केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री ‘भूपेंद्र यादव’ ने उत्तराखंड के देहरादून स्थित भारतीय वन अनुसंधान संस्थान से भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2023 (ISFR 2023) के 18वें संस्करण को 21 दिसंबर 2024 को जारी किया। यही रिपोर्ट वर्तमान में नवीनतम उपलब्ध ISFR है। गौरतलब है कि पहली बार यह रिपोर्ट 1987 में प्रकाशित की गई थी और तब से इसे हर दो वर्षों के अंतराल पर जारी किया जा रहा है।
भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट कौन जारी करता है?
भारत में वन स्थिति रिपोर्ट भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) द्वारा प्रत्येक 2 वर्ष में जारी की जाती है। भारतीय वन सर्वेक्षण पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार के अधीन एक संस्थान है। भारतीय वन सर्वेक्षण का प्रमुख कार्य देश के वन और वृक्ष आवरण की सटीक और व्यापक जानकारी एकत्रित करना, विश्लेषण करना और उसे सार्वजनिक करना है। इस रिपोर्ट में भारत में वनावरण, वृक्ष आवरण, मैंग्रोव वन, भारत के वनों में कार्बन स्टॉक, वनाग्नि की घटनाएं, कृषि वानिकी आदि विषयों पर जानकारी शामिल होती है। राष्ट्रीय वन नीति 1988 और 33% का लक्ष्य-राष्ट्रीय वन नीति, 1988 के अनुसार देश के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने के लिए कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के कम से कम 33% हिस्से पर वनों का होना अनिवार्य है। इसमें मैदानी इलाकों में 20% और पहाड़ी क्षेत्रों में 60% से 67% वन क्षेत्र का लक्ष्य रखा गया है। भारत वन स्थिति रिपोर्ट मुख्य रूप से इसी लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में देश की प्रगति का आकलन करती है।
वनावरण उन सभी भूमि क्षेत्रों को कहते हैं, जिनका क्षेत्रफल एक हेक्टेयर या उससे अधिक हो और जिन पर पेड़ों की छत्रछाया (Canopy) 10% या उससे अधिक हो। इसमें भूमि का स्वामित्व या कानूनी स्थिति मायने नहीं रखती, और इसमें बाग, बांस तथा ताड़ के वृक्ष भी शामिल होते हैं। यह किसी भी प्रकार की भूमि पर पेड़ों की उपस्थिति को दर्शाता है, चाहे वह अधिसूचित वन क्षेत्र हो या नहीं। रिमोट सेंसिंग तकनीकों के माध्यम से भूमि की कानूनी स्थिति का पता लगाना संभव नहीं होने के कारण, उपग्रह चित्रों से प्राप्त आंकड़ों को सीधे वन आवरण के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। इस रिपोर्ट में ‘वृक्ष आवरण‘ का मतलब उन क्षेत्रों से है जो दर्ज वन क्षेत्रों के बाहर पेड़ों से ढके होते हैं। ये क्षेत्र एकल पेड़ से लेकर 1 हेक्टेयर से छोटे पेड़ों के समूह तक हो सकते हैं, क्योंकि 1 हेक्टेयर से बड़े क्षेत्र पहले ही वन आवरण में शामिल हैं। इसमें बाग-बागान, रेखीय बागान और फैले हुए पेड़ शामिल हो सकते हैं, जिन्हें उपग्रह चित्रों के विश्लेषण के दौरान वन आवरण के रूप में नहीं गिना गया।
वनों का घनत्व के आधार पर वर्गीकरण
प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर वनों के घनत्व (Canopy Density) का प्रतिशत सीधे पूछ लिया जाता है। वन स्थिति रिपोर्ट 2023 के अनुसार कैनोपी घनत्व के आधार पर वनों को निम्नलिखित श्रेणियों में बांटा गया है:
- अति सघन वन (Very Dense Forest – VDF): जिन भूमियों पर वृक्षों का कैनोपी घनत्व 70% या उससे अधिक होता है।
