भारत और दक्षिण एशिया के सबसे विशाल तथा प्राचीन नदी तंत्रों में से एक सिंधु नदी तंत्र (Sindhu Nadi Tantra) भौगोलिक, ऐतहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस ब्लॉग पोस्ट में हम सिंधु नदी और उसके पूरे नदी तंत्र को सरल भाषा में विस्तारपूर्वक समझेंगे।
यहां आप सिंधु नदी का सामान्य परिचय, भौगोलिक विशेषताएं, उद्गम स्थल, मुहाना, प्रभाव क्षेत्र, तथा सिंधु नदी की प्रमुख सहायक नदियों तथा उन पर स्थित जल विद्युत परियोजनाओं का विस्तार पूर्वक अध्ययन करेंगे।
पूरे लेख में महत्वपूर्ण तथ्यों को चित्रों तथा मानचित्रो की सहायता से समझाया गया है, जिससे यह पोस्ट प्रतियोगी परीक्षाओं, स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों और भूगोल मे रुचि रखने वाले पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी बन जाती है। इस लेख में सिंधु नदी तंत्र से संबंधित सभी परीक्षोपयोगी बिंदुओं को शामिल किया गया है।

सिंधु नदी तंत्र (Sindhu Nadi Tantra): का सामान्य परिचय
सिंधु नदी तंत्र: एक नज़र में
| विवरण | महत्वपूर्ण जानकारी |
| नदी का नाम | सिंधु नदी (Indus River) |
| प्राचीन/वैदिक नाम | सिंधु |
| उद्गम स्थल | बोखर-चू हिमनद / ‘सिंघी खंबन’ (मानसरोवर झील के पास, तिब्बत) |
| मुहाना | अरब सागर (कराची, पाकिस्तान के निकट) |
| कुल लंबाई | 2,880 किलोमीटर |
| भारत में लंबाई | 1,114 किलोमीटर |
| भारत में प्रवेश / निकास | दमचौक (प्रवेश) / चिल्लास (निकास) |
| सबसे बड़ी सहायक नदी | चेनाब नदी |
| पंचनद (बाएं से मिलने वाली) | झेलम, चेनाब, रावी, व्यास, सतलज |
| दाएं से मिलने वाली नदियां | श्योक, काबुल, कुर्रम, गोमल, गिलगित |
| प्रमुख जल समझौता | सिंधु जल समझौता (19 सितंबर 1960) |
- सिंधु नदी तंत्र विश्व के सबसे विशाल नदी तंत्रों में से एक है, जिसका कुल जल ग्रहण क्षेत्र लगभग 11.65 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यह तंत्र दक्षिण एशिया के भौगोलिक, कृषि और सांस्कृतिक परिदृश्य को निर्णायक रूप से प्रभावित करता है। भारत में इसका लगभग 2.21 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल शामिल है, जो मुख्यतः लद्दाख, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और पंजाब के हिस्सों में फैला हुआ है।
- यह नदी तंत्र, इस तंत्र की सबसे प्रमुख नदी सिंधु नदी और उसकी सभी सहायक नदियों से बनता है।
- सिंधु नदी तंत्र में निम्न नदियां आती हैं- सिंधु, झेलम, चेनाब, रावी, व्यास, सतलज, श्योक, गिलगित, काबुल, कुर्रम, गोमल आदि।
- सिंधु नदी तंत्र (Sindhu Nadi tantra) का अपवाह क्षेत्र तिब्बत (चीन), भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में फैला हुआ है।
- सिंधु नदी तंत्र की अधिकांश नदियां हिमालय क्षेत्र से निकलती हैं और कुछ नदियां हिंदू कुश पर्वत से निकलती है।
- सिंधु और उसकी अधिकतर सहायक नदियों के जल का स्रोत ग्लेशियर हैं इसलिए यह नदियां वर्ष वाहिनी है।
- यह नदी तंत्र पाकिस्तान के शहर कराची के निकट अरब सागर में अपना जल गिराता है, जहाँ सिंधु नदी एक विशाल डेल्टा का निर्माण करती है।
सिंधु नदी (Sindhu Nadi)
- सिंधु नदी तिब्बत में मानसरोवर झील के पास कैलाश पर्वत श्रृंखला पर स्थित बोखर-चू नामक ग्लेशियर से निकलती है। तिब्बत में इस ग्लेशियर को ‘सिंघी खंबन’ या ‘शेर का मुंह’ के नाम से जाना जाता है।
