यमुना नदी का उद्गम उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में बंदरपूंछ चोटियों के समीप स्थित यमुनोत्री ग्लेशियर से होता है। यह नदी लगभग 1,376 किलोमीटर लंबी है और उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली तथा उत्तर प्रदेश — कुल 5 राज्यों से होकर बहती हुई प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर गंगा नदी में मिल जाती है। यह गंगा की सबसे लंबी सहायक नदी और भारत की पांचवीं सबसे लंबी नदी है।
भारत की प्राचीन सभ्यता और सांस्कृतिक परंपराओं की धरोहर रही नदियां न केवल जीवनदायिनी जलधाराएं हैं, बल्कि वे इस भूमि की आत्मा भी हैं। इन्हीं में से एक है यमुना नदी, जो गंगा की प्रमुख सहायक नदी होते हुए भी धार्मिक, ऐतिहासिक और भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखती है। आज के इस लेख में हम यमुना नदी के उद्गम स्थल, प्रवाह मार्ग और प्रमुख सहायक नदियों को एक सुस्पष्ट मानचित्र (Yamuna river map) के माध्यम से विस्तार से समझेंगे।

लेख को बेहतर ढंग से समझने के लिए मेरा सुझाव है कि आप इसे पढ़ते समय ऊपर दिए गए यमुना नदी के मानचित्र को भी अवश्य देखें, ताकि इसकी संरचना और सहायक नदियों की स्थिति समझने में और अधिक आसानी हो। इसी लेख में मैंने इस मैप को डाउनलोड करने के लिए डाउनलोड बटन भी लगाए हैं, उन पर क्लिक करके आप इस मैप को डाउनलोड भी कर पाएंगे।
यमुना नदी कहां से निकलती है? (उद्गम स्थल)
यमुना नदी उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी जिले में स्थित यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलती है, जिसे चंपासर ग्लेशियर भी कहा जाता है। यह ग्लेशियर बंदरपूंछ पर्वत समूह में स्थित है, जो हिमालय की पश्चिमी शाखा का हिस्सा है।
यमुना नदी का उद्गम स्थल उत्तराखंड के चार धामों में से एक यमुनोत्री धाम के पास स्थित है, जो एक प्रमुख हिंदू तीर्थ स्थल है। यह स्थल चार धाम यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव और धार्मिक आस्था का केंद्र माना जाता है। यहां स्थित गर्म जल कुंड में चावल और आलू पकाकर प्रसाद तैयार करने की परंपरा आज भी प्रचलित है।
यमुना नदी का उद्गम स्थल गंगा नदी के उद्गम स्थल गंगोत्री से भौगोलिक रूप से कुछ ही दूरी पर स्थित है, परंतु दोनों नदियों का प्रवाह मार्ग अलग-अलग है। उद्गम के बाद यमुना पर्वतीय घाटियों से होकर बहती है और डाकपत्थर के पास मैदानी भाग की ओर बढ़ती है।
उद्गम की ऊंचाई को लेकर भ्रम : पुस्तकों में यमुना के उद्गम की ऊंचाई अलग-अलग बताई जाती है — कहीं 6,387 मीटर तो कहीं लगभग 4,400 मीटर। इसका कारण यह है कि 6,387 मीटर बंदरपूंछ शिखर क्षेत्र की ऊंचाई है, जबकि ग्लेशियर का वह मुहाना जहां से जलधारा वास्तव में निकलती है, उससे काफी नीचे है। जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत तैयार यमुना रिवर बेसिन एटलस में उपग्रह आंकड़ों के आधार पर उद्गम बिंदु की ऊंचाई 3,813 मीटर दर्ज है। परीक्षा में 6,387 मीटर वाला आंकड़ा ही सही उत्तर माना जाता है।
यमुना नदी का नक्शा (Yamuna River Map PDF)
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यमुना नदी का सामान्य परिचय
- यमुना नदी, भारत की सबसे बड़ी नदी प्रणालियों में से एक ‘गंगा नदी तंत्र‘ का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह गंगा की सबसे लंबी और प्रमुख सहायक नदी है।
- यह भारत की पांचवीं सबसे लंबी नदी है।
- इसका उद्गम उत्तराखंड में हिमालय की बंदरपूंछ श्रेणी में स्थित यमुनोत्री ग्लेशियर से होता है।
- यमुना नदी की कुल लंबाई लगभग 1,376 किलोमीटर है।
- यह नदी उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश राज्यों से होकर बहती है। हालांकि इसका जल ग्रहण क्षेत्र उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान — कुल 7 राज्यों में फैला हुआ है।
- यमुना नदी प्रयागराज में गंगा नदी से मिल जाती है, और इस संगम स्थल को ‘त्रिवेणी संगम’ कहा जाता है।
- टोंस, चंबल, हिंडन, बेतवा और केन यमुना की प्रमुख सहायक नदियां हैं।
- यमुना नदी का धार्मिक महत्व अत्यधिक है — यह देवी यमुना के रूप में पूजनीय है, जो सूर्य देव की पुत्री और यमराज की बहन मानी जाती हैं। जहां भगवान श्रीकृष्ण ब्रज संस्कृति के जनक कहे जाते हैं, वहीं यमुना इसकी जननी मानी जाती है। इस प्रकार यह सच्चे अर्थों में ब्रजवासियों की माता है, अतः ब्रज में इसे ‘यमुना मैया’ कहते हैं।
- मथुरा, वृंदावन, दिल्ली और आगरा जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक नगर इसके तट पर बसे हुए हैं। ताजमहल भी आगरा में यमुना के ही तट पर स्थित है।
