चित्रों में आप भारत के अपवाह तंत्र का पूरा वर्गीकरण देख सकते हैं।

गंगा नदी तंत्र (Ganga Nadi Tantra) का सामान्य परिचय

  • गंगा नदी तंत्र भारत का सबसे विशाल और महत्वपूर्ण अपवाह तंत्र है। इसका कुल जल ग्रहण क्षेत्रफल लगभग 10 लाख वर्ग किलोमीटर है, जिसमें से लगभग 8.6 लाख वर्ग किलोमीटर हिस्सा अकेले भारत में है, जो देश के कुल क्षेत्रफल का लगभग 26% है।
  • यह तंत्र मुख्य नदी ‘गंगा’ और उसकी सहायक नदियों (जैसे यमुना, चंबल, सोन, गंडक, घाघरा, कोसी आदि) के मिलने से बनता है।
  • गंगा नदी तंत्र में निम्न नदियां आती हैं — गंगा, यमुना, चंबल, सोन, रामगंगा, गंडक, कोसी, गोमती, घाघरा, महानंदा नदी आदि।
  • गंगा नदी एक अंतरराष्ट्रीय नदी है, जिसका बेसिन भारत के अलावा चीन (तिब्बत), नेपाल, भूटान और बांग्लादेश तक फैला हुआ है। भारत के अंदर यह नदी तंत्र 11 राज्यों (उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल) के अपवाह क्षेत्र को कवर करता है, जो इसकी विशालता को दर्शाता है।
  • गंगा नदी की सबसे अधिक पानी लाने वाली सहायक नदियां नेपाल से निकलती हैं, इसीलिए नेपाल को वॉटर टावर ऑफ़ गंगा (Water Tower of Ganga) कहा जाता है।
  • गंगा नदी तंत्र का मुहाना बंगाल की खाड़ी है। समुद्र में मिलने से पहले गंगा नदी ब्रह्मपुत्र नदी (मेघना) के साथ मिलकर विश्व के सबसे बड़े डेल्टा ‘सुंदरबन डेल्टा’ का निर्माण करती है। पारिस्थितिकी रूप से यह क्षेत्र अत्यंत महत्वपूर्ण है और यह भारत की सबसे बड़ी रामसर साइट भी है।
  • गंगा नदी तंत्र में दो तरह की नदियां मिलती हैं। हिमालय से आने वाली नदियां (गंगा, यमुना, घाघरा, गंडक, कोसी आदि) पूरे साल बहती हैं, क्योंकि इन्हें बर्फ पिघलने और बारिश, दोनों से पानी मिलता है। ऐसी नदियों को सदावाहिनी कहते हैं। वहीं दक्षिण के प्रायद्वीपीय पठार से आने वाली सहायक नदियां (चंबल, सिंध, बेतवा, केन, सोन) मुख्य रूप से बारिश के पानी पर निर्भर रहती हैं।
  • उत्तर भारत का विशाल गंगा का मैदान इसी नदी तंत्र की नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी (जलोढ़) से बना है। इसीलिए यह इलाका देश के सबसे उपजाऊ और सबसे घनी आबादी वाले इलाकों में गिना जाता है।

गंगा नदी (Ganga Nadi)

गंगा भारत की राष्ट्रीय नदी होने के साथ-साथ आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से देश की सबसे महत्वपूर्ण नदी है। इसकी कुल लंबाई 2525 किलोमीटर है, जो इसे भारत की सबसे लंबी नदी बनाती है। यह लंबाई भागीरथी और हुगली के रास्ते से बंगाल की खाड़ी में गिरने तक नापी जाती है।

  1. अक्सर छात्रों को भ्रम होता है कि सिंधु नदी और ब्रह्मपुत्र नदी दोनों गंगा नदी से अधिक लंबी हैं। यह सत्य है, किंतु उन नदियों का एक बड़ा हिस्सा भारत के बाहर (चीन/पाकिस्तान) बहता है। चूंकि गंगा की लंबाई भारत के भीतर सर्वाधिक है, इसलिए इसे ही भारत की सबसे बड़ी नदी माना जाता है।
  2. भारत में सबसे बड़ा जल ग्रहण क्षेत्र गंगा नदी का है।
  3. गंगा नदी की मुख्यधारा दो देशों से होकर प्रवाहित होती है — भारत और बांग्लादेश। (ध्यान रहे: बेसिन का विस्तार इससे कहीं अधिक देशों में है, जैसा ऊपर बताया गया।)
  4. गंगा का उद्गम उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में गोमुख के निकट गंगोत्री हिमनद से होता है।
  5. गंगा नदी डेल्टा बनाते हुए बंगाल की खाड़ी में अपना मुहाना बनाती है।
  6. गंगा की मुख्यधारा भारत के पांच राज्यों — उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश (सर्वाधिक), बिहार, झारखंड (सबसे कम) और पश्चिम बंगाल — में बहती है। 
  7. भारत के राज्यों में गंगा नदी की लंबाई (कुल 2525 किमी में से) — उत्तराखंड: 110 किमी, उत्तर प्रदेश: 1450 किमी, बिहार: 405 किमी, झारखंड: 40 किमी, पश्चिम बंगाल: 520 किमी।
  8. पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में फरक्का के पास गंगा नदी दो भागों में विभाजित हो जाती है। इसकी एक शाखा (पद्मा) बांग्लादेश में चली जाती है और दूसरी शाखा हुगली नदी (भागीरथी-हुगली) के रूप में कोलकाता से होते हुए बंगाल की खाड़ी में गिर जाती है।
  9. हुगली नदी के किनारे ही कोलकाता शहर और कोलकाता बंदरगाह स्थित है। हुगली नदी को अपनी अनिश्चित प्रकृति के कारण ‘विश्व की सबसे विश्वासघाती नदी’ कहा जाता है।
  10. गंगा नदी सर्वप्रथम हरिद्वार में पर्वतीय भाग से निकलकर मैदान में प्रवेश करती है।
  11. उत्तराखंड से निकलने के बाद गंगा नदी बिजनौर जिले से उत्तर प्रदेश में प्रवेश करती है।
  12. गंगा नदी में बैक्टीरियोफेज नामक विषाणु (virus) पाए जाते हैं जो जीवाणुओं (bacteria) को खा जाते हैं। इसी कारण गंगा नदी का पानी लंबे समय तक खराब नहीं होता है। बैक्टीरियोफेज ही गंगा नदी को स्वत: शुद्धिकरण वाली नदी का दर्जा प्रदान करते हैं।

गंगा नदी का उद्गम स्थल (गंगा नदी कहां से निकलती है?)

