सामान्य ज्ञान और प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे SSC, UPSSSC, Railway, Bank, और State Exams) की दृष्टि से “भारत के प्रथम (पुरुष)” एक बेहद महत्वपूर्ण विषय है। लगभग हर प्रतियोगी परीक्षा में इस टॉपिक से प्रश्न अवश्य पूछे जाते हैं।
इतिहास के पन्नों में दर्ज इन महान हस्तियों ने न केवल हमारे देश की मजबूत नींव रखी, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में भारत का मान भी बढ़ाया है। आज की इस पोस्ट में हम स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, और मुख्य न्यायाधीश से लेकर प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता और अंतरिक्ष यात्री तक के बारे में विस्तार से जानेंगे।
इस लेख को खास बनाने के लिए हमने केवल नाम नहीं दिए हैं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति से जुड़े कुछ रोचक और परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य भी शामिल किए हैं। चाहे आप किसी सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हों या केवल अपना सामान्य ज्ञान (General Knowledge) बढ़ाना चाहते हों, यह पोस्ट आपके लिए बहुत उपयोगी साबित होगी।

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भारत के प्रथम प्रधानमंत्री: पंडित जवाहरलाल नेहरू

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू थे। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई और स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में देश का नेतृत्व किया।
उनसे जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:
- जवाहरलाल नेहरू जी जन्म 14 नवंबर 1889 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुआ था। इनके पिता का नाम मोतीलाल नेहरू था।
- इन्होंने 15 अगस्त 1947 से लेकर 1964 तक भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। (यह भारत के इतिहास में किसी भी प्रधानमंत्री का सबसे लंबा कार्यकाल है)।
- बच्चों के प्रति उनके विशेष स्नेह के कारण, भारत में उनके जन्म दिवस (14 नवंबर) को ‘बाल दिवस’ (Children’s Day) के रूप में मनाया जाता है।
- जवाहरलाल नेहरू ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की तीन बार अध्यक्षता की— 1929 (लाहौर अधिवेशन), 1936 (लखनऊ अधिवेशन), और 1937 (फैजपुर अधिवेशन)।
- इनमें से 1929 का लाहौर अधिवेशन सबसे ऐतिहासिक था। इसी अधिवेशन में कांग्रेस ने पहली बार ‘पूर्ण स्वराज’ की मांग की थी और 26 जनवरी 1930 को रावी नदी के तट पर पहला स्वतंत्रता दिवस मनाने का संकल्प लिया था।
भारत के प्रथम राष्ट्रपति: डॉ. राजेंद्र प्रसाद

भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे। वह एक महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रमुख कानूनविद् और भारतीय संविधान के निर्माण में सबसे अहम भूमिका निभाने वाले व्यक्तियों में से एक थे।
उनसे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य:
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जन्म 3 दिसंबर 1884 को बिहार के सारण (वर्तमान सिवान) जिले के जीरादेई गांव में हुआ था।
- इन्होंने 1950 से लेकर 1962 तक भारत के राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया। (महत्वपूर्ण: यह एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जो लगातार दो कार्यकाल के लिए भारत के राष्ट्रपति चुने गए हैं)।
- 11 दिसंबर 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद को संविधान सभा का स्थायी अध्यक्ष चुना गया था।
- इन्होंने अक्टूबर 1934 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मुंबई अधिवेशन की अध्यक्षता की थी। इसके अलावा, 1939 के त्रिपुरी अधिवेशन में सुभाष चंद्र बोस जी के इस्तीफा देने के बाद भी डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने ही इस अधिवेशन की अध्यक्षता की थी।
- परीक्षाओं में अक्सर इनकी रचनाओं के बारे में पूछा जाता है। इनकी सबसे प्रसिद्ध पुस्तक का नाम “इंडिया डिवाइडेड” (India Divided) है। इसके अलावा इन्होंने “चंपारण में सत्याग्रह” नामक पुस्तक भी लिखी।
- देश के प्रति उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें वर्ष 1962 में ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया था।
- इन्हें सम्मान से ‘देशरत्न’ और ‘अजातशत्रु’ (जिसका कोई शत्रु न हो) भी कहा जाता है।
भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति: डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन

भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन थे। वह एक महान दार्शनिक, शिक्षाविद और राजनेता थे।
- डॉ. राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु राज्य में हुआ था। शिक्षा के क्षेत्र में उनके महान योगदान और शिक्षकों के प्रति उनके सम्मान के कारण ही उनका जन्मदिन प्रतिवर्ष ‘राष्ट्रीय शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
- उपराष्ट्रपति के पद पर इनका कार्यकाल 1952 से लेकर 1962 तक रहा। (लगातार दो बार उपराष्ट्रपति चुने जाने वाले ये पहले व्यक्ति थे)।
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह 1962 से 1967 तक भारत के दूसरे राष्ट्रपति भी बने।
- वर्ष 1954 में जब पहली बार भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ शुरू किया गया, तो सबसे पहले सम्मानित होने वाले तीन व्यक्तियों में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भी शामिल थे।
- राजनीति में आने से पहले उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के कुलपति और सोवियत संघ में भारत के राजदूत के रूप में भी कार्य किया था।
भारत के प्रथम रेल मंत्री: जॉन मथाई