- मध्यम सघन वन (Moderately Dense Forest – MDF): जिन भूमियों पर वृक्षों का कैनोपी घनत्व 40% से 70% के बीच होता है।
- खुले वन (Open Forest): जिन भूमियों पर वृक्षों का कैनोपी घनत्व 10% से 40% के बीच होता है।
- झाड़ियाँ (Scrub): जिन भूमियों पर वृक्षों का कैनोपी घनत्व 10% से कम होता है।
घनत्व के आधार पर वनों का वास्तविक क्षेत्रफल
परिभाषा के साथ-साथ यह भी याद रखिए कि इनमें से प्रत्येक श्रेणी का वास्तविक क्षेत्रफल कितना है। परीक्षा में यही आँकड़े सीधे पूछे जाते हैं:
| वन की श्रेणी | कैनोपी घनत्व | क्षेत्रफल (वर्ग किमी) | भौगोलिक क्षेत्र का % |
|---|---|---|---|
| अति सघन वन (VDF) | 70% या अधिक | 1,02,502.20 | 3.12% |
| मध्यम सघन वन (MDF) | 40% से 70% | 3,07,673.28 | 9.36% |
| खुले वन (OF) | 10% से 40% | 3,05,167.13 | 9.28% |
| कुल वन आवरण | 7,15,343 | 21.76% | |
ध्यान दीजिए कि तीनों श्रेणियों का योग ही कुल वन आवरण (21.76%) बनाता है। मध्यम सघन वन और खुले वन लगभग बराबर हैं, जबकि अति सघन वन कुल वन आवरण का लगभग सातवाँ हिस्सा ही हैं। (नोट: झाड़ियों को ‘वन आवरण’ या Forest Cover में नहीं गिना जाता है। वर्तमान रिपोर्ट के अनुसार देश में झाड़ियों का कुल क्षेत्रफल 43,622.64 वर्ग किलोमीटर है, जो कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का मात्र 1.33% है।)
वन स्थिति रिपोर्ट 2023 के अनुसार भारत में वन और वृक्ष आवरण-
वन स्थिति रिपोर्ट 2023 के अनुसार भारत में वन और वृक्ष आवरण 8,27,357 वर्ग किलोमीटर है जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 25.17 प्रतिशत है। जिसमें वन क्षेत्र लगभग 7,15,343 वर्ग किलोमीटर है जो कि देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 21.76% है। जबकि वृक्ष क्षेत्र 1,12,014 वर्ग किलोमीटर है जो देश के भौगोलिक क्षेत्रफल का 3.41% है।

वर्ष 2021 की तुलना में देश के कुल वन एवं वृक्ष क्षेत्र में 1,445 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है जिसमें वन आवरण में 156 वर्ग किलोमीटर की तथा वृक्ष आवरण में 1,289 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि शामिल है।
दर्ज वन क्षेत्र (Recorded Forest Area) — सबसे बड़ी उलझन
यहाँ अधिकांश अभ्यर्थी गलती करते हैं। वन आवरण (Forest Cover) और दर्ज वन क्षेत्र (Recorded Forest Area) दो बिल्कुल अलग चीज़ें हैं। वन आवरण उपग्रह चित्रों से निकाला जाता है और बताता है कि ज़मीन पर वास्तव में कितने पेड़ हैं, चाहे वह भूमि सरकारी हो या निजी। दर्ज वन क्षेत्र वह भूमि है जो सरकारी अभिलेखों में ‘वन’ के रूप में दर्ज है — भले ही वहाँ आज पेड़ हों या न हों। ISFR 2023 के अनुसार देश का कुल दर्ज वन क्षेत्र 7,75,377 वर्ग किलोमीटर है, जो कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 23.59% है। इसका वर्गीकरण इस प्रकार है:
| दर्ज वन क्षेत्र की श्रेणी | क्षेत्रफल (वर्ग किमी) |
|---|---|
| आरक्षित वन (Reserved Forests) | 4,43,253 |
| संरक्षित वन (Protected Forests) | 2,12,859 |
| अवर्गीकृत वन (Unclassed Forests) | 1,19,265 |
| कुल दर्ज वन क्षेत्र | 7,75,377 |
वन और वृक्ष आवरण में सर्वाधिक वृद्धि करने वाले शीर्ष राज्य-
- छत्तीसगढ़ (684 वर्ग किलोमीटर)
- उत्तर प्रदेश (559 वर्ग किलोमीटर)