- यमुना नदी भारत की सबसे प्रदूषित नदियों में से एक है, विशेषकर दिल्ली में इसकी स्थिति अत्यंत गंभीर हो चुकी है।
- यमुना के जल स्तर को सुधारने और प्रदूषण कम करने के लिए भारत सरकार द्वारा जापान के सहयोग से 1993 में ‘यमुना एक्शन प्लान (Yamuna Action Plan – YAP)’ की शुरुआत की गई थी, जो वर्तमान में भी कई चरणों में चल रहा है।
यमुना नदी का प्रवाह मार्ग
- उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलकर यमुना नदी दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर प्रवाहित होती है। कुछ दूरी तक चलने के बाद यह उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा के निकट पहुंचती है, जहां देहरादून जिले के कालसी नामक स्थान के पास बंदरपूंछ श्रेणी से ही निकलकर आने वाली टोंस नदी इसमें दाईं ओर से आकर मिलती है। संगम स्थल पर टोंस में यमुना से भी अधिक जल होता है।
- इसके आगे यमुना नदी उत्तराखंड के डाकपत्थर के पास पर्वतीय क्षेत्र से बाहर निकलती है, जहां बैराज बनाकर जल को विद्युत उत्पादन हेतु नहर में मोड़ा जाता है।
- आगे बढ़ते हुए यह नदी कुछ दूरी तक हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा बनाती हुई बहती है। सिख धर्म के प्रसिद्ध स्थल पांवटा साहिब के पास इसमें हिमाचल प्रदेश से आने वाली गिरी नदी दाईं ओर से आकर मिलती है।
- इसके बाद यमुना हरियाणा के यमुनानगर जिले में पहुंचती है, जहां हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमा पर हथनीकुंड बैराज स्थित है। यह बैराज यमुना के जल को नियंत्रित करके पश्चिमी यमुना नहर और पूर्वी यमुना नहर में सिंचाई के लिए बांटने का कार्य करता है। इसे पुराने ताजेवाला बैराज के स्थान पर बनाया गया है।
- इसके आगे यमुना नदी उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सीमा पर बहते हुए दिल्ली में पल्ला गांव के पास प्रवेश करती है। यह दिल्ली शहर को दो भागों में विभाजित करती है, जहां पूर्वी भाग को आम भाषा में ‘यमुना पार’ कहा जाता है।
- दिल्ली में ही राजस्थान की अरावली की पहाड़ियों से निकलकर आने वाली साहिबी नदी — जो वर्तमान में नजफगढ़ नाला कहलाती है — यमुना में दाईं ओर से मिलती है।
- दिल्ली में यमुना पर वजीराबाद बैराज स्थित है, जहां से दिल्ली को पेयजल मिलता है, और उससे आगे ओखला बैराज, जहां से आगरा नहर निकाली गई है।
- दिल्ली से निकलने के पश्चात यमुना नदी फिर से उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सीमा पर बहती है। गौतम बुद्ध नगर में सहारनपुर से निकलकर आने वाली हिंडन नदी बाईं ओर से यमुना में मिलती है।
- मथुरा जिले से यमुना नदी पूर्ण रूप से उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर जाती है। इसके बाद यह मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद और इटावा जिलों से होकर बहती है। आगरा जिले के पास उटंगन (गंभीर) नदी दाईं ओर से इसमें मिलती है।
- आगे चलकर यह इटावा और औरैया जिलों की सीमा पर पहुंचती है, जहां चंबल नदी दाईं ओर से आकर यमुना में मिल जाती है। यह यमुना की सबसे लंबी सहायक नदी है।
- इससे कुछ ही दूरी पर औरैया के पास सिंध नदी भी दाईं ओर से यमुना नदी में मिल जाती है।
- इसके आगे यमुना नदी औरैया व जालौन जिलों की सीमा बनाती हुई बहती है। इसके पश्चात यह कानपुर देहात और जालौन, तथा आगे चलकर कानपुर नगर और हमीरपुर जिलों की सीमा रेखा बनाते हुए आगे बढ़ती है। इसी क्षेत्र में सेंगर और रिंद नदियां बाईं ओर से यमुना में मिलती हैं। हमीरपुर में ही बेतवा नदी दाईं ओर से आकर यमुना नदी से मिलती है।
- इसके आगे यमुना नदी फतेहपुर और बांदा जिलों की सीमा पर बहती है। बांदा जिले में चिल्ला घाट के पास केन नदी दाईं ओर से यमुना नदी में आकर मिलती है।
- इसके पश्चात यमुना नदी फतेहपुर और चित्रकूट तथा कौशांबी और चित्रकूट की सीमा बनाते हुए प्रयागराज में प्रवेश कर जाती है।
- प्रयागराज में प्रवेश करने के बाद यमुना नदी शहर के दक्षिणी भाग में बहती हुई ‘त्रिवेणी संगम’ पर गंगा नदी से मिल जाती है। यह संगम स्थल अत्यंत पवित्र धार्मिक स्थान माना जाता है, जहां गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती नदियों का मिलन होता है। यहीं पर कुंभ मेला और माघ मेला जैसे विश्व प्रसिद्ध धार्मिक आयोजन होते हैं।
- संगम के बाद यमुना नदी की स्वतंत्र पहचान समाप्त हो जाती है और वह गंगा नदी का हिस्सा बन जाती है। इसके आगे की जलधारा ‘गंगा’ कहलाती है, जो बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल होते हुए अंततः बांग्लादेश में प्रवेश करती है और ‘बंगाल की खाड़ी’ में गिरती है।
यमुना नदी किन राज्यों से होकर बहती है?