स्वतंत्र भारत के प्रथम रेल एवं परिवहन मंत्री डॉ. जॉन मथाई थे।
- इन्होंने 15 अगस्त 1947 से लेकर 22 सितंबर 1948 तक स्वतंत्र भारत के पहले रेल मंत्री के रूप में कार्य किया। स्वतंत्र भारत का पहला रेल बजट (नवंबर 1947 में) डॉ. जॉन मथाई द्वारा ही पेश किया गया था।
- आर. के. शनमुखम चेट्टी के इस्तीफे के बाद इन्होंने भारत के वित्त मंत्री का पदभार भी संभाला (1948 से 1950 तक) और दो केंद्रीय बजट पेश किए।
- डॉ. जॉन मथाई ने वर्ष 1950 में ‘योजना आयोग’ के गठन के विरोध में वित्त मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था।
- वर्ष 1955 में इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया का राष्ट्रीयकरण होने के बाद यह भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के पहले अध्यक्ष भी नियुक्त हुए थे। (यह प्रश्न कई बार बैंकिंग और एसएससी परीक्षाओं में पूछा जाता है)।
भारत के प्रथम वित्त मंत्री: आर. के. शनमुखम चेट्टी

स्वतंत्र भारत के प्रथम वित्त मंत्री आर. के. शनमुखम चेट्टी थे, जो एक प्रसिद्ध वकील, अर्थशास्त्री और राजनेता थे।
- इन्होंने 15 अगस्त 1947 से लेकर 1949 तक स्वतंत्र भारत के पहले वित्त मंत्री के रूप में देश की सेवा की।
- 26 नवंबर 1947 को इन्होंने स्वतंत्र भारत का पहला केंद्रीय बजट (जो कि एक अंतरिम बजट था) पेश किया था।
- इस अंतरिम बजट के ठीक 95 दिन बाद इनके द्वारा ही 1948-49 का पहला पूर्ण बजट भी संसद में प्रस्तुत किया गया था।
- पंडित जवाहरलाल नेहरू के मंत्रिमंडल में शामिल होने से पहले इन्होंने 1944 के ऐतिहासिक ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था।
भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री: मौलाना अबुल कलाम आजाद

स्वतंत्र भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद थे, जो एक प्रसिद्ध पत्रकार, शिक्षाविद और स्वतंत्रता सेनानी थे।
- इनका जन्म 11 नवंबर 1888 को मक्का (सऊदी अरब) में हुआ था। शिक्षा के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान को याद करते हुए हर साल उनके जन्मदिन (11 नवंबर) को भारत में ‘राष्ट्रीय शिक्षा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
- ये 1923 में कांग्रेस के दिल्ली विशेष अधिवेशन के अध्यक्ष चुने गए थे। मात्र 35 वर्ष की आयु में वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्षता करने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति बने थे।
- इन्होंने 1940 में कांग्रेस के रामगढ़ (वर्तमान झारखंड) अधिवेशन की अध्यक्षता की थी। 1941 से 1945 तक द्वितीय विश्व युद्ध और भारत छोड़ो आंदोलन के कारण कांग्रेस का कोई अधिवेशन नहीं हुआ, इसलिए मौलाना आजाद लगातार 6 वर्षों तक अध्यक्ष पद पर रहे। (आज़ादी से पूर्व सबसे लंबे समय तक कांग्रेस अध्यक्ष रहने का रिकॉर्ड इन्हीं के नाम है)।
- इनकी प्रसिद्ध आत्मकथा का नाम ‘इंडिया विंस फ्रीडम’ (India Wins Freedom) है और इन्होंने 1912 में ‘अल-हिलाल’ नामक एक प्रसिद्ध उर्दू पत्रिका भी शुरू की थी।
- भारत में पहले IIT (खड़गपुर) और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की स्थापना में इनकी प्रमुख भूमिका थी। मरणोपरांत वर्ष 1992 में इन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया।
भारत के प्रथम गृहमंत्री एवं उप-प्रधानमंत्री: सरदार वल्लभ भाई पटेल