- ओडिशा (559 वर्ग किलोमीटर)
इन तीनों राज्यों के वन और वृक्ष आवरण में हुई वृद्धि को जोड़ लिया जाए तो यह 1,802 वर्ग किलोमीटर हो जाती है जो कि पूरे देश में हुई कुल वृद्धि (1,445 वर्ग किलोमीटर) से भी अधिक है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कुछ राज्यों के वन और वृक्ष आवरण में कमी भी आई है। इन्हें भी पढ़ें-
क्षेत्रफल के आधार पर सर्वाधिक वन और वृक्ष आवरण वाले शीर्ष राज्य-
- मध्य प्रदेश (85,724 वर्ग किलोमीटर)
- अरुणाचल प्रदेश (67,083 वर्ग किलोमीटर)
- महाराष्ट्र (65,383 वर्ग किलोमीटर)
क्षेत्रफल की दृष्टि से सर्वाधिक वन आवरण वाले शीर्ष राज्य-
- मध्य प्रदेश (77,073 वर्ग किलोमीटर)
- अरुणाचल प्रदेश (65,882 वर्ग किलोमीटर)
- छत्तीसगढ़ (55,812 वर्ग किलोमीटर)
सबसे कम वन आवरण वाले राज्य
परीक्षाओं में जितना “सर्वाधिक” पूछा जाता है, उतना ही “न्यूनतम” भी। यहाँ भी दो अलग सूचियाँ बनती हैं: प्रतिशत की दृष्टि से सबसे कम वन आवरण वाले राज्य-
- हरियाणा (3.65%)
- पंजाब (3.66%)
- राजस्थान (4.83%)
क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे कम वन आवरण वाले राज्य-
- हरियाणा (1,614.26 वर्ग किलोमीटर)
- पंजाब (1,846.09 वर्ग किलोमीटर)
- गोवा (2,265.72 वर्ग किलोमीटर)
- मिजोरम (242 वर्ग किलोमीटर)
- गुजरात (180 वर्ग किलोमीटर)
- ओडिशा (152 वर्ग किलोमीटर)
केवल वृक्ष आवरण में सर्वाधिक वृद्धि वाले शीर्ष राज्य-
- छत्तीसगढ़ (702.75 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि)
- राजस्थान (478.26 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि)
- उत्तर प्रदेश (440.76 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि)
वृक्ष आवरण वाले शीर्ष एवं न्यूनतम राज्य-
सर्वाधिक वृक्ष आवरण वाले राज्य-
- महाराष्ट्र (14,524.88 वर्ग किलोमीटर)
- राजस्थान (10,841.12 वर्ग किलोमीटर)
- उत्तर प्रदेश (8,950.92 वर्ग किलोमीटर)
सबसे कम वृक्ष आवरण वाले राज्य-
- सिक्किम (48.33 वर्ग किलोमीटर)
- मणिपुर (209.82 वर्ग किलोमीटर)
- त्रिपुरा (247.56 वर्ग किलोमीटर)
वन आवरण में सर्वाधिक कमी (नुकसान) वाले राज्य-
प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर नकारात्मक ट्रेंड्स से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं, इसलिए यह जानना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है कि किन राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में वन क्षेत्र सबसे ज्यादा घटा है:
- मध्य प्रदेश (612.41 वर्ग किलोमीटर की कमी)
- कर्नाटक (459.36 वर्ग किलोमीटर की कमी)
- लद्दाख (159.26 वर्ग किलोमीटर की कमी)
- नागालैंड (125.22 वर्ग किलोमीटर की कमी)
वन स्थिति रिपोर्ट 2023 के अनुसार, पूर्वोत्तर राज्यों में कुल मिलाकर वन आवरण में 327.30 वर्ग किलोमीटर की कमी दर्ज की गई है।
प्रतिशत की दृष्टि से सर्वाधिक वन आवरण वाले शीर्ष राज्य-
- लक्षद्वीप (91.33%)
- मिजोरम (85.34%)
- अंडमान एवं निकोबार द्वीप (81.62%)
अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
- वन स्थिति रिपोर्ट 2023 के अनुसार देश में 19 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश ऐसे हैं जिनके 33% से अधिक भौगोलिक क्षेत्र पर वनावरण है।