क्या गंगा नदी वास्तव में गंगोत्री से निकलती है? इस प्रश्न का उत्तर थोड़ा तकनीकी है।

भौगोलिक रूप से गंगा नदी का वास्तविक निर्माण उत्तराखंड के देवप्रयाग में होता है, जहां दो पवित्र नदियां भागीरथी और अलकनंदा आपस में मिलती हैं। इन दोनों नदियों की संयुक्त धारा को ही आगे चलकर ‘गंगा’ नाम दिया जाता है।

परीक्षा की दृष्टि से: हालांकि गंगा देवप्रयाग में बनती है, लेकिन अधिकांश परीक्षाओं और सामान्य मान्यताओं में मुख्यधारा भागीरथी के उद्गम स्थल को ही गंगा नदी का उद्गम स्थल माना जाता है।

अतः गंगा नदी का उद्गम उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में गोमुख के निकट गंगोत्री हिमनद (glacier) से भागीरथी नदी के रूप में होता है। जब उत्तराखंड के देवप्रयाग में भागीरथी और अलकनंदा नदियां मिलती हैं, तो इनकी संयुक्त धारा गंगा नदी कहलाती है।

यदि आपसे पूछा जाए कि गंगा कहां से निकलती है, तो उत्तर गंगोत्री हिमनद (गोमुख) होगा, लेकिन तकनीकी रूप से यह भागीरथी और अलकनंदा का संगम है।

गोमुख का शाब्दिक अर्थ है ‘गाय का मुख’। माना जाता है कि गंगोत्री हिमनद का यह छोर गाय के मुख जैसा दिखता था, इसीलिए इसे यह नाम मिला। यहीं से बर्फ पिघलकर भागीरथी की धारा बनती है। गंगोत्री मंदिर से गोमुख तक लगभग 18 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है।

इन्हें भी पढ़ें:

पंच प्रयाग और गंगा का निर्माण

गंगा नदी तंत्र को समझने के लिए हमें पंच प्रयाग को समझना आवश्यक है। जिसे हम मैप की सहायता से समझने का प्रयास करते हैं। इस आर्टिकल को पढ़ने के साथ-साथ मैप को भी देखते जाएं तो आप अच्छे से समझ पाएंगे।

पंच प्रयाग का मानचित्र - गंगा नदी तंत्र में प्रयागों का स्थान
पंच प्रयाग का मानचित्र

भागीरथी नदी

भागीरथी को गंगा की मुख्य धारा माना जाता है, और इसी के उद्गम स्थल को गंगा का उद्गम स्थल कहा जाता है। यह गोमुख से निकलकर गंगोत्री और उत्तरकाशी होते हुए टिहरी की ओर बहती है। रास्ते में भैरोंघाटी के पास जाड़ गंगा (जाह्नवी) इसमें मिलती है, और टिहरी में भीलांगना नदी आकर मिलती है। भागीरथी पर उत्तरकाशी जिले में मनेरी भाली परियोजना और टिहरी में टिहरी बांध बना है। टिहरी बांध से छोड़े गए पानी को उसके नीचे बना कोटेश्वर बांध नियंत्रित करता है। इसके बाद देवप्रयाग में भागीरथी अलकनंदा से मिलती है।

अलकनंदा नदी का उद्गम और पंच प्रयागों का निर्माण

  • अलकनंदा नदी का निर्माण दो नदियों — धौलीगंगा नदी और विष्णुगंगा नदी — की संयुक्त धाराओं के मिलने से होता है।
  • विष्णुगंगा नदी सतोपंथ ग्लेशियर के क्षेत्र से निकलकर बद्रीनाथ की ओर से आती है, जबकि धौलीगंगा नदी नीति दर्रे के पास से आती है। यह दोनों नदियां विष्णुप्रयाग में मिलती हैं और यहीं से मुख्य धारा का नाम अलकनंदा पड़ता है।
  • क्या आप जानते हैं? बद्रीनाथ धाम हिंदू धर्म के चार पवित्र धामों में से एक है। यह चारों धाम चारों दिशाओं में स्थित हैं — (1) बद्रीनाथ (उत्तराखंड) (2) द्वारका (गुजरात) (3) रामेश्वरम (तमिलनाडु) (4) पुरी (ओडिशा)।
  • यदि आपसे पूछा जाए कि बद्रीनाथ किस नदी के किनारे स्थित है, तो आप उत्तर अलकनंदा नदी ही बताएंगे, क्योंकि विष्णुगंगा अलकनंदा नदी का ही रूप है।
  • नंदाकिनी नदी नंदादेवी ग्लेशियर से निकलकर नंदप्रयाग में अलकनंदा नदी से मिलती है।
  • पिंडर नदी (कर्ण गंगा) पिंडारी ग्लेशियर से निकलकर कर्णप्रयाग में अलकनंदा नदी से मिलती है।
  • चोराबाड़ी ग्लेशियर (केदारनाथ) से निकलकर मंदाकिनी नदी रुद्रप्रयाग में अलकनंदा नदी से मिलती है।
  • उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के गंगोत्री ग्लेशियर के गोमुख से निकलकर भागीरथी नदी देवप्रयाग में अलकनंदा नदी से मिलती है। यहीं से इन दोनों नदियों की संयुक्त धारा गंगा नदी कहलाती है।
  • उत्तराखंड की लोक कथाओं में भागीरथी नदी को सास का दर्जा दिया गया है और अलकनंदा नदी को बहू का दर्जा दिया गया है, क्योंकि भागीरथी नदी बहुत उथल-पुथल के साथ बहती है और अलकनंदा बड़ी शांति से बहती है।
  • भागीरथी नदी और उसकी सहायक नदी भीलांगना के संगम पर भारत का सबसे ऊंचा बांध — टिहरी बांध (उत्तराखंड में) बनाया गया है। भीलांगना नदी खतलिंग ग्लेशियर से निकलती है।