स्वतंत्र भारत के प्रथम गृहमंत्री और प्रथम उप-प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल थे।
- इनका जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ था। देश की एकता में उनके योगदान के कारण, उनके जन्मदिन (31 अक्टूबर) को भारत में प्रतिवर्ष ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
- भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में इनका पहला बड़ा और महत्वपूर्ण योगदान वर्ष 1918 का ‘खेड़ा सत्याग्रह’ था।
- 1928 के बारदोली सत्याग्रह का इन्होंने सफल नेतृत्व किया। इस आंदोलन की सफलता के बाद महात्मा गांधी जी ने बारदोली की महिलाओं की ओर से वल्लभभाई पटेल को ‘सरदार’ की उपाधि प्रदान की थी।
- इन्होंने 1931 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के ऐतिहासिक कराची अधिवेशन की अध्यक्षता की थी, जिसमें पहली बार मौलिक अधिकारों का प्रस्ताव पारित हुआ था। संविधान सभा में भी ये ‘मौलिक अधिकारों एवं अल्पसंख्यकों संबंधी समिति’ के अध्यक्ष थे।
- स्वतंत्रता के पश्चात 562 से अधिक देशी रियासतों का भारत में एकीकरण करने में उन्होंने सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी महान योगदान के कारण उन्हें ‘भारत का लौह पुरुष’ (Iron Man of India) और ‘भारत का बिस्मार्क’ कहा जाता है।
- मरणोपरांत 1991 में इन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया। गुजरात में केवड़िया के पास नर्मदा नदी के तट पर स्थित ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ सरदार पटेल की ही प्रतिमा है, जो दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति है।
भारत के प्रथम कानून मंत्री: डॉ. बी. आर. अंबेडकर

स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून एवं न्याय मंत्री डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर (बाबासाहेब अंबेडकर) थे।
- इनका जन्म 14 अप्रैल 1891 को महू (मध्य प्रदेश) में हुआ था। इन्हें ‘भारतीय संविधान का जनक’ कहा जाता है।
- संविधान निर्माण में इनकी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका थी। 29 अगस्त 1947 को संविधान सभा द्वारा गठित ऐतिहासिक प्रारूप समिति के ये अध्यक्ष थे।
- ये एकमात्र ऐसे भारतीय नेता थे जिन्होंने लंदन में आयोजित तीनों गोलमेज सम्मेलनों (1930, 1931 और 1932) में भाग लिया था।
- सितंबर 1932 में दलित वर्गों के राजनीतिक अधिकारों को लेकर अंबेडकर जी और महात्मा गांधी जी के मध्य यरवदा जेल में ऐतिहासिक ‘पूना समझौता’ हुआ था।
- इन्होंने ‘इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी’ की स्थापना की थी। इसके अलावा इन्होंने ‘मूकनायक’ और ‘बहिष्कृत भारत’ जैसी प्रसिद्ध पत्रिकाएं भी निकालीं, जिनके बारे में परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है।
- ‘हिंदू कोड बिल’ पर प्रधानमंत्री के साथ मतभेदों के कारण इन्होंने 1951 में नेहरू मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। देश के प्रति उनके अमूल्य योगदान के लिए वर्ष 1990 में इन्हें मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया।
भारत के प्रथम मुस्लिम राष्ट्रपति: डॉ. जाकिर हुसैन

भारत के पहले मुस्लिम राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन थे। यह एक महान शिक्षाविद और प्रखर राष्ट्रवादी थे।
- इन्होंने 1967 से 1969 तक भारत के तीसरे राष्ट्रपति के रूप में देश की सेवा की। इससे पहले यह भारत के उपराष्ट्रपति (1962 – 1967) और बिहार के राज्यपाल भी रह चुके थे।
- अपने कार्यकाल के दौरान ही 3 मई 1969 को इनकी मृत्यु हो गई थी। इसलिए यह पद पर रहते हुए मरने वाले भारत के पहले राष्ट्रपति हैं।
- सभी राष्ट्रपतियों में डॉ. जाकिर हुसैन का कार्यकाल सबसे छोटा (केवल 1 वर्ष 11 दिन) रहा है।
- शिक्षा के क्षेत्र में इनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए इन्हें वर्ष 1963 में ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया था। ये दिल्ली स्थित प्रसिद्ध ‘जामिया मिल्लिया इस्लामिया’ विश्वविद्यालय के सह-संस्थापकों में से एक थे।
भारत के प्रथम रक्षा मंत्री: सरदार बलदेव सिंह

भारत के प्रथम रक्षा मंत्री सरदार बलदेव सिंह थे। यह भारत के स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ-साथ एक प्रमुख सिख नेता और उद्योगपति भी थे।
- इनका जन्म 11 जुलाई 1902 को पंजाब के रोपड़ जिले के डुम्मना गांव में हुआ था।
- आजादी से पहले इन्होंने 1946 में भारत आए ‘कैबिनेट मिशन’ के दौरान सिख समुदाय का प्रतिनिधित्व किया था। इसके अलावा 2 सितंबर 1946 को गठित अंतरिम सरकार में भी ये ‘रक्षा सदस्य’ थे।
- स्वतंत्रता के बाद 15 अगस्त 1947 से लेकर 1952 तक इन्होंने भारत के पहले रक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया।
- स्वतंत्रता और विभाजन के कठिन समय में रक्षा मंत्री के रूप में इन्होंने अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। विशेष रूप से भारत और पाकिस्तान के बीच सशस्त्र बलों के विभाजन तथा 1947-48 में कश्मीरी घुसपैठ (प्रथम भारत-पाक युद्ध) को नियंत्रित करने में उनका योगदान सराहनीय था।
भारत के प्रथम महान्यायवादी (Attorney General): एम. सी. सीतलवाड़