- इनमें से 8 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 75% से अधिक वन क्षेत्र है। ये हैं — मिजोरम, लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मेघालय, त्रिपुरा और मणिपुर।
- रिपोर्ट के नए पहलू: ISFR 2023 में पहली बार कृषि वानिकी और मृदा स्वास्थ्य पर अलग से विस्तृत अध्याय शामिल किए गए हैं, जिनकी चर्चा आगे विस्तार से की गई है।

भारत में मैंग्रोव वन
- वन स्थिति रिपोर्ट 2023 के अनुसार देश में कुल मैंग्रोव आवरण 4,991.68 वर्ग किलोमीटर है जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 0.15% है।
- भारत में 2021 की तुलना में मैंग्रोव वन क्षेत्र में 7.43 वर्ग किलोमीटर की कमी दर्ज की गई है। इस अवधि में गुजरात राज्य में मैंग्रोव वनों का सर्वाधिक नुकसान हुआ है, जहां क्षेत्रफल में 36.39 वर्ग किलोमीटर की गिरावट दर्ज की गई।
- मैंग्रोव वनों में सर्वाधिक वृद्धि आंध्र प्रदेश में दर्ज की गई, जहाँ यह क्षेत्र 13.01 वर्ग किलोमीटर तक बढ़ा। इसके बाद महाराष्ट्र का स्थान रहा, जहाँ मैंग्रोव वनों का विस्तार 12.39 वर्ग किलोमीटर हुआ।
मैंग्रोव वनों का घनत्ववार वर्गीकरण
जैसे सामान्य वनों को घनत्व के आधार पर बाँटा जाता है, वैसे ही मैंग्रोव वनों का भी वर्गीकरण होता है:
| मैंग्रोव की श्रेणी | क्षेत्रफल (वर्ग किमी) | कुल मैंग्रोव का % |
|---|---|---|
| अति सघन मैंग्रोव | 1,463.97 | 29.33% |
| मध्यम सघन मैंग्रोव | 1,500.84 | 30.07% |
| खुले मैंग्रोव | 2,026.87 | 40.60% |
| कुल मैंग्रोव आवरण | 4,991.68 | 100% |
वन स्थिति रिपोर्ट 2023 के अनुसार भारत में सर्वाधिक मैंग्रोव आवरण वाले शीर्ष राज्य-
- पश्चिम बंगाल (42.45%)
- गुजरात (23.32%)
- अंडमान निकोबार द्वीप समूह (12.19%)
- आंध्र प्रदेश (8.4%)
भारत में सर्वाधिक मैंग्रोव वन पश्चिम बंगाल राज्य में स्थित हैं, जो देश के कुल मैंग्रोव वन क्षेत्र का 42.45 प्रतिशत हैं।
कार्बन स्टॉक
वन स्थिति रिपोर्ट 2023 के अनुसार भारत में वनों का कुल कार्बन स्टॉक 7,285.5 मिलियन टन है। कार्बन स्टॉक में 2021 की तुलना में 81.5 मिलियन टन की वृद्धि हुई है। भारत ने अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) के तहत 2030 तक 2.5 से 3.0 बिलियन टन CO₂ के समतुल्य अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाने का लक्ष्य रखा है। वर्तमान आकलन के अनुसार, देश ने 2005 के आधार वर्ष की तुलना में 2.29 बिलियन टन अतिरिक्त कार्बन सिंक प्राप्त कर लिया है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारत अपने लक्ष्यों के काफी करीब पहुंच चुका है। शीर्ष कार्बन स्टॉक वाले राज्य हैं-
- अरुणाचल प्रदेश (1,021 मिलियन टन)
- मध्य प्रदेश (608 मिलियन टन)
- छत्तीसगढ़ (505 मिलियन टन)
- महाराष्ट्र (465 मिलियन टन)
भारत में बांस क्षेत्र
वन स्थिति रिपोर्ट 2023 के अनुसार देश में कुल बांस धारित क्षेत्र (Bamboo bearing area) 1,54,670 वर्ग किलोमीटर अनुमानित किया गया है। बांस क्षेत्र में वर्ष 2021 की तुलना में 5,227 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है। सर्वाधिक बांस क्षेत्र वाले राज्य-
- मध्य प्रदेश (20,421 वर्ग किलोमीटर)
- अरुणाचल प्रदेश (18,424 वर्ग किलोमीटर)
- महाराष्ट्र (13,572 वर्ग किलोमीटर)
- ओडिशा (12,328 वर्ग किलोमीटर)
बाघ अभयारण्यों (Tiger Reserves) में वन स्थिति
वन स्थिति रिपोर्ट के अनुसार देश के बाघ अभयारण्यों के कुल क्षेत्रफल का लगभग 74.51% हिस्सा वनों से ढका हुआ है।