यमुना नदी 5 राज्यों से होकर बहती है — उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश।
हालांकि इसका जल ग्रहण क्षेत्र 7 राज्यों में फैला है — उपर्युक्त पांच के अतिरिक्त मध्य प्रदेश और राजस्थान भी इसमें शामिल हैं, क्योंकि चंबल, सिंध, बेतवा और केन जैसी बड़ी सहायक नदियां इन्हीं राज्यों से आती हैं।
यही कारण है कि यमुना के जल ग्रहण क्षेत्र में सबसे बड़ा हिस्सा मध्य प्रदेश का है (लगभग 40%), उसके बाद राजस्थान और फिर उत्तर प्रदेश का स्थान आता है — जबकि नदी स्वयं मध्य प्रदेश या राजस्थान से होकर बहती ही नहीं। संपूर्ण गंगा बेसिन का लगभग 40% भाग अकेले यमुना का जल ग्रहण क्षेत्र है।
यमुना नदी पर स्थित प्रमुख बैराज
यमुना नदी के जल को नियंत्रित करने, सिंचाई और पेयजल आपूर्ति के लिए इसके मार्ग में कई महत्वपूर्ण बैराज बनाए गए हैं, जिनसे अक्सर परीक्षाओं में प्रश्न पूछे जाते हैं:
| बैराज | स्थिति | मुख्य उद्देश्य |
| डाकपत्थर बैराज | देहरादून, उत्तराखंड | विद्युत उत्पादन हेतु जल का नहर में मोड़ना |
| हथनीकुंड बैराज | यमुनानगर, हरियाणा | पश्चिमी व पूर्वी यमुना नहर में सिंचाई हेतु जल वितरण (पुराने ताजेवाला बैराज के स्थान पर) |
| वजीराबाद बैराज | दिल्ली | दिल्ली को पेयजल आपूर्ति |
| ओखला बैराज | दिल्ली–उत्तर प्रदेश सीमा | आगरा नहर के लिए जल वितरण |
| गोकुल बैराज | मथुरा, उत्तर प्रदेश | मथुरा और आगरा को पेयजल आपूर्ति |
यमुना नदी की सहायक नदियां
यमुना नदी की कई सहायक नदियां हैं जो इसके जल प्रवाह को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनमें से टोंस नदी हिमालय से निकलती है और यमुना में सबसे अधिक जल लाने वाली सहायक नदी है, जबकि चंबल नदी इसकी सबसे लंबी सहायक नदी है, जो मध्य प्रदेश से निकलकर इटावा (उत्तर प्रदेश) में यमुना नदी से मिल जाती है। इसके अतिरिक्त गिरी, हिंडन, साहिबी, उटंगन (गंभीर), सिंध, सेंगर, रिंद, बेतवा और केन भी यमुना की सहायक नदियां हैं।
बाएं तट और दाएं तट की सहायक नदियां
| तट | सहायक नदियां |
| दायां तट (Right Bank) | टोंस, गिरी, साहिबी, उटंगन, चंबल, सिंध, बेतवा, केन |
| बायां तट (Left Bank) | हिंडन, सेंगर, रिंद |
यह वर्गीकरण भ्रम का एक बड़ा कारण रहा है — कई पुस्तकों और वेबसाइटों पर टोंस, गिरी और साहिबी को गलती से बाएं तट की नदियां बता दिया जाता है। जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत तैयार यमुना रिवर बेसिन एटलस में हर सहायक नदी का संगम तट स्पष्ट रूप से दर्ज है, और ऊपर दी गई सूची उसी के अनुरूप है।
इसे याद रखने का सरल तरीका यह है कि हिंडन, सेंगर और रिंद — तीनों नदियां गंगा-यमुना दोआब में, यानी यमुना के पूर्व की ओर बहती हैं, इसलिए ये बाएं तट पर मिलती हैं। शेष सभी सहायक नदियां यमुना के पश्चिम या दक्षिण से आती हैं, इसलिए दाएं तट पर मिलती हैं।
महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण — “सबसे बड़ी” बनाम “सबसे लंबी” : यमुना में सर्वाधिक जल लाने के कारण टोंस नदी को यमुना की सबसे बड़ी सहायक नदी माना जाता है। हालांकि कई पुस्तकों और यहां तक कि कुछ सरकारी दस्तावेज़ों में भी टोंस को यमुना की सबसे लंबी सहायक नदी बता दिया जाता है, जो सही नहीं है — जल शक्ति मंत्रालय के आंकड़ों में चंबल की लंबाई टोंस से कई गुना अधिक दर्ज है। टोंस को हम यमुना की सबसे बड़ी सहायक नदी कह सकते हैं क्योंकि यह सर्वाधिक जल लाती है और इसका प्रवाह बहुत तेज है, परंतु यह सबसे लंबी सहायक नदी नहीं है।
सहायक नदियों का सारांश
| सहायक नदी | उद्गम | संगम स्थल | तट |
| टोंस | बंदरपूंछ श्रेणी, उत्तरकाशी (उत्तराखंड) | कालसी, देहरादून | दायां |
| गिरी | शिमला जिला (हिमाचल प्रदेश) | पांवटा साहिब के पास | दायां |
| साहिबी | अरावली पहाड़ियां, राजस्थान | दिल्ली | दायां |
| हिंडन | शिवालिक, सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) | ग्रेटर नोएडा | बायां |
| उटंगन (गंभीर) | राजस्थान | आगरा जिला | दायां |
| चंबल | जानापाव पहाड़ी, इंदौर (मध्य प्रदेश) | इटावा जिला | दायां |
| सिंध | विदिशा जिला (मध्य प्रदेश) | औरैया के पास | दायां |
| सेंगर | उत्तर प्रदेश (दोआब क्षेत्र) | औरैया जिला | बायां |
| बेतवा | विंध्य श्रेणी (मध्य प्रदेश) | हमीरपुर (उत्तर प्रदेश) | दायां |
| रिंद | उत्तर प्रदेश (दोआब क्षेत्र) | फतेहपुर के पास | बायां |