भारत के प्रथम महान्यायवादी एम. सी. सीतलवाड़ (मोतीलाल चिमनलाल सीतलवाड़) थे। यह एक प्रख्यात भारतीय न्यायविद् थे।
- इन्होंने 28 जनवरी 1950 से 1 मार्च 1963 तक भारत के महान्यायवादी के रूप में कार्य किया। यह अब तक के सबसे लंबे समय (लगभग 13 वर्ष) तक इस पद पर रहने वाले एकमात्र महान्यायवादी हैं।
- महान्यायवादी केंद्र सरकार का मुख्य कानूनी सलाहकार और भारत के सर्वोच्च न्यायालय में केंद्र सरकार का प्राथमिक वकील होता है।
- भारतीय संविधान का अनुच्छेद 76 भारत के महान्यायवादी के पद से संबंधित है। (यह परीक्षाओं में बहुत बार पूछा जाता है)।
- संविधान के अनुच्छेद 88 के तहत महान्यायवादी को संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही में भाग लेने और बोलने का अधिकार है, लेकिन वोट देने का अधिकार नहीं है।
- एम. सी. सीतलवाड़ स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि आयोग (First Law Commission, 1955) के अध्यक्ष भी थे।
भारत के प्रथम गवर्नर जनरल: लॉर्ड विलियम बैंटिक

भारत के प्रथम गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बैंटिक थे। इन्होंने 1828 से 1835 तक भारत में कार्य किया।
- बैंटिक भारत में अपने सामाजिक सुधारों के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। राजा राममोहन राय के सहयोग से इन्होंने 1829 में सती प्रथा पर पूर्ण रूप से रोक लगाई थी।
- 1830 में इन्होंने कर्नल स्लीमन की सहायता से ठगी प्रथा का अंत किया था।
- 1833 का चार्टर एक्ट इन्हीं के समय में पारित हुआ था। इसी अधिनियम के द्वारा ‘बंगाल के गवर्नर जनरल’ के पद का नाम बदलकर ‘भारत का गवर्नर जनरल’ कर दिया गया था। इस प्रकार लॉर्ड विलियम बैंटिक बंगाल के अंतिम गवर्नर जनरल और भारत के प्रथम गवर्नर जनरल बने।
- इन्हीं के कार्यकाल में 1835 में मैकाले की सिफारिश पर भारत में अंग्रेजी को उच्च शिक्षा का माध्यम बनाया गया था और कलकत्ता मेडिकल कॉलेज की स्थापना की गई थी।
भारत के प्रथम वायसराय: लॉर्ड कैनिंग

भारत के प्रथम वायसराय लॉर्ड कैनिंग थे। इनका कार्यकाल 1856 से 1862 तक था।
- भारत का सबसे ऐतिहासिक विद्रोह ‘1857 की क्रांति’ लॉर्ड कैनिंग के कार्यकाल में ही हुई थी।
- 1857 की क्रांति के बाद ब्रिटिश संसद ने 1858 का भारत शासन अधिनियम पारित किया। इसके द्वारा भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन पूरी तरह समाप्त कर दिया गया और सत्ता सीधे ब्रिटिश क्राउन (महारानी) के हाथों में चली गई।
- 1858 के अधिनियम के तहत ही ‘भारत के गवर्नर जनरल’ का नाम बदलकर ‘वायसराय’ कर दिया गया।
- इन्होंने लॉर्ड डलहौजी द्वारा शुरू की गई कुख्यात ‘राज्य हड़प नीति’ (Doctrine of Lapse) को समाप्त कर दिया था।
- भारत में पहली बार आयकर (Income Tax) की शुरुआत और पहला बजट (1860 में जेम्स विल्सन द्वारा) लॉर्ड कैनिंग के समय में ही पेश किया गया था। कलकत्ता, मद्रास और बॉम्बे में पहले तीन विश्वविद्यालयों की स्थापना (1857) भी इन्हीं के समय हुई।
स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर जनरल: लॉर्ड माउंटबेटन

स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन थे। साथ ही यह भारत के अंतिम ब्रिटिश वायसराय भी थे।
- फरवरी 1947 से जून 1948 तक यह भारत के गवर्नर जनरल रहे।
- भारत की आज़ादी और विभाजन की रूपरेखा इन्हीं के द्वारा तैयार की गई थी, जिसे ‘माउंटबेटन योजना’ या ‘3 जून योजना’ कहा जाता है।
- 15 अगस्त 1947 को भारत को पूर्ण स्वतंत्रता मिली और पाकिस्तान नाम का नया देश बना। स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को पद की शपथ लॉर्ड माउंटबेटन ने ही दिलाई थी।
- 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या भी इन्हीं के कार्यकाल के दौरान हुई थी।
स्वतंत्र भारत के प्रथम भारतीय गवर्नर जनरल: चक्रवर्ती राजगोपालाचारी