- क्षेत्रफल के अनुसार सबसे बड़ा वन क्षेत्र: नागार्जुनसागर-श्रीशैलम टाइगर रिजर्व (आंध्र प्रदेश)।
- प्रतिशत के अनुसार सबसे अधिक वन आवरण: पक्के टाइगर रिजर्व (अरुणाचल प्रदेश), यहाँ लगभग 97% वन आवरण है।
(पर्यावरण और पारिस्थितिकी के दृष्टिकोण से प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य है।)
भारत में वनों के प्रकार
घनत्व के अलावा वनों का वर्गीकरण उनकी जलवायु और वनस्पति के आधार पर भी किया जाता है। भारत में सर्वाधिक पाए जाने वाले वन प्रकार इस प्रकार हैं:
- उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन (Tropical Dry Deciduous) — कुल वन क्षेत्र का लगभग 34.87%। यह भारत में सबसे अधिक पाया जाने वाला वन प्रकार है।
- उष्णकटिबंधीय नम पर्णपाती वन (Tropical Moist Deciduous) — लगभग 33.58%।
- पर्वतीय/अल्पाइन वन (Montane/Alpine Forests) — लगभग 11%।
- अन्य प्रमुख प्रकार — उष्णकटिबंधीय कांटेदार वन (Tropical Thorn) एवं उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन (Tropical Evergreen)।
पहाड़ी ज़िलों एवं पश्चिमी घाट में वन स्थिति
पहाड़ी ज़िले
देश के पहाड़ी ज़िलों में कुल वन आवरण 2,83,713.20 वर्ग किलोमीटर है, जो इन ज़िलों के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 40% है। वर्तमान आकलन में पहाड़ी ज़िलों के वन आवरण में 234.14 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है।
पश्चिमी घाट पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (WGESA)
पश्चिमी घाट पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल लगभग 60,285.61 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें से वन आवरण 44,043.99 वर्ग किलोमीटर यानी लगभग 73% है।
ISFR 2023 के दो नए अध्याय — कृषि वानिकी एवं मृदा स्वास्थ्य
ISFR 2023 की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें पहली बार कृषि वानिकी और मृदा स्वास्थ्य पर अलग से विस्तृत अध्याय शामिल किए गए। परीक्षा की दृष्टि से ये दोनों नए क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं।
कृषि वानिकी (Agroforestry)
- राष्ट्रीय स्तर पर कृषि वानिकी के तहत कुल वृक्ष हरित आवरण (Tree Green Cover) 1,27,590.05 वर्ग किलोमीटर अनुमानित किया गया है।
- ग्रोइंग स्टॉक (लकड़ी के आयतन) के मामले में शीर्ष राज्य — महाराष्ट्र (136.45 मिलियन घन मीटर), कर्नाटक (98.31), ओडिशा (88.53) और राजस्थान (86.26)।
मृदा स्वास्थ्य (Soil Health)
2013 की तुलना में मृदा स्वास्थ्य के तीनों प्रमुख संकेतकों में सुधार दर्ज किया गया है:
| संकेतक | 2013 | ISFR 2023 |
|---|---|---|
| उथली से गहरी मृदा | 83.53% | 87.16% |
| मध्यम से गहरा ह्यूमस | 11.43% | 18.04% |
| मृदा जैविक कार्बन | 55.85 टन/हेक्टेयर | 56.08 टन/हेक्टेयर |
वनाग्नि (Forest Fire) के आँकड़े
वर्ष 2023-24 के वनाग्नि मौसम के दौरान SNPP-VIIRS सेंसर द्वारा देश भर में कुल 2,03,544 आग की घटनाओं (fire hotspots) का पता लगाया गया। सर्वाधिक वनाग्नि की घटनाएं क्रमशः उत्तराखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में दर्ज की गईं।
वन स्थिति रिपोर्ट: 2021 बनाम 2023 (तुलनात्मक तालिका)