| केन | कैमूर पहाड़ियां (मध्य प्रदेश) | चिल्ला घाट, बांदा (उत्तर प्रदेश) | दायां |
आइए अब हम बारी-बारी से यमुना नदी की सहायक नदियों को देखते हैं—
टोंस नदी
- टोंस नदी उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में हिमालय की बंदरपूंछ पर्वत श्रृंखला से निकलती है। इसका उद्गम क्षेत्र प्रसिद्ध हर-की-दून घाटी में है।
- यह यमुना की सबसे बड़ी सहायक नदी है। संगम स्थल पर इसमें यमुना से भी अधिक जल होता है और इसका प्रवाह भी काफी तेज है।
- यह कुछ दूरी तक हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा भी बनाती है।
- टोंस नदी उत्तराखंड के देहरादून जिले में कालसी नामक स्थान के पास यमुना नदी के दाएं तट पर मिल जाती है।
- पब्बर, रूपिन और सूपिन नदियां टोंस की प्रमुख सहायक नदियां हैं।
- टोंस पर निर्माणाधीन किशाऊ बांध (236 मीटर) संपूर्ण यमुना तंत्र का सबसे ऊंचा बांध होगा। इसी नदी पर इचारी बांध भी स्थित है।
- टोंस के ऊपरी भाग में गोविंद पशु विहार अभयारण्य स्थित है।
गिरी नदी
- गिरी नदी का उद्गम हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में जुब्बल तहसील की कोटखाई पहाड़ियों में स्थित गिरि गंगा मंदिर के समीप से होता है।
- गिरी नदी को गिरिगंगा के नाम से भी जाना जाता है।
- यह दक्षिण-पूर्व दिशा में बहते हुए सिरमौर जिले को दो भागों में विभाजित करती है, जिन्हें सिस-गिरी और ट्रांस-गिरी कहा जाता है।
- यह नदी पांवटा साहिब के पास यमुना के दाएं तट पर मिल जाती है।
- गिरी नदी पर गिरी-बाटा जलविद्युत परियोजना तथा प्रस्तावित रेणुका बांध परियोजना स्थित है।
हिंडन नदी
- हिंडन नदी का उद्गम उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में कालूवाल खोल नामक शिवालिक की पहाड़ियों से होता है।
- यह नदी सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर जिलों से बहते हुए ग्रेटर नोएडा के पास यमुना नदी से मिल जाती है।
- यह यमुना के बाएं तट पर मिलने वाली सबसे प्रमुख सहायक नदी है। यह एक बरसाती नदी है।
- यह गंगा और यमुना के बीच दोआब क्षेत्र में बहती है — इसके बाईं ओर गंगा और दाईं ओर यमुना है।
- काली (पश्चिमी), कृष्णा और धमोला हिंडन की प्रमुख सहायक नदियां हैं।
- हड़प्पा सभ्यता (सिंधु घाटी सभ्यता) का सबसे पूर्वी स्थल आलमगीरपुर हिंडन नदी के किनारे मेरठ जिले में स्थित है। इसे स्थानीय रूप से ‘परशुराम का खेड़ा’ कहा जाता है।
साहिबी नदी
- साहिबी नदी, जिसे कुछ स्थानों पर साबी नदी भी कहा जाता है, एक बरसाती नदी है जो राजस्थान की अरावली की पहाड़ियों से निकलती है।
- यह नदी राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली में प्रवाहित होते हुए दिल्ली में ही यमुना के दाएं तट पर मिल जाती है।
- साहिबी नदी को अब दिल्ली में नजफगढ़ नाला के नाम से जाना जाता है। इसमें दिल्ली के अधिकांश बड़े नालों का पानी गिरता है, जिससे यह यमुना के प्रदूषण का सबसे प्रमुख स्रोत बन गई है।
- कभी यह नदी पूरे इलाके का बारिश का पानी एकत्रित कर नजफगढ़ झील के रास्ते यमुना नदी तक पहुंचती थी; अब यह झील लगभग विलुप्त हो चुकी है और नदी एक नाले के रूप में तब्दील हो चुकी है।
- हरियाणा के रेवाड़ी जिले में इसी नदी पर मसानी बैराज स्थित है।
गंभीर (उटंगन) नदी
- गंभीर नदी, जिसे उटंगन नदी के नाम से भी जाना जाता है, भारत की एक मौसमी नदी है तथा यमुना की एक सहायक नदी है।
- गंभीर नदी राजस्थान राज्य में उत्पन्न होती है और उत्तर प्रदेश राज्य में आगरा जिले के पास यमुना के दाएं तट पर मिल जाती है।
- बाणगंगा, खारी और पार्वती इसकी प्रमुख सहायक नदियां हैं।
- इस नदी पर राजस्थान के करौली जिले में पंचाना बांध स्थित है।
चंबल नदी
- चंबल नदी का प्राचीन नाम चर्मण्वती है। इसका उद्गम मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में म्हो के समीप स्थित विंध्य पर्वत श्रृंखला की जानापाव पहाड़ी से होता है। उद्गम के पश्चात यह नदी उत्तर-पूर्व दिशा में बहते हुए मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से होकर गुजरती है और इटावा जिले में यमुना नदी के दाएं तट पर मिल जाती है।
- यह यमुना की सबसे लंबी सहायक नदी है और यमुना तंत्र की सबसे बड़ी नदी प्रणाली है — अकेले चंबल का जल ग्रहण क्षेत्र संपूर्ण यमुना बेसिन का लगभग 42% है।