स्वतंत्र भारत के प्रथम और अंतिम भारतीय गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी थे।
- यह 21 जून 1948 से लेकर 26 जनवरी 1950 (संविधान लागू होने) तक भारत के गवर्नर जनरल रहे।
- यह स्वतंत्र भारत के द्वितीय गवर्नर जनरल (लॉर्ड माउंटबेटन के बाद) और प्रथम भारतीय गवर्नर जनरल थे।
- राजनीति और साहित्य में उनके योगदान के कारण लोग उन्हें सम्मान से ‘राजाजी’ कहकर बुलाते थे।
- वर्ष 1954 में जब पहली बार देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ देना शुरू हुआ, तो सबसे पहले यह सम्मान पाने वाले तीन व्यक्तियों में राजाजी भी शामिल थे।
- इन्होंने 1959 में कांग्रेस से अलग होकर एक नई ‘स्वतंत्र पार्टी’ की स्थापना की थी।
भारत के प्रथम लोकसभा अध्यक्ष: जी. वी. मावलंकर

भारत के प्रथम लोकसभा अध्यक्ष गणेश वासुदेव मावलंकर थे।
- प्रथम लोकसभा के गठन के बाद 1952 से लेकर 1956 तक इन्होंने लोकसभा अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।
- राजनीति और जनसेवा में इनके लंबे अनुभव और लोकप्रियता के कारण इन्हें ‘दादा साहेब’ के नाम से भी जाना जाता था।
- यह भारत के पहले ऐसे लोकसभा अध्यक्ष थे, जिनके खिलाफ संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था (हालांकि वह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका था)।
- अपने कार्यकाल के दौरान ही वर्ष 1956 में इनका निधन हो गया था।

भारत के प्रथम मुख्य चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन थे।
- इन्होंने 21 मार्च 1950 (चुनाव आयोग की स्थापना के तुरंत बाद) से लेकर दिसंबर 1958 तक इस पद पर कार्य किया।
- इनकी देखरेख में ही स्वतंत्र भारत के पहले दो आम चुनाव (1951-52 और 1957) बहुत ही सफलतापूर्वक संपन्न हुए थे। (पहले भारत जैसे विशाल और अशिक्षित देश में चुनाव करवाना असंभव माना जा रहा था)।
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 में निर्वाचन आयोग का प्रावधान किया गया है।
- भारत के अलावा इन्होंने सूडान के पहले चुनाव आयुक्त के रूप में भी वहां के चुनाव संपन्न कराए थे। लोक सेवा में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया गया था।
भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश: हरिलाल जे. कानिया

भारत के प्रथम मुख्य न्यायाधीश हरिलाल जे. कानिया थे।
- 26 जनवरी 1950 को जब भारत पूर्ण रूप से गणतंत्र बना और वर्तमान सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना हुई, तब हरिलाल जे. कानिया को भारत का प्रथम मुख्य न्यायाधीश बनाया गया।
- इससे पहले वे भारत के ‘संघीय न्यायालय’ के मुख्य न्यायाधीश भी रहे थे।
- वर्ष 1951 में पद पर रहते हुए ही इनका निधन हो गया था। (पद पर रहते हुए मरने वाले ये पहले मुख्य न्यायाधीश थे)।
केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने वाले प्रथम व्यक्ति: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी

स्वतंत्र भारत के केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने वाले प्रथम व्यक्ति डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी थे।
- इन्होंने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के मंत्रिमंडल में उद्योग और आपूर्ति मंत्री के रूप में कार्य किया था।
- अप्रैल 1950 में नेहरू-लियाकत समझौते (दिल्ली पैक्ट) और पूर्वी पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों (हिंदुओं) की स्थिति को लेकर नेहरू जी के साथ गंभीर मतभेदों के कारण इन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
- इस्तीफा देने के बाद वर्ष 1951 में इन्होंने ‘भारतीय जनसंघ’ की स्थापना की थी। (यही जनसंघ आगे चलकर 1977 में जनता पार्टी में शामिल हुआ और 1980 में ‘भारतीय जनता पार्टी’ के रूप में उभरा)।
- इन्होंने जम्मू-कश्मीर में धारा 370 का कड़ा विरोध करते हुए ऐतिहासिक नारा दिया था- “एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे।”
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष: व्योमेश चन्द्र बनर्जी
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के प्रथम अध्यक्ष व्योमेश चन्द्र बनर्जी थे।
- दिसंबर 1885 में बंबई (वर्तमान मुंबई) के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत महाविद्यालय में कांग्रेस का प्रथम अधिवेशन आयोजित हुआ था, जिसकी अध्यक्षता इन्होंने ही की थी।
- इस ऐतिहासिक प्रथम अधिवेशन में कुल 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था।
- कांग्रेस की स्थापना ए. ओ. ह्यूम द्वारा की गई थी और उस समय भारत के वायसराय लॉर्ड डफरिन थे।
अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के प्रथम भारतीय मुख्य न्यायाधीश: डॉ. नागेंद्र सिंह