| महत्वपूर्ण मानक | वन स्थिति रिपोर्ट (ISFR) 2021 | वन स्थिति रिपोर्ट (ISFR) 2023 | मुख्य परिवर्तन |
|---|---|---|---|
| कुल वन और वृक्ष आवरण | 8,09,537 वर्ग किमी (24.62%) | 8,27,357 वर्ग किमी (25.17%) | 1,445 वर्ग किमी की वृद्धि |
| कुल वनावरण | 7,13,789 वर्ग किमी (21.71%) | 7,15,343 वर्ग किमी (21.76%) | 156 वर्ग किमी की वृद्धि |
| कुल वृक्षावरण | 95,748 वर्ग किमी (2.91%) | 1,12,014 वर्ग किमी (3.41%) | 1,289 वर्ग किमी की वृद्धि |
| कुल मैंग्रोव आवरण | 4,992 वर्ग किमी (देश का 0.15%) | 4,991.68 वर्ग किमी (देश का 0.15%) | 7.43 वर्ग किमी की कमी |
| वनों में कुल कार्बन स्टॉक | 7,204 मिलियन टन | 7,285.5 मिलियन टन | 81.5 मिलियन टन की वृद्धि |
| कुल बांस क्षेत्र | 1,49,443 वर्ग किमी | 1,54,670 वर्ग किमी | 5,227 वर्ग किमी की वृद्धि |
अक्सर छात्रों को यह कन्फ्यूजन होता है कि 2021 और 2023 के कुल क्षेत्रफल (8,27,357 – 8,09,537) को घटाने पर अंतर ज्यादा आता है, लेकिन रिपोर्ट में कुल वृद्धि 1,445 वर्ग किमी ही बताई गई है। ऐसा इसलिए है क्योंकि उपग्रह चित्रों (Satellite Data) और नई तकनीक के कारण पिछले आंकड़ों को भी Update किया जाता है। इसलिए, परीक्षाओं में आपको आधिकारिक रूप से घोषित 1,445 वर्ग किमी की वृद्धि को ही सही उत्तर मानना है। यही बात वृक्षावरण और मैंग्रोव आवरण के आँकड़ों पर भी लागू होती है — वहाँ भी घटाने पर आया अंतर रिपोर्ट में घोषित वृद्धि/कमी से अलग दिखेगा।
वैश्विक वन संसाधन मूल्यांकन 2025 (GFRA 2025) और भारत की स्थिति
खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा 22 अक्टूबर 2025 को जारी वैश्विक वन संसाधन मूल्यांकन 2025 (Global Forest Resources Assessment 2025) भारत के लिए कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ दर्ज करता है। यह रिपोर्ट प्रत्येक पाँच वर्ष में जारी की जाती है और वैश्विक स्तर पर वन संसाधनों का सबसे व्यापक आकलन प्रस्तुत करती है।
- कुल वन क्षेत्र के मामले में भारत पिछले आकलन के 10वें स्थान से बढ़कर 9वें स्थान पर पहुँच गया है।
- शुद्ध वार्षिक वन क्षेत्र वृद्धि (Net Annual Forest Area Gain) में भारत ने विश्व में तीसरा स्थान बरकरार रखा है।
- कार्बन सिंक के मामले में भारत विश्व में 5वें स्थान पर है — 2021 से 2025 के दौरान भारत के वनों ने प्रति वर्ष लगभग 150 मिलियन टन CO₂ अवशोषित किया।
- विश्व का कुल वन क्षेत्र लगभग 4.14 अरब हेक्टेयर है, जो पृथ्वी के कुल भू-क्षेत्र का लगभग 32% है।
- वैश्विक शुद्ध वन हानि की वार्षिक दर 1990-2000 के 1.07 करोड़ हेक्टेयर से घटकर 2015-2025 में 41.2 लाख हेक्टेयर रह गई है।
वन लेखांकन रिपोर्ट 2025 (Environmental Accounting on Forest 2025)
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने 25 सितंबर 2025 को चंडीगढ़ में आयोजित 29वें CoCSSO सम्मेलन के दौरान “Environmental Accounting on Forest 2025” जारी की। यह पर्यावरण लेखा शृंखला का 8वाँ लगातार अंक है और वन लेखांकन पर भारत का पहला समर्पित प्रकाशन है, जो संयुक्त राष्ट्र के SEEA (System of Environmental Economic Accounting) ढाँचे पर आधारित है।
- 2010-11 से 2021-22 के बीच भारत का वन आवरण 17,444.61 वर्ग किलोमीटर (2.4%) बढ़कर 7.15 लाख वर्ग किलोमीटर तक पहुँच गया।