- चंबल एक अध्यारोपित नदी है, जो भारत में सर्वाधिक अवनालिका अपरदन करने के लिए जानी जाती है। यह उत्खात भूमि का निर्माण करती है, जिसे बीहड़ (Bad Land Topography) कहा जाता है।
- चंबल नदी पर चार प्रमुख संरचनाएं बनाई गई हैं, जिनका क्रम दक्षिण से उत्तर की ओर गांधी सागर बांध, राणा प्रताप सागर बांध, जवाहर सागर बांध और कोटा बैराज है। इन्हें सामूहिक रूप से चंबल परियोजना कहा जाता है।
- चंबल नदी पर राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य स्थित है, जो राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश राज्यों में फैला हुआ है। यह घड़ियाल और गंगा डॉल्फिन के लिए प्रसिद्ध है।
- क्षिप्रा, कालीसिंध, पार्वती, बनास, मेज, बेराच और कुनो आदि नदियां चंबल नदी की प्रमुख सहायक नदियां हैं।
चंबल नदी और उसकी सहायक नदियों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए आप हमारी इस पोस्ट को पढ़ सकते हैं — चंबल नदी | उद्गम, सहायक नदियां, बांध और मानचित्र
सिंध नदी
- सिंध नदी मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में बहने वाली यमुना नदी के दाएं तट की एक सहायक नदी है। ध्यान दें — यह सिंधु (Indus) नदी से पूर्णतः भिन्न है, दोनों के नाम मिलते-जुलते होने के कारण अक्सर भ्रम होता है।
- सिंध नदी का उद्गम मालवा पठार में मध्य प्रदेश के विदिशा जिले की सिरोंज तहसील से होता है।
- यह उत्तर-पूर्व दिशा में बहते हुए गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, दतिया, ग्वालियर और भिंड जिलों से गुजरकर औरैया के पास यमुना नदी से मिल जाती है।
- कुंवारी, वैसाली, पहुज और माहौर सिंध नदी की प्रमुख सहायक नदियां हैं।
- इस नदी पर मड़ीखेड़ा बांध (अटल सागर) स्थित है।
बेतवा नदी
- बेतवा नदी मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में बहने वाली यमुना के दाएं तट की एक प्रमुख सहायक नदी है।
- इसका उद्गम मध्य प्रदेश में विंध्य पर्वत श्रेणी से होता है। उद्गम के पश्चात यह नदी उत्तर-पूर्व दिशा में बहते हुए उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में यमुना से मिल जाती है।
- हमीरपुर शहर बेतवा और यमुना नदियों के बीच में स्थित है।
- बेतवा नदी का प्राचीन नाम वेत्रवती था। यह बुंदेलखंड पठार की सबसे लंबी नदी है।
- बेतवा नदी मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की कुछ दूरी तक सीमा भी निर्धारित करती है।
- बेतवा नदी पर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर राजघाट बांध तथा माताटीला बांध और झांसी में पारीछा बांध स्थित है।
- धसान, जामिनी, बीना और उर बेतवा की प्रमुख सहायक नदियां हैं।
सेंगर और रिंद नदियां
- ये दोनों उत्तर प्रदेश के गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र में बहने वाली यमुना के बाएं तट की सहायक नदियां हैं।
- सेंगर नदी इटावा, मैनपुरी, फिरोजाबाद, औरैया और कानपुर देहात जिलों से होकर बहती है। सिरसा और करुंदी इसकी प्रमुख सहायक नदियां हैं।
- रिंद नदी (जिसे अरिंद भी कहा जाता है) कानपुर देहात, कानपुर नगर और फतेहपुर जिलों से बहते हुए यमुना में मिलती है।
केन नदी
- केन नदी मध्य प्रदेश में कैमूर पहाड़ियों से निकलती है। इस नदी को कर्णावती नाम से भी जाना जाता है।
- यह नदी दक्षिण से उत्तर दिशा में बहते हुए बुंदेलखंड क्षेत्र से होकर गुजरती है। अपनी यात्रा के दौरान यह उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में प्रवेश करती है और चिल्ला घाट के पास यमुना के दाएं तट पर समाहित हो जाती है।
- यह मध्य प्रदेश के पन्ना व छतरपुर तथा उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की सीमा भी बनाती है।
- सोनार, बेयरमा, श्यामरी और चंद्रावल केन की प्रमुख सहायक नदियां हैं। इनमें सोनार सबसे लंबी है।
- केन नदी पन्ना टाइगर रिजर्व से होकर बहती है और अपने स्वच्छ जल के लिए जानी जाती है।
- केन नदी पर केन-बेतवा लिंक परियोजना क्रियान्वित की जा रही है, जो भारत की पहली बड़ी नदी जोड़ो परियोजना है।
यमुना नदी में प्रदूषण
यमुना भारत की सर्वाधिक प्रदूषित नदियों में गिनी जाती है। परंतु यह समझना ज़रूरी है कि यमुना का प्रदूषण केवल “गंदगी डालने” की समस्या नहीं है — यह दो अलग-अलग कारणों के मेल से बनी समस्या है। पहला, नदी से उसका साफ पानी निकाल लिया जाता है और दूसरा, उसकी जगह अपशिष्ट जल डाल दिया जाता है। इन दोनों को साथ मिलाकर देखें तभी पूरी तस्वीर स्पष्ट होती है।