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में नियुक्त होने वाले प्रथम भारतीय न्यायाधीश ‘सर बेनेगल नरसिंह राव’ थे, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के प्रथम भारतीय मुख्य न्यायाधीश डॉ. नागेंद्र सिंह थे।
- इन्होंने 1985 से लेकर 1988 तक अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया था।
- अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय का मुख्यालय हेग (नीदरलैंड) में स्थित है।
- इस न्यायालय में कुल 15 न्यायाधीश होते हैं और प्रत्येक न्यायाधीश का कार्यकाल 9 वर्ष का होता है।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष: बदरुद्दीन तैयबजी

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष बदरुद्दीन तैयबजी थे।
- इन्होंने वर्ष 1887 में मद्रास (वर्तमान चेन्नई) में आयोजित कांग्रेस के तीसरे अधिवेशन की अध्यक्षता की थी।
- इसी अधिवेशन में इन्होंने लोगों से पहली बार अपील की थी कि “कांग्रेसी बनो”।
नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रथम भारतीय: रबीन्द्रनाथ टैगोर

नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले भारतीय (और पहले एशियाई) रबीन्द्रनाथ टैगोर जी थे। यह एक महान कवि, साहित्यकार, चित्रकार और दार्शनिक थे।
- वर्ष 1913 में उन्हें उनके प्रसिद्ध काव्य-संग्रह ‘गीतांजलि’ के लिए साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
- यह दुनिया के एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जिनकी दो रचनाएं दो अलग-अलग देशों का राष्ट्रगान बनीं— भारत का राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और बांग्लादेश का राष्ट्रगान ‘आमार सोनार बांग्ला’।
- महात्मा गांधी ने उन्हें सम्मान से ‘गुरुदेव’ की उपाधि दी थी, जबकि टैगोर जी ने ही चंपारण सत्याग्रह के दौरान गांधी जी को सबसे पहले ‘महात्मा’ कहा था।
- 1919 के ऐतिहासिक जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में इन्होंने अंग्रेजों द्वारा दी गई ‘नाइटहुड’ (Knighthood/Sir) की उपाधि वापस लौटा दी थी।
नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रथम भारतीय वैज्ञानिक: सी. वी. रमन

नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले भारत के प्रथम वैज्ञानिक चन्द्रशेखर वेंकट रमन (सी. वी. रमन) थे। यह एक प्रसिद्ध भौतिक शास्त्री थे।
- वर्ष 1930 में प्रकाश के प्रकीर्णन और उनके उत्कृष्ट शोध कार्यों के लिए उन्हें भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
- इन्होंने ‘रमन प्रभाव’ की खोज 28 फरवरी 1928 को की थी। इसी महान खोज की याद में भारत में हर साल 28 फरवरी को ‘राष्ट्रीय विज्ञान दिवस’ मनाया जाता है।
- विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए वर्ष 1954 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से भी सम्मानित किया गया था।
रेमन मैग्सेसे पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रथम भारतीय: आचार्य विनोबा भावे

रेमन मैग्सेसे पुरस्कार (जिसे ‘एशिया का नोबेल पुरस्कार’ भी कहा जाता है) प्राप्त करने वाले पहले भारतीय आचार्य विनोबा भावे थे।
- यह भारत के एक महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और आध्यात्मिक शिक्षक थे।
- वर्ष 1940 में महात्मा गांधी द्वारा ब्रिटिश राज के खिलाफ चलाए गए व्यक्तिगत सत्याग्रह में इन्हें पहले ‘व्यक्तिगत सत्याग्रही’ के रूप में चुना गया था। (दूसरे सत्याग्रही जवाहरलाल नेहरू थे)।
- इन्होंने वर्ष 1951 में तेलंगाना के पोचमपल्ली गांव से ऐतिहासिक ‘भूदान आंदोलन’ की शुरुआत की थी, जो एक स्वैच्छिक भूमि सुधार आंदोलन था।
- सामुदायिक नेतृत्व के लिए इन्हें 1958 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार मिला और मरणोपरांत 1983 में ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया।
गोल्डन ग्लोब अवार्ड प्राप्त करने वाले प्रथम भारतीय: ए. आर. रहमान

गोल्डन ग्लोब अवार्ड प्राप्त करने वाले प्रथम भारतीय संगीतकार ए. आर. रहमान हैं।
- इन्होंने वर्ष 2009 में हॉलीवुड फिल्म ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ के प्रसिद्ध गीत “जय हो” के लिए यह प्रतिष्ठित अवार्ड जीता था।
- इसी फिल्म और इसी गीत के लिए उन्होंने दो ऑस्कर भी जीते हैं, जिससे वह ऑस्कर जीतने वाले पहले भारतीय भी बने।
भारत रत्न प्राप्त करने वाले प्रथम भारतीय: चक्रवर्ती राजगोपालाचारी, डॉ. राधाकृष्णन और सी. वी. रमन

भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ सबसे पहले वर्ष 1954 में देना शुरू किया गया था। पहली बार (1954 में) यह सम्मान तीन महान हस्तियों को एक साथ दिया गया था: स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी, भारत के द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और महान वैज्ञानिक डॉ. चन्द्रशेखर वेंकटरमन (सी. वी. रमन)।
भारत रत्न से सम्मानित होने वाले पहले विदेशी नागरिक: खान अब्दुल गफ्फार खान

भारत रत्न से सम्मानित होने वाले पहले विदेशी (गैर-भारतीय) नागरिक खान अब्दुल गफ्फार खान थे।
- इनका जन्म पेशावर (अब पाकिस्तान) में हुआ था। इन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
- इन्हें ‘सीमांत गांधी’ (Frontier Gandhi), ‘बादशाह खान’ और ‘बाचा खान’ के नाम से जाना जाता है।
- इन्होंने पश्तूनों के अधिकारों के लिए 1929 में ‘खुदाई खिदमतगार’ (जिसे लाल कुर्ती आंदोलन भी कहा जाता है) नामक संगठन की स्थापना की थी। यह तथ्य परीक्षाओं में बहुत अधिक पूछा जाता है।
- स्वतंत्रता संग्राम में इनके निस्वार्थ योगदान और हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रयासों को देखते हुए भारत सरकार ने इन्हें वर्ष 1987 में भारत रत्न से सम्मानित किया था।
नोट: भारत रत्न प्राप्त करने वाले दूसरे विदेशी नागरिक नेल्सन मंडेला थे, जिन्हें 1990 में यह सम्मान मिला था।
भारतीय सिविल सेवा (ICS) की परीक्षा पास करने वाले प्रथम भारतीय: सत्येंद्र नाथ टैगोर

भारतीय सिविल सेवा (ICS) की परीक्षा पास करने वाले प्रथम भारतीय सत्येंद्र नाथ टैगोर थे।
- वर्ष 1863 में उन्होंने इस कठिन परीक्षा को पास किया था। (उस समय यह परीक्षा केवल लंदन में आयोजित होती थी और भारतीयों के लिए इसे पास करना बेहद मुश्किल माना जाता था)।
- यह महान कवि रबीन्द्रनाथ टैगोर जी के बड़े भाई थे।
- प्रशिक्षण के बाद 1864 में वे भारत लौटे और एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में उनकी पहली नियुक्ति बॉम्बे प्रेसीडेंसी में हुई थी।
अंतरिक्ष में पहुंचने वाले प्रथम भारतीय: राकेश शर्मा

अंतरिक्ष में पहुंचने वाले प्रथम भारतीय (और विश्व के 138वें अंतरिक्ष यात्री) राकेश शर्मा हैं।
- वह भारतीय वायुसेना में स्क्वाड्रन लीडर और एक अत्यंत कुशल विमानचालक थे।
- इसरो (ISRO) और सोवियत संघ (रूस) के संयुक्त अंतरिक्ष मिशन के तहत 3 अप्रैल 1984 को उन्होंने ‘सोयुज टी-11’ (Soyuz T-11) अंतरिक्ष यान से अपनी ऐतिहासिक यात्रा शुरू की थी।
- अंतरिक्ष में उन्होंने सैल्यूट-7 (Salyut-7) स्पेस स्टेशन पर 7 दिन, 21 घंटे और 40 मिनट बिताए थे।
महत्वपूर्ण तथ्य: जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उनसे पूछा कि अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है, तो राकेश शर्मा का ऐतिहासिक जवाब था— “सारे जहाँ से अच्छा”।
इंग्लिश चैनल तैरकर पार करने वाले प्रथम भारतीय: मिहिर सेन

इंग्लिश चैनल को तैरकर पार करने वाले प्रथम भारतीय मिहिर सेन हैं।
- वर्ष 1958 में वे इंग्लिश चैनल (जो इंग्लैंड और फ्रांस के बीच स्थित है) को तैरकर पार करने वाले भारत के और एशिया के प्रथम व्यक्ति बने थे।
- इसके अलावा, वे दुनिया के एकमात्र ऐसे तैराक हैं जिन्होंने एक ही कैलेंडर वर्ष (1966) में पांच महाद्वीपों के पांच प्रमुख समुद्रों/जलडमरूमध्य को तैरकर पार किया था। (इनमें भारत और श्रीलंका के बीच स्थित ‘पाक जलडमरूमध्य’ और पनामा नहर भी शामिल है)।
- उनके इन अद्भुत कारनामों के लिए उन्हें पद्म श्री और पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
भारत के प्रथम पायलट: जे. आर. डी. टाटा