Note: भारत का सबसे ऊंचा बांध टिहरी बांध है, पर भारत का सबसे ऊंचा गुरुत्वीय बांध भाखड़ा नांगल बांध है। बांध और बांधों के प्रकारों को हम बांध (Dams) वाले टॉपिक में विस्तार से समझेंगे।

पंच प्रयाग का क्रम ऊपर से नीचे की ओर, यानी अलकनंदा की यात्रा के हिसाब से नीचे तालिका में दिया है। ध्यान रहे कि देवप्रयाग सबसे आखिर में आता है और यहीं से आगे की धारा को गंगा कहा जाता है।

क्रमप्रयागकौन-कौन सी नदियां मिलती हैंजिला
1विष्णुप्रयागधौलीगंगा और विष्णुगंगा (यहीं से अलकनंदा नाम)चमोली
2नंदप्रयागनंदाकिनी और अलकनंदाचमोली
3कर्णप्रयागपिंडर (कर्ण गंगा) और अलकनंदाचमोली
4रुद्रप्रयागमंदाकिनी और अलकनंदारुद्रप्रयाग
5देवप्रयागभागीरथी और अलकनंदा (यहीं से गंगा नाम)टिहरी गढ़वाल

गंगा नदी का नक्शा / मानचित्र (Map of Ganga Nadi Tantra)

मैं आपको अपने हाथों से बनाया गया गंगा नदी तंत्र का नक्शा प्रदान कर रहा हूं। आप इस आर्टिकल को पढ़ते हुए सारे पॉइंट्स को इस नक्शे में भी देखते जाएं, जिससे आपको याद रखने में आसानी होगी। आप इस मैप का प्रिंट आउट निकलवा सकते हैं। इस मैप को अच्छी क्वालिटी में प्राप्त करने के लिए आप मेरे टेलीग्राम चैनल को ज्वाइन कर सकते हैं।

गंगा नदी का नक्शा - गोमुख से बंगाल की खाड़ी तक गंगा नदी तंत्र का मानचित्र
गंगा नदी तंत्र का मानचित्र

गंगा नदी का प्रवाह मार्ग (गंगा कहां-कहां से बहती है?)

गंगा पश्चिम से पूर्व की ओर बहने वाली नदी है और अपने रास्ते में पांच राज्यों से गुजरती है। ऊपर के नक्शे में इस पूरे रास्ते को देखते हुए नीचे का विवरण पढ़ेंगे तो याद रखना आसान रहेगा।

उत्तराखंड में

गोमुख से भागीरथी के रूप में निकलकर यह गंगोत्री, उत्तरकाशी और टिहरी से गुजरती है। देवप्रयाग में अलकनंदा से मिलने के बाद इसे गंगा कहते हैं। आगे यह ऋषिकेश होते हुए हरिद्वार पहुंचती है, जहां यह पहाड़ों को छोड़कर पहली बार मैदान में उतरती है। हरिद्वार में हर की पौड़ी के पास ही भीमगोड़ा बैराज है, जिससे ऊपरी गंगा नहर निकलती है।

उत्तर प्रदेश में

बिजनौर के पास गंगा उत्तर प्रदेश में प्रवेश करती है और यहां इसकी लंबाई सबसे ज्यादा है। गढ़मुक्तेश्वर, नरौरा, फर्रुखाबाद और कन्नौज होते हुए यह कानपुर पहुंचती है। कन्नौज के पास रामगंगा इसमें मिलती है। प्रयागराज में दाईं ओर से यमुना आकर मिलती है और इस संगम को त्रिवेणी संगम कहते हैं। मान्यता है कि यहां सरस्वती नदी भी अदृश्य रूप से मिलती है। इसके बाद गंगा मिर्जापुर और वाराणसी से गुजरती है। वाराणसी में यह उत्तर की ओर बहती है, इसलिए यहां इसे उत्तरवाहिनी कहते हैं। गाजीपुर के पास गोमती इसमें मिलती है और बलिया के पास से गंगा कुछ दूरी तक उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा बनाते हुए बिहार में प्रवेश करती है।

बिहार में

बिहार में गंगा बक्सर की ओर से प्रवेश करती है। छपरा के पास घाघरा, पटना के पास सोन और पटना के सामने हाजीपुर के पास गंडक इसमें मिलती है। पटना के आगे फतुहा में पुनपुन मिलती है। इसके बाद गंगा मुंगेर और भागलपुर से होकर आगे बढ़ती है और कुर्सेला के पास कोसी को अपने में मिला लेती है। बिहार में गंगा लगभग बीच से बहती है और राज्य को उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार, दो हिस्सों में बांट देती है।

झारखंड में

बिहार के बाद गंगा झारखंड के साहिबगंज जिले में लगभग 40 किलोमीटर तक बहती है। राजमहल की पहाड़ियों के पास यह दक्षिण की ओर मुड़ जाती है और पश्चिम बंगाल में प्रवेश करती है।

पश्चिम बंगाल में

पश्चिम बंगाल में गंगा मालदा और मुर्शिदाबाद जिलों से होकर बहती है। फरक्का के पास यह दो धाराओं में बंट जाती है। इनमें से एक हुगली के रूप में दक्षिण की ओर जाकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है और दूसरी पद्मा के नाम से बांग्लादेश चली जाती है। इसके बारे में हम आगे मुहाना और डेल्टा वाले हिस्से में विस्तार से पढ़ेंगे।

गंगा नदी की सहायक नदियाँ (बाएँ और दाएँ तट की)

गंगा नदी तंत्र की विशालता उसकी सहायक नदियों के कारण है। अध्ययन और परीक्षा की दृष्टि से हम इन नदियों को दो मुख्य भागों में विभाजित करते हैं:

  1. दाएं तट की नदियां: जो दक्षिण या पश्चिम से आकर मिलती हैं
  2. बाएं तट की नदियां: जो उत्तर या हिमालय से आकर मिलती हैं
गंगा नदी की सहायक नदियां - बाएं और दाएं तट की नदियों का मानचित्र
गंगा में बाएं और दाएं ओर से मिलने वाली नदियां