- तिब्बत में मानसरोवर झील और कैलाश पर्वत स्थित है। तिब्बत मे मानसरोवर झील के पास से तीन पूर्ववर्ती नदियों सिंधु, सतलज, और ब्रह्मपुत्र का उद्गम होता हैं। मानसरोवर झील के पास स्थित राक्षस / राकस ताल झील से सतलज नदी का, मानसरोवर झील के पश्चिम में कैलाश पर्वत श्रृंखला में स्थित बोखर-चू हिमनद से सिंधु नदी का और मानसरोवर के पूर्व में स्थित कैलाश पर्वत श्रृंखला के चेमायुंगडुंग हिमनद से ब्रह्मपुत्र नदी का उद्गम होता है।
- सिंधु नदी तिब्बत, भारत और पाकिस्तान में बहते हुए अरब सागर में डेल्टा बनाते हुए अपना जल गिराती है।
- सिंधु नदी की लंबाई 2880 किलोमीटर है जबकि भारत में इसकी लंबाई 1114 किलोमीटर है।
- भारत में सिंधु नदी दमचौक नामक स्थान से प्रवेश करती है और चिल्लास नामक स्थान से बाहर निकलती है।
- सिंधु नदी एक पूर्ववर्ती नदी है यानी कि यह नदी हिमालय पर्वत के निर्माण से पहले से बह रही है।
- यह हिमालय की सबसे पश्चिमी नदी है।
- सिंधु नदी भारत में दमचौक से प्रवेश करती है फिर यह लद्दाख श्रेणी को उत्तर से दक्षिण की ओर दुंग्ती नामक स्थान पर काटने के बाद लद्दाख और जास्कर श्रेणियों के मध्य उत्तर-पश्चिम दिशा में बहती है।
- जहां लेह के पास इसमें बाई ओर से जास्कर नदी मिलती है। यहां पर जस्कर नदी सिंधु नदी से ज्यादा पानी लेकर आती है।
- इस संगम से थोड़ा आगे सिंधु नदी पर अलची के पास निम्मो बाजगो जल विद्युत परियोजना चल रही है।
- लद्दाख श्रेणी को काटते हुए सिंधु नदी गिलगित के समीप एक महाखड्ड (बुंजी गॉर्ज) का निर्माण करती है। जो 5200 मीटर गहरा है। जो भारत का सबसे गहरा गार्ज है।
- नंगा पर्वत से सिंधु नदी दक्षिण की ओर मुड़ती है और पाकिस्तान में प्रवेश कर जाती है।
- पाकिस्तान में मिथनकोट के पास सिंधु नदी में पंचनद (झेलम, चेनाब ,रवि ,व्यास ,सतलज की संयुक्त धारा) आकर मिलता है।
- सिंधु नदी डेल्टा बनाते हुए पाकिस्तान के शहर कराची के निकट अरब सागर में गिरती है।
इन्हें भी पढ़ें:
सिंधु नदी तंत्र मानचित्र (Sindhu Nadi Tantra Map)
सिंधु नदी तंत्र के इस मानचित्र में मैंने लगभग सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को दर्शाने का प्रयास किया है आप सभी से निवेदन है कि इस पोस्ट को पढ़ते समय इस मानचित्र को भी साथ-साथ देखते रहें, जिससे सिंधु नदी तंत्र पर आपकी समझ और अधिक मजबूत होगी। यदि आप इस मानचित्र का प्रिंट आउट निकलवाना चाहते हैं तो हमारे टेलीग्राम चैनल से इस मानचित्र की full hd pdf प्राप्त कर सकते हैं।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य:
अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में सिंधु और उसकी सहायक (पंचनद) नदियों को भौगोलिक रूप से उत्तर से दक्षिण के क्रम में व्यवस्थित करने के लिए कहा जाता है। मानचित्र के अनुसार इनका बिल्कुल सही क्रम इस प्रकार है:
सिंधु ➔ झेलम ➔ चेनाब ➔ रावी ➔ व्यास ➔ सतलज
सिंधु नदी की सहायक नदियां
सिंधु नदी की सहायक नदियों को हम पढ़ने की सुविधा की दृष्टि से दो भागों में बांट सकते हैं-
- सिंधु नदी में दाएं ओर से मिलने वाली नदियां
- सिंधु नदी में बाएं ओर से मिलने वाली नदियां

सिंधु नदी की सहायक नदियां
सिंधु की प्रमुख सहायक नदियां: एक दृष्टि में