भारत के प्रथम लाइसेंस प्राप्त पायलट जे. आर. डी. टाटा (जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा) थे।
- वर्ष 1929 में उन्होंने भारत का पहला कमर्शियल पायलट लाइसेंस प्राप्त किया था।
- इन्होंने 1932 में देश की पहली वाणिज्यिक विमान सेवा ‘टाटा एयरलाइंस’ की शुरुआत की थी। (यही एयरलाइंस आज़ादी के बाद भारत की राष्ट्रीय विमान सेवा ‘एयर इंडिया’ बन गई)।
- भारतीय विमानन क्षेत्र में उनके इसी महान योगदान के कारण उन्हें ‘भारत के नागरिक उड्डयन का पिता’ कहा जाता है।
- देश के औद्योगिक विकास में उनके अतुलनीय योगदान के लिए 1992 में इन्हें ‘भारत रत्न’ से भी सम्मानित किया गया था। (यह सम्मान पाने वाले वे गिने-चुने उद्योगपतियों में से एक हैं)।

ओलम्पिक खेलों की व्यक्तिगत स्पर्धा में भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ी अभिनव बिंद्रा हैं।
- इन्होंने 2008 के बीजिंग ओलंपिक खेलों में 10 मीटर एयर राइफल (निशानेबाजी) स्पर्धा में यह ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता था।
- इनकी प्रसिद्ध आत्मकथा का नाम ‘ए शॉट ऐट हिस्ट्री’ है।
नोट: व्यक्तिगत स्पर्धा में भारत के लिए दूसरा स्वर्ण पदक एथलेटिक्स (भाला फेंक) में नीरज चोपड़ा ने 2020 टोक्यो ओलंपिक में जीता है।
ब्रिटिश संसद का सदस्य बनने वाले प्रथम भारतीय: दादा भाई नौरोजी

ब्रिटिश संसद का सदस्य बनने वाले प्रथम भारतीय दादा भाई नौरोजी थे।
- वर्ष 1892 में वे ‘उदारवादी पार्टी’ (Liberal Party) के टिकट पर ‘फिंसबरी सेंट्रल’ से ब्रिटिश संसद (हाउस ऑफ कॉमंस) के लिए चुने गए थे।
- इन्हें सम्मान से भारत का ‘वयोवृद्ध पुरुष’ (Grand Old Man of India) कहा जाता है।
- इन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया’ में ऐतिहासिक ‘धन निष्कासन का सिद्धांत’ (Drain of Wealth Theory) दिया था।
- इन्होंने तीन बार (1886, 1893 और 1906) में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्षता भी की थी। (1906 के कलकत्ता अधिवेशन में ही दादा भाई नौरोजी की अध्यक्षता में पहली बार ‘स्वराज’ की मांग की गई थी)।
भारत का भ्रमण करने वाले प्रथम चीनी यात्री: फाह्यान (Fa-Hien)
भारत का भ्रमण करने वाले पहले चीनी यात्री फाह्यान थे।
- वह गुप्त वंश के प्रतापी राजा चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के शासनकाल में (लगभग 399 ई. में) भारत आए थे।
- इनकी भारत यात्रा का मुख्य उद्देश्य बौद्ध धर्मग्रंथों की प्रामाणिक प्रतियों की तलाश करना और पवित्र बौद्ध तीर्थ स्थलों के दर्शन करना था।
- इनके प्रसिद्ध यात्रा वृतांत को ‘फो-क्यो-की’ (Record of Buddhist Kingdoms) कहा जाता है।
भारत में पहला समाचार पत्र शुरू करने वाले व्यक्ति: जेम्स ऑगस्टस हिक्की

भारत में पहला समाचार पत्र शुरू करने वाले व्यक्ति जेम्स ए. हिक्की (जेम्स ऑगस्टस हिक्की) थे। उन्हें ‘भारत में आधुनिक पत्रकारिता का जनक’ भी माना जाता है।
- वर्ष 1780 में जेम्स ऑगस्टस हिक्की द्वारा कोलकाता से ‘बंगाल गजट’ नामक एक साप्ताहिक समाचार पत्र का प्रकाशन शुरू किया गया था। यह अंग्रेजी भाषा में था।
- इस समाचार पत्र को ‘हिक्की का बंगाल गजट’ या ‘कलकत्ता जनरल एडवरटाइजर’ के नाम से भी जाना जाता था। वे अपनी निष्पक्ष और निर्भीक लेखनी के लिए जाने जाते थे।
- वह भारत में प्रिंटिंग प्रेस (छपाई) का प्रचलन करने वाले पहले व्यक्ति थे।
भारत आने वाले प्रथम विदेशी राष्ट्राध्यक्ष
- भारत आने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति: ड्वाइट डेविड आइजनहावर भारत आने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति थे। दिसंबर 1959 में यह भारत के ऐतिहासिक दौरे पर नई दिल्ली आए थे।
- भारत आने वाले पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री: हेरोल्ड मैकमिलन भारत आने वाले पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री थे। यह वर्ष 1958 में भारत दौरे पर आए थे।
- भारत आने वाले पहले रूसी प्रधानमंत्री: निकोलाई ए. बुल्गानिन भारत आने वाले पहले रूसी प्रधानमंत्री (प्रीमियर) थे। वर्ष 1955 में उन्होंने भारत का दौरा किया था।
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