(क) दाएं तट से मिलने वाली नदियां

(1) यमुना नदी

यमुना और उसकी सहायक नदियों का मानचित्र
यमुना और उसकी सहायक नदियां

यह गंगा नदी की सबसे पश्चिमी, सबसे लंबी और सबसे महत्वपूर्ण सहायक नदी है। यह गंगा के समांतर बहते हुए प्रयागराज में उससे मिलती है।

  • उद्गम: यमुना नदी का उद्गम उत्तराखंड की बंदरपूंछ पहाड़ी के यमुनोत्री ग्लेशियर से होता है।
  • संगम (मुहाना): यमुना प्रयागराज में गंगा नदी से त्रिवेणी संगम पर मिलती है।
  • यमुना की सहायक नदियां: टोंस, हिण्डन (बाएँ ओर की); चंबल, सिंध, बेतवा, केन (दाएँ ओर की) आदि।
  • यमुना के किनारे बसे प्रमुख शहर: दिल्ली, फरीदाबाद, मथुरा, आगरा, इटावा, हमीरपुर, बांदा, प्रयागराज आदि।

(2) चंबल नदी (Chambal River)

(1) उद्गम: चंबल नदी विंध्य पर्वत श्रृंखला की जानापाव पहाड़ी (महू, इंदौर) से निकलती है।

(2) मुहाना: इटावा के पास यमुना नदी से मिल जाती है।

(3) प्रमुख सहायक नदियां: बनास, पार्वती, काली सिंध, क्षिप्रा आदि।

(4) विशेषताएं:

  • चंबल नदी यमुना की सबसे बड़ी सहायक नदी है।
  • चंबल नदी मध्य प्रदेश और राजस्थान की सीमा पर बहती है, यानी राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमा बनाती है।
  • चंबल बड़े पैमाने पर अवनालिका अपरदन (गली अपरदन) करती है, जिसके कारण चंबल नदी की घाटी में बीहड़ (उत्खात भूमि) का निर्माण हुआ है।
  • यह नदी घड़ियालों के लिए प्रसिद्ध है। यहां बड़ी मात्रा में घड़ियाल पाए जाते हैं और उनका संरक्षण भी किया जाता है।
  • चंबल की सहायक नदी क्षिप्रा काकरी बरडी की पहाड़ी से निकलती है। क्षिप्रा नदी के किनारे ही उज्जैन शहर बसा हुआ है।

(5) चंबल नदी की परियोजनाएं:

  • गांधी सागर (मंदसौर, MP)
  • राणा प्रताप सागर (चित्तौड़गढ़, RJ)
  • जवाहर सागर (RJ)
  • कोटा बैराज (RJ)

(3) सिंध नदी

सिंध नदी यमुना की एक सहायक नदी है, जो मालवा के पठार से निकलती है। मध्य प्रदेश में मड़ीखेड़ा बांध इसी नदी पर स्थित है।

(4) बेतवा नदी

बेतवा नदी यमुना की सहायक नदी है, जो विंध्य पहाड़ी से निकलती है और हमीरपुर में यमुना से मिल जाती है। बेतवा नदी पर ही माता टीला परियोजना बनाई गई है, जो उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर (झाँसी, उत्तर प्रदेश) स्थित है।

(5) केन नदी

केन नदी यमुना की सहायक नदी है, जो कैमूर की पहाड़ी से निकलती है और बांदा के निकट यमुना नदी से मिल जाती है। केन नदी मध्य प्रदेश के पन्ना नेशनल पार्क से होकर गुजरती है।

Note: केन और बेतवा नदियों को जोड़ा जा रहा है। केन-बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत 231.75 किलोमीटर लंबी नहर की सहायता से इन दोनों नदियों को जोड़ा जा रहा है। इस परियोजना से पन्ना राष्ट्रीय उद्यान प्रभावित हो रहा है।

(6) सोन नदी

  • सोन नदी गंगा की दाएं ओर से आकर मिलने वाली सहायक नदी है। सोन नदी अमरकंटक पहाड़ी (अनूपपुर, MP) से निकलती है।
  • अमरकंटक पहाड़ी से दो नदियां निकलती हैं — एक सोन नदी, जो उत्तर की ओर बहते हुए गंगा नदी से मिल जाती है; दूसरी नर्मदा नदी, जो पश्चिम की ओर प्रायद्वीपीय भारत के सामान्य ढाल के विपरीत दिशा में अपनी भ्रंश घाटी में बहती हुई खंभात की खाड़ी में गिरती है।
  • सोन नदी पटना के पास गंगा नदी से मिल जाती है।
  • सोन नदी की सहायक नदियां: रिहंद, कोली, गोपाल आदि हैं।
  • सोन नदी पर बाणसागर परियोजना (मध्य प्रदेश) और इंद्रपुरी बैराज (रोहतास, बिहार) बनाया गया है।
  • सोन नदी की सहायक नदी रिहंद पर रिहंद बांध उत्तर प्रदेश के पिपरी नामक स्थान पर बनाया गया है। इसी बांध के पीछे भारत की सबसे बड़ी कृत्रिम झील ‘गोविंद बल्लभ पंत सागर’ का निर्माण हुआ है।

(7) पुनपुन नदी

पुनपुन नदी छोटा नागपुर पठार से निकलती है और बिहार के फतुहा नामक स्थान पर गंगा नदी से मिल जाती है।

महत्वपूर्ण अंतर (परीक्षा में अक्सर भ्रम होता है): कई छात्र पुनपुन और निरंजना नदी को एक ही समझ लेते हैं, जो सही नहीं है। निरंजना नदी (जिसे पाली में लीलाजन कहा जाता है) एक अलग नदी है, जो आगे चलकर फल्गु नदी कहलाती है। बिहार का गया शहर फल्गु नदी के किनारे बसा हुआ है, और बोधगया में इसी निरंजना नदी के तट पर गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। फल्गु नदी की धाराएं अंततः पुनपुन नदी में जाकर मिल जाती हैं — यही एकमात्र संबंध है, जिसके कारण यह भ्रम पैदा होता है।