| नदी का नाम | प्राचीन/अन्य नाम | उद्गम स्थल (Origin) | मुहाना/संगम (Confluence) | विशेष तथ्य / परियोजनाएं |
|---|---|---|---|---|
| झेलम (Jhelum) | वितस्ता | बेरीनाग झील (पीर पंजाल, जम्मू-कश्मीर) | चेनाब नदी (झंग, पाकिस्तान) | श्रीनगर इसी के किनारे स्थित है। तुलबुल और उरी परियोजना। वुलर झील से होकर बहती है। |
| चेनाब (Chenab) | अस्कनी / चंद्रभागा | बारालाचा दर्रा (लाहुल स्पीति, हिमाचल) | सिंधु नदी (मिथनकोट, पाकिस्तान) | यह सिंधु की सबसे बड़ी सहायक नदी है। सलाल, बगलिहार, दुलहस्ती और रतले परियोजनाएं। |
| रावी (Ravi) | पुरुषणी / इरावती | रोहतांग दर्रा (कांगड़ा, हिमाचल) | चेनाब नदी (सराय सिंधु, पाकिस्तान) | चंबा घाटी से होकर बहती है। पंजाब में थीन बांध (रंजीत सागर बांध)। |
| व्यास (Beas) | विपासा | व्यास कुंड (रोहतांग दर्रे के पास, हिमाचल) | सतलज नदी (हरिके, पंजाब) | पूर्ण रूप से केवल भारत में बहती है। इसी के संगम से इंदिरा गांधी नहर निकलती है। पोंग डैम स्थित है। |
| सतलज (Sutlej) | शतुद्री | राकस/राक्षस ताल (मानसरोवर के पास, तिब्बत) | चेनाब नदी | शिपकीला दर्रे से भारत में प्रवेश करती है। भाखड़ा नांगल, नाथपा झाकरी और कोल डैम परियोजनाएं। |
| श्योक (Shyok) | – | रेमो ग्लेशियर (काराकोरम श्रेणी) | सिंधु नदी | नुब्रा नदी इसकी सहायक है। रेमो ग्लेशियर को ‘सियाचिन की जीभ’ कहते हैं। |
| काबुल (Kabul) | कुभा (वैदिक नाम) | संगलाख़ श्रृंखला (हिंदुकुश पर्वत, अफगानिस्तान) | सिंधु नदी (अटक, पाकिस्तान के पास) | अफगानिस्तान की राजधानी काबुल इसी नदी के तट पर स्थित है। |
| किशनगंगा | नीलम नदी (पाकिस्तान में) | किशनगंगा घाटी (जम्मू-कश्मीर) | झेलम नदी (मुजफ्फराबाद के पास) | भारत-पाकिस्तान के बीच इसके जल को लेकर विवाद (किशनगंगा परियोजना)। |
सिंधु नदी में बाएं ओर से मिलने वाली नदियां
(1) झेलम नदी
1- उद्गम– झेलम नदी कश्मीर घाटी के दक्षिण पूर्वी भाग में पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला की पदस्थली में स्थित बेरीनाग झील से बेरीनाग झरने के रूप में निकलती है। बेरीनाग झील का पानी बेरीनाग झरने के रूप में शेषनाग झील में गिरता है और शेषनाग झील से झेलम नदी प्रारंभ होती है।
2- उत्तर-पश्चिम दिशा में प्रभावित होते हुए वुलर झील से होकर निकलती है। वुलर झील जम्मू कश्मीर में स्थित भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है।
3- जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर झेलम नदी के किनारे स्थित है।
4- आगे चलकर झेलम नदी पाक अधिकृत कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद के पास से दक्षिण की ओर मुड़ जाती है और कुछ दूरी तक भारत और पाकिस्तान की सीमा निर्धारित करती है।
5- झेलम नदी का प्राचीन नाम वितस्ता है।
6- झेलम नदी की सबसे प्रमुख सहायक नदी किशनगंगा नदी है, जिसे पाकिस्तान में ‘नीलम नदी’ के नाम से जाना जाता है। इस नदी पर जम्मू-कश्मीर (भारत) में ‘किशनगंगा जल विद्युत परियोजना’ स्थित है। इसके जल बंटवारे (सिंधु जल समझौते) को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच का विवाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अक्सर चर्चा में रहता है, इसलिए यह परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