पहला कारण : नदी का साफ जल निकाल लिया जाना
हरियाणा के यमुनानगर में स्थित हथनीकुंड बैराज पर यमुना का अधिकांश जल पश्चिमी यमुना नहर और पूर्वी यमुना नहर में सिंचाई के लिए मोड़ दिया जाता है। इसके बाद दिल्ली में वजीराबाद बैराज पर बचा हुआ लगभग संपूर्ण जल शहर की पेयजल आपूर्ति के लिए रोक लिया जाता है।
परिणाम यह होता है कि वजीराबाद बैराज के नीचे नदी में ताज़े जल का प्रवाह लगभग शून्य रह जाता है। वर्ष के लगभग नौ महीनों तक दिल्ली खंड में जो जलधारा बहती दिखाई देती है, वह वास्तव में नदी का जल नहीं बल्कि नालों से आया अपशिष्ट जल होता है। नदी के पास अपने प्रदूषण को घोलने या बहाकर ले जाने के लिए पानी ही नहीं बचता — इसे पर्यावरणीय प्रवाह (Environmental Flow) की कमी कहा जाता है, और विशेषज्ञ इसे यमुना के प्रदूषण का सबसे मूल कारण मानते हैं।
दूसरा कारण : अपशिष्ट जल का नदी में गिरना
दिल्ली में यमुना लगभग 52 किलोमीटर बहती है — पल्ला गांव से प्रवेश करके असगरपुर के पास बाहर निकलती है। इसी में वजीराबाद से ओखला तक का लगभग 22 किलोमीटर का खंड सबसे गंभीर है।
परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण तथ्य : दिल्ली का यह 22 किलोमीटर लंबा खंड यमुना की कुल लंबाई (1,376 किमी) का 2% से भी कम है, फिर भी यह अकेले नदी के कुल प्रदूषण भार का लगभग 76% से 80% तक उत्पन्न करता है।
दिल्ली में लगभग 22 बड़े नाले सीधे यमुना में गिरते हैं। इनमें दो सबसे बड़े हैं —
- नजफगढ़ नाला (वास्तव में यह पुरानी साहिबी नदी है) — वजीराबाद बैराज के ठीक नीचे यमुना में मिलता है
- शाहदरा नाला — ओखला बैराज के पास यमुना में मिलता है
पर्यावरण संस्था सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) के आकलन के अनुसार अकेले ये दो नाले ही दिल्ली में यमुना के कुल प्रदूषण भार का लगभग 80% लाते हैं। इनमें दिल्ली के साथ-साथ हरियाणा और उत्तर प्रदेश से आने वाला अपशिष्ट जल भी शामिल होता है।
दिल्ली प्रतिदिन लगभग 792 MGD (मिलियन गैलन प्रतिदिन) अपशिष्ट जल उत्पन्न करती है, जबकि शहर के 37 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) इसका केवल एक हिस्सा ही शोधित कर पाते हैं। शोधित जल का भी एक बड़ा भाग निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरता। साथ ही 500 से अधिक अनधिकृत कॉलोनियों और लगभग 160 गांवों में अब तक सीवर नेटवर्क पहुंचा ही नहीं है, जहां का अपशिष्ट जल बरसाती नालों के रास्ते सीधे नदी में पहुंच जाता है।
प्रदूषण मापने के पैमाने और यमुना की वास्तविक स्थिति
नदी के जल की गुणवत्ता तीन मुख्य मापदंडों से आंकी जाती है, जिनसे परीक्षाओं में अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं:
- BOD (जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग) : जल में मौजूद कार्बनिक पदार्थ को विघटित करने के लिए सूक्ष्मजीवों को जितनी ऑक्सीजन चाहिए, वह मात्रा। BOD जितना अधिक, जल उतना अधिक प्रदूषित।
- DO (घुलित ऑक्सीजन) : जल में घुली हुई ऑक्सीजन। जलीय जीवों के जीवित रहने के लिए आवश्यक। DO जितना कम, जल उतना अधिक प्रदूषित।
- फीकल कोलीफॉर्म : मल-जनित बैक्टीरिया की संख्या, जो मानव या पशु मल से जल के दूषित होने का संकेत देती है।
| मापदंड | निर्धारित मानक | पल्ला (प्रवेश स्थल) | दिल्ली का निचला खंड |
| BOD | 3 मिग्रा/लीटर से कम | लगभग 2 मिग्रा/लीटर (मानक के भीतर) | 50 मिग्रा/लीटर से अधिक |
| DO | 4 मिग्रा/लीटर से अधिक | लगभग 7.6 मिग्रा/लीटर | 1 मिग्रा/लीटर से भी कम, कहीं-कहीं शून्य |
| फीकल कोलीफॉर्म | 500 MPN/100 मिली | मानक के आसपास | निर्धारित सीमा से हज़ारों गुना अधिक |
यह तालिका पूरी कहानी एक नज़र में कह देती है — पल्ला में यमुना का जल मानकों के भीतर है, परंतु वजीराबाद बैराज पार करते ही यह “जैविक रूप से मृत” हो जाता है। DO शून्य होने का अर्थ है कि उस जल में मछली सहित कोई भी जलीय जीव जीवित नहीं रह सकता।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की नवीनतम मूल्यांकन रिपोर्ट में भी दिल्ली का पल्ला से असगरपुर तक का खंड देश के सर्वाधिक प्रदूषित नदी खंडों में शामिल है। इस रिपोर्ट के अनुसार देशभर में 296 प्रदूषित नदी खंड चिन्हित किए गए, जिनमें से 37 खंड ‘प्राथमिकता-1’ श्रेणी में रखे गए — यानी सर्वाधिक गंभीर। संतोष की बात यह है कि प्रदूषित नदी खंडों की कुल संख्या 2018 के 351 से घटकर अब 296 रह गई है।