(ख) बाएं तट से मिलने वाली नदियां

(1) रामगंगा नदी

  • रामगंगा नदी का उद्गम उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र के नामिक ग्लेशियर से होता है और यह कन्नौज के पास गंगा नदी से मिल जाती है।
  • यह गंगा नदी से बाईं ओर से मिलने वाली पहली सहायक नदी है।
  • रामगंगा नदी उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क (आजादी के बाद 1950 के दशक में कुछ साल इसका नाम रामगंगा नेशनल पार्क भी रहा) के मध्य से होकर गुजरती है। रामगंगा नदी के किनारे यूपी के मुरादाबाद, बरेली और बदायूं शहर स्थित हैं।
  • रामगंगा पर उत्तराखंड में कालागढ़ बांध (रामगंगा बांध) बना है।

(2) गोमती नदी

  • गोमती नदी यूपी के पीलीभीत जिले की फुलहर झील / गोमत ताल से निकलती है और गाजीपुर के पास गंगा नदी से मिल जाती है।
  • गोमती नदी मैदानी भाग से निकलने वाली गंगा की एकमात्र सहायक नदी है।
  • यूपी के लखनऊ और जौनपुर शहर गोमती नदी के किनारे स्थित हैं।

(3) घाघरा नदी

  • घाघरा नदी तिब्बत के मापचाचुंगो (Mapchachungo) ग्लेशियर से निकलती है और बिहार के छपरा नामक स्थान पर गंगा नदी से मिल जाती है।
  • नेपाल में घाघरा नदी को करनाली कहा जाता है।
  • शारदा (काली), सरयू, राप्ती, छोटी गंडक आदि नदियां घाघरा नदी की सहायक नदियां हैं।
  • शारदा (काली) नदी मिलाम ग्लेशियर से निकलकर बाराबंकी में घाघरा नदी से मिल जाती है।
  • सरयू नदी के किनारे अयोध्या शहर बसा हुआ है।

(4) गंडक नदी

  • गंडक नदी का उद्गम नेपाल-तिब्बत सीमा पर धौलागिरी पर्वत के क्षेत्र से होता है और पटना के पास यह गंगा नदी से मिल जाती है।
  • नेपाल में गंडक नदी को नारायणी (काली गंडकी) कहा जाता है। भारत में यह वाल्मीकिनगर के पास बिहार में प्रवेश करती है और हाजीपुर-सोनपुर के पास (पटना के सामने) गंगा में मिलती है।
  • काली गंडक तथा त्रिशूल गंगा, गंडक नदी की सहायक नदियां हैं।
  • गंडक नदी पर भारत और नेपाल मिलकर गंडक परियोजना चला रहे हैं। इसका बैराज वाल्मीकिनगर (भारत-नेपाल सीमा) पर बना है।

(5) बूढ़ी गंडक नदी

बूढ़ी गंडक बिहार की अपनी नदी है और गंगा के बाएं तट की एक प्रमुख सहायक नदी है। यह पश्चिम चंपारण से निकलकर मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और बेगूसराय होते हुए खगड़िया के पास गंगा से मिल जाती है।

(6) कोसी नदी

  • कोसी नदी नेपाल में सात हिमालयी धाराओं के मिलने से बनती है, इसीलिए इसे सप्तकोशी भी कहते हैं। इनमें तीन धाराएं प्रमुख हैं: सुनकोसी (गोसाईंथान क्षेत्र से), अरुण (तिब्बत से) और तमोर (कंचनजंगा क्षेत्र से)। ये धाराएं नेपाल में त्रिवेणी के पास मिलती हैं, और आगे कोसी नदी बिहार के सुपौल जिले में भीमनगर के पास भारत में प्रवेश करती है।
  • भारत-नेपाल सीमा पर भीमनगर में कोसी बैराज बना है, जो 1954 की कोसी संधि के तहत बनाया गया था।
  • कोसी नदी बिहार के कटिहार जिले में कुर्सेला (भागलपुर के पास) गंगा नदी से मिल जाती है।
  • सुनकोसी की सहायक नदियों में दूधकोसी, लिखू, तामाकोसी, भोटे कोसी और इंद्रावती शामिल हैं।
  • यह नदी बाढ़ तथा अपने मार्ग परिवर्तन के लिए कुख्यात है। कोसी नदी में अवसादों की मात्रा अधिक होने के कारण यह अपने मार्ग को स्वयं ही अवरुद्ध कर लेती है, इसीलिए यह मार्ग परिवर्तित करती है। अत्यधिक बाढ़ के कारण इसे ‘बिहार का शोक’ कहा जाता है।

(7) महानंदा नदी

महानंदा नदी पश्चिम बंगाल की दार्जिलिंग पहाड़ियों से निकलती है। यह गंगा के बाएं तट पर मिलने वाली गंगा नदी की सबसे पूर्वी अथवा अंतिम सहायक नदी है।

गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों के किनारे बसे हुए प्रमुख शहर

क्रमांकशहरनदी
1बद्रीनाथअलकनंदा
2केदारनाथमंदाकिनी
3ऋषिकेशगंगा
4हरिद्वारगंगा
5बिजनौरगंगा
6कन्नौजगंगा
7कानपुरगंगा
8प्रयागराजगंगा और यमुना
9गाजीपुरगंगा
10वाराणसीगंगा
11बेगूसरायगंगा
12पटनागंगा और सोन
13भागलपुरगंगा
14बक्सरगंगा
15फरक्कागंगा
16दिल्लीयमुना
17मथुरायमुना
18आगरायमुना
19इटावायमुना
20हमीरपुरयमुना और बेतवा
21बांदायमुना और केन
22उज्जैनक्षिप्रा
23अयोध्यासरयू
24बरेलीरामगंगा
25बदायूंरामगंगा
26लखनऊगोमती
27जौनपुरगोमती
28ओरछाबेतवा
29कोलकाताहुगली
30उत्तरकाशीभागीरथी
31टिहरीभागीरथी और भीलांगना
32श्रीनगर (गढ़वाल)अलकनंदा
33देवप्रयागभागीरथी और अलकनंदा
34रुद्रप्रयागअलकनंदा और मंदाकिनी
35फर्रुखाबादगंगा
36मिर्जापुरगंगा
37बलियागंगा
38मुंगेरगंगा
39हाजीपुरगंडक (गंगा से संगम के पास)
40छपराघाघरा (गंगा से संगम के पास)
41मुरादाबादरामगंगा
42सुल्तानपुरगोमती
43कोटाचंबल
44विदिशाबेतवा
45हावड़ाहुगली

गंगा नदी का मुहाना और डेल्टा (गंगा कहां गिरती है?)