7- झेलम नदी पाकिस्तान में झंग नामक स्थान पर चिनाब नदी से मिल जाती है।
8- यह कश्मीर की सबसे महत्वपूर्ण नदी है। जम्मू कश्मीर में झेलम नदी पर तुलबुल और उरी परियोजनाएं चल रही हैं।
(2) चेनाब नदी
1- चेनाब नदी का प्राचीन नाम अस्कनी है। यह सिंधु नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी है।
2- उद्गम– चेनाब नदी हिमाचल प्रदेश में जास्कर श्रेणी के लाहुल स्पीति खंड के बारालाचा दर्रा के पास से दो शाखाओं चंद्र और भाग के रुप निकलती हैं। चंद्र नदी चंद्र ताल से और भागा नदी सूर्य ताल से निकलती है। चंद्र और भाग का संगम तांडी हिमाचल प्रदेश में होता है। इसलिए चेनाब नदी को चंद्रभागा के नाम से भी जाना जाता है।
3- चेनाब नदी (पंचनद) सिंधु नदी से पाकिस्तान के मिथनकोट नामक स्थान पर मिलती है।
4- झेलम, रावी और सतलज आदि चेनाब की सहायक नदियां हैं।
5- चेनाब नदी पर सलाल, बगलिहार और दुलहस्ती, रतले आदि प्रमुख जल विद्युत परियोजनाएं स्थापित की गई हैं।
6- विश्व का सबसे ऊंचा रेल ब्रिज चिनाब नदी पर जम्मू कश्मीर राज्य के रियासी जिले में बनाया गया है।
(3) रावी नदी
1- रावी नदी का प्राचीन नाम पुरुषणी (इरावती) है। यह चेनाब नदी की एक प्रमुख सहायक नदी है।
2- उद्गम– रावी नदी हिमाचल प्रदेश (कांगड़ा जिले) की कुल्लू पहाड़ियों में रोहतांग दर्रे के पास से निकलती है। इसी दर्रे के पास व्यास कुंड से व्यास नदी निकलती है।
3- रावी नदी हिमाचल प्रदेश की चंबा घाटी में बहती है।
4- रावी नदी पीर पंजाल श्रेणी और धौलाधार श्रेणी के मध्य प्रवाहित होती है तथा धौलाधार श्रेणी को उत्तर से दक्षिण की ओर काटते हुए महाखड्ड (गार्ज) का निर्माण करती है।
5- पंजाब में रावी नदी मैदानी भाग में प्रवेश करती है और कुछ दूरी तक भारत-पाक सीमा के साथ-साथ बहती है।
6- पंजाब के पठानकोट जिले में रावी नदी पर थीन बांध (रंजीत सागर बांध) परियोजना स्थित हैं।
7- रावी नदी पाकिस्तान मे सराय सिंधु के निकट चेनाब नदी से मिल जाती है।
(4) व्यास नदी
1- व्यास नदी का प्राचीन नाम विपासा है। यह सतलज नदी की सहायक नदी है।
2- उद्गम– व्यास नदी का उद्गम हिमाचल प्रदेश की कुल्लू पहाड़ी में स्थित रोहतांग दर्रे के दक्षिणी किनारे पर स्थित व्यास कुंड से होता है।
3- यह नदी कुल्लू घाटी से होकर गुजरती है और धौलाधार श्रेणी में काती और लारगी में महाखड्ड का निर्माण करती है। इसके बाद यह कांगड़ा घाटी में बहती है।
4- पंजाब में हरिके नामक स्थान पर व्यास नदी सतलज नदी से मिलती है। पंजाब के कपूरथला में हरिके नामक स्थान पर व्यास और सतलज के संगम पर हरिके बैराज बांध बनाया गया है। इसी बैराज से इंदिरा गांधी नहर का उद्गम होता है जो भारत की सबसे लम्बी नहर है।
5- हरिके बांध के पीछे हरिके नामक कृत्रिम झील का निर्माण हुआ है, जो कि एक रामसर आद्रभूमि है।
6- पंचनद में से व्यास नदी का संपूर्ण प्रबाह भारत में ही है।
7- व्यास नदी में Indus Dolphins पाई जाती हैं। जो पूरे भारत में सिर्फ व्यास नदी में ही पाई जाती हैं और किसी नदी में नहीं मिलती।
8- हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में व्यास नदी पर पोंग डैम बनाया गया है जिसे व्यास बांध भी कहा जाता है।
(5) सतलज नदी
1- सतलज नदी का प्राचीन नाम शतुद्री है। यह चेनाब की सबसे लंबी सहायक नदी है।