यमुना के पांच खंड
प्रदूषण और जल-प्रवाह की स्थिति के आधार पर यमुना को पांच खंडों में बांटा गया है। यह वर्गीकरण प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है:
| खंड | विस्तार | विशेषता |
| हिमालयी खंड | उद्गम से ताजेवाला बैराज तक | जल स्वच्छ एवं निर्मल |
| ऊपरी खंड | ताजेवाला बैराज से वजीराबाद बैराज तक | जल नहरों में मोड़ा जाता है, प्रवाह घटता है |
| दिल्ली खंड | वजीराबाद बैराज से ओखला बैराज तक | सर्वाधिक प्रदूषित, लगभग 22 किमी |
| सुपोषित (Eutrophicated) खंड | ओखला बैराज से चंबल संगम तक | पोषक तत्वों की अधिकता, शैवाल की वृद्धि |
| तनुकृत (Diluted) खंड | चंबल संगम से गंगा संगम तक | चंबल का स्वच्छ जल मिलने से प्रदूषण घटता है |
इन नामों में ही पूरी कहानी छिपी है। ‘सुपोषित’ का अर्थ है कि जल में नाइट्रोजन और फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्व इतने अधिक हो गए हैं कि शैवाल तेज़ी से बढ़ने लगते हैं और जल की ऑक्सीजन खा जाते हैं। वहीं ‘तनुकृत’ का अर्थ है कि इटावा में चंबल नदी का बड़ी मात्रा में स्वच्छ जल मिलने के बाद ही यमुना का प्रदूषण घुलकर कम होता है — यानी यमुना को साफ करने का काम अंततः चंबल करती है, कोई शोधन संयंत्र नहीं।
यमुना की सफाई के प्रयास
- यमुना एक्शन प्लान (YAP), 1993 : जापान (JICA) के सहयोग से शुरू किया गया। अब तक यह तीन चरणों में चल चुका है। YAP-III के अंतर्गत ओखला में एशिया का सबसे बड़ा अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र (लगभग 564 MLD क्षमता) स्थापित किया गया है।
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की निगरानी : NGT ने यमुना पुनरुद्धार के लिए उच्चस्तरीय निगरानी समिति गठित की है, जो समय-समय पर प्रगति की समीक्षा करती है।
- राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) : यमुना गंगा तंत्र का हिस्सा होने के कारण इसका पुनरुद्धार भी NMCG के अंतर्गत आता है, जिसके माध्यम से दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश को वित्तीय एवं तकनीकी सहायता दी जाती है।
- वर्तमान लक्ष्य : दिल्ली की सीवेज शोधन क्षमता को चरणबद्ध रूप से बढ़ाकर लगभग 1,500 MGD तक ले जाने की योजना है, जिसके अंतर्गत मौजूदा संयंत्रों का उन्नयन, विकेंद्रीकृत STP और बड़े नालों के पास नए संयंत्र शामिल हैं। साथ ही बाढ़ क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने और नालों को STP से जोड़ने का कार्य भी चल रहा है।
1993 से अब तक विभिन्न योजनाओं पर हज़ारों करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद यमुना की स्थिति में अपेक्षित सुधार न आने का मुख्य कारण विशेषज्ञ तकनीकी कमी नहीं, बल्कि प्रशासनिक समन्वय की कमी मानते हैं — क्योंकि यमुना चार राज्यों से होकर बहती है और जल बंटवारे, सीवर नेटवर्क तथा औद्योगिक अपशिष्ट पर नियंत्रण की जिम्मेदारी अलग-अलग एजेंसियों के पास बंटी हुई है।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए यमुना नदी की वर्तमान भौगोलिक स्थिति से जुड़ा यह नवीनतम अपडेट अत्यंत महत्वपूर्ण है:
- दिल्ली में यमुना का सिकुड़ना : एक वैज्ञानिक शोध, जिसमें 1799 से लेकर अब तक के मानचित्रों और आंकड़ों का विश्लेषण किया गया, के अनुसार पिछले लगभग 225 वर्षों में दिल्ली क्षेत्र में यमुना नदी की औसत चौड़ाई लगभग 68% तक घट गई है।
- जल प्रवाह में गिरावट : चौड़ाई सिकुड़ने के साथ-साथ नदी में बहने वाले पानी की मात्रा में भी लगभग 89% की भारी कमी दर्ज की गई है।
- कारण : तेजी से बढ़ता शहरीकरण, नदी क्षेत्र में अतिक्रमण, जगह-जगह बने बैराज और जलवायु परिवर्तन इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। यदि यही स्थिति रही, तो भविष्य में इस ऐतिहासिक नदी का अस्तित्व एक गंभीर संकट में पड़ सकता है।
- केन-बेतवा लिंक परियोजना : यमुना तंत्र की दो सहायक नदियों को जोड़ने वाली यह भारत की पहली बड़ी नदी जोड़ो परियोजना है, जो बुंदेलखंड क्षेत्र की जल समस्या के समाधान हेतु क्रियान्वित की जा रही है।
- 🔹 प्राचीन/अन्य नाम: कालिंदी, यमी (सूर्य की पुत्री एवं यमराज की बहन)
- 🔹 उद्गम स्थल: यमुनोत्री (चंपासर) ग्लेशियर (बंदरपूंछ चोटी का पश्चिमी ढाल, उत्तरकाशी, उत्तराखंड — ऊँचाई: ~6,387 मी.)