पश्चिम बंगाल में फरक्का (मुर्शिदाबाद जिला) के पास गंगा दो धाराओं में बंट जाती है। जो धारा मुख्य नदी से अलग होकर निकलती है और वापस उसमें नहीं मिलती, उसे वितरिका कहते हैं। हुगली और पद्मा गंगा की वितरिकाएं हैं। हुगली, यानी भागीरथी-हुगली लगभग 260 किलोमीटर दक्षिण की ओर बहकर कोलकाता होते हुए गंगा सागर के पास (सागर द्वीप, दक्षिण 24 परगना) बंगाल की खाड़ी में गिरती है। दूसरी धारा पद्मा के नाम से बांग्लादेश चली जाती है।

फरक्का बैराज

बैराज ऐसा ढांचा होता है जो नदी के पानी को रोककर नहरों में मोड़ता है और जरूरत के हिसाब से पानी छोड़ता भी है। फरक्का बैराज 21 अप्रैल 1975 को चालू हुआ। इसकी फीडर नहर गंगा के पानी का एक हिस्सा भागीरथी-हुगली में भेजती है, ताकि उसमें जमी गाद बह जाए और कोलकाता बंदरगाह चालू रहे। गंगा के पानी के बंटवारे को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच 1977 और 1996 में समझौते हुए।

हुगली में दामोदर, रूपनारायण, अजय और हल्दी जैसी नदियां मिलती हैं। दामोदर नदी में पहले बार-बार भीषण बाढ़ आती थी, इसलिए इसे ‘बंगाल का शोक’ कहा जाता था।

बांग्लादेश में गंगा (पद्मा)

बांग्लादेश में गंगा लगभग 145 किलोमीटर तक भारत और बांग्लादेश की सीमा बनाती है और फिर बांग्लादेश में प्रवेश करके पद्मा कहलाती है। गोआलंदो के पास ब्रह्मपुत्र (जिसे बांग्लादेश में जमुना कहते हैं) इसमें मिलती है, फिर भी नाम पद्मा ही रहता है। इसके बाद चांदपुर के पास मेघना नदी इससे मिलती है और यह मिली-जुली विशाल धारा मेघना के नाम से बंगाल की खाड़ी में गिरती है। ब्रह्मपुत्र के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए हमारी ब्रह्मपुत्र नदी वाली पोस्ट देखें।

सुंदरबन डेल्टा

डेल्टा नदी के मुहाने पर बना वह त्रिभुजाकार उपजाऊ इलाका है, जहां नदी कई धाराओं में बंटकर समुद्र में मिलती है। गंगा, ब्रह्मपुत्र और मेघना मिलकर दुनिया का सबसे बड़ा डेल्टा बनाती हैं। इसका भारत वाला हिस्सा पश्चिम बंगाल में सुंदरबन डेल्टा कहलाता है, जो मैंग्रोव जंगलों और बंगाल टाइगर के लिए जाना जाता है। सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान को 1987 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया था, और सुंदरबन वेटलैंड भारत की सबसे बड़ी रामसर साइट है।

गंगा नदी पर बने प्रमुख बांध, बैराज और नहरें

गंगा और उसकी धाराओं पर बने प्रमुख ढांचे नदी के बहाव के क्रम में नीचे तालिका में दिए हैं। सहायक नदियों पर बने बांध, जैसे रिहंद, गांधी सागर, माता टीला और मड़ीखेड़ा, हमने ऊपर उनकी नदियों के साथ पढ़ लिए हैं।

ढांचानदीस्थानखास बात
मनेरी भाली परियोजनाभागीरथीउत्तरकाशी, उत्तराखंडजलविद्युत परियोजना
टिहरी बांधभागीरथी (भीलांगना संगम)टिहरी, उत्तराखंडभारत का सबसे ऊंचा बांध, ऊंचाई लगभग 260.5 मीटर
कोटेश्वर बांधभागीरथीटिहरी, उत्तराखंडटिहरी से छोड़े गए पानी को नियंत्रित करता है
भीमगोड़ा बैराजगंगाहरिद्वार (हर की पौड़ी के पास)ऊपरी गंगा नहर यहीं से निकलती है
नरौरा बैराजगंगानरौरा, बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश)यहां से निचली गंगा नहर निकलती है
लव-कुश बैराजगंगाकानपुर (उत्तर प्रदेश)सिंचाई के लिए पानी मोड़ने वाला बैराज
फरक्का बैराजगंगाफरक्का, मुर्शिदाबाद (पश्चिम बंगाल)1975 में चालू, फीडर नहर से हुगली को पानी

ऊपरी गंगा नहर देश की सबसे पुरानी बड़ी नहर प्रणालियों में से एक है। इसकी योजना प्रोबी कॉटले ने बनाई थी, निर्माण 1840 में शुरू हुआ और 1854 में तत्कालीन गवर्नर-जनरल लॉर्ड डलहौजी ने इसे खोला। यह नहर गंगा और यमुना के बीच के इलाके की सिंचाई करती है। दो नदियों के बीच की जमीन को दोआब कहते हैं, इसलिए इस इलाके को गंगा-यमुना दोआब कहा जाता है।

गंगा नदी से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि देश की पहचान का हिस्सा है। इसे प्रदूषण से बचाने और इसकी सफाई के लिए कई कदम उठाए गए हैं। परीक्षा के लिए इनके वर्ष याद रखना जरूरी है, इसलिए नीचे तालिका में इन्हें क्रम से दिया है।