2- उद्गम– सतलज नदी तिब्बत की मानसरोवर झील के पास स्थित राकस /राक्षस ताल झील से निकलती है। यह एक पूर्ववर्ती नदी है।
3- सतलज नदी भारत में भारत-चीन सीमा पर हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित शिपकीला दर्रे से प्रवेश करती है।
4- सतलज नदी पर भाखड़ा नांगल परियोजना चल रही है। इस परियोजना के तहत हिमाचल प्रदेश में भाखड़ा बांध और पंजाब में नांगल बांध बनाया गया है। भाखड़ा बांध के पीछे गोविंद सागर झील का निर्माण होता है जो हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित है।
5- हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में सतलज नदी पर स्थित भाखड़ा बांध विश्व का सबसे ऊंचा गुरूत्वी बांध है।
5- नाथपा झाकरी परियोजना, कोल डैम परियोजना ,सरहिंद परियोजना सतलज नदी पर स्थित अन्य परियोजनाएं हैं।
6- व्यास नदी सतलज की सहायक नदी है जो पंजाब के हरिके नामक स्थान पर सतलज नदी से मिलती है।
पंचनद क्या है?
‘पंजाब’ शब्द मुख्य रूप से दो शब्दों ‘पंज’ (पांच) + ‘आब’ (पानी/नदी) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है— ‘पांच नदियों की भूमि’। भारत और पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र में बहने वाली सिंधु की पांच प्रमुख सहायक नदियों के समूह को ही ‘पंचनद’ कहा जाता है।
- पंचनद की नदियां (उत्तर से दक्षिण क्रम में): झेलम, चेनाब, रावी, व्यास और सतलज।
- इन पांचों नदियों में चेनाब नदी सबसे प्रमुख और विशाल है, जिसमें अन्य चारों नदियां आकर अपना जल मिलाती हैं।
- इन सभी नदियों की यह संयुक्त धारा पाकिस्तान के मिथनकोट नामक स्थान पर सिंधु नदी में बाईं ओर से जाकर मिल जाती है।
- नदियों द्वारा लाई गई उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी और प्रचुर जल की उपलब्धता के कारण पंचनद का यह पूरा क्षेत्र कृषि की दृष्टि से अत्यधिक उपजाऊ माना जाता है।
पंचनद के प्रमुख ‘दोआब’
दो नदियों के बीच के उपजाऊ मैदानी भाग को ‘दोआब’ कहा जाता है। सिंधु नदी तंत्र (विशेषकर पंचनद) में 5 प्रमुख दोआब पाए जाते हैं, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
इन्हें याद रखना बहुत आसान है क्योंकि अधिकतर दोआबों के नाम उनके बीच बहने वाली नदियों के पहले अक्षरों से मिलकर बने हैं:
| दोआब का नाम | किन नदियों के मध्य स्थित है? | याद रखने की ट्रिक |
| बिस्त दोआब | व्यास और सतलज | बि (व्यास) + स्त (सतलज) |
| बारी दोआब | व्यास और रावी | बा (व्यास) + री (रावी) |
| रेचना दोआब | रावी और चेनाब | रे (रावी) + चना (चेनाब) |
| चाज / छाज दोआब | चेनाब और झेलम | चा (चेनाब) + ज (झेलम) |
| सिंध सागर दोआब | झेलम और सिंधु | सिंधु और झेलम नदी के बीच का क्षेत्र |
सिंधु नदी की दाएं ओर से मिलने वाली सहायक नदियां
(1) श्योक नदी
1- उद्गम– श्योक नदी रेमो ग्लेशियर से निकलती है।
2- रेमो ग्लेशियर काराकोरम श्रेणी पर सियाचिन ग्लेशियर के दाएं ओर स्थित है।
3- रेमो ग्लेशियर को सियाचिन ग्लेशियर की जीभ कहते हैं।
4- नुब्रा नदी और गलवान नदी, श्योक नदी की सहायक नदी है, नुब्रा नदी सियाचिन ग्लेशियर से निकलती है।
(2) काबुल नदी
1- काबुल नदी अफगानिस्तान में हिंदुकुश पर्वत के संगलाख़ श्रृंखला से निकलती है।
2- काबुल नदी पाकिस्तान के अटक नामक शहर के पास सिंधु नदी से मिल जाती है।