- 🔹 कुल लंबाई: लगभग 1,376 किलोमीटर
- 🔹 भारत में स्थान: पांचवीं सबसे लंबी नदी; गंगा की सबसे लंबी सहायक नदी
- 🔹 प्रवाह वाले राज्य: उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश (5)
- 🔹 मुहाना: प्रयागराज (UP) में ‘त्रिवेणी संगम’ पर गंगा नदी में विलय
- 🔹 सबसे बड़ी सहायक नदी: टोंस (जल की मात्रा और प्रवाह के आधार पर)
- 🔹 सबसे लंबी सहायक नदी: चंबल
- 🔹 दाएं तट की नदियाँ: टोंस, गिरी, साहिबी, उटंगन (गंभीर), चंबल, सिंध, बेतवा और केन
- 🔹 बाएं तट की नदियाँ: हिंडन, सेंगर और रिंद
- 🔹 तट पर बसे प्रमुख शहर: दिल्ली, नोएडा, मथुरा, वृंदावन, आगरा, इटावा, हमीरपुर और प्रयागराज
- 🔹 प्रमुख बैराज: डाकपत्थर (उत्तराखंड), हथनीकुंड (हरियाणा), वजीराबाद (दिल्ली), ओखला (दिल्ली-UP सीमा) और गोकुल बैराज (मथुरा)
- 🔹 जल ग्रहण क्षेत्र: 7 राज्यों में विस्तृत (उत्तराखंड, HP, हरियाणा, दिल्ली, UP, MP और राजस्थान)
निष्कर्ष
यमुना नदी केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि उत्तर भारत की कृषि, संस्कृति और आस्था की धुरी है। उत्तरकाशी के यमुनोत्री ग्लेशियर से प्रयागराज के त्रिवेणी संगम तक का इसका सफर पांच राज्यों और अनेक ऐतिहासिक नगरों को जोड़ता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से इसके उद्गम, प्रवाह मार्ग, सहायक नदियों के तट (बाएं/दाएं) तथा बैराजों की स्थिति — ये चार बिंदु सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं। लेख में दिए गए मानचित्र की सहायता से इनका अभ्यास करने पर मानचित्र-आधारित प्रश्न आसानी से हल किए जा सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
यमुना नदी कहां से निकलती है?
यमुना नदी उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में बंदरपूंछ चोटियों के समीप स्थित यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलती है। इसका उद्गम स्थल यमुनोत्री धाम के पास है, जो चार धामों में से एक है।
यमुना नदी की कुल लंबाई कितनी है?
यमुना नदी की कुल लंबाई लगभग 1,376 किलोमीटर है। यह भारत की पांचवीं सबसे लंबी नदी और गंगा की सबसे लंबी सहायक नदी है।
यमुना नदी कितने राज्यों से होकर गुजरती है?
यमुना नदी 5 राज्यों से होकर बहती है — उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश। इसका जल ग्रहण क्षेत्र 7 राज्यों में फैला है, जिसमें मध्य प्रदेश और राजस्थान भी शामिल हैं।
यमुना नदी कहां से कहां तक बहती है?
यमुना उत्तराखंड के यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलकर लगभग 1,376 किलोमीटर बहने के बाद उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर गंगा नदी में मिल जाती है।
यमुना नदी कहां गिरती है?
यमुना नदी प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) में त्रिवेणी संगम पर गंगा नदी में मिलती है। यह सीधे किसी समुद्र में नहीं गिरती — इसका जल गंगा के माध्यम से बंगाल की खाड़ी तक पहुंचता है।
यमुना की सबसे बड़ी सहायक नदी कौन सी है?
जल की मात्रा की दृष्टि से टोंस यमुना की सबसे बड़ी सहायक नदी है। यह उत्तरकाशी की बंदरपूंछ श्रेणी से निकलती है और कालसी के पास यमुना में मिलती है। संगम स्थल पर टोंस में यमुना से भी अधिक जल होता है।
यमुना की सबसे लंबी सहायक नदी कौन सी है?
चंबल यमुना की सबसे लंबी सहायक नदी है। यह मध्य प्रदेश के इंदौर जिले की जानापाव पहाड़ी से निकलकर इटावा (उत्तर प्रदेश) में यमुना से मिलती है।
यमुना की बाएं तट की सहायक नदियां कौन सी हैं?
यमुना के बाएं तट पर मिलने वाली सहायक नदियां हैं — हिंडन, सेंगर और रिंद। ये तीनों गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र में बहती हैं। शेष सभी प्रमुख सहायक नदियां (टोंस, गिरी, साहिबी, उटंगन, चंबल, सिंध, बेतवा, केन) दाएं तट पर मिलती हैं।
यमुना नदी किस नदी की सहायक नदी है?
यमुना गंगा नदी की सहायक नदी है, और गंगा की सबसे लंबी सहायक नदी है। यह गंगा के दाएं तट की एकमात्र प्रमुख सहायक नदी है जिसका उद्गम हिमालय के ग्लेशियर से होता है।
यमुना नदी का प्राचीन नाम क्या है?
यमुना के प्राचीन एवं अन्य नाम कालिंदी और यमी हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार यह सूर्य देव की पुत्री और यमराज की बहन हैं।
गंगा और यमुना का संगम कहां होता है?
गंगा और यमुना का संगम उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में होता है, जिसे त्रिवेणी संगम कहा जाता है। मान्यता के अनुसार यहां पौराणिक सरस्वती नदी भी अदृश्य रूप से मिलती है।
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स्रोत एवं संदर्भ
इस लेख के तथ्य निम्नलिखित आधिकारिक स्रोतों से सत्यापित किए गए हैं:
- यमुना रिवर बेसिन एटलस — राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) एवं cGanga, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर, जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार
- India-WRIS (भारत जल संसाधन सूचना तंत्र) — जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग, जल शक्ति मंत्रालय
- केंद्रीय जल आयोग (CWC) — नदी बेसिन संबंधी प्रकाशन
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) — आलमगीरपुर पुरास्थल संबंधी विवरण
इस लेख का मानचित्र GkGsNotes द्वारा स्वयं तैयार किया गया है।
अंतिम समीक्षा : सितंबर 2026