वर्षघटना
1985गंगा एक्शन प्लान की शुरुआत हुई। यह गंगा को प्रदूषण से बचाने की पहली बड़ी योजना थी, जिसमें मुख्य जोर शहरों के गंदे पानी (सीवेज) के उपचार पर था
1986प्रयागराज से हल्दिया तक (लगभग 1620 किलोमीटर) गंगा-भागीरथी-हुगली को राष्ट्रीय जलमार्ग-1 घोषित किया गया
20084 नवंबर को गंगा को भारत की राष्ट्रीय नदी घोषित किया गया
2009राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण (NGRBA) बना। 5 अक्टूबर 2009 को गंगा डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया
2011राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) एक सोसायटी के रूप में पंजीकृत हुआ
2014-15नमामि गंगे कार्यक्रम शुरू हुआ, जिसके लिए 20,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया
2016NGRBA की जगह राष्ट्रीय गंगा परिषद बनी

गंगा डॉल्फिन को स्थानीय भाषा में सूंस कहा जाता है। यह लगभग अंधी होती है और ध्वनि तरंगों की मदद से रास्ता खोजती है। इसे गंगा के पानी की सेहत का सूचक भी माना जाता है। बिहार के भागलपुर जिले में सुल्तानगंज से कहलगांव के बीच विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन हर साल 5 अक्टूबर को राष्ट्रीय गंगा डॉल्फिन दिवस मनाता है।

गंगा नदी तंत्र का वर्णन (परीक्षा में कैसे लिखें)

स्कूल और प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है कि गंगा नदी तंत्र का वर्णन कीजिए, या गंगा नदी तंत्र का सचित्र वर्णन कीजिए। ऐसे सवाल का उत्तर सिलसिलेवार लिखना चाहिए। नीचे एक नमूना उत्तर है, जिसे आप अपने शब्दों में लिख सकते हैं।

गंगा नदी तंत्र भारत का सबसे बड़ा नदी तंत्र है। इसकी मुख्य नदी गंगा उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में गोमुख (गंगोत्री हिमनद) से भागीरथी के रूप में निकलती है। देवप्रयाग में अलकनंदा से मिलने के बाद इसे गंगा कहा जाता है। हरिद्वार में यह पहाड़ों को छोड़कर मैदान में आती है और उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड से गुजरकर पश्चिम बंगाल पहुंचती है। फरक्का के पास यह दो धाराओं में बंट जाती है। एक धारा हुगली के रूप में बंगाल की खाड़ी में गिरती है और दूसरी पद्मा के नाम से बांग्लादेश चली जाती है। इसकी कुल लंबाई 2525 किलोमीटर है।

गंगा में दाएं तट से यमुना, सोन और पुनपुन तथा बाएं तट से रामगंगा, गोमती, घाघरा, गंडक, बूढ़ी गंडक, कोसी और महानंदा नदियां मिलती हैं। यमुना की सहायक नदियां चंबल, सिंध, बेतवा और केन भी इसी तंत्र का हिस्सा हैं। गंगा के किनारे हरिद्वार, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, पटना और कोलकाता जैसे बड़े शहर बसे हैं। यह भारत की राष्ट्रीय नदी है और इसका बेसिन देश के लगभग 26% क्षेत्रफल में फैला है।

सचित्र वर्णन के लिए एक सरल नक्शा जरूर बनाइए। उसमें गोमुख, देवप्रयाग, हरिद्वार, प्रयागराज, पटना, फरक्का और बंगाल की खाड़ी दिखाइए। गंगा के ऊपर की ओर (उत्तर में) बाएं तट की नदियां जैसे गोमती, घाघरा, गंडक और कोसी, तथा नीचे की ओर (दक्षिण में) दाएं तट की नदियां यमुना और सोन के नाम लिख दीजिए।

गंगा नदी तंत्र (Ganga River System): विस्तृत माइंड मैप

इस पूरे आर्टिकल के ‘क्विक रिवीजन’ के लिए हमने यहाँ ‘गंगा नदी तंत्र’ का एक विस्तृत माइंड मैप साझा किया है। इस चार्ट की मदद से आप नदी के उद्गम स्थल, पंच प्रयाग (विष्णु, नंद, कर्ण, रुद्र, देव प्रयाग), और दाईं तथा बाईं ओर से मिलने वाली प्रमुख सहायक नदियों का आसानी से रिवीजन कर सकते हैं। इसके अलावा, इसमें ‘सुंदरबन डेल्टा’ निर्माण और ‘किनारे बसे प्रमुख शहरों’ जैसे महत्वपूर्ण परीक्षा-उपयोगी तथ्यों को भी शामिल किया गया है। पूरे विषय को गहराई से समझने के लिए हमारे विस्तृत नोट्स का अध्ययन अवश्य करें।

गंगा नदी तंत्र का माइंड मैप — उद्गम, पंच प्रयाग और सहायक नदियों का क्विक रिवीजन चार्ट
गंगा नदी तंत्र — क्विक रिवीजन माइंड मैप

गंगा नदी तंत्र: हाई-क्वालिटी PDF माइंड मैप डाउनलोड करें

गंगा नदी तंत्र से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

नदी तंत्र किसे कहते हैं?

किसी एक मुख्य नदी और उसमें मिलने वाली सभी सहायक नदियों के समूह को नदी तंत्र कहते हैं। इसे अपवाह तंत्र भी कहा जाता है। जैसे गंगा नदी तंत्र में गंगा मुख्य नदी है और यमुना, सोन, घाघरा, गंडक, कोसी आदि उसकी सहायक नदियां हैं।

गंगा नदी तंत्र क्या है?

गंगा नदी तंत्र भारत का सबसे बड़ा नदी तंत्र है। इसमें मुख्य नदी गंगा और उसमें मिलने वाली यमुना, रामगंगा, गोमती, घाघरा, गंडक, कोसी, सोन, महानंदा जैसी नदियां आती हैं। गंगा का बेसिन भारत के लगभग 26% क्षेत्रफल में फैला है।

गंगा नदी कहां से निकलती है?

गंगा नदी उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में गोमुख के पास गंगोत्री हिमनद से भागीरथी के रूप में निकलती है। देवप्रयाग में भागीरथी और अलकनंदा के मिलने के बाद इसकी धारा गंगा कहलाती है।

गंगा नदी कहां गिरती है?