3- काबुल नदी पूर्वी अफगानिस्तान की मुख्य नदी है।
4- अफगानिस्तान की राजधानी काबुल, काबुल नदी के तट पर स्थित है।
5- स्वात नदी और कुनार नदी काबुल नदी की सहायक नदियां हैं।
6- स्वात नदी घाटी को पाकिस्तान का स्वर्ग कहा जाता है।
(3) गिलगित नदी
1- गिलगित नदी पाक अधिकृत कश्मीर में स्थित संदूर लेख से निकलती है।
2- गिलगित नदी को गि़ज़र नदी के नाम से भी जानते हैं।
3- गिलगित शहर इसी नदी के किनारे स्थित है।
(4) गोमल नदी
1- गोमल नदी अफगानिस्तान में स्थित कोहनाक पर्वत से निकलती है।
सिंधु जल समझौता (Indus Water Treaty – 1960)
सिंधु नदी तंत्र के जल बंटवारे को लेकर भारत और पाकिस्तान के मध्य एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है, जिसे सिंधु जल समझौता कहा जाता है। परीक्षा की दृष्टि से इसके निम्नलिखित बिंदु अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:
- समझौते की तिथि और स्थान: इस समझौते पर 19 सितंबर 1960 को पाकिस्तान के रावलपिंडी में हस्ताक्षर किए गए थे।
- हस्ताक्षरकर्ता: भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति आयूब खान ने इस पर हस्ताक्षर किए थे।
- मध्यस्थता: इस समझौते को संपन्न कराने में विश्व बैंक ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी (हस्ताक्षर के समय विश्व बैंक के प्रतिनिधि डब्लू. ए. बी. इलिफ उपस्थित थे)।
जल बंटवारे का नियम (80:20 का नियम): इस समझौते के तहत सिंधु नदी तंत्र की 6 नदियों को दो भागों (पूर्वी और पश्चिमी नदियों) में बांटा गया और उनके जल का प्रतिशत निर्धारित किया गया:
- पूर्वी नदियां (रावी, व्यास और सतलज): इन तीन नदियों के जल के उपयोग पर भारत को पूर्ण अधिकार (100%) दिया गया है। भारत इनके पानी का बिना किसी रोक-टोक के इस्तेमाल कर सकता है।
- पश्चिमी नदियां (सिंधु, चेनाब और झेलम): इन तीन पश्चिमी नदियों के कुल जल का 80% हिस्सा पाकिस्तान उपयोग करेगा और शेष 20% जल का उपयोग भारत (सिंचाई, बिजली उत्पादन और घरेलू कार्यों के लिए) कर सकता है।
सिंधु जल समझौता: विवाद और ऐतिहासिक निलंबन (2025-26)
प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से सिंधु जल समझौते से जुड़े हालिया घटनाक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:
- विवाद का मुख्य कारण: यह विवाद मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर में बन रही भारत की दो जल विद्युत परियोजनाओं— किशनगंगा (किशनगंगा नदी पर) और रतले (चेनाब नदी पर) को लेकर शुरू हुआ।
- PCA (स्थायी मध्यस्थता न्यायालय) पर टकराव: पाकिस्तान इस विवाद को लेकर हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) में गया है। भारत का तर्क है कि समझौते के अनुसार एक ही समय में दो अलग-अलग जांच (तटस्थ विशेषज्ञ और PCA) नहीं चल सकतीं। इसलिए भारत ने PCA को अवैध मानते हुए 2025 से इसकी कार्यवाही में भाग लेना और अपनी फीस चुकाना बंद कर दिया है।
- संधि का ऐतिहासिक निलंबन (Abeyance): इसी कानूनी विवाद और अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 65 वर्षों में पहली बार इस जल संधि को निलंबित (Abeyance) कर दिया है। यह एक बहुत बड़ा कूटनीतिक बदलाव है, क्योंकि 1965, 1971 और 1999 (कारगिल) के युद्धों के दौरान भी इस संधि को नहीं रोका गया था।