- वन आवरण में वृद्धि के मामले में शीर्ष राज्य — केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु।
- यह प्रकाशन दो खंडों में है — खंड I में राष्ट्रीय स्तर की पद्धति एवं आँकड़े, तथा खंड II में राज्य स्तर के आँकड़े दिए गए हैं।
- इसका मुख्य डेटा स्रोत भारत वन स्थिति रिपोर्ट (ISFR) ही है।
- 🔹 रिपोर्ट जारीकर्ता: भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI), पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
- 🔹 संस्करण एवं शुरुआत: 18वाँ संस्करण, 21 दिसंबर 2024 को जारी (प्रारंभ: 1987, प्रत्येक 2 वर्ष में)
- 🔹 राष्ट्रीय वन नीति 1988 का लक्ष्य: देश के कुल 33% भौगोलिक क्षेत्रफल पर वन होना अनिवार्य।
- 🔹 कुल वन और वृक्ष आवरण: 8,27,357 वर्ग किमी (25.17%)
- 🔹 कुल वृद्धि (2021 की तुलना में): 1,445 वर्ग किमी (वनावरण: 156 वर्ग किमी + वृक्षावरण: 1,289 वर्ग किमी)
- 🔹 घनत्ववार वन: VDF 3.12% | MDF 9.36% | OF 9.28% (कुल 21.76%)
- 🔹 दर्ज वन क्षेत्र (RFA): 7,75,377 वर्ग किमी (23.59%) — वन आवरण से अलग
- 🔹 सर्वाधिक वन क्षेत्रफल वाले राज्य: 1. मध्य प्रदेश | 2. अरुणाचल प्रदेश | 3. छत्तीसगढ़
- 🔹 सर्वाधिक वन प्रतिशत वाले राज्य/UT: 1. लक्षद्वीप (91.33%) | 2. मिजोरम (85.34%) | 3. अंडमान निकोबार
- 🔹 सबसे कम वन: हरियाणा (3.65% एवं 1,614.26 वर्ग किमी) — दोनों सूचियों में प्रथम
- 🔹 वनावरण में सर्वाधिक वृद्धि: 1. मिजोरम (242 वर्ग किमी) | 2. गुजरात | 3. ओडिशा
- 🔹 वनावरण में सर्वाधिक कमी: 1. मध्य प्रदेश (612.41 वर्ग किमी) | 2. कर्नाटक | 3. लद्दाख
- 🔹 सर्वाधिक वन प्रकार: उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन (34.87%)
- 🔹 मैंग्रोव वन आवरण: 4,991.68 वर्ग किलोमीटर (0.15%) | सर्वाधिक: पश्चिम बंगाल | सर्वाधिक वृद्धि: आंध्र प्रदेश
- 🔹 कुल कार्बन स्टॉक: 7,285.5 मिलियन टन (+81.5 मिलियन टन की वृद्धि) | शीर्ष राज्य: अरुणाचल प्रदेश एवं मध्य प्रदेश
- 🔹 टाइगर रिजर्व: प्रतिशत में – पक्के टाइगर रिजर्व (अरुणाचल प्रदेश, 97%) | क्षेत्रफल में – नागार्जुनसागर-श्रीशैलम (आंध्र प्रदेश)
- 🔹 GFRA 2025 में भारत: कुल वन क्षेत्र में 9वाँ | वार्षिक वन वृद्धि में 3रा | कार्बन सिंक में 5वाँ स्थान
- ⭐ विशेष बिंदु: इस रिपोर्ट में पहली बार कृषि वानिकी और मृदा स्वास्थ्य को शामिल किया गया है।
निष्कर्ष
भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2023 यह दर्शाती है कि देश का वन और वृक्ष आवरण धीरे-धीरे बढ़ रहा है और अब कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के 25.17% तक पहुँच चुका है। GFRA 2025 में भारत का 9वें स्थान पर पहुँचना और कार्बन सिंक में 5वाँ स्थान प्राप्त करना इसी प्रगति की वैश्विक स्वीकृति है। फिर भी राष्ट्रीय वन नीति 1988 का 33% का लक्ष्य अभी दूर है। मध्य प्रदेश और कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों में वनावरण की कमी, पश्चिमी घाट में 58.22 वर्ग किलोमीटर की गिरावट तथा पूर्वोत्तर में 327.30 वर्ग किलोमीटर की कमी यह बताती है कि वृद्धि का यह आँकड़ा हर जगह एक जैसा नहीं है। परीक्षा के लिए मास्टर ट्रिक — ये पाँच अंक याद रखें:
- 25.17% — कुल वन और वृक्ष आवरण
- 21.76% — केवल वन आवरण
- 3.41% — केवल वृक्ष आवरण
- 23.59% — दर्ज वन क्षेत्र (RFA)
- 33% — राष्ट्रीय वन नीति 1988 का लक्ष्य
इन्हें भी पढ़ें-