गंगा नदी बंगाल की खाड़ी में गिरती है। फरक्का के पास यह दो धाराओं में बंट जाती है। हुगली के रूप में बहने वाली धारा गंगा सागर के पास बंगाल की खाड़ी में गिरती है, जबकि पद्मा के रूप में बांग्लादेश जाने वाली धारा आगे मेघना के नाम से समुद्र में मिलती है।

गंगा नदी की लंबाई कितनी है?

गंगा नदी की कुल लंबाई 2525 किलोमीटर है, जो भागीरथी और हुगली के रास्ते बंगाल की खाड़ी तक नापी जाती है। इसी कारण यह भारत की सबसे लंबी नदी है।

गंगा नदी किन-किन राज्यों से होकर बहती है?

गंगा की मुख्यधारा पांच राज्यों से होकर बहती है: उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल। इनमें उत्तर प्रदेश में इसकी लंबाई सबसे ज्यादा और झारखंड में सबसे कम है।

गंगा की सहायक नदियां कौन-कौन सी हैं?

दाएं तट से यमुना, सोन और पुनपुन तथा बाएं तट से रामगंगा, गोमती, घाघरा, गंडक, बूढ़ी गंडक, कोसी और महानंदा नदियां गंगा में मिलती हैं। चंबल, सिंध, बेतवा और केन यमुना की सहायक नदियां हैं।

बिहार में गंगा की सहायक नदियां कौन सी हैं?

बिहार में गंगा में घाघरा, सोन, गंडक, बूढ़ी गंडक, कोसी और पुनपुन नदियां मिलती हैं। इनमें सोन और पुनपुन दाएं तट की तथा घाघरा, गंडक, बूढ़ी गंडक और कोसी बाएं तट की नदियां हैं।

पंच प्रयाग कौन-कौन से हैं?

पंच प्रयाग हैं: विष्णुप्रयाग (धौलीगंगा और विष्णुगंगा), नंदप्रयाग (नंदाकिनी), कर्णप्रयाग (पिंडर), रुद्रप्रयाग (मंदाकिनी) और देवप्रयाग (भागीरथी)। ये सभी अलकनंदा नदी पर उत्तराखंड में हैं और देवप्रयाग से आगे नदी को गंगा कहा जाता है।

गंगा नदी कहां जाकर दो भागों में बंट जाती है?

गंगा नदी पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में फरक्का के पास दो भागों में बंट जाती है। एक धारा हुगली के रूप में कोलकाता की ओर जाती है और दूसरी पद्मा के नाम से बांग्लादेश चली जाती है।

गंगा और यमुना का संगम कहां होता है?

गंगा और यमुना का संगम उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में होता है, जिसे त्रिवेणी संगम कहते हैं। यमुना यहां दाएं तट की ओर से गंगा में मिलती है।

गंगा के किनारे कौन-कौन से प्रमुख शहर बसे हैं?

गंगा के किनारे ऋषिकेश, हरिद्वार, कन्नौज, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गाजीपुर, पटना और भागलपुर जैसे प्रमुख शहर बसे हैं। हुगली नदी के किनारे कोलकाता और हावड़ा हैं।

गंगा नदी तंत्र का वर्णन कैसे लिखें?

उत्तर में पहले गंगा का उद्गम और गंगा बनने की जगह (देवप्रयाग) लिखें, फिर राज्यों से होकर बहने का मार्ग, दाएं और बाएं तट की सहायक नदियां, प्रमुख शहर और अंत में मुहाना व सुंदरबन डेल्टा लिखें। सचित्र वर्णन में एक सरल नक्शा भी बनाएं। नमूना उत्तर इसी पोस्ट में ऊपर दिया है।

गंगा को राष्ट्रीय नदी कब घोषित किया गया?

गंगा को 4 नवंबर 2008 को भारत की राष्ट्रीय नदी घोषित किया गया था।

निष्कर्ष

गंगा नदी तंत्र न केवल भारत के भूगोल का सबसे विस्तृत अध्याय है, बल्कि यह करोड़ों भारतीयों की आस्था और अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है। इस पोस्ट में हमने जाना कि कैसे भागीरथी और अलकनंदा मिलकर गंगा बनती हैं, कैसे यह पहाड़ियों से उतरकर मैदानों को सींचती है और अंत में सुंदरबन डेल्टा का निर्माण करती है।

प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, SSC, UPPSC आदि) में अक्सर नदियों के उद्गम स्थल, संगम (प्रयाग) और सहायक नदियों से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं। हमें आशा है कि ऊपर दिए गए मानचित्र (Map) और तथ्यों ने आपकी समझ को गहरा किया होगा।

भारत की दूसरी नदियों और राज्यों के नक्शे देखने के लिए हमारा मानचित्र पेज देखिए। अगर इस पोस्ट में कहीं कोई कमी या गलती दिखे तो कमेंट में जरूर बताइए।

स्रोत और संदर्भ

इस पोस्ट के तथ्य इन स्रोतों से मिलाकर देखे गए हैं: भारत जल संसाधन सूचना प्रणाली (India-WRIS), जल शक्ति मंत्रालय का गंगा नदी बेसिन का पृष्ठ; राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG); केंद्रीय जल आयोग (CWC); और पद्मा नदी के लिए एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका तथा बांग्लापीडिया।

Nitin Tiwari
✍️ लेखक

Nitin Tiwari

नितिन तिवारी GKGSNotes.com के संस्थापक और मुख्य लेखक हैं। उन्होंने गणित में B.Sc. और भूगोल में M.A. की डिग्री प्राप्त की है तथा D.El.Ed (2017 बैच) भी किया है। इसके अलावा उन्हें 5 वर्षों का शिक्षण अनुभव भी है, जिससे वे छात्रों की जरूरतों और परीक्षा की चुनौतियों को गहराई से समझते हैं। उत्तर प्रदेश से संबंध रखने वाले नितिन जी को भूगोल, इतिहास और सामान्य ज्ञान विषयों में गहरी रुचि है। उनका लक्ष्य है कि हिंदी माध्यम के छात्रों को UPSC, UPPSC, SSC, UP Police जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उच्च गुणवत्ता की अध्ययन सामग्री बिल्कुल निःशुल्क मिले।

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