- भारत ने स्पष्ट किया है कि जब तक सीमा-पार आतंकवाद के खिलाफ “विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय” कार्रवाई नहीं होती, यह संधि निलंबित ही रहेगी।
- संधि के निलंबन के बाद भारत ने नदियों का हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा करना बंद कर दिया है, जिसके कारण 2026 की गर्मियों में पाकिस्तान को भारी जल संकट का सामना करना पड़ा।
सिंधु नदी तंत्र (Indus River System): विस्तृत माइंड मैप
इस पूरे आर्टिकल के ‘क्विक रिवीजन’ के लिए हमने यहाँ ‘सिंधु नदी तंत्र’ का एक विस्तृत माइंड मैप साझा किया है। इस चार्ट की मदद से आप नदी के उद्गम स्थल, पंचनद की नदियों (झेलम, चेनाब, रावी, व्यास, सतलज), और दाईं तथा बाईं ओर से मिलने वाली प्रमुख सहायक नदियों का आसानी से रिवीजन कर सकते हैं। इसके अलावा, इसमें ‘सिंधु जल समझौता (1960)’ जैसे महत्वपूर्ण परीक्षा-उपयोगी तथ्यों को भी शामिल किया गया है। पूरे विषय को गहराई से समझने के लिए हमारे विस्तृत नोट्स का अध्ययन अवश्य करें।

सिंधु नदी तंत्र: हाई-क्वालिटी PDF माइंड मैप डाउनलोड करें
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. सिंधु नदी कहाँ से निकलती है (उद्गम स्थल)?
उत्तर: सिंधु नदी तिब्बत में मानसरोवर झील के पास कैलाश पर्वत श्रृंखला में स्थित ‘बोखर-चू’ हिमनद (ग्लेशियर) से निकलती है। तिब्बत में इस उद्गम स्थल को ‘सिंघी खंबन’ या ‘शेर का मुंह’ भी कहा जाता है।
2. सिंधु नदी की कुल लंबाई कितनी है?
उत्तर: सिंधु नदी की कुल लंबाई लगभग 2,880 किलोमीटर है। यदि बात केवल भारत की करें, तो भारत में सिंधु नदी की लंबाई 1,114 किलोमीटर है।
3. सिंधु नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी कौन सी है?
उत्तर: सिंधु नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी चेनाब नदी है। यह हिमाचल प्रदेश के बारालाचा दर्रे से निकलती है और पाकिस्तान के मिथनकोट में जाकर सिंधु नदी (पंचनद के रूप में) से मिल जाती है।
4. सिंधु नदी अपना जल कहाँ गिराती है (मुहाना)?
उत्तर: सिंधु नदी तिब्बत और भारत से बहते हुए अंत में पाकिस्तान पहुँचती है और पाकिस्तान के शहर कराची के निकट अरब सागर में अपना जल गिराती है। यहाँ यह एक विशाल डेल्टा का निर्माण करती है।
5. सिंधु नदी कहाँ है और यह किन देशों में बहती है?
उत्तर: सिंधु नदी दक्षिण एशिया की एक प्रमुख नदी है। इसका अपवाह क्षेत्र मुख्य रूप से तीन देशों— चीन (तिब्बत), भारत और पाकिस्तान में फैला हुआ है। भारत में यह मुख्य रूप से केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख (लेह) से होकर बहती है।
6. पंचनद क्या है और इसमें कौन-कौन सी नदियां आती हैं?
उत्तर: ‘पंचनद’ का अर्थ है ‘पांच नदियों का समूह’। इसमें पंजाब (भारत और पाकिस्तान) में बहने वाली सिंधु की पांच प्रमुख सहायक नदियां शामिल हैं: झेलम, चेनाब, रावी, व्यास और सतलज।
7. सिंधु जल समझौता कब और किन देशों के बीच हुआ था?
उत्तर: सिंधु जल समझौता 19 सितंबर 1960 को भारत और पाकिस्तान के मध्य हुआ था। इस समझौते को कराने में विश्व बैंक ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी, जिसके तहत 6 नदियों के पानी का बंटवारा किया गया